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केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने नई कैबिनेट में 14 नए चेहरों को शामिल कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. पुराने दिग्गजों की जगह युवाओं और पहली बार विधायकों को मौका देकर सतीशन ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. दो महिला मंत्रियों की एंट्री और विभागों के बंटवारे को लेकर चले विवाद ने भी इस नई सरकार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
आखिरकार केरल में नए मंत्रिमंडल का गठन हो गया है.
UDF Government Cabinet: केरल के नए नवेले मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने ऐसा दांव चला है, जिसने उनके अपने सियासी साथियों को चारों खाने चित्त कर दिया है. इतना ही नहीं, सतीशन के इस कदम से यूडीएफ के भीतर नई खलबली मच गई है. दरअसल, बीते कई दिनों से केरल की राजनीति में सियासी खींचतान का दौर जारी थी. पार्टी में रसूक रखने वाले तमाम नेता नई सरकार में मंत्री पद पाने की होड़ में थे. ऐसे में, सीएम सतीशन के एक फैसले ने सभी की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है.
दरअसल, सीएम सतीशन ने पुराने साथियों पर भरोसा जताने की जगह नए चेहरों को अपना सिपहसालार (मंत्री) बनाया है. इसी के साथ मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की नई कैबिनेट का गठन भी पूरा हो गया है. उन्होंने बिना देरी किए इन सिपहसालारों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया है, जिससे सरकार का औपचारिक कामकाज शुरू हो सके. आपको बता दें कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार की वापसी को खास माना जा रहा है. इससे पहले साल 2011 में ओम्मन चांडी के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार सत्ता में आई थी. इस बार की कैबिनेट में युवा नेताओं और नए चेहरों को ज्यादा मौका दिया गया है.
नई कैबिनेट के 14 सदस्य पहली बार मंत्री बने हैं. इनमें मुख्यमंत्री वीडी सतीशन भी शामिल हैं. खास बात यह है कि छह मंत्री ऐसे हैं जो पहली बार विधायक चुने गए हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. इस बार कांग्रेस ने इतिहास रचते हुए कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी जगह दी है. बिंदु कृष्णा को श्रम विभाग की जिम्मेदारी मिली है. वहीं केए तुलसी को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. यह पहली बार है जब कांग्रेस ने केरल में अपनी सरकार में दो महिला मंत्रियों को शामिल किया है.
नए चेहरों में एम लिजू को अहम जिम्मेदारी मिली है. उन्हें आबकारी और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं. हालांकि विभागों के बंटवारे को लेकर यूडीएफ के अंदर कई दिनों तक विवाद चलता रहा. सबसे ज्यादा चर्चा मत्स्य पालन विभाग को लेकर हुई. यह विभाग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को दिया गया है. लैटिन कैथोलिक चर्च ने इसका विरोध किया था. चर्च का कहना था कि तटीय समुदाय को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, इसलिए यह विभाग कांग्रेस के पास रहना चाहिए. लेकिन मुस्लिम लीग अपने फैसले पर अड़ी रही.
आखिरकार यूडीएफ ने यह विभाग आईयूएमएल के पास ही रहने दिया और वीई अब्दुल गफूर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई. कांग्रेस के अंदर भी कुछ विभागों को लेकर खींचतान देखने को मिली है. स्वास्थ्य विभाग को लेकर के मुरलीधरन और एपी अनिल कुमार के बीच विवाद था. बाद में मुरलीधरन को स्वास्थ्य और देवस्वम विभाग दिया गया, जबकि अनिल कुमार को राजस्व विभाग मिला. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन और बंदरगाह विभाग अपने पास रखे हैं. वहीं गृह और सतर्कता विभाग वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को सौंपा गया है.
इसके अलावा पीके कुन्हालीकुट्टी को उद्योग और आईटी, पीसी विष्णुनाथ को पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा तथा केएम शाजी को स्थानीय स्वशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा, माकपा के बागी नेता जी सुधाकरण ने बुधवार को केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली है. गुरुवार को नए विधायक उनके सामने शपथ लेंगे.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें