| Su-57 बनाम राफेल फाइटर जेट |
| Su-57 फाइटर जेट | राफेल फाइटर जेट |
| रूस का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर: सुखोई Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) रूस का पहला ऑपरेशनल 5th जेनरेशन का स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है. इसे अमेरिकी F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग-II जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों को टक्कर देने के लिए विकसित किया गया है. | फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation द्वारा विकसित राफेल (Rafale) एक ट्विन-इंजन, कैनार्ड डेल्टा-विंग मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे वायु श्रेष्ठता, टोही, सटीक हमले और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता जैसे मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. |
| स्टील्थ और मल्टीरोल क्षमता से लैस: Su-57 को वायु, जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें कम रडार सिग्नेचर, इंटरनल वेपन बे, सुपरमैन्युवरेबिलिटी और लंबी दूरी तक मिशन संचालित करने जैसी उन्नत क्षमताएं मौजूद हैं. | राफेल को ओम्नी-रोल फाइटर माना जाता है, क्योंकि यह एक ही उड़ान में कई प्रकार के सैन्य अभियानों को अंजाम दे सकता है. इसके तीन प्रमुख संस्करण हैं—राफेल C, राफेल B और नौसेना के लिए राफेल M. |
| सुपरक्रूज और हाई-स्पीड प्रदर्शन: यह लड़ाकू विमान अधिकतम मैक 2 (करीब 2,130 किमी/घंटा) की रफ्तार हासिल कर सकता है. साथ ही यह आफ्टरबर्नर के बिना लगभग 1,800 किमी/घंटा की सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने की सुपरक्रूज क्षमता रखता है. | विमान में अत्याधुनिक RBE2 AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगाया गया है, जो दुश्मन के खतरों की पहचान, निगरानी और उनसे बचाव की उन्नत क्षमता प्रदान करता है. |
| AI और नए इंजन से हो रहा अपग्रेड: रूस लगातार Su-57 को आधुनिक बना रहा है. विमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे पायलट पर कार्यभार कम होगा. इसके अलावा नए AL-51F-1 (इज्देलिये-177) इंजन के जरिए इसकी थ्रस्ट और प्रदर्शन क्षमता को और बढ़ाया जा रहा है. | राफेल 9,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है. इसमें Meteor लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल, SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड बम जैसे आधुनिक हथियारों का एकीकरण किया गया है. |
| भारत को को-प्रोडक्शन का प्रस्ताव: रूस ने भारत को Su-57E निर्यात संस्करण की पेशकश की है. राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत के साथ इस विमान के सह-विकास और सह-उत्पादन का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा सके. | भारत वर्तमान में 36 राफेल विमानों को ऑपरेट कर रहा है. इसके अलावा Indian Air Force पुराने विमानों की जगह लेने के लिए 114 नए लड़ाकू विमानों की योजना पर काम कर रही है, जबकि Indian Navy ने विमानवाहक पोत INS Vikrant और INS Vikramaditya के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता किया है. |
राफेल की कितनी कीमत?
तुलना के लिए भारत ने वर्ष 2016 में फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी. इस हिसाब से सभी सहायता पैकेजों और हथियारों सहित प्रति विमान लागत करीब 1,640 करोड़ रुपये बैठती है. राफेल की अधिक कीमत उसके प्रूव्ड वॉर परफॉर्मेंस, भारत के मनमुताबिक संशोधनों और अत्याधुनिक मेटेओर तथा स्कैल्प जैसी मिसाइलों के कारण मानी जाती है.
भारत ने फ्रांस से जो 36 राफेल फाइटर जेट खरीदा है, उसकी औसत कीमत रूस के Su-57 जेट से कहीं ज्यादा है. (फाइल फोटो/Reuters)
रूस के ऑफर में कितना दम?
रूस की पेशकश केवल विमान बिक्री तक सीमित नहीं है. प्रस्ताव में संवेदनशील सोर्स कोड तक पहुंच, व्यापक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत की जरूरतों के अनुरूप दो सीटों वाले Su-57D वेरिएंट के विकास की संभावना भी शामिल है. यह भारत को स्वदेशी हथियारों, सेंसरों और एवियोनिक्स को बिना किसी विदेशी मंजूरी के विमान में इंटीग्रेट करने की स्वतंत्रता देगा. रक्षा क्षेत्र में इस स्तर का तकनीकी हस्तांतरण बेहद दुर्लभ माना जाता है. प्रस्ताव के अनुसार शुरुआती लगभग 30 विमान सीधे रूस से मिल सकते हैं, जबकि बाद के विमानों का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सहयोग से भारत में किया जा सकता है. रूस का कहना है कि सहयोग पर किसी प्रकार की तकनीकी या राजनीतिक पाबंदी नहीं होगी. इसे अमेरिका के F-35 प्रस्ताव से अलग माना जा रहा है, जिसे भारत ने लिमिटेड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कड़े उपयोग प्रतिबंधों के कारण स्वीकार नहीं किया था.
Su-57 के सामने क्या चुनौतियां?
हालांकि, Su-57 कार्यक्रम को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. वर्ष 2026 की शुरुआत तक रूस अपनी वायुसेना को केवल लगभग 30 Su-57 विमान ही सौंप पाया है, जबकि उत्पादन लक्ष्य इससे कहीं अधिक थे. पश्चिमी प्रतिबंधों, आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं और उन्नत Izdeliye-30 इंजन के विकास में देरी ने कार्यक्रम की गति को प्रभावित किया है. मौजूदा विमानों में ट्रांजिशनल इंजन लगे हैं, जिससे उनकी पूर्ण क्षमता को लेकर सवाल उठते हैं.
Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. इसे दुनिया में सबसे सस्ता 5th जेनरेशन का फाइटर जेट माना जाता है. (फाइल फोटो/Reuters)
114 राफेल खरीद सौदा
दूसरी ओर भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल F5 लड़ाकू विमानों के लिए 30 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के संभावित सौदे को भी मंजूरी मिल चुकी है. इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के उपयोग की योजना है. राफेल पहले से भारतीय परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित कर चुका है और भारतीय हथियार प्रणालियों के साथ इसकी अनुकूलता भी स्थापित हो चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि Su-57 भारत के स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के सेवा में आने तक एक अंतरिम समाधान साबित हो सकता है. वहीं, रूस से मिलने वाला तकनीकी सहयोग भारत की एयरोस्पेस क्षमताओं को भी मजबूत कर सकता है.
भारत के पास क्या विकल्प?
फिलहाल भारत के सामने विकल्प स्पष्ट हैं. Su-57 कम लागत और व्यापक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का आकर्षक प्रस्ताव देता है, जबकि राफेल विश्वसनीयता, सिद्ध प्रदर्शन और स्थिर दीर्घकालिक समर्थन का भरोसा प्रदान करता है. अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत तत्काल स्टील्थ क्षमता और तकनीकी स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है या फिर दीर्घकालिक स्थिरता और प्रमाणित प्रदर्शन को.