Today Weather Live: देश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. लेकिन इस बार बारिश सिर्फ राहत लेकर नहीं आई है. कई राज्यों में यह आफत का रूप भी दिखा रही है. बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है. इसी बीच मौसम विभाग (IMD) ने अगले पांच दिनों के लिए देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है. कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 61 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों तक मौसम तेजी से करवट लेने वाला है. ऐसे में लोगों को सिर्फ छाता लेकर निकलने की नहीं, बल्कि मौसम विभाग की हर चेतावनी पर नजर रखने की जरूरत है. पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, जबकि निचले इलाकों में जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई गई है. IMD का कहना है कि अगले कुछ दिन पूरे देश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं.
तमिलनाडु में भी मानसूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं. (PTI)
बंगाल की खाड़ी का सिस्टम क्यों बढ़ा रहा है चिंता?
- उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है. मौसम विभाग का अनुमान है कि यह सिस्टम अगले तीन दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा. इसके प्रभाव से उत्तर भारत, पूर्वी भारत और मध्य भारत के कई राज्यों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा. कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है.
- मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस सिस्टम के सक्रिय रहने से मानसूनी ट्रफ भी उत्तर की ओर मजबूत बनी रहेगी. यही वजह है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार तक मानसूनी बादल तेजी से पहुंच रहे हैं. दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है. कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है, इसलिए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में है.
दिल्ली-NCR: पांच दिन तक गरजेंगे बादल, तेज हवाओं के साथ होगी बारिश
दिल्ली-एनसीआर में मौसम अब पूरी तरह बदलने जा रहा है. IMD के अनुसार 5 जुलाई से 9 जुलाई तक राजधानी में रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है. इस दौरान आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार इससे भी अधिक हो सकती है. अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. बारिश के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ सकती है.
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक भारी बारिश का खतरा
उत्तर प्रदेश में मानसून अगले पांच दिनों तक जोरदार असर दिखाएगा. प्रयागराज, कौशांबी, चित्रकूट, फतेहपुर, झांसी, महोबा, आगरा, वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी भी दी है. किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. निचले इलाकों में जलभराव और छोटी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई गई है.
बिहार में तेज हवाओं और मेघगर्जन के साथ बदलेगा मौसम
बिहार में भी मौसम तेजी से बदलने वाला है. पश्चिम और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, शिवहर और समस्तीपुर समेत कई जिलों में बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है. इसके साथ ही कई स्थानों पर मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका भी बनी हुई है. प्रशासन ने लोगों से बारिश और बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है.
राजस्थान में पांच दिन तक आंधी और तेज बारिश का दौर
महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. (PTI)
उत्तराखंड में बारिश के साथ लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ा
पूर्वोत्तर में मूसलाधार बारिश का दौर जारी
पूर्वोत्तर भारत में मानसून का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी है. वहीं ओडिशा के कंधमाल, बौध, अंगुल, संबलपुर और सोनपुर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है और अगले तीन दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेगा. इसके प्रभाव से कई नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है.
केरल में नदियां उफान पर, तेज हवाओं का भी अलर्ट
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर केरल में देखने को मिल रहा है. राज्य के कई जिलों में शनिवार को तेज बारिश के साथ 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं. पेरियार नदी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पत्तनमथिट्ठा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, त्रिशूर, पलक्कड, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है. कई बांधों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है.
तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना
तमिलनाडु में भी मानसूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं. चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, कांचीपुरम, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, तंजावुर, नागपट्टिनम और नीलगिरी समेत कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में बनी हुई मौसम प्रणाली और मजबूत हो सकती है. इसके चलते कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं. प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है.
महाराष्ट्र में रेड अलर्ट, मुंबई-पालघर में सबसे ज्यादा खतरा
महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और कोंकण क्षेत्र के कई हिस्सों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है. मुंबई और आसपास के इलाकों में सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है. दादर इलाके में देर रात भारी बारिश के कारण विशाल पेड़ गिर गया. राहत की बात यह रही कि घटना रात करीब दो बजे हुई, इसलिए बड़ा हादसा टल गया. वहीं नालासोपारा रेलवे स्टेशन के बाहर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश और 50 से 61 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है.
बिहार में भी मौसम तेजी से बदलने वाला है.
बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों होता है?
बंगाल की खाड़ी भारत के मानसून का प्रमुख ऊर्जा स्रोत मानी जाती है. यहां बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र बड़ी मात्रा में नमी लेकर उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत की ओर बढ़ता है. यही कारण है कि इसके सक्रिय होते ही कई राज्यों में एक साथ भारी बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिलती है. यदि यह सिस्टम और मजबूत हो जाए तो बाढ़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है.
IMD का रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट क्या संकेत देता है?
रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम बेहद गंभीर हो सकता है और लोगों को अधिकतम सतर्कता बरतनी चाहिए. ऑरेंज अलर्ट संभावित खतरे की चेतावनी देता है, जबकि येलो अलर्ट लोगों को सावधान रहने और मौसम की जानकारी पर नजर बनाए रखने का संकेत होता है. इन अलर्ट के आधार पर प्रशासन भी जरूरी तैयारियां करता है.
आंधी-तूफान के दौरान सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को रहता है?
खुले मैदान में काम करने वाले किसान, बिजली के खंभों या पेड़ों के पास मौजूद लोग, नदी-नालों के किनारे रहने वाले परिवार और पहाड़ी इलाकों में यात्रा कर रहे लोगों को सबसे अधिक खतरा रहता है. तेज हवा और बिजली गिरने की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर रहना जरूरी होता है.
भारी बारिश के दौरान वाहन चलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जलभराव वाले रास्तों से बचना चाहिए. तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. वाहन की हेडलाइट चालू रखें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और मौसम विभाग या स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें. कई हादसे केवल पानी की गहराई का गलत अनुमान लगाने से होते हैं.
क्या मानसून के दौरान बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं?
हां, मानसून के दौरान बादलों में तीव्र विद्युत गतिविधि होने के कारण बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. खुले मैदान, ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे और धातु की वस्तुओं से दूर रहना चाहिए. यदि गरज सुनाई दे तो तुरंत किसी सुरक्षित भवन के अंदर चले जाना सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है.