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रिम्स में एमबीबीएस सेकेंड ईयर के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी की




भास्कर इनसाइट रिम्स के हॉस्टल नंबर 8 में शनिवार सुबह एमबीबीएस सेकेंड ईयर के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मृतक अक्षित कुजूर (21) मूल रूप से सिमडेगा के ठेठईटांगर के लकड़ाचाटा का था। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। इसलिए आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। घटना की जानकारी तब मिली, जब शनिवार सुबह 11 बजे तक अक्षित कमरे से बाहर नहीं आया। दोस्तों ने आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका को देखते हुए छात्रों ने रिम्स प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। काफी प्रयास के बाद भी जब कमरा नहीं खुला तो छात्रों ने दरवाजा तोड़ा। अंदर अक्षित फांसी पर लटक रहा था। फिर घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। बरियातू थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। अक्षित के दोस्तों से घटना की जानकारी ली। फिर शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अक्षित अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। उसकी एक छोटी बहन है, जो माता-पिता के साथ रहकर पढ़ाई करती है। बरियातू थानेदार मनोज कुमार ने कहा कि अक्षित के डिप्रेशन में होने की बात सामने आई है। कुछ दिनों से वह दोस्तों से भी कटा-कटा सा रहता ​था। बातचीत कम करता था। हालांकि किस बात को लेकर डिप्रेशन में था, इसकी जानकारी नहीं मिली है। इसलिए पुलिस डिप्रेशन के एंगल से जांच कर रही है। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के अलावा वार्डन और डीन से भी बातचीत कर पूरे मामले की जांच की जाएगी। गरीब परिवार से था अक्षित, पिता निजी कंपनी के कर्मचारी: अक्षित गरीब परिवार से था। उसके पिता बीरेंद्र कुजूर हरियाणा में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। मां भी एक निजी स्कूल में काम करती है। रिम्स प्रबंधन ने उन्हें घटना की जानकारी दे दी है। सूचना मिलते ही ​बीरेंद्र कुजूर रांची के लिए रवाना हुए, ​लेकिन दिल्ली में फंस गए। क्योंकि उनकी फ्लाइट छूट गई। अब वे रविवार सुबह रांची पहुंचेंगे। रिम्स में एडमिशन लेने के बाद दो साल में कभी माता-पिता के पास नहीं गया अक्षित अक्षित ने दो साल पहले रिम्स में एडमिशन लिया था। डोरंडा में रहने वाले फूफा संजय बाड़ा उसके लोकल अभिभावक हैं। संजय ने कहा-एडमिशन के समय वे अक्षित और उसके माता-पिता के साथ रिम्स गए थे। इसके बाद न तो कभी अक्षित से मुलाकात हुई और न ही कभी फोन से संपर्क किया। माता-पिता ने छुट्टियों में मेरे पास रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह कभी नहीं आया। एडमिशन के बाद वह कभी माता-पिता के पास भी नहीं गया। छुट्टियों में वह अक्सर अपने दोस्त के घर में रहता था। किस दोस्त के पास रहता था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।



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