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रांची समेत पूरे झारखंड में बालू संकट दस्तक देने जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देशों के तहत 10 जून से राज्य की सभी नदियों से बालू के उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा, जो 15 अक्टूबर (पूरे मानसून सत्र के दौरान) तक जारी रहेगा। इस चार महीने की बंदी से ठीक पहले राज्य के बालू सिंडिकेट, ठेकेदारों और घाट संचालकों के बीच अधिक से अधिक बालू का स्टॉक डंप करने की होड़ मच गई है। रात-दिन एक करके सैकड़ों डंपर और हाइवा नदियों से बालू निकालकर स्टॉकयार्डों में जमा कर रहे हैं, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में आम जनता की जेब पर पड़ना तय है। रांची स्थित श्यामनगर बालू घाट का क्षेत्रफल 5.00 हेक्टेयर है, जहां से वर्तमान में बालू का उठाव किया जा रहा है। यहाँ संवेदक और अनुबंधित स्टॉकिस्टों द्वारा लगभग 15 लाख से 18 लाख सीएफटी बालू का स्टॉक किया गया है। बालू की भारी मांग को देखते हुए यह स्टॉक अधिकतम 15 से 20 दिन तक ही चल सकता है। रांची राज्य में बालू का सबसे बड़ा कंजम्पशन हब (खपत केंद्र) है। अकेले रांची शहर और शहरी सीमाओं के भीतर चल रहे निजी व सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रोजाना करीब 80,000 से 1 लाख सीएफटी बालू की जरूरत होती है। मात्र एक वैध घाट होने के कारण यह स्टॉक जून के आखिरी सप्ताह तक खत्म हो जाएगा, जिसके बाद पूरी तरह कृत्रिम किल्लत और कालाबाजारी की स्थिति बनेगी। ऐसे समझें कैसे होगी किल्लत… रांची में बालू का स्टॉक महंगा बालू, कटेगी जेब… रांची में घर बनाना होगा और मुश्किल रांची में बालू की किल्लत से शहर में चल रही सरकारी आवास योजनाओं से लेकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के छोटे-छोटे मकानों के निर्माण तक पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जिन लोगों ने कर्ज लेकर या जीवनभर की बचत से घर बनाना शुरू किया है, उनके काम बीच में ही रुकने की नौबत आ सकती है। पर्याप्त बैकअप स्टॉक नहीं होने के कारण ठेकेदारों और मजदूरों के सामने भी काम का संकट खड़ा होगा। बालू की कमी का फायदा उठाकर बाजार में कीमतें 30-40% तक बढ़ने की आशंका है, जिससे आम आदमी के लिए एक-एक ट्रॉली बालू खरीदना भी भारी पड़ जाएगा। राज्य में 35 के बदले मात्र 14 घाटों से हो रहा उठाव विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य में केवल 14 बालू घाटों से ही नियमित रूप से बालू का उठाव हो रहा है। मानसून से पहले कम से कम 35 मुख्य घाटों से सघन उठाव शुरू कराया जाना था, ताकि बाजार में पर्याप्त बैकअप स्टॉक रहे। परंतु, प्रशासनिक सुस्ती और पर्यावरणीय स्वीकृति न मिल पाने के कारण वर्तमान में सिर्फ 14 घाट ही ‘लाइव मोड’ में हैं। इनमें से सबसे ज्यादा मांग वाले रांची जिले में केवल एक मात्र ‘श्यामनगर बालू घाट’ ही वैध रूप से क्रियाशील है। राज्य में 299 घाटों का टेंडर होने के बाद भी पर्यावरण की हरी झंडी न मिलने के कारण मशीनें खड़ी हैं। जानें किस जिले में बालू का कितना स्टॉक कागजी फेर में फंसा सरकारी लक्ष्य 15-18 लाख सीएफटी: कुल उपलब्ध बालू का स्टॉक 80,000 से 1 लाख सीएफटी: बालू की रोजाना खपत 15-20 दिन: अधिकतम अवधि, जितने दिन यह बालू चलेगा
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