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Hyderabad News: हैदराबाद के आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह के बेटे प्रिंस आज़म जाह ने विरासत और शाही पहचान पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि वे खुद को प्रिंस से ज्यादा एक साधारण इंसान मानते हैं और उनके लिए ईमानदारी सबसे बड़ी संपत्ति है. संपत्ति विवाद पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सुन्नी मुस्लिम कानून के तहत संपत्ति सभी वारिसों में बराबर बंटनी चाहिए. आज़म जाह ने शाही चकाचौंध को छोड़कर सादगी और भारतीय कानून के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की है.
Hyderabad News: दुनिया के सबसे अमीर घरानों में शुमार हैदराबाद का निज़ाम परिवार एक बार फिर चर्चा में है. लेकिन इस बार वजह रईसी नहीं, बल्कि विरासत के वारिस का सादगी भरा सच है. सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली खान, जिन्हें 1937 में टाइम मैग्जीन ने दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति बताया था, उनके परपोते प्रिंस आज़म जाह ने अपनी पहचान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. प्रिंस आज़म जाह, जो आठवें निज़ाम मुकर्रम जाह और प्रिंसेस आयशा के बेटे हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शाही खिताबों के बजाय इंसानियत और सच्चाई को प्राथमिकता देते हैं.
एक विशेष बातचीत के दौरान आज़म जाह ने कहा कि वे अपने नाम के साथ जुड़ने वाले ‘प्रिंस’ के खिताब को न तो पहचान मानते हैं और न ही बोझ. उन्होंने दिल छू लेने वाली बात कहते हुए बताया कि जब भी वे आईने में देखते हैं, तो उन्हें प्रिंस आज़म जाह नहीं, बल्कि सिर्फ एक साधारण इंसान दिखाई देता है. उनके अनुसार, उनके पिता मुकर्रम जाह ने उन्हें सिखाया था कि इंसान की असली पहचान उसके पद या खिताब से नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी और निष्पक्षता जैसे मूल्यों से बनती है.
पिता की यादें और ऑस्ट्रेलिया का वो फार्म हाउस
अपने पिता मुकर्रम जाह को याद करते हुए आज़म जाह भावुक हो गए. उन्होंने उन्हें एक शांत और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला इंसान बताया, जिनका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का था. उन्होंने खुलासा किया कि उनके पिता अपनी जिंदगी के सबसे सुखद पल ऑस्ट्रेलिया के फार्म हाउस पर बिताते थे. वहां वे किसी तामझाम या सुरक्षा घेरे के बिना एक स्वतंत्र नागरिक की तरह सिनेमा जाते थे और घूमते थे. सादगी का यही गुण आज़म जाह की शख्सियत में भी झलकता है.
संपत्ति विवाद पर सख्त रुख और कानूनी पक्ष
अपने पिता के निधन के बाद संपत्ति को लेकर चल रहे विवादों पर आज़म जाह ने स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि 1971 में प्रिवी पर्स की समाप्ति के साथ ही निज़ाम की उपाधि आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है. उनके पिता आखिरी मान्यता प्राप्त निज़ाम थे. कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता एक भारतीय नागरिक थे और उन पर सुन्नी मुस्लिम उत्तराधिकार कानून लागू होता है. इस कानून के तहत संपत्ति सभी वारिसों में बराबर बंटनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसी उपाधि या केवल पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता के सम्मान और न्याय के लिए खड़े हैं.
पुरानी गलियों से लगाव और लो-प्रोफाइल जीवन
चिरान पैलेस और पुरानी हवेली में बीते बचपन को याद करते हुए आज़म जाह ने बताया कि उन्हें आज भी हैदराबाद के पुराने शहर की गलियों और वहां की तहजीब से गहरा लगाव है. उन्होंने जानबूझकर लाइमलाइट से दूर एक ‘लो-प्रोफाइल’ जीवन चुना है. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर परिवार की प्रतिष्ठा और न्याय की रक्षा के लिए उन्हें सार्वजनिक मंच पर आना पड़ा, तो वे कदम पीछे नहीं हटाएंगे. यह बयान ऐसे समय में आया है जब निज़ाम की संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाइयाँ सुर्खियों में हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें