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रसीला, मीठा और खुशबूदार होता है ‘चौसा’ आम, जानिए कैसे पड़ा इसका...

Last Updated:April 29, 2026, 07:59 IST आम का सीजन शुरू हो गया है. ऐसे में मार्केट में अब अलग-अलग वैरायटी के आम देखने को मिल जाएंगे. तो वही अलग-अलग नाम के आम भी मार्केट में देखने को मिल जाएंगे. उन्ही में से एक चौसा आम है. जो देखने और खाने दोनों में बहुत लाजवाब होता है. इसकी सुगंध बहुत अच्छी होती है. इस आम में भरपूर मात्रा में गुदा पाया जाता है आम का सीजन शुरू हो गया है. ऐसे में बाजार में अब अलग-अलग वैरायटी के आम देखने को मिल रहे हैं. वहीं, अलग-अलग नामों के आम भी उपलब्ध हैं. उन्हीं में से एक है चौसा आम, जो देखने और खाने दोनों में बहुत लाजवाब होता है. इसकी सुगंध बेहद अच्छी होती है और इसमें भरपूर मात्रा में गूदा पाया जाता है. आम के शौकीनों की यह पहली पसंद माना जाता है. बहुत खास होता है यह आम मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता ने बताया कि चौसा आम का नाम बिहार के चौसा नामक स्थान से जुड़ा हुआ है. यह आम बिहार में अधिक पाया जाता है. चौसा नाम के स्थान पर ही इसे पहली बार उगाया गया था, इसलिए इसका नाम चौसा आम पड़ा. इसका स्वाद बहुत मीठा होता है और इसकी फसल अन्य आमों के मुकाबले देर से आती है. इसी कारण बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है. किसान यदि इसकी खेती करते हैं, तो उन्हें अच्छी पैदावार मिलती है और देर से आने के कारण यह आम महंगे दामों पर बिकता है. चौसा नाम की उत्पत्तिमुख्य रूप से बिहार के चौसा नामक स्थान के कारण ही इसे चौसा आम कहा जाता है. शुरुआत में यह आम केवल बिहार में पाया जाता था, लेकिन अब इसकी खेती उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में होने लगी है. उत्तर प्रदेश में भी इसकी अच्छी-खासी पैदावार होती है. यह आम की ऐसी किस्म है, जिसकी फसल देर से तैयार होती है. जब दशहरी और लंगड़ा आम का सीजन समाप्त हो जाता है, तब चौसा आम बाजार में आता है. इस दौरान इसकी मांग अधिक होने के कारण किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं और अच्छा मुनाफा होता है. इसलिए जो किसान आम की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए चौसा आम एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, यह आम स्वाद में भी बेहद लाजवाब होता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Moradabad,Moradabad,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 07:59 IST Source link

झारखंड

किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे… मिक्सड फार्मिंग में कर रहे हैं...

होमताजा खबरकृषि किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे…1 खेत में उगा रहे ये 5 सब्जियां, कमाई है बंपर Last Updated:April 29, 2026, 07:34 IST Ranchi Kisan Xavier Lakra Story: रांची के दमी गांव के किसान जेवियर लकड़ा खेती में कमाल कर रहे हैं. वह एक एकड़ में 5 तरह की सब्जियों और फलों की खेती करते हैं. जहां इस समय उनके खेत में 150 से ज्यादा आम के पेड़ हैं. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजाधानी रांची के दमी गांव के रहने वाले जेवियर लकड़ा अपने घर के पास ही अपने एक एकड़ फॉर्म में हर तरह की खेती करते हैं. खासतौर पर वह आम की खेती के लिए मशहूर हैं. आज उनके पास 150 से अधिक आम के पेड़ हैं. इसके अलावा लीची, धनिया पत्ता, मिर्ची, भिंडी जैसी सारी चीजों की खेती करते हैं, जिससे आज उन्हें लाखों का मुनाफा हो रहा है और उन्होंने अपने सीक्रेट खाद के बारे में भी लोकल 18 की टीम से जानकारी साझा की. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. भेड़ के खाद का करते हैं इस्तेमाल जेवियर लकड़ा ने लोकल 18 से बताया कि वह खेती के साथ-साथ 4 बैल और भेड़ भी पाले हुए हैं. ऐसे में बैल और भेड़ का जो वेस्ट होता है, वह उसको केंचुआ खाद में मिलाते हैं और उसको खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काफी अच्छी रहती है और साथ में थोड़ा चूना भी मिला देते हैं, जिससे मिट्टी का पीएच लेवल एकदम बैलेंस रहता है. फार्म के बीच में ही बनाया है घर जेवियर बताते हैं कि उनके घर के चारों तरफ बगान है और बीच में यह उनका घर है. फिलहाल इस समय उनके बगान में कच्चे आम के फल पेड़ में ज्यादा लदे हुए हैं, जिसको हम लोग पका कर बाजार में बेचने का काम करते हैं, तो कुछ प्राकृतिक तौर पर भी पकते हैं. ऐसे में उन्हें कच्चे आम के भी दाम मिल जाते है और पका हुआ का फिलहाल मार्केट में ₹120 किलो तक मिल जाता है. हर दिन उन्हें 15 केजी तक पका आम मिल जाता है. लीची से लेकर मिर्ची तक है तैयार इसके अलावा उनके पास लीची के भी कई सारे पेड़ देखने को मिलेंगे, लेकिन लीची फिलहाल कच्चा है. जहां आने वाले 15 दिनों में वह भी पक जाएंगे और तो और पेड़ के छांव वाली जगह पर मिर्च की खेती होती है. उसमें वह कई तरह के साग और धनिया पत्ता जैसे चीजों की खेती करते हैं. क्योंकि इससे सूर्य की रोशनी सीधे नहीं पड़ती और जगह का भी उपयोग बढ़िया से हो जाता है. उन्होंने आगे बताया इस बगान को तैयार करने में उन्हें 8 से 9 साल का समय लगा है. यह सारे पेड़ इतने ही साल पुराने हैं. अभी और नए पेड़ करीबन 70 पौधे आम के और लगाया हुए हैं, जो आने वाले 4 साल में फल देने लगेंगे. इसी तरह हर साल 60 से 70 पेड़ लगा देते हैं. इससे क्या है गर्मी के मौसम का वक्त होता है. इसमें अच्छी खासी डेढ़ लाख तक की कमाई हो जाती है और यह मुनाफा रुकता नहीं है. साल भर खेती से होता रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 07:34 IST Source link

