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पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने के बावजूद दिल्ली ने इंसानियत दिखाते हुए पाकिस्तान को चिनाब नदी में संभावित बाढ़ का अलर्ट भेजा है. जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध से गाद साफ करने के लिए स्पिलवे गेट खोले जाने से वहां जलस्तर 3 मीटर तक बढ़ सकता है. भारत से मिले इस जरूरी इनपुट के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तुरंत हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया है.
भारत ने पाकिस्तान को संभावित बाढ़ के लिए समय से जानकारी दे दी है.
भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे गंभीर तनाव और पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के निलंबन के बावजूद भारत ने एक बार फिर मानवीय गरिमा और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है. जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल बांध से गाद निकालने और मानसून से पहले जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए भारत ने बांध के स्पिलवे गेट खोल दिए हैं. इसके चलते चिनाब नदी में पानी का बहाव तेजी से बढ़ने की संभावना है. भारत सरकार ने इस बढ़े हुए जलप्रवाह के बारे में पाकिस्तान को अरली वार्निंग भेजकर सतर्क कर दिया है ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें.
भारत से मिले इस आधिकारिक इनपुट के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तुरंत फ्लड अलर्ट घोषित कर दिया गया है. सियालकोट के डिप्टी कमिश्नर समेत आपदा प्रबंधन अधिकारियों को नदी पर 24 घंटे निगरानी रखने और आम जनता को चिनाब के किनारों से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं. यह पिछले आठ महीनों में दूसरा मौका है जब भारत ने संधि निलंबित होने और पाकिस्तान के लगातार दुष्प्रचार के बाद भी उसे इस तरह की आपदा से बचाने के लिए समय रहते सूचना दी है. इससे पहले अगस्त 2024 में भी भारत ने सतलुज नदी में बाढ़ आने की चेतावनी देकर पाकिस्तान के हजारों नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की थी.
इस मानवीय कदम के विपरीत पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर भारत के खिलाफ अपनी बयानबाजी और वॉटर वेपनाइजेशन (पानी को हथियार बनाने) के झूठे आरोपों से बाज नहीं आ रहा है. ताजिकिस्तान में जल सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक और संयुक्त राष्ट्र (UN) में वहां के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर साझा जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. पाकिस्तान की यह छटपटाहट इसलिए भी है क्योंकि उसकी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और देश का अन्न का कटोरा कहा जाने वाला पंजाब प्रांत पूरी तरह से सिंधु बेसिन की नदियों पर निर्भर है. भारत के इस सख्त स्टैंड ने पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है.
भारत ने पाकिस्तान को सूचना दी.
भारत-पाकिस्तान IWT विवाद 5 मुख्य बातें
• बाढ़ की समय पूर्व चेतावनी: भारत ने जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध के गेट खोलने के बाद चिनाब नदी में 30 मई तक पानी का बहाव बढ़ने की चेतावनी पाकिस्तान को दी है.
• सलाल बांध की गाद सफाई: मानसून से पहले बांध की सफाई और गाद (Silt) निकालने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा स्पिलवे गेट्स को खोला गया है.
• पाकिस्तान में हाई अलर्ट: भारत से इनपुट मिलने के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, क्योंकि चिनाब का जलस्तर 2 से 3 मीटर तक बढ़ सकता है.
• दुष्प्रचार जारी: भारत की इस मदद के बावजूद, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया है.
• सख्त रुख के बाद भी मानवीयता: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 25 पर्यटकों की जान गई थी) के बाद भारत ने ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ की नीति के तहत संधि निलंबित कर दी थी, फिर भी भारत ने इंसानी जानों की रक्षा के लिए अलर्ट भेजा.
सिंधु जल विवाद- दुश्मनी में भी भारत की शराफत
भारत द्वारा सिंधु जल संधि (IWT) को ठंडे बस्ते में डालना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका है. वर्ष 1960 में हस्ताक्षरित यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच 1965, 1971 और 1999 के भीषण युद्धों के दौरान भी कभी नहीं रुकी थी. लेकिन, 2025 में पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अपनी कूटनीति में बड़ा बदलाव किया. भारत ने न केवल संधि को निलंबित किया बल्कि मानसून के दौरान पाकिस्तान के साथ साझा किए जाने वाले वॉटर-लेवल डेटा को भी पूरी तरह से बंद कर दिया. यह डेटा पाकिस्तान के लिए पंजाब और सिंध प्रांतों में बाढ़ से बचने का एकमात्र जरिया था.
इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो यह साफ होता है कि भारत ने भले ही कड़े दंडात्मक कदम उठाते हुए डेटा शेयरिंग रोक दी हो लेकिन वह एक गैर-जिम्मेदार देश की तरह काम नहीं कर रहा है. चिनाब नदी को लेकर दिया गया यह ताजा अलर्ट दिखाता है कि भारत कूटनीतिक मोर्चे पर बेहद परिपक्व है; वह बिना संधि के बंधनों के भी मानवीय आधार पर आपदा प्रबंधन की जानकारी साझा कर रहा है. वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान की बौखलाहट वैश्विक मंचों पर साफ दिख रही है, क्योंकि आने वाले सूखे और गर्मियों के मौसम में सिंधु बेसिन के पानी के बिना उसकी पूरी खेती बर्बाद हो सकती है. भारत के इस कदम ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि दिल्ली आतंकवाद पर कोई ढील नहीं देगा, लेकिन बेकसूर नागरिकों की जान बचाने के भूगोल और नदियों के प्राकृतिक नियमों का सम्मान हमेशा करेगा.
सिंधु जल विवाद 5 सवाल-जवाब
भारत ने पाकिस्तान को चिनाब नदी को लेकर क्या ताजा चेतावनी जारी की है?
भारत ने पाकिस्तान को सूचित किया है कि जम्मू-कश्मीर में सलाल बांध के स्पिलवे गेट खोलने के कारण चिनाब नदी में 30 मई तक पानी का बहाव तेजी से बढ़ सकता है, जिससे वहां बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.
सलाल बांध के गेटों को अचानक क्यों खोलना पड़ा?
मानसून सीजन की शुरुआत से पहले बांध में जमा हुई गाद (Silt Flushing) को साफ करने और अत्यधिक पानी के ओवरफ्लो को प्रबंधित करने के लिए सलाल बांध के स्पिलवे गेट्स को खोला गया है.
भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को किस वजह से निलंबित किया था?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले में 25 निर्दोष पर्यटकों की मौत हो गई थी. इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के रूप में इस संधि को निलंबित कर दिया था.
वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर क्या आरोप लगाए हैं?
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि को निलंबित रखकर दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डाल रहा है और पानी को एक कूटनीतिक हथियार (Weaponising Water) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच नदियों का बंटवारा किस प्रकार है?
1960 की संधि के तहत भारत के पास पूर्वी नदियों (सतलुज, ब्यास और रावी) के पानी पर असीमित अधिकार है, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का अधिकार पाकिस्तान को मिला था. हालांकि, भारत को इन पश्चिमी नदियों पर भी पनबिजली और सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें