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अगर मजबूत इरादे और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो एक छोटा सा विचार भी बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला सकता है. जिले के इंदरवा बस्ती की रहने वाली राधा देवी ने अपने छोटे प्रयास को सफल व्यवसाय में बदलकर न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि आसपास की 20 महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है. आज राधा देवी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उन्होंने रोजगार, आत्मविश्वास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है.
राधा देवी ने बताया कि इस काम की शुरुआत उस समय हुई, जब उनके बच्चे छोटे थे और स्कूल में पढ़ाई करते थे. बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट के लिए वह यूट्यूब देखकर ऊन और धागों से आकर्षक डिजाइन तैयार करती थीं. उनके बनाए प्रोजेक्ट्स की स्कूल में काफी सराहना होती थी और बच्चों को पुरस्कार भी मिलते थे. इसी दौरान उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देने की प्रेरणा मिली.
इसके बाद उन्होंने जिला उद्योग विभाग से संपर्क किया. विभाग की मदद से उन्हें सिर्फ 10 प्रतिशत अंशदान, यानी करीब 50 हजार रुपये जमा करने पर लगभग 5 लाख रुपये की मशीनरी उपलब्ध कराई गई. इस मशीनरी में सात इलेक्ट्रिक सिलाई मशीन, चार मैन्युअल सिलाई मशीन और दो प्रिंटिंग मशीन शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने हजारीबाग स्थित जन जागरण केंद्र से 25 दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी लिया.
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद राधा देवी ने अपने घर से ही लघु कुटीर उद्योग की शुरुआत की. उन्होंने आसपास की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया और उन्हें रोजगार से जोड़ा. आज उनके उद्योग से जुड़ी महिलाएं कटिंग, सिलाई और डिजाइनिंग का काम कर रही हैं. यहां तैयार किए गए उत्पादों की सप्लाई स्थानीय बाजार, सरकारी विभागों और जिला प्रशासन को जरूरत के अनुसार की जाती है.
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राधा देवी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कई महिलाएं घरेलू काम खत्म करने के बाद काफी समय खाली बिताती थीं. उन्होंने महिलाओं को समय का महत्व समझाया और उन्हें हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया. अब ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. साथ ही बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों में भी अहम योगदान दे रही हैं.
उन्होंने बताया कि उनके उद्योग में जुट से बने कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इनमें अलग-अलग आकार के बैग, वाटर बैग, लैपटॉप बैग, फाइल फोल्डर, डायरी कवर और वॉल हैंगिंग प्रमुख हैं. खास बात यह है कि जुट से बना वाटर बैग गर्मियों में पानी को लंबे समय तक ठंडा रखने में मदद करता है.
राधा देवी का कहना है कि प्लास्टिक से बने उत्पाद पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हैं, जबकि जुट से बने सामान पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होते हैं. ये उत्पाद टिकाऊ होते हैं, खराब होने पर आसानी से मरम्मत किए जा सकते हैं और इस्तेमाल के बाद भी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते.