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शरीर पर लोहे की जंजीरें, दिल में बाबा का नाम! पूर्व सैनिक...


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जंजीरों में बंधा पूर्व सैनिक, बाबा बैद्यनाथ की कर रहा अनोखी कांवड़ यात्रा

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Deoghar Kanwar Yatra: देवघर के खिजुरिया कांवड़िया पथ पर पूर्व सैनिक राम उदय सिंह लोहे की जंजीरों में बंधकर बाबा बैद्यनाथधाम की डाक कांवड़ यात्रा कर रहे हैं, उनका संकल्प चर्चा में है. आइये जानते हैं उनके बारे में.

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देवघर: श्रावणी मेला शुरू होने से पहले कांवड़िया पथ पर आस्था, तपस्या और संकल्प का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला  है, जिसने हर किसी को ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया. देवघर के खिजुरिया कांवड़िया पथ पर एक पूर्व सैनिक अपने पूरे शरीर को लोहे की जंजीरों से जकड़कर बाबा बैद्यनाथधाम की ओर बढ़ते हुए नजर आया. पूर्व सैनिक के इस अनोखे रूप को देखकर राहगीर, कांवड़िया और स्थानीय लोग हैरान भी हुए और उनकी भक्ति को नमन भी किया. श्रद्धा से भरे कदम, शरीर पर बंधी जंजीरें और आंखों में बाबा के दर्शन की चाह, यह दृश्य कांवड़िया पथ पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

जंजीरों में जकड़कर जा रहे कांवड़ यात्रा

शेखपुरा जिले के एकड़ा गांव निवासी राम उदय सिंह भारतीय सेना में 18 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं. देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले इस पूर्व सैनिक ने अब खुद को बाबा बैद्यनाथ की भक्ति में समर्पित कर दिया है. सुल्तानगंज की पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर वे डाक कांवड़ के रूप में बाबाधाम पहुंचे. हालांकि यह उनकी पहली यात्रा नहीं है. सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे लगातार बाबाधाम आते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका संकल्प सबसे अलग और कठिन है. पूरे शरीर को जंजीरों में जकड़कर यात्रा करने का उनका फैसला हर किसी के लिए कौतूहल का विषय बन गया है.

जानें पूर्व सैनिक ने क्या कहा

राम उदय सिंह बताते हैं कि इंसान के जीवन में कई बार जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिनका बोझ मन पर बना रहता है. इन्हीं भूलों और गुनाहों के प्रायश्चित की भावना से उन्होंने यह कठिन संकल्प लिया है. उनका मानना है कि जब इंसान सच्चे मन से भगवान की शरण में जाता है तो उसे आत्मिक शांति मिलती है. यही कारण है कि वे खुद को जंजीरों में बांधकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे. उनके अनुसार यह जंजीरें केवल लोहे की नहीं हैं, बल्कि जीवन की गलतियों, पश्चाताप और आत्मशुद्धि का प्रतीक है.

जलकल्याण की भावना लिए पहुंचे बाबाधाम

व्यक्तिगत प्रायश्चित के साथ-साथ उनके मन में जनकल्याण की भी बड़ी भावना है. वह बाबा बैद्यनाथ से देश में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं. उनका कहना है कि समाज में प्रेम और भाईचारा बना रहे, देश प्रगति करे और हर व्यक्ति का जीवन खुशहाल हो, इसी मन्नत के साथ वह यह कठिन यात्रा कर रहे हैं. विश्व शांति और मानव कल्याण की भावना से जुड़ी उनकी यह साधना लोगों को विशेष रूप से प्रभावित कर रही है.

पूर्व सैनिक के संकल्प की हो रही चर्चा

रास्ते में जहां-जहां से राम उदय सिंह गुजरे, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुक गई. कोई उनकी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद कर लिया तो कोई उनके संकल्प की चर्चा कर रहा है. कई श्रद्धालु उन्हें आस्था और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बता रहे हैं. जंजीरों में बंधे इस पूर्व सैनिक की अनोखी डाक कांवड़ यात्रा इन दिनों पूरे कांवड़िया पथ पर चर्चा का विषय बन गई है. भक्ति, तपस्या, त्याग और जनकल्याण की भावना से जुड़ी यह यात्रा हर किसी को यह संदेश दे रही है कि सच्ची श्रद्धा के सामने कठिन से कठिन मार्ग भी आसान हो जाता है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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