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कोयले के अवैध खनन के लिए बच्चों की सप्लाई:हर बच्चे पर तस्कर...




कैसे भेजे जा रहे बच्चे… ‘हर उम्र के बच्चे-बच्चियां मिल जाएंगे… काम चाहे घर का हो, होटल का या कारखानों का, कुछ भी करवा लें। मन हो तो कोयले की अवैध खदानों (माइंस) में उनसे खनन भी करवा लें…’। ये हैरान करने वाले दावे उन तस्करों के हैं, जो महज चंद रुपयों के लिए मासूमों का बचपन बेच रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने खूंटी जिले की उरिकेल पंचायत के दो गांवों में तस्करों के दो बड़े गिरोहों के बीच तीन दिन रहकर इस खौफनाक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। भास्कर की पड़ताल में यह साफ हुआ है कि यह गिरोह सरकार और प्रशासन के तमाम दावों को ठेंगा दिखाते हुए ग्रामीण इलाकों में गहराई से अपने पैर पसार चुका है। यहां सक्रिय तस्कर गरीब माता-पिता को शहरों में अच्छी नौकरी, पढ़ाई और बेहतर जिंदगी का झांसा देकर उनके बच्चों को अपने चंगुल में लेते हैं। इसके बाद उन्हें धनबाद व आसपास की कोयला खदानों और ईंट-भट्ठों जैसे जानलेवा चक्रव्यूह में धकेल दिया जाता है। भास्कर के दो अलग-अलग स्टिंग ऑपरेशनों में तस्करों ने कैमरे पर कबूल किया है कि यदि उन्हें तय एडवांस रकम और 1,000 रुपए प्रति बच्चा मासिक कमीशन मिले, तो वे मांग के अनुरूप बच्चे उपलब्ध करा देंगे। उनके पास 12 से 15 साल की उम्र के बच्चे और बच्चियां हैं। तस्करों का दावा है कि वे देश की किसी भी जगह पर बच्चों को पहुंचा सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन अपराधियों में कानून या पकड़े जाने का कोई खौफ नहीं है और वे बेहद बेखौफ अंदाज में मासूमों का सौदा करते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। दो स्टिंग से समझिए: कहां जा रहे बच्चे, परिजन भी नहीं जानते ग्रामीण इलाकों में सक्रिय तस्कर गरीब परिवारों से सीधे संपर्क कर एडवांस में पैसे देने या हर महीने कमाई भेजने का भरोसा देकर बच्चों को ले जाते हैं। कई बार माता-पिता को यह भी नहीं बताया जाता कि बच्चे को किस शहर या किस काम के लिए भेजा जा रहा है। भास्कर रिपोर्टर ने तोरपा में ऐसे ही दो तस्करों से मिलकर बात की। पहला तस्कर: भिखुआदाग गांव का जय मसीह कोयला खदानों में जोखिम भरे काम करने के लिए बच्चों को भेजने को राजी हो गया। उसकी एक ही शर्त थी कि एडवांस में पैसे देने होंगे। चार दिन बाद उसने बच्चों की व्यवस्था कर खुद फोन करके बुलाया। दूसरा तस्कर: जोजोदाग गांव के छोटेंद्र पाहन ने 1,000 रुपए प्रति बच्चा कमीशन मांगा। उसने कहा कि वह 12 बच्चियां देगा, लेकिन जब तक वे आपके पास रहेंगी, तब तक प्रति महीना कमीशन देना होगा। स्टिंग 1: भिखुआदाग गांव में तस्कर से बातचीत “कोयला माइंस में काम के लिए भी बच्चे मैनेज कर देंगे” रिपोर्टर : छोटा लड़का काम करने के लिए मिल जाएगा? तस्कर : कितनी उम्र वाला चाहिए? रिपोर्टर : 13 से 15 साल तक का। तस्कर : क्या काम है? रिपोर्टर : कोयला खदान में काम कराना है। तस्कर : हो जाएगा… पर पैसा कितना मिलेगा? रिपोर्टर : 500 से 600 रुपए रोज। तस्कर : खाने और रहने की क्या व्यवस्था है? रिपोर्टर : व्यवस्था वहीं पर है। तस्कर : 1,000 रुपए हम लेंगे प्रत्येक बच्चे पर (कमीशन)। रिपोर्टर : लड़का ठीक से काम करेगा न? तस्कर : काम के लिए उसे अच्छे से समझा देंगे। तस्कर ने वॉट्सऐप पर भेजी बच्चियों की तस्वीरें: भास्कर रिपोर्टर को तस्कर ने उन बच्चियों की तस्वीरें भी भेजीं, जिनकी सप्लाई की वह बात कर रहा था। तस्कर का कहना था कि जो भी पसंद हो बताइए, उसे काम करने के लिए भेज देंगे। स्टिंग 2: जोजोदाग गांव में दूसरे तस्कर ‘छोटू’ से बातचीत “15 हजार रुपए एडवांस और जब तक रहेगी, 1,000 रुपए हर महीने देना होगा” रिपोर्टर : घर के काम के लिए छोटा बच्चा मिलेगा? तस्कर : लड़का या लड़की? रिपोर्टर : लड़की। तस्कर : कितनी उम्र की? रिपोर्टर : यही 12-13 साल। तस्कर : कहां के लिए चाहिए? रिपोर्टर : रांची और बेंगलुरु के लिए। तस्कर : कितना पैसा मिलेगा? रिपोर्टर : 400 रुपए रोज, साथ में खाना भी मिलेगा। तस्कर : कितने घंटे का काम रहेगा? रिपोर्टर : 8 से 9 घंटे। तस्कर : मिल जाएगी, कितने बच्चे चाहिए? रिपोर्टर : 12 बच्चे। तस्कर : लेकिन बच्चा भेजने के समय 15 हजार रुपए एडवांस देने होंगे, बाकी जब तक बच्चा काम करेगा, तब तक 1,000 रुपए प्रति बच्चा प्रति माह देना होगा। दूसरे राज्यों तक भेजने का नेटवर्क तस्करों ने बताया कि वे बच्चों को पहले गांव से टेंपो के जरिए हटिया-राउरकेला रेलखंड पर स्थित गोविंदपुर रेलवे स्टेशन तक लाते हैं। इसके बाद रांची या हटिया रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए उन्हें गंतव्य राज्यों में भेज दिया जाता है। एजेंट ने दावा किया कि रास्ते में बच्चों को ‘मैनेज’ करना उसका काम है। एनसीआरबी (NCRB) का डेटा: हर वर्ष बच्चों की तस्करी के करीब 150 मामले दर्ज होते हैं… गड़बड़ी मिली तो सख्त एक्शन लेंगे “बाल तस्करी को रोकने के लिए एसओपी (SOP) जारी की गई है और इस मामले में लगातार कार्रवाई भी हो रही है। अगर इस स्टिंग के बाद कहीं भी कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो पुलिस तुरंत एक्शन लेगी और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”— मनोज कौशिक, एडीजी (सीआईडी), झारखंड



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