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Jamtara Karmatand incident: झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ में समाज की संवेदनहीनता की बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है. माता-पिता के निधन के बाद 5 अनाथ बहनों के एकमात्र सहारे उनके चाचा का भी निधन हो गया. पड़ोसियों और समाज के आगे न आने पर पांचों बहनों ने खुद चाचा की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया. मामले में डीसी ने संज्ञान लेकर मदद का भरोसा दिया है.

जामताड़ा में इंसानियत शर्मसार! 5 बेटियों ने चाचा की अर्थी को पहुंचाया श्मशानZoom

जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले के करमाटांड़ से एक मार्मिक घटना सामने आई है. जिसने दिल को झकझोर दिया है. इस घटना ने समाज और व्यवस्था की संवेदनहीनता की कलई खोल दी. माता-पिता के गुजर जाने के बाद पांच अनाथ बहनों का एकमात्र सहारा उनके चाचा थे. उनके निधन के बाद बेटियों को वह दर्द झेलना पड़ा जिसकी कल्पना एक सभ्य समाज में नहीं की जा सकती. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

श्मशान चलने के लिए लोगों से कीं मिन्नतें, कोई आगे नहीं आया
करमाटांड़ बाजार में फल बेचकर किसी तरह परिवार का पेट भरने वाले 55 वर्षीय ठाकुर प्रसाद साह का देर रात निधन हो गया. ठाकुर प्रसाद उन पांच अनाथ बहनों के लिए पिता समान थे. जिन्होंने साल 2013 में अपने पिता और 2017 में अपनी मां को खो दिया था. चाचा के निधन के बाद जब उनकी अंतिम यात्रा निकालने का समय आया तो समाज और पड़ोस के लोगों ने अपनी आंखें मूंद लीं. बहनों ने श्मशान घाट चलने के लिए लोगों से मिन्नतें कीं, लेकिन कोई आगे नहीं आया.

खुद अर्थी उठाई, छोटी बहन ने दी मुखाग्नि
जब समाज की बेरुखी की वजह से कोई कंधा देने नहीं आया. मजबूर होकर पांचों बहनों रुबी, मौसम, चंदा, तन्नू और रिमझिम कुमारी ने खुद अपने चाचा के शव को कंधा दिया. करमाटांड़ बाजार से श्मशान घाट तक बहनें पैदल शव लेकर पहुंचीं. श्मशान घाट पहुंचकर सबसे छोटी बहन तन्नू ने पूरे विधि-धान के साथ मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं. रास्ते में जिसने भी इन बेटियों को अर्थी ले जाते देखा, उसकी आंखें नम हो गईं.

बकरियों के साथ रहने को मजबूर हैं बहनें
पीड़ित बहन रिमझिम कुमारी ने अपने परिवार के बदतर हालातों का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि परिवार दो कमरों के एक जर्जर एस्बेस्टस (एलबस्टर) की छत वाले घर में रहता है. जिसमें शौचालय और स्नानघर तक नहीं है. जीवनयापन के लिए परिवार के पास केवल 25 बकरियां हैं. आर्थिक तंगी और मजबूरी का आलम यह है कि एक ही कमरे में पांचों बहनें और बकरियां साथ रहने को विवश हैं.

डीसी ने लिया संज्ञान, मिला मदद का भरोसा
यह घटना उन तमाम बड़े मंचों और दावों की पोल खोलती है. जहां समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं. इस मामले पर जामताड़ा के डीसी आलोक कुमार ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि प्रशासन इस घटना का संज्ञान ले रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही पीड़ित परिवार की सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा. उन्हें प्रशासनिक मदद पहुंचाई जाएगी.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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