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- Amidst The Investigation Into Corruption In JPSC, Leader Of Opposition Babulal Marandi Wrote A Letter To The CM, Making Serious Allegations.
रांची22 घंटे पहले
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आयोग के सदस्य ने भी दिया
जमाल अहमद ने पद का दुरुपयोग कर बड़ी संपत्ति बनाई, एसीबी जांच हो : बाबूलाल
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में फैले भ्रष्टाचार पर सरकार की वार के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी सदस्य डॉ. जमाल अहमद पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि जमाल अहमद ने विगत कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर चल और अचल संपत्तियों का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया है। रांची में उनके पास तीन से चार हजार वर्गफीट का आलीशान फ्लैट है। इसके अलावा हजारीबाग में भी उनके द्वारा बड़े पैमाने पर अचल संपत्तियां अर्जित की गई हैं।
उन्होंने कहा है कि जमाल अहमद पूर्व में एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर पद पर हुई। उस नियुक्ति प्रक्रिया में हुई भारी धांधली की जांच सीबीआई कर रही है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति की प्रक्रिया ही जांच एजेंसियों के दायरे में हो, उसे जेपीएससी का सदस्य कैसे बना दिया गया।
ऐसे सदस्य को तत्काल पदमुक्त किया जाए : मरांडी
मरांडी ने कहा है कि जब ऐसे दागी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को जेपीएससी का सदस्य बनाया जाएगा तो राज्य के लाखों मेधावी युवाओं का इस संस्था पर कैसे भरोसा रहेगा?
यह राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। ऐसे में जमाल अहमद द्वारा अर्जित सभी चल-अचल संपत्तियों, उनके बैंक खातों, विभिन्न निवेशों और आय के स्रोतों की अविलंब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से गहन जांच कराई जाए। साथ ही उन्हें तत्काल पदमुक्त किया जाए।
5 दिनों में संपत्ति सार्वजनिक करूंगा, मेरे परिवार ने कोई लाभ नहीं लिया : जमाल विशेष संवाददाता | रांची बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोपों पर जेपीएससी के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, असत्य और राजनीति से प्रेरित बताया है। बाकायदा प्रेस रिलीज जारी कर उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा मूल्य पारदर्शिता है। सार्वजनिक जीवन में यह बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले पांच दिनों के अंदर वे अपनी सभी चल-अचल संपत्ति और आय का पूरा विवरण सार्वजनिक करेंगे, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्याख्याता नियुक्ति से जुड़े कथित घोटाले में न तो वह किसी मामले में अभियुक्त हैं और न ही किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है। जिन लोगों के खिलाफ जांच एजेंसियों को साक्ष्य मिले हैं, उनके नाम सार्वजनिक हैं। ऐसे में बिना किसी तथ्य या कानूनी आधार के उनका नाम इस प्रकरण से जोड़ना केवल भ्रम फैलाने का प्रयास है।
बिना किसी तथ्य के भ्रम फैलाने का प्रयास : अहमद जमाल अहमद ने कहा कि उनकी पत्नी वर्ष 1995-96 में इतिहास विषय में विश्वविद्यालय टॉपर रही थीं। वर्ष 2008 में जेपीएससी के लिए आवेदन करने पर उन्हें 2022 में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने इंटरव्यू में भाग नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि उनके दोनों पुत्रों ने आज तक जेपीएससी की किसी परीक्षा के लिए आवेदन तक नहीं किया और न ही उनके परिवार ने कभी उनके पद का कोई अनुचित लाभ लिया।
