नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से एक ऐसी अपील की है, जिसकी आज खूब चर्चा हो रही है. 10 मई 2026 को हैदराबाद (Hyderabad) में करीब 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक साल तक सोना (Gold) न खरीदें. उन्होंने कहा कि सोना बाहर से मंगाने में बहुत सारा विदेशी पैसा खर्च होता है, इसलिए देश के हित में हमें एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए. यह बात उन्होंने खास तौर पर उन परिवारों से कही, जिनके घर में शादियां होने वाली हैं. यह सिर्फ अपील है, कोई कानून नहीं है. इसलिए यह तो नहीं पता कि कितने लोग इसे फॉलो करेंगे, मगर यह जानने में सबकी दिलचस्पी जरूर होगी कि प्रधानमंत्री ने ऐसी बात क्यों कही और इसके पीछे क्या गुना-गणित भिड़ाया गया होगा.
क्यों दी गई सोना न खरीदने की सलाह?
प्रधानमंत्री मोदी की यह बात कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. दरअसल, इस समय दुनिया एक बड़े संकट से गुजर रही है. पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक है और तेल की सप्लाई में दिक्कत आ रही है. इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं. हाल-फिलहाल ही इसने 120 डॉलर का स्तर भी छुआ है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल विदेशों से ही खरीदता है और इसके लिए हमें बहुत ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं. ऐसी स्थिति में सरकार चाहती है कि हम उन चीजों पर पैसा बचाएं, जो बहुत जरूरी नहीं हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो सके.
भारत में सोना सिर्फ एक गहना नहीं है, बल्कि यह बचत और परंपरा का हिस्सा है. लेकिन आर्थिक नजरिए से देखें तो सोना और कच्चा तेल ही दो ऐसी चीजें हैं, जिनकी वजह से भारत का सबसे ज्यादा पैसा बाहर जाता है. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि तेल तो फैक्ट्रियों और गाड़ियों के लिए जरूरी है, लेकिन सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है. यह कोई कानूनी पाबंदी या बैन नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री ने इसे एक ‘नैतिक अपील’ की तरह लोगों के सामने रखा है. उन्होंने जनता से इसे एक देश सेवा के रूप में देखने को कहा है. इसके साथ ही उन्होंने तेल बचाने, वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) अपनाने और बाहर घूमने कम जाने की भी सलाह दी है.
देश की अर्थव्यवस्था पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने जो अपील की है, उसका सबसे बड़ा असर शादियों पर पड़ सकता है. भारत में साल भर में होने वाले कुल सोने के इस्तेमाल का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ शादियों में इस्तेमाल होता है. अगर देश के 1 करोड़ से ज्यादा शादियों वाले परिवार अपनी खरीदारी में थोड़ी भी कमी करते हैं, तो भारत के अरबों डॉलर बच सकते हैं. इससे भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी मजबूत होगा और महंगाई को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी. जो लोग निवेश के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने पहले से ही डिजिटल विकल्प दिए हुए हैं.
निवेश के लिए क्या हैं दूसरे विकल्प?
अगर आप सोने में निवेश करना ही चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री की इस अपील के बीच आपके पास कुछ बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं. सरकार काफी समय से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds) और गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) को बढ़ावा दे रही है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक तरह का सरकारी सर्टिफिकेट है, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) जारी करता है. इसमें न तो सोने के चोरी होने का डर है और न ही शुद्धता की चिंता.
इसके अलावा आप गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) के जरिए भी बाजार से सोना खरीद सकते हैं. इसे आप अपने डीमैट अकाउंट (Demat Account) के जरिए शेयर की तरह कभी भी खरीद और बेच सकते हैं. डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) का भी विकल्प है, जहां आप महज कुछ रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं. सरकार का मकसद यह है कि लोग सोने के गहने मंगाने के बजाय इन ‘पेपर गोल्ड’ विकल्पों को चुनें. इससे लोगों की बचत भी बनी रहेगी और देश का कीमती विदेशी पैसा भी बाहर नहीं जाएगा. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि इस मुश्किल समय में हर नागरिक अपनी खरीदारी के फैसलों के जरिए देश को आर्थिक मजबूती देने में मदद करे.
