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  • A Sand Ghat Is Operational In Ranchi, But No One Knows How To Get The Sand. Stocks Have Been Accumulated Even Before The CTO CTE Is Approved.

रांची2 घंटे पहले

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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो।

नदियों से बालू निकालने पर 10 जून से एनजीटी की रोक लग जाएगी। इससे पहले नदियों से बालू निकाल कर स्टॉक करने की होड़ मची हुई है। रांची के श्यामनगर बालू घाट से बालू उत्खनन की अनुमति मिली है। पर्यावरण स्वीकृति के साथ सीटीओ भी दे दिया गया है। लेकिन श्याम नगर घाट से अभी तक विधिवत तरीके से बालू का उत्खनन शुरू नहीं हुआ है।

उत्खनन कब से होगा और आम लोगों को बालू कैसे मिलेगा यह भी किसी को पता नहीं। क्योंकि, प्रशासन से लेकर ठेका लेने वाले ठेकेदार के लोग सामने नहीं आ रहे हैं। रांची डीएमओ ने बताया कि एग्रीमेंट के बाद घाट का संचालन किसके द्वारा किया जाएगा, यह नहीं बताया गया है। इस वजह से अभी तक पता नहीं चला है कि बालू की बिक्री कैसे होगी।

दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से श्याम नगर घाट के कांट्रेक्टर समर्थ एड प्रोटेक्स को गाड़ीहलमाद में बालू स्टॉक करने के लिए सीटीई और सीटीओ दिया गया है। लेकिन, क्लियरेंस मिलने से पहले ही उक्त स्थल पर लाखों सीएफटी बालू का स्टॉक कर लिया गया है। उत्खनन की अनुमति से पहले उक्त स्थल पर बालू का स्टॉक किसने किया, इसकी भी जानकारी प्रशासन को नहीं है।

मानसून से पहले बालू की जबर्दस्त किल्लत शुरू हो गई है। बालू सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने बालू का स्टॉक करना शुरू कर दिया दिया है। बिहार के बालू के चालान के नाम पर रांची, लोहरदगा, पतरातू व खूंटी से अवैध रूप से आ रहे बालू का स्टॉक किया जा रहा है। जमाखोरी के साथ मुनाफाखोरी भी शुरू कर दी गई है। 100 सीएफटी बालू 4500 रुपए से 5000 रुपए में मिल रहा था, अब उसके लिए 8000 से 9000 हजार रुपए की मांग की जा रही है।क्योंकि, बालू ब्रोकर पुलिस-प्रशासन को मैनेज करने के नाम पर मोटी रकम की वसूली कर रहे हैं। मुनाफाखोरी रोकने की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।



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