भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Rahul Gandhi Vs Amit Malviya: तो फिर आपके प्रिय नेहरू जी भी...


नई दिल्ली: राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Work From Home, पेट्रोल बचत और स्वदेशी अपनाने की अपील को सरकार की ‘नाकामी’ बताया. लेकिन भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने उसी मुद्दे को कांग्रेस पर पलटवार का हथियार बना दिया. मालवीय ने ऐसा सवाल पूछा, जिसने राजनीतिक बहस को सीधे इतिहास की अदालत में खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक संकट के समय जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील करना ‘Compromised Leadership’ है, तो फिर क्या जवाहरलाल नेहरू भी ‘Compromised PM’ थे? यह हमला सिर्फ राहुल गांधी पर नहीं था. यह कांग्रेस की उस राजनीति पर प्रहार था, जिसमें हर आर्थिक चुनौती को सरकार की कमजोरी बताने की कोशिश की जाती है. मालवीय ने नेहरू के पुराने बयान का हवाला देकर यह दिखाने की कोशिश की कि दुनिया में युद्ध और संकट का असर हमेशा भारत पर पड़ता रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि आज वही बात मोदी सरकार कहे तो कांग्रेस उसे बहाना बताती है.

अमित मालवीय का बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से Work From Home, कारपूलिंग, ऊर्जा बचत और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की. कांग्रेस ने इसे सरकार की आर्थिक विफलता से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन भाजपा ने तुरंत पलटवार किया. मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘अगर जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील करना नाकामी है, तो फिर आपके प्रिय नेहरू जी भी क्या ‘Compromised PM’ थे?’ उन्होंने याद दिलाया कि खुद नेहरू ने कहा था कि दूसरे देशों में युद्ध होने का असर भारत में महंगाई के रूप में पड़ता है. भाजपा अब इस बहस को “जिम्मेदार नेतृत्व बनाम राजनीतिक अवसरवाद” के रूप में पेश कर रही है.

अमित मालवीय ने क्या कहा?

  • अमित मालवीय ने अपने पूरे बयान में कांग्रेस पर दोहरी राजनीति का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, ‘अगर जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील करना ‘नाकामी’ है, तो फिर आपके प्रिय नेहरू जी भी क्या ‘Compromised PM’ थे? खुद नेहरू जी ने कहा था कि जब दूसरे देशों में युद्ध होता है तो उसका असर भारत में महंगाई के रूप में पड़ता है. क्या तब भी यह बहाना था, या तब यह जिम्मेदार नेतृत्व माना जाता था?’ मालवीय ने आगे कहा कि हर वैश्विक संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. एक जिम्मेदार नेतृत्व जनता को सच बताकर साझी भागीदारी से चुनौतियों का सामना करने की अपील करता है.
  • उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से त्याग नहीं मांगा, बल्कि राष्ट्रहित में जागरूक विकल्प चुनने की अपील की है. इसमें ऊर्जा बचत, स्वदेशी को बढ़ावा, विदेशी मुद्रा संरक्षण और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं. मालवीय के मुताबिक कांग्रेस की समस्या यह है कि वह राष्ट्रहित में जनभागीदारी को हमेशा “उपदेश” मानती है.

नेहरू के बयान को लेकर क्यों बढ़ी बहस?

भाजपा ने इस पूरे विवाद में जवाहरलाल नेहरू के 1951 के बयान को सामने रखा है. उस समय कोरियाई युद्ध के कारण दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही थी. नेहरू ने माना था कि बाहरी घटनाओं का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. भाजपा अब इसी उदाहरण के जरिए कांग्रेस पर “डबल स्टैंडर्ड” का आरोप लगा रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ आर्थिक बहस नहीं, बल्कि वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश करना चाहती है. एक तरफ ‘राष्ट्रहित में जनभागीदारी’ का संदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पर सिर्फ आलोचना करने का आरोप लगाया जा रहा है.

क्या WFH और ऊर्जा बचत से फर्क पड़ेगा?

  • सरकार का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग Work From Home अपनाते हैं, कारपूलिंग करते हैं और ईंधन की बचत करते हैं, तो इससे तेल आयात का दबाव कम हो सकता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है. ऐसे में वैश्विक संकट का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ता है.
  • PM मोदी की अपील को भाजपा “राष्ट्रहित में सामूहिक भागीदारी” बता रही है. वहीं विपक्ष इसे सरकार की तैयारी की कमी से जोड़कर देख रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सोशल मीडिया तक और तेज हो सकता है.

अमित मालवीय ने राहुल गांधी को क्या जवाब दिया?

अमित मालवीय ने कहा कि अगर वैश्विक संकट के दौरान जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील करना नाकामी है, तो फिर जवाहरलाल नेहरू को भी ‘Compromised PM’ कहना पड़ेगा. उन्होंने नेहरू के 1951 के बयान का हवाला दिया, जिसमें कोरियाई युद्ध को महंगाई का कारण बताया गया था. मालवीय ने कहा कि PM मोदी सिर्फ राष्ट्रहित में जागरूक विकल्प अपनाने की अपील कर रहे हैं.

नेहरू के पुराने बयान को भाजपा क्यों उठा रही है?

भाजपा का कहना है कि कांग्रेस आज जिस बात को मोदी सरकार की विफलता बता रही है, वही बात नेहरू ने अपने समय में कही थी. नेहरू ने माना था कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध और संकट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. भाजपा इसे कांग्रेस की ‘दोहरी राजनीति’ के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है.

PM मोदी की अपील का असली मकसद क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मकसद तेल की खपत कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना बताया जा रहा है. सरकार का मानना है कि Work From Home, कारपूलिंग और ऊर्जा बचत जैसे छोटे कदम बड़े आर्थिक दबाव को कम कर सकते हैं. भाजपा इसे “राष्ट्रहित में जनभागीदारी” का मॉडल बता रही है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top