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साइकिल में बाइक का पहिया व मोटरसाइकिल में 6 शॉकर लगा कोयले...




बोकारो जिला के बेरमो अनुमंडल क्षेत्र में कोयला तस्करों ने अब चोरी और ढुलाई के लिए नई तकनीक अपनाना ली है। तस्कर अब साइकिलों में बाइक की टायर लगाकर साइकिल में 5 क्विंटल कोयला ले जा रहे हैं। जबकि बाइक में अतिरिक्त 6 शॉकर लगवाकर कर भारी वजन ढोने लायक बना दिया गया है। इसका मकसद एक ही है, ज्यादा से ज्यादा कोयला कम समय में सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाना है। जानकारी के अनुसार चंद्रपुरा थाना क्षेत्र के सीसीएल ढोरी एरिया के तारमी परियोजना और भंडारीदह रेलवे साइडिंग से चोरी किया गया कोयला पहले तारमी तुरियो तथा आसपास के इलाकों में जमा किया जाता है। इसके बाद स्थानीय तस्कर उस कोयले को खरीदकर बाइक, स्कूटर और संशोधित साइकिलों के जरिए विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। सूत्रों की मानें, तो तस्करों का पूरा नेटवर्क रात के अंधेरे में सक्रिय होता है। रातभर कोयले की ढुलाई की जाती है और सुबह होने से पहले बाइक, स्कूटर और साइकिलों को जरीडीह थाना क्षेत्र के तांतरी बस्ती सहित अन्य स्थानों पर खड़े कर दिए जाते हैं। शाम ढलते ही फिर से इन्हें गंतव्य की ओर रवाना किया जाता है। बताया जाता है कि एक बाइक, स्कूटर और साइकिल मिलकर करीब डेढ़ टन तक कोयले की ढुलाई कर लेते हैं। यही वजह है कि तस्करों ने वाहनों को विशेष रूप से मॉडिफाई करना शुरू कर दिया है। मोटरसाइकिलों में अतिरिक्त शॉकर और मजबूत पहियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि अधिक वजन सहन किया जा सके। वहीं साइकिलों में मोटरसाइकिल के मोटे पहिए लगाए जा रहे हैं, जिससे कच्चे रास्तों और ग्रामीण इलाकों में भी आसानी से कोयला पहुंचाया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेरमो अनुमंडल क्षेत्र में करीब एक हजार बाइक, स्कूटर और साइकिल रोजाना अवैध कोयला ढुलाई में लगी हुई हैं। छोटे स्तर पर होने वाली यह ढुलाई जब एक साथ जुड़ती है तो प्रतिदिन भारी मात्रा में कोयले की चोरी और तस्करी सामने आती है। कई इलाकों में देर रात तक कोयला लदे बाइक स्कूटर की आवाजाही देखी जा सकती है। पुलिस का दावा- कोयला चोरी पर लगा अंकुश, हकीकत कुछ और ही
ग्रामीणों का आरोप है कि रातभर सड़कों और गलियों से गुजरने वाले इन वाहनों के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार ओवरलोडिंग के कारण बाइक और साइकिल असंतुलित होकर गिर जाती हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद कोयला तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। हालांकि पुलिस और प्रशासन का दावा है कि क्षेत्र में कोयला चोरी पर काफी हद तक अंकुश लगाया गया है। पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर छापेमारी अभियान भी चलाया जाता है। वहीं सीसीएल प्रबंधन भी अपने कोलियरी क्षेत्रों से अवैध कोयला निकासी पर पूर्ण रोक लगाने को लेकर सक्रिय होने की बात कह रहा है। कोलियरियों के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और नियमित गश्ती अभियान चलाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद तस्कर लगातार नए तरीके अपनाकर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे वाहनों के जरिए हो रही यह तस्करी अब संगठित नेटवर्क का रूप ले चुकी है। बड़ी गाड़ियों की अपेक्षा बाइक, स्कूटर और साइकिल से की जाने वाली ढुलाई पर निगरानी रखना कठिन साबित हो रहा है, जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। क्षेत्र में बढ़ती कोयला चोरी और तस्करी को लेकर अब सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त और लगातार कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध कोयला कारोबार और अधिक संगठित होकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है। तांतरी में खड़ी साइकिल में लगाया गया बाइक का पहिया।



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