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अमेरिका ने फिर लगा दिया 12.5 फीसदी टैरिफ, भारत के पास बचने...


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Section 301 : अमेरिका ने एक बार फिर पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है. एक तरफ तो उसके विदेश मंत्री दावा कर रहे हैं कि डील 99 फीसदी पूरी हो गई है और दूसरी ओर सेक्‍शन 301 जैसे कानून की आड़ में भारत पर टैरिफ लगा रहा है. सरकार के थिंक टैंक ने सुझाव दिया है कि भारत को इस कानून और टैरिफ का विरोध करना चाहिए. इसके विरोध में भारत के पास पर्याप्‍त तर्क भी हैं.

अमेरिका ने फिर लगा दिया 12.5 फीसदी टैरिफ, भारत के पास बचने के क्‍या विकल्‍प Zoom

अमेरिका ने धारा 301 की आड़ में भारत पर 12.5 फीसदी टैरिफ लगा दिया है.

नई दिल्‍ली. अमेरिका ने भारत पर बंधुआ मजदूरी सहित अन्‍य कई तरह के आरोपों की जांच का बहाना बनाकर फिर 12.5 फीसदी का टैरिफ लगाने का प्रस्‍ताव दे दिया है. एक तरफ तो भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है और दूसरी ओर टैरिफ का खेल शुरू कर दिया है. ऐसे में भारत के पास आखिर क्‍या विकल्‍प हैं, जिसका इस्‍तेमाल वह टैरिफ से बचने के लिए कर सकता है. सरकार के थिंक टैंक जीटीआरआई ने साफ कहा है कि अमेरिका का यह कदम नियमों के विरुद्ध है और भारत को इसे चुनौती देनी चाहिए.

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, अमेरिका द्वारा धारा-301 जांच के तहत भारत पर प्रस्तावित 12.5 फीसदी शुल्क प्रावधान के दायरे से बाहर है. भारत को इसे चुनौती देनी चाहिए. संस्‍थान ने कहा है कि 12.5 फीसदी का यह शुल्क अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन प्रतिबद्धताओं से अधिक है. इससे पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है.

60 देशों के खिलाफ चल रही कार्रवाई
अमेरिका की यह कार्रवाई 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बाद की जा रही है. इसमें यूएसटीआर ने आरोप लगाया था कि ये देश बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने में विफल रहे हैं. जीटीआरआई ने कहा कि वर्तमान जांच धारा-301 के दायरे से बाहर है, जो जांच के दायरे में आ रहे देश के आयात व उनके स्रोत से नहीं बल्कि अमेरिकी कंपनियों के सामने आने वाली बाजार पहुंच बाधाओं से संबंधित है.

क्‍या है अमेरिका के दावे में लूपहोल
आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार, यह जांच इस आरोप पर आधारित नहीं है कि निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पाद बंधुआ मजदूरी से तैयार किए जाते हैं, बल्कि यूएसटीआर की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या देश तीसरे देशों में बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाते हैं. जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को यह तर्क देना चाहिए कि अमेरिका एकतरफा व्यापार उपायों के जरिये अपने पसंदीदा आयात-नियंत्रण ढांचे को अन्य देशों पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जो धारा-301 के दायरे से बाहर है. भारत यह भी तर्क दे सकता है कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दे, खासकर चीन जैसे देशों में अक्सर उत्पाद-विशिष्ट होते हैं और अमेरिका स्वयं भी इन उत्पादों का बड़ा आयातक है. ऐसे में देश-व्यापी शुल्क लगाना उचित नहीं है जब समस्या कुछ उत्पादों तक सीमित हो सकती है.

अमेरिका खेल रहा दबाव की राजनीति
जीटीआरआई ने इन शुल्कों को वाशिंगटन द्वारा भारत पर दबाव बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा भी बताया, खासकर तब जब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. कहा कि भारत को अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त धारा 301 शुल्कों के लिए भी तैयार रहना चाहिए. अमेरिका की मंशा इस तरह के दबाव के जरिये व्‍यापार समझौते में अपनी मनमर्जी शर्ते शामिल करना है. अब देखना यह है कि भारत आखिर कैसे इस दोहरी मुश्किल से निपट सकता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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