नई दिल्ली. गुजरात के गांधीनगर की एक सिविल कोर्ट ने पहली बार ऐसा बड़ा फैसला दिया है जिसमें कहा गया कि किसी व्यक्ति के Apple iCloud अकाउंट में रखा गया डिजिटल डेटा भी उसकी संपत्ति माना जाएगा. यानी अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके फोन और iCloud में मौजूद फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट, कॉन्टैक्ट्स और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड भी उसकी विरासत का हिस्सा होंगे. कोर्ट ने यह फैसला देने से पहले अखबरों में एक विज्ञापन दिया और 30 दिनों के इंतजार के बाद दिया ऐतिहासिक फैसला
मामला क्या था?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, गांधीनगर के रहने वाले शैशव शाह की 24 अप्रैल 2025 को बिना वसीयत के मौत हो गई. उनके पास Apple iPhone 13 Pro Max और उससे जुड़ा iCloud अकाउंट था. उनकी पत्नी और बेटी ने कोर्ट में याचिका दायर की. उनका कहना था कि फोन और iCloud में परिवार की कई महत्वपूर्ण चीजें थीं—
– निजी फोटो और वीडियो
– जरूरी डॉक्यूमेंट्स
– वॉयस नोट्स
– कॉन्टैक्ट लिस्ट
– भावनात्मक यादें
उन्होंने कोर्ट से मांग की कि उन्हें मृतक की डिजिटल संपत्ति का कानूनी अधिकार दिया जाए ताकि वे एपलसे डेटा एक्सेस कर सकें.
एपल ने क्या कहा?
परिवार ने एपलसे संपर्क किया तो कंपनी ने कहा:-
– iCloud डेटा तक पहुंच देने के लिए कोर्ट का आदेश जरूरी होगा.
– केवल कानूनी प्रतिनिधि ही डेटा मांग सकता है.
– कोर्ट यह घोषित करे कि मृतक अकाउंट का असली यूजर था.
– मांग करने वाला व्यक्ति उसका वैध प्रतिनिधि है.
– एपल को डेटा एक्सेस देने में मदद करनी होगी.
यानी बिना कोर्ट आदेश के एपल डेटा नहीं दे सकता था.
कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
तीसरे एडिशनल सीनियर सिविल जज हिमांशु चौधरी ने कहा कि iCloud में मौजूद डिजिटल डेटा एक ‘कीमती डिजिटल एसेट’ है और यह मृतक की संपत्ति का हिस्सा माना जाएगा. कोर्ट ने माना कि भारतीय कानूनों में ‘प्रॉपर्टी’ की परिभाषा इतनी व्यापक है कि उसमें डिजिटल डेटा भी शामिल किया जा सकता है.
कोर्ट ने किन कानूनों का सहारा लिया?
कोर्ट ने कई कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया:
1. Indian Succession Act : इस कानून के तहत किसी मृत व्यक्ति की संपत्ति का प्रशासन किया जाता है.
2. General Clauses Act 1897: इसमें ‘चल संपत्ति’ की परिभाषा काफी व्यापक है.
3. Prevention of Money Laundering Act (PMLA) : इसमें ‘प्रॉपर्टी’ शब्द का दायरा बहुत बड़ा माना गया है.
4. Income Tax Act : इस कानून में Virtual Digital Assets को मान्यता दी गई है.
5. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले – कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी ‘प्रॉपर्टी’ शब्द की उदार व्याख्या कर चुका है.
कोर्ट ने आगे क्या किया?
कोर्ट ने अखबार में पब्लिक नोटिस छपवाया ताकि अगर किसी और को संपत्ति पर दावा करना हो तो वह आपत्ति दर्ज करा सके. 30 दिन तक कोई आपत्ति नहीं आई. इसके बाद कोर्ट ने बेटी को मृतक की संपत्ति का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का रास्ता साफ किया.
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी भारतीय कोर्ट ने साफ तौर पर डिजिटल डेटा को संपत्ति माना. भविष्य में सोशल मीडिया अकाउंट, क्लाउड डेटा, क्रिप्टो, NFTs जैसी चीजों पर भी असर पड़ सकता है.
– अब परिवार मृत व्यक्ति के डिजिटल डेटा पर कानूनी अधिकार मांग सकेंगे
– डिजिटल विरासत (Digital Inheritance) को लेकर नया कानूनी रास्ता खुला है