इसके अलावा हाल ही में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) लाने की बात कही है. EGR एनएसई पर ट्रेड होने वाली डिजिटल सिक्योरिटी है, जो फिजिकल गोल्ड के स्वामित्व को दर्शाएगी है. यह SEBI रेगुलेटेड वॉल्ट्स में सुरक्षित रखे स्टैंडर्ड गोल्ड (999 या 995 प्योरिटी) पर आधारित होता है. इसे स्टॉक की तरह डीमैट अकाउंट में होल्ड किया जा सकता है, एक्सचेंज पर खरीद या बेचा सकता है, और जरूरत पड़ने पर फिजिकल गोल्ड में कन्वर्ट भी किया जा सकता है.
आजकल पश्चिम एशिया के देशों में भारी तनाव और युद्ध जैसे हालात हैं. इस वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं. तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के ऊपर ही टिकी हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी है. अब समझने वाली बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 85% से 87% कच्चा तेल बाहर के देशों से खरीदता है. तेल खरीदने के लिए हमें विदेशी मुद्रा खासकर डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब तेल महंगा होता है, तो भारत के खजाने से बहुत सारा डॉलर बाहर चला जाता है. हमारी तेल कंपनियां जनता को महंगाई से बचाने के लिए हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का घाटा सह रही हैं. ऐसे में सरकार चाहती है कि जो पैसा हम फालतू चीजों पर खर्च कर रहे हैं, उसे बचाकर तेल जैसी जरूरी चीजों के लिए रखा जाए. भारत में तेल के बाद सबसे ज्यादा पैसा ‘सोना’ खरीदने में विदेश जाता है. सोना कोई मजबूरी नहीं है, इसलिए इसकी खरीद को टाला जा सकता है, जबकि तेल के बिना गाड़ियां और फैक्ट्रियां नहीं चल सकतीं. इसलिए पीएम ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है ताकि देश का डॉलर बचे, रुपया मजबूत रहे और देश में महंगाई न बढ़े. यह कोई कानून नहीं है, बल्कि देशहित में की गई एक स्वैच्छिक प्रार्थना है.
शादी-ब्याह के सीजन पर इसका क्या असर होगा?
भारत में शादियों का सीजन अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है और इसी दौरान सोने की सबसे ज्यादा मांग होती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में हर साल जितनी सोने की खपत होती है, उसका 50 फीसदी हिस्सा सिर्फ शादियों में इस्तेमाल होता है. भारत में हर साल लगभग 1 से 1.2 करोड़ शादियां होती हैं. अगर हर परिवार अपनी शादी में थोड़ा भी कम सोना खरीदे, तो देश का अरबों रुपया बच सकता है. प्रधानमंत्री ने खास तौर पर उन परिवारों से अपील की है जिनके यहां शादियां हैं. हालांकि, यह परिवारों के लिए एक बड़ी दुविधा है, क्योंकि शादी में सोना देना सम्मान और परंपरा से जुड़ा है. सराफा बाजार और बड़े ज्वेलर्स भी इस अपील से थोड़े डरे हुए हैं, क्योंकि उनकी कमाई शादियों पर ही टिकी होती है.
सबसे बड़ा सवाल: आपके सोने खरीदने से क्या फर्क पड़ता है?
जब आप दुकान से एक सोने की चेन या अंगूठी खरीदते हैं, तो आपको लगता है कि आपने सिर्फ अपनी बचत खर्च की है, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अलग है. भारत में सोने की खदानें बहुत कम हैं, इसलिए हम अपनी जरूरत का लगभग पूरा (700 से 800 टन) सोना हर साल दूसरे देशों से मंगाते हैं. इसे खरीदने के लिए भारत सरकार को अपने रिजर्व से ‘अमेरिकी डॉलर’ देने पड़ते हैं. जब करोड़ों भारतीय एक साथ शादियों के सीजन में सोना खरीदते हैं, तो देश के खजाने से अचानक बहुत सारा डॉलर बाहर चला जाता है. इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो जाता है. जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेश से आने वाली हर चीज (जैसे खाद, मोबाइल, तेल) महंगी हो जाती है, जिससे देश में महंगाई बढ़ती है. अगर हम कुछ समय के लिए सोना कम खरीदें, तो सरकार के पास डॉलर बचे रहेंगे और उस पैसे से महंगा कच्चा तेल आसानी से खरीदा जा सकेगा. सीधे शब्दों में कहें तो, आपकी सोने की खरीदारी केवल आपका व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की आर्थिक सेहत और आपके पड़ोसी की जेब पर भी पड़ता है. एक ग्राम सोना कम खरीदना भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने जैसा है.