रांची. झारखंड की ऊर्जा क्रांति अब एक नए चरण में पहुंचने जा रही है. राजधानी रांची के गेतलसूद डैम (Getalsud Dam) में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट लगभग तैयार हो चुका है. इस प्रोजेक्ट से जल्द ही बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे करीब 1 लाख घरों को रौशनी मिलेगी. यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट कुल 100 मेगावाट क्षमता का होगा, जिसमें पहले चरण में 50 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू किया जाएगा. दूसरे चरण में अतिरिक्त 50 मेगावाट क्षमता जोड़ी जाएगी. प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार होने के बाद यह राज्य की ऊर्जा जरूरतों में बड़ी भूमिका निभाएगा.
पानी पर तैरते सोलर पैनल और ट्रांसफार्मर
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सोलर पैनल और ट्रांसफार्मर दोनों पानी की सतह पर तैरते हुए नजर आते हैं. केबल सिस्टम के जरिए पैनलों से बिजली एचटी पैनल रूम तक पहुंचाई जाएगी, जहां इसे नियंत्रित कर ग्रिड में भेजा जाएगा.
ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम
यह प्रोजेक्ट ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है. इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि डैम के पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आएगी, जिससे जलस्तर लंबे समय तक स्थिर रहेगा. प्रोजेक्ट की लागत करीब 423 करोड़ रुपये है और इसे विश्व बैंक की सहायता से वित्तीय सहयोग मिला है.
कैसे काम करेगा सिस्टम?
एलएनटी प्रोजेक्ट टीम के अनुसार, सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली केबल के माध्यम से एचटी पैनल रूम तक पहुंचेगी. इसके बाद इसे ट्रांसफार्मर के जरिए स्टेप-अप कर सीधे ग्रिड में भेजा जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक पर आधारित है.
राज्य में और बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट
झारखंड में कई अन्य डैम पर भी ऐसे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं-
Tilaiya Dam – 155 मेगावाट
Panchet Dam – 75 मेगावाट
Konar Dam – 228 मेगावाट
Maithon Dam – 235 मेगावाट
Chandil Dam – स्टडी जारी
1 लाख घरों को मिलेगी राहत
रांची में सामान्य दिनों में लगभग 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है. ऐसे में गेतलसूद डैम से मिलने वाली 100 मेगावाट बिजली शहर की आपूर्ति में बड़ा योगदान देगी. इससे करीब 1 लाख घरों को सीधे फायदा मिलेगा.
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट न सिर्फ जमीन की बचत करता है बल्कि डैम के पानी के संरक्षण में भी मदद करता है. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बिजली उत्पादन लागत भी कम होगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी.
झारखंड की ऊर्जा क्रांति की नई शुरुआत
इस परियोजना को झारखंड की ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. आने वाले समय में यह राज्य को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.