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आमतौर पर देखा जाता है कि कुछ ही लोग पशुओं को ढंग से रखते हैं और उनकी देखरेख करते हैं. आमतौर पर लोग जानवरों को बंधक जैसी स्थिति में कम जगह में और कीचड़ भरी जगहों पर रखते हैं. इससे जानवरों की मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की सेहत बिगड़ती है. इसी तरह कई बार लोग जानकारी की कमी के कारण पशुओं को ऐसे समय में भी नहला देते हैं जो उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
कैलाश कुमार/बोकारो: गर्मियों के बाद मानसून आते ही पशुपालकों के मन में एक आम सवाल उठता है कि क्या बारिश के मौसम में पशुओं को बार-बार नहलाना चाहिए या इससे वे बीमार पड़ सकते हैं. इस बारे में बोकारो चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है.
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में पशुओं को बार-बार नहलाना नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि इस दौरान वातावरण में काफी अधिक नमी रहती है और गाय, भैंस, बकरी, कुत्ता जैसे अधिकांश पशुओं के शरीर पर घने बाल होते हैं, जो नहलाने के बाद जल्दी नहीं सूखते हैं और लम्बे समय तक नमी बने रहने कारण फंगल संक्रमण, त्वचा रोग और परजीवियों की समस्या बढ़ सकती है और छोटे बछड़ों और मेमनो में बीमारी का खतरा अधिक होता है
वहीं अगर पशु कीचड़ या गंदगी में सना हुआ हो तो उसे हल्के गुनगुने पानी से साफ किया जा सकता है, और अगर नहलाना बहुत जरूरी हो तो पशु को नहलाने के बाद उसके शरीर को अच्छी तरह सुखाए इसके अलावा पशुओं के रहने की जगह को हमेशा सूखा और साफ रखें है क्योंकि लंबे समय तक गीली जमीन पर रहने से पशुओं के खुर गलने लगते हैं, जिससे लंगड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है
वहीं बारिश के मौसम में पशुओं के चारे और पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि बरसात के दौरान हरा चारा सड़ा-गला या अधिक गीला आहार देने से पाचन संबंधित समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी पिलाएं और पशु के शरीर में अचानक तापमान के बदलाव होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क कर स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं.
तो उम्मीद है कि आपको एक जानकार डॉक्टर के जरिए पशुओं की देखरेख से जुड़ी सही जानकारी मिल गई होगी. इससे आपको अपने जानवरों की देखरेख और उनकी परेशानी को समझने में आसानी होगी. ध्यान रखें कि जानवर को किसी भी तरह की बीमारी या दिक्कत होने पर नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या फिर पशुओं के डॉक्टर की सलाह अवश्य लें.
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