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Famous Lakshmi Talkies Of Ajmer: अजमेर जिले के नसीराबाद का लक्ष्मी टॉकीज कभी शहर की सबसे बड़ी पहचान माना जाता था. 1945 में शुरू हुए इस सिनेमा हॉल में फिल्म देखने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और परिवारों के लिए यह खास अनुभव हुआ करता था. समय बदला, मल्टीप्लेक्स आए और 2017 में यहां आखिरी फिल्म दिखाई गई. आज यह इमारत भले शांत हो, लेकिन लोगों की यादों में इसकी रौनक अब भी जिंदा है.
अजमेर. अजमेर जिले के नसीराबाद में स्थित लक्ष्मी टॉकीज कभी सिर्फ एक सिनेमा हॉल नहीं था, बल्कि यह शहर की पहचान और लोगों की यादों का अहम हिस्सा हुआ करता था. उस दौर में जब मनोरंजन के साधन बेहद सीमित थे, तब फिल्मों का आकर्षण लोगों को एक साथ जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था. लक्ष्मी टॉकीज में फिल्म देखना केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ बिताया जाने वाला खास अनुभव हुआ करता था. यहां की हलचल, टिकट खिड़की पर लगने वाली भीड़ और नई फिल्मों को लेकर लोगों का उत्साह शहर की पहचान बन चुका था.
स्थानीय निवासी पंकज बताते हैं कि लक्ष्मी टॉकीज की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी. इसे नसीराबाद का पहला और सबसे पुराना सिनेमा हॉल माना जाता है. लंबे समय तक यह शहर का एकमात्र थिएटर रहा, जहां नई फिल्म लगने पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं. कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, तब जाकर फिल्म देखने का मौका मिलता था.
जब सिनेमा देखना एक खास मौका हुआ करता था
पंकज बताते हैं कि बचपन में वह अपने माता-पिता के साथ यहां फिल्म देखने आया करते थे. उस समय सिनेमा देखना किसी खास मौके से कम नहीं माना जाता था. परिवार के साथ बिताए गए वे पल आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं. लक्ष्मी टॉकीज केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि यहां बड़े सर्कस और दूसरे मनोरंजन कार्यक्रम भी आयोजित होते थे, जो शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते थे.
2017 में चली आखिरी फिल्म
समय के साथ मनोरंजन के तरीके बदलते गए. मल्टीप्लेक्स संस्कृति बढ़ी और लोगों की पसंद भी बदलने लगी. बदलते दौर और देखरेख की कमी के कारण लक्ष्मी टॉकीज की रौनक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी. आखिरकार वर्ष 2017 में यहां आखिरी फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसके बाद यह हमेशा के लिए बंद हो गया.
आज भले ही लक्ष्मी टॉकीज का भवन शांत और वीरान नजर आता हो, लेकिन नसीराबाद के लोगों के दिलों में इसकी यादें अब भी जिंदा हैं. यह सिर्फ एक बंद पड़ा सिनेमा हॉल नहीं, बल्कि शहर के सुनहरे दौर और सामूहिक यादों का एक अहम हिस्सा माना जाता है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें