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Salary Increment : पीएम मोदी ने जनता से अपील की है कि आयात बिल की वजह से अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए ईंधन की बचत पर जोर दें और सोने की खरीद बंद कर दें. इस अपील के बाद सरकारी कर्मचारियों के मन में 8वें वेतन आयोग को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. उन्हें डर है कि कहीं कोरोनाकाल की तरह सरकार उनके अरमानों पर पानी न फेर दे.

पीएम मोदी ने सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव को देखते हुए खर्च कम करने की अपील की है.
8th Pay Commission : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले जनता से तेल और गैस बचाने व सोने की खरीद बंद करने की अपील की है. प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद से ही सरकारी कर्मचारियों में खलबली मची हुई है. उन्हें फिर डर सताने लगा है कि कहीं कोरोनाकाल की तरह सरकार उनके अरमानों पर कैंची न चला दे. सरकार ने कोरोनाकाल में भी आपात स्थिति बताते हुए 18 महीने का महंगाई भत्ता रोक दिया था. आज तक इन पैसों को सरकारी कर्मचारियों को नहीं दिया गया है. इस बार भी पीएम मोदी ने आपात स्थिति बताते हुए जनता से बचत की अपील की तो सरकारी कर्मचारियों को फिर 8वें वेतन आयोग की चिंता सताने लगी है.
पीएम मोदी ने पिछले दिनों जनता से अपील करते हुए कहा था कि देश पर आयात बिल बढ़ता जा रहा है. खासकर पेट्रोल-डीजल, गैस और सोने की कीमतों से ज्यादा दबाव बढ़ रहा है. लिहाजा उन्होंने जनता से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल और गैस का कम इस्तेमाल करें, जबकि सोने की खरीद को संभव हो तो सालभर के लिए टाल दें. पीएम मोदी का यह संबोधन सीधे तोर पर देश की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को दिखा रहा है. जाहिर है कि खजाने पर बढ़ते इस बोझ से बचने के लिए सरकार अपने अन्य खर्चों में भी कटौती कर सकती है. यही वजह है कि सरकारी कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग को लेकर चिंताएं सताने लगी हैं.
क्या है कर्मचारियों की चिंता
आज से 6 साल पहले मार्च, 2020 में भारत सहित दुनियाभर में कोविड-19 महामारी ने दस्तक दी थी, तब सरकार ने खजाने पर दबाव का हवाला देते हुए 18 महीने का महंगाई भत्ता रोक दिया था. आज जबकि भारत की विकास दर दुनिया में सबसे तेज है और निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि आरबीआई का विदेशी खजाना भी लबालब भरा हुआ है, फिर भी सरकारी कर्मचारियों को 18 महीने का महंगाई भत्ता नहीं दिया गया. अब पीएम मोदी ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था पर दबाव का हवाला दिया है. ऐसे में कर्मचारियों को चिंता है कि अगर तब मामूली सा महंगाई भत्ता बढ़ाने में सरकार को दिक्कत आ रही थी, तो अब वेतन आयोग के रूप में हजारों रुपये की बढ़ोतरी पर निश्चित रूप से असर पड़ सकता है.
कैसे पड़ेगा वेतन आयोग पर असर
एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे तो वेतन आयोग और आयात बिल दोनों अलग-अलग चीजें हैं. वेतन आयोग अंदरूनी मामला है, जबकि आयात बिल सीधे तौर पर देश के फॉरेक्स रिजर्व यानी खजाने पर असर डालता है. लिहाजा आयात बिल की वजह से वेतन आयोग पर सीधे तौर पर तो असर नहीं पड़ना चाहिए. लेकिन, सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ने पर परोक्ष रूप से इसका असर जरूर दिख सकता है. 8वें वेतन आयोग का गठन पिछले साल ही हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने में अभी समय है. ऐसे में अगर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है तो सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों लागू करने में देरी कर सकती है. हालांकि, अभी तक आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं की है और इसे लागू किए जाने में सालभर से ज्यादा का समय है.
मांग पर चल सकती है कैंची
कुछ कर्मचारी संगठनों को इस बात की भी चिंता है कि सरकार भले ही आयोग को समय पर लागू कर दे, लेकिन खजाने पर असर पड़ा तो सरकार कर्मचारी संगठनों की डिमांड पर कैंची चला सकती है. कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को 18 हजार से बढ़ाकर 69 हजार रुपये करने की डिमांड रखी है, जबकि फिटमेंट फैक्टर भी 2.57 से 3.83 करने की डिमांड की जा रही है. इस सिफारिश से सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का खर्चा आएगा. जाहिर है कि अगर अर्थव्यवस्था और खजाना दबाव में रहे तो सरकार इन सिफारिशों पर कैंची चला सकती है. इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी पर होगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें