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43 साल बाद PM मोदी का नॉर्वे दौरा, ये कोई संयोग या...


नई द‍िल्‍ली. एक तरफ हॉर्मुज का संकट खत्म होने के बजाय गहराता ही जा रहा है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 6 दिन में 5 देशों का अहम दौरा. पीएम मोदी का हर विदेश दौरा किसी ना किसी मायने में खास होता है और 5 यूरोपीय देशों का ये दौरा भी बड़ा खास है. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा ,व्यापार, ग्रीन ग्रोथ और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है लेकिन नॉर्वे जैसे देश में भारतीय प्रधानमंत्री को दूसरी बार पहुंचने में 43 साल लग गए. हम इस सवाल को जानने की कोशिश करते हैं.

जिस देश की कुल आबादी ही 56 लाख हो यानी सिर्फ दिल्ली जैसे शहर में ही 4 नॉर्वे के बराबर की आबादी समा जाए. तो आखिर ऐसा क्या खास है नॉर्वे में जो संकट की घड़ी में पीएम मोदी को यहां खींच लाया? छोटा सा नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादक और दुनिया के शीर्ष निर्यातकों में से एक है और हर साल ये दुनिया भर के बाजारों में ये फॉसिल फ्यूल बेचकर अरबों डॉलर कमाता है.

* नॉर्वे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस निर्यातक है
* यह यूरोपीय संघ की कुल गैस खपत का लगभग 30% से अधिक हिस्सा पूरा करता है.
* यह वैश्विक कच्चे तेल की मांग का करीब 2% उत्पादन करता है और पश्चिमी यूरोप में सबसे बड़ा तेल निर्यातक है.
* तेल और गैस नॉर्वे की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो इसके जीडीपी में लगभग 20 % का योगदान देता है.

लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि नॉर्वे अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरत के लिए तेल और कोयले का काफी कम इस्तेमाल करता है.दरअसल ये देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अग्रणी है. देश की लगभग 98% बिजली हाइड्रोपावर से बनती है वहीं दूसरी ओर भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन यानी Fossil fuel का भारी निर्यात करके आर्थिक रूप से भी समृद्ध भी हो रहा है.

नॉर्वे की यही खासियतें पीएम मोदी को यहां खींच लाईं और दोनों देशों के बीच 30 से अधिक व्यापारिक और तकनीकी समझौते मील के पत्थर साबित होंगे. इतना ही नहीं नॉर्वे के सरकारी फंड का भारत के शेयर बाजार में 28 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है और इसमें भी बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन जो सबसे खास डील होगी वो ग्रीन टेक्नोलॉजी और एलपीजी सप्लाई की होगी जिसकी अभी भारत को काफी जरूरत है.

नॉर्वे में भारत के राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने पहले ही संकेत दे दिया था कि पीएम के यात्रा का उद्देश्य भारत के बड़े बाजार में नॉर्डिक क्षेत्र की भागीदारी को बड़े स्तर पर बढ़ाना है. नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 19 मई को भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी पीएम मोदी हिस्सा लेंगे.इस सम्मेलन में वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा को लेकर खास चर्चा होगी.

इससे पहले पीएम मोदी दूसरे देशों के साथ बड़े अहम समझौते कर चुके हैं:

* संयुक्त अरब अमीरात (UAE)के साथ एलपीजी सप्लाई और रणनीतिक तेल भंडारों को लेकर अहम समझौते किए ताकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की तेल और गैस की जरूरतें पूरी होती रहें.
* नीदरलैंड्स और स्वीडन के साथ सेमीकंडक्टर,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन के क्षेत्र में साझा तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी.

नॉर्वे दौरे के बाद पीएम मोदी इटली जाएंगे जहां व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के अलावा रक्षा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी. हॉर्मुज संकट की वजह से भारत ही नहीं पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है और अब ये बहुत ही गंभीर चुनौती की शक्ल ले चुका है. भारत के लिए भी मौजूदा हालात किसी आने वाले बड़े खतरे का संकेत दे रहा है और इसीलिए पीएम मोदी हर उन विकल्पों पर काम कर रहे हैं जिससे भारत ना सिर्फ आने वाली बड़ी चुनौतियों का सामना कर पाए बल्कि ग्रोथ के रास्ते पर भी बिना रुके आगे बढ़ता रहे.

इसलिए उन्होंने जब 5 देशों को चुना को उसमें नॉर्वे को भी प्रमुखता दी जहां जून 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहली बार आधिकारिक दौरे पर गई थीं लेकिन उसके बाद इस देश पहुंचने में भारतीय प्रधानमंत्री को 43 साल लग गए.



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