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पीएम नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है. दोनों देशों के बीच कच्चे तेल और एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए बड़े समझौते हुए हैं. यूएई भारत को 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल देगा और 5 अरब डॉलर का नया निवेश भी करेगा. यह साझेदारी भारत को वैश्विक संकट से बचाएगी.
पीएम मोदी की यूएई यात्रा कैसे बनी भारत के लिए गेमचेंजर? (Photo made with AI)
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही है. इस समय पूरे मिडिल ईस्ट में भारी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. तेल बाजार में लगातार अस्थिरता की स्थिति देखी जा रही है. ऐसे नाजुक समय में भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और बड़े समझौते हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को हमेशा के लिए पक्का कर देगी. यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के पांच देशों के बड़े दौरे का पहला चरण थी. इसके बाद वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रवाना हो गए. इस दौरे ने वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को एक बार फिर से रेखांकित किया है.
ओपेक से बाहर निकला यूएई भारत की मदद कैसे करेगा?
यूएई ने हाल ही में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से बाहर निकलने का बड़ा फैसला किया था. इस फैसले के बाद अब यूएई अपनी तय उत्पादन सीमा से बाहर जाकर अधिक तेल का उत्पादन कर सकता है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग दसवां हिस्सा अकेले यूएई से आयात करता है. इसके साथ ही भारत यूएई की एलएनजी का सबसे बड़ा ग्राहक भी है. ऐसे में यूएई का बढ़ा हुआ तेल उत्पादन सीधे तौर पर भारत के लिए बड़ा फायदेमंद साबित होने वाला है.
30 मिलियन बैरल तेल की महाडील से देश को क्या फायदा होगा?
सरकार की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच एक बड़ा रणनीतिक समझौता संपन्न हुआ है. यह डील इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच हुई है. इसके तहत यूएई भारत के रणनीतिक तेल भंडार के लिए 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराने पर सहमत हुआ है. संकट के समय में यह तेल भंडार भारत की लाइफलाइन साबित होगा.
एलपीजी सप्लाई और गैस के रणनीतिक भंडार को लेकर क्या है तैयारी?
कच्चे तेल के साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और एडीएनओसी के बीच एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए भी समझौता हुआ है. दोनों देशों ने भारत में गैस के रणनीतिक भंडार स्थापित करने की संभावना पर भी सहमति जताई है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य भविष्य में भारत की डोमेस्टिक गैस सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करना है. इससे भारतीय उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलेगी.
ड्रोन हमलों के खतरे के बीच 5 अरब डॉलर के निवेश के क्या मायने हैं?
यह ऐतिहासिक समझौते ऐसे समय में हुए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में भारी अस्थिरता जारी है. हाल ही में यूएई और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की खबरों ने वहां की ऊर्जा संरचना की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है. इसके बावजूद यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के नए निवेश की बड़ी प्रतिबद्धता जताई है. वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 85 अरब डॉलर का व्यापार होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट और कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखेगी.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें