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Koderma Home Maker Unique Gardening: जिन चीजों को लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, उनसे ही कोडरमा की गृहिणी सरिता विजय ऐसी गार्डनिंग करती हैं कि इसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. वे प्लास्टिक के खाली पैकेट, डिब्बे वगैरह में पौधे उगाती हैं और कचरे का बहुत ही क्रिएटिव इस्तेमाल करती हैं.
कोडरमा. झुमरी तिलैया शहर के ब्लॉक रोड के समीप रहने वाली गृहिणी सरिता विजय आज पूरे कोडरमा जिले में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं. उन्होंने घरेलू प्लास्टिक कचरे को फेंकने के बजाय उसका ऐसा उपयोग किया है, जिससे न केवल घर की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की नई प्रेरणा भी मिल रही है. विशेष बातचीत में सरिता विजय ने बताया कि शादी के बाद उन्होंने देखा कि उनके पति विजय कुमार को गार्डनिंग का काफी शौक है.
धीरे-धीरे वह भी इस शौक का हिस्सा बन गईं और दोनों ने मिलकर अपने घर में हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया. इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि बाजार से आने वाले अधिकांश घरेलू सामान प्लास्टिक के पैकेट और डिब्बों में होते हैं, जिससे घर में प्लास्टिक कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही थी.
प्लास्टिक के बेकार पैकेट गमले से अधिक मजबूत
सरिता ने बताया कि इस समस्या का समाधान खोजने के लिए उन्होंने और उनके पति ने खाली प्लास्टिक पैकेटों को गमले के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया. प्लास्टिक बैग के नीचे एक छोटा छेद कर अतिरिक्त पानी निकलने की व्यवस्था की जाती है. इसके बाद कोकोपीट, मिट्टी और गोबर से तैयार मिश्रण भरकर उसमें फूलों और सजावटी पौधों की रोपाई की जाती है. उन्होंने बताया कि मिट्टी के गमले समय के साथ टूट जाते हैं, जबकि प्लास्टिक के पैकेट और डिब्बे लंबे समय तक टिकाऊ रहते हैं.
बेकार समझी जानें वाली चीजें, बनीं हरियाली का आधार
ये हल्के होते हैं, आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जा सकते हैं और टूटने का डर भी नहीं रहता. यही कारण है कि उन्होंने अपने घर की छत पर एक आकर्षक गार्डन तैयार किया है. इस गार्डन की खास बात यह है कि इसमें घी के खाली डिब्बे, तेल के कैन, सर्फ के रैपर, नारियल के खोल, पूजा के बाद बेकार हो चुके मिट्टी के कलश, पेंट के खाली डिब्बे और पुरानी बाल्टी तक का उपयोग पौधे लगाने के लिए किया गया है. बेकार समझी जाने वाली ये वस्तुएं आज हरियाली का आधार बन गई हैं और उनके बगीचे को अलग पहचान देती हैं.
गार्डन देखने वाले लोग होते हैं प्रेरित, कई लोगों ने शुरू किया प्रयास
उन्होंने बताया कि जब उनकी सहेलियां और परिचित उनकी छत पर बने इस अनोखे बागान को देखने आते हैं, तो उसकी खूब सराहना करते हैं. उनकी पहल से प्रेरित होकर कई लोगों ने भी अपने घरों में प्लास्टिक कचरे का दोबारा उपयोग शुरू कर दिया है. उनकी सहेलियां अब घर में इस्तेमाल हो चुके प्लास्टिक के डिब्बे और पैकेट उन्हें भेंट करती हैं, ताकि उनमें नए पौधे लगाए जा सकें. इससे न सिर्फ प्लास्टिक कचरा कम हो रहा है, बल्कि अधिक से अधिक लोग पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ रहे हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें