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JPSC OMR Sheet: OMR शीट में सामने आया बड़ा खेल, 32 सवालों...


JPSC OMR Sheet Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पहले 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पर सवाल उठे और अब बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के रिजल्ट में भी बड़ा खेल सामने आया है. सीआईडी (CID) की जांच में ऐसी OMR शीट मिली है जिसने पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच में सामने आया कि एक अभ्यर्थी ने 100 में से सिर्फ 32 सवाल हल किए थे. इनमें भी केवल 15 उत्तर सही थे और 17 गलत, लेकिन इसके बावजूद उसे परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया.इस खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मामले की जांच जारी है और फिलहाल मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी गई है.

सिर्फ 15 सही जवाब, फिर भी रिजल्ट में सफल

सीआईडी जांच के मुताबिक संबंधित अभ्यर्थी ने परीक्षा में कुल 100 प्रश्नों में से सिर्फ 32 प्रश्नों के उत्तर दिए थे. बाकी 68 सवाल उसने छोड़े थे. जब उसकी OMR शीट का प्रारंभिक उत्तर कुंजी (Answer Key) से मिलान किया गया तो केवल 15 उत्तर सही और 17 गलत पाए गए.इसके बावजूद 6 जुलाई को जारी रिजल्ट में उसे सफल घोषित कर दिया गया. यही नहीं वह मुख्य परीक्षा के लिए भी चयनित हो गया. इसी मामले ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा और अब पूरी परीक्षा प्रक्रिया जांच के दायरे में है.

OMR शीट और डिजिटल सर्वर में हेरफेर का आरोप

नगड़ी थाना रांची में दर्ज शिकायत के आधार पर सीआईडी जांच कर रही है. जांच में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा खत्म होने के बाद OMR शीट में फिजिकल स्तर पर बदलाव किए गए. कुछ शीटों को दोबारा भरा गया या उनमें रंग भरकर उत्तर बदले गए.
इतना ही नहीं आरोप यह भी है कि परीक्षा एजेंसी के प्रोग्रामरों की मदद से मुख्य डिजिटल सर्वर के बैकएंड तक पहुंच बनाई गई और वहां से कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़ा दिए गए। जांच एजेंसियां अब डिजिटल रिकॉर्ड और सर्वर डेटा की भी जांच कर रही हैं.

500 से ज्यादा OMR शीट में गड़बड़ी का दावा

शिकायत में दावा किया गया है कि केवल एक-दो नहीं बल्कि बड़ी संख्या में OMR शीट में हेरफेर की गई.आरोपों के मुताबिक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा की करीब 350 OMR शीट और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) परीक्षा की लगभग 150 OMR शीट में बदलाव किए गए। यानी कुल 500 से ज्यादा OMR शीट जांच के दायरे में हैं.यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह राज्य की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जाएगा.

अभय तिवारी पर सिंडिकेट चलाने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) से जुड़े अभय तिवारी की हो रही है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह पहले कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर था और उसने परीक्षा प्रणाली का गलत फायदा उठाकर एक पूरा सिंडिकेट तैयार किया.सीआईडी के अनुसार अभय तिवारी ने अपने संपर्क में आने वाले कई अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए डिजिटल सिस्टम और OMR शीट में हेरफेर कराई.

खुद भी पास हुआ, भाई-भाभी का भी हुआ चयन

जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी खुद भी कई सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफल हुआ. इसके अलावा उसके भाई अक्षय तिवारी और उसकी भाभी का चयन भी भर्ती परीक्षाओं के जरिए हुआ.अभय तिवारी ने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (रैंक-2), पीजीटी शिक्षक, एसीएफ और एफआरओ जैसी कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं पास की थीं. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन चयन प्रक्रियाओं में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई.

CID और पुलिस कर रही डिजिटल जांच

फिलहाल सीआईडी और रांची पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच का दायरा केवल OMR शीट तक सीमित नहीं है बल्कि परीक्षा के डिजिटल सर्वर, बैकएंड एक्सेस, डेटा लॉग और परीक्षा संचालन से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं.जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित सिंडिकेट से और कौन-कौन लोग जुड़े थे और किन अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिला.

JPSC की 9 परीक्षाएं पहले ही हो चुकी हैं स्थगित

14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवाद बढ़ने के बाद JPSC पहले ही मुख्य परीक्षा समेत नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर चुका है.सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी है. इसी बीच आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था.

JPSC के साथ JSSC को लेकर भी नाराज हैं छात्र

झारखंड में केवल JPSC ही नहीं बल्कि JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी है.JSSC-CGL परीक्षा में पहले पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे थे. वहीं फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में भी दूर-दराज परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड में देरी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं.इन्हीं मुद्दों को लेकर रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं.

छात्रों की क्या हैं मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए. पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए. भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला

JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मॉडल उत्तर कुंजी में कई उत्तर गलत थे.कटऑफ जारी नहीं किया गया और अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों को असफल घोषित कर दिया गया.उन्होंने अदालत से परीक्षा रद्द करने या मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की है.सुनवाई के दौरान JPSC ने अदालत को बताया कि पूरे मामले की जांच चल रही है और मुख्य परीक्षा पहले ही स्थगित की जा चुकी है.हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी है और आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी.



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