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स्लोवाकिया छोटा देश जरूर है, लेकिन यूरोप की ऑटो इंडस्ट्री, परमाणु ऊर्जा क्षमता, EU सदस्यता और रक्षा महत्व के कारण उसकी रणनीतिक कीमत काफी बड़ी है. यही वजह है कि 33 साल बाद होने जा रही किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा को भारत की यूरोप नीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया के दौरे पर जाने वाले हैं.
स्लोवाकिया, जिसकी आबादी तकरीबन 55 लाख है, यानी जयपुर से भी कम. फिर इस देश में ऐसा क्या है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के दौरे पर जा रहे हैं. 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी वहां 14 से 16 जून तक रहेंगे. लगातार मीटिंग फिक्स है. आपके मन में भी सवाल होगा कि पीएम मोदी वहां इतना टाइम क्यों दे रहे हैं? वहां से क्या हासिल होने वाला है?
स्लोवाकिया आकार में भले छोटा देश हो, लेकिन भारत के लिए उसकी रणनीतिक, आर्थिक और जियोपालिटिकल अहमियत लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि पीएम मोदी का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है.
स्लोवाकिया क्यों है खास?
- लगभग 55 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर में गिना जाता है. यहां Volkswagen, Kia, Jaguar Land Rover और Stellantis जैसी कंपनियों के बड़े प्लांट हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाना चाहता है.
- स्लोवाकिया European Union का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत रिश्ते भारत को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच दिला सकते हैं. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है.
- रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देश अपने डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बना रहे हैं. स्लोवाकिया भी उनमें शामिल है. भारत अपनी डिफेंस कंपनियों और स्वदेशी वेपन सिस्टम का एक्सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में डिफेंस पार्टनरशिप दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है.
- स्लोवाकिया अपनी बिजली का बड़ा हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसलिए परमाणु तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं.
- मध्य यूरोप में भारत अपनी मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक संतुलन बनाना चाहता है. स्लोवाकिया NATO और EU दोनों का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय राजनीति और सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली साझेदार बनने में मदद कर सकते हैं.
दुनिया के लिए मैसेज
पीएम मोदी यह दौरा दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन या फ्रांस जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं है. मोदी सरकार छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रही है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें