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कभी उग्रवाद से थी पहचान, अब आम की खुशबू से महक रहा...




महेंद्र साव | धालभूमगढ़ एक समय था जब धालभूमगढ़ प्रखंड की अंतिम सीमा पर स्थित रावताड़ा पंचायत का नुआग्राम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। लोग इस गांव की ओर जाने से भी डरते थे। लेकिन अब वही नुआग्राम अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। गांव के किसान बीरा टुडू ने अपनी मेहनत और मनरेगा योजना के सहयोग से बंजर टांड़ जमीन को आम के हरे-भरे बाग में बदल दिया है। आज उनके बागान में आम की भरपूर पैदावार हो रही है और वे बाजार तलाशने में जुट गए हैं। किसान बीरा टुडू ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में मनरेगा योजना के तहत दो एकड़ जमीन पर आम बागवानी की शुरुआत की गई थी। उस समय लगभग 3 लाख 60 हजार रुपए की लागत से 236 आम के पौधे लगाए गए थे। बागवानी में मुख्य रूप से आम्रपाली और मल्लिका किस्म के पौधे लगाए गए, जो अब पूरी तरह फल देने लगे हैं। बीरा टुडू ने कहा कि शुरुआती वर्षों में पौधों की देखभाल करना काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन लगातार मेहनत और देखरेख के कारण अब बागवानी बेहतर परिणाम दे रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी पेड़ों में आम लगे थे, लेकिन इस बार उत्पादन काफी अधिक हुआ है। हर पेड़ पर 20 से 40 किलो तक आम : इस वर्ष बागान के लगभग हर पेड़ में 20 से 40 किलो तक आम का उत्पादन हुआ है। पेड़ों पर लटकते आमों को देखकर आसपास के किसान भी काफी उत्साहित हैं। गांव के लोग अब इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम मानने लगे हैं। बीरा टुडू का कहना है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिले तो टांड़ और अनुपजाऊ जमीन पर भी अच्छी खेती और बागवानी संभव है। उन्होंने कहा कि अब वे आम बेचने के लिए बाजार की तलाश कर रहे हैं ताकि उचित मूल्य मिल सके। वित्तीय वर्ष 2018-19 में रावताड़ा पंचायत में दो किसानों के यहां मनरेगा के तहत आम बागवानी की शुरुआत की गई थी। अब इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। क्षेत्र के कई किसान इस मॉडल को देखकर प्रेरित हो रहे हैं और बागवानी की ओर रुचि दिखा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जो इलाका कभी भय और उग्रवाद की पहचान से जाना जाता था, आज वहां खेती और बागवानी की नई उम्मीद दिखाई दे रही है। इससे गांव की आर्थिक स्थिति में भी धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। आम बिक्री को लेकर प्रशासन भी सक्रिय : आम उत्पादकों को उचित बाजार और सही कीमत दिलाने को लेकर प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। उपायुक्त कार्यालय में हाल ही में क्रेता और विक्रेताओं की एक सामान्य बैठक आयोजित की गई, जिसमें किसानों की उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचता रहा, तो आने वाले समय में नुआग्राम और रावताड़ा पंचायत पूरे क्षेत्र के लिए बागवानी का मॉडल बन सकता है।



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