व्यापार

नौकरी छोड़ना चाहते हैं? बाजार के ये 5 बिजनेस बदल सकते हैं...

Last Updated:January 19, 2026, 13:20 IST बहुत से लोगों का सपना होता है कि वे नौकरी करने के बजाय अपना खुद का व्यापार शुरू करें, लेकिन पूंजी की कमी के कारण यह सपना अधूरा रह जाता है. ऐसे में अगर सही आइडिया और सही जगह मिल जाए, तो कम निवेश में भी अच्छा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. आज हम आपको ऐसे पांच बिजनेस आइडिया के बारे में बताने जा रहे हैं, जो छोटी और कम ट्रैफिक वाली मार्केट के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं और कम लागत में बेहतर कमाई का मौका देते हैं. अगर आप घर पर रहकर और छोटे बाजार में कम लागत में काम शुरू कर कमाई करना चाहते हैं, तो टिफिन सर्विस एक आसान और कारगर तरीका है. इसे घर की महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं. आप अपने घर पर दाल, चावल, रोटी और सब्जी जैसा सादा खाना बनाकर बाजार में काम करने वाले लोगों को टिफिन सर्विस उपलब्ध करा सकती हैं. एक टिफिन में खाना बनाने की लागत लगभग ₹30 आती है, जबकि वही टिफिन ₹50 से ₹60 में बेची जा सकती है. यह महिलाओं के लिए एक बढ़िया विकल्प है. वैसे तो यह एक ऐसा व्यापार है, जिसकी डिमांड साल भर रहती है, क्योंकि लोग पूजा-पाठ पूरे साल करते हैं. लेकिन त्योहारों में इसकी मांग और भी ज्यादा बढ़ जाती है. आप अपने घर पर अगरबत्ती, दिया और पूजन सामग्री बनाकर उसे छोटे-छोटे बाजारों में ले जाकर बेच सकते हैं. इसकी शुरुआत मात्र 10 हजार रुपए से की जा सकती है. आजकल मेकअप और सौंदर्य प्रसाधन लोगों, खासकर महिलाओं का आवश्यक हिस्सा बन चुका है. ऐसे में यदि महिलाएं और लड़कियां चाहें, तो कम पूंजी में ब्यूटी पार्लर खोलकर एक व्यापारिक आधार बना सकती हैं. इससे वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं और कई अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे सकती हैं. ब्यूटी पार्लर का बिजनेस 50,000 से लेकर ₹1,00,000 की पूंजी में शुरू किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल कोई भी सरकारी योजना हो या कहीं भी कोई काम, ज्यादातर ऑनलाइन और डिजिटल तरीके से किया जा रहा है. ऐसे में आप अपने गांव या छोटे-छोटे बाजार में ऑनलाइन फॉर्म भरकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने मोबाइल का भी उपयोग कर सकते हैं या फिर जन सुविधा केंद्र खोलकर भी यह काम किया जा सकता है. इसमें आप मोबाइल के जरिए ही लोगों के फॉर्म भरकर उन्हें सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं. अगर आप अपने गांव या शहरी इलाके में किसी छोटे बाजार के आसपास रहते हैं, या आपके पास छोटा बाजार उपलब्ध है, तो आप हेयर कटिंग का काम करके अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ दिन किसी अनुभवी हेयर कटर के पास जाकर प्रशिक्षण लेना होगा. इसके बाद आप दिन में लगभग ₹1000 तक की कमाई कर सकते हैं. यह एक ऐसा व्यापार है जो कभी बंद नहीं होता और लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का काम करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:20 IST Source link

ताज़ा खबर

5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, बिहार-असम सहित 21 राज्यों...

होमताजा खबरदेश 5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, 21 राज्यों में हीटवेव से मचेगा हाहाकार Last Updated:April 29, 2026, 02:09 IST एनएचसी ने हीटवेव के भारी खतरे पर अपना कड़ा अलर्ट जारी किया है. लू की बढ़ती इंटेंसिटी से गरीब और बेघर लोग बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. आउटडोर वर्कर के पास गर्मी से बचने के लिए कोई अच्छा शेल्टर नहीं होता है. बुजुर्ग और छोटे बच्चे इस खतरनाक गर्मी के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. ख़बरें फटाफट एनएचसी ने लू को लेकर 21 राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखा है. नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने दिल्ली सहित 21 राज्य सरकारों को लू के बढ़ते खतरे से संवेदनशील आबादी की रक्षा के लिए सक्रिय उपाय करने और राहत प्रयासों को लागू करने का निर्देश दिया है. आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों को निर्देश जारी किया गया है. संबंधित राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्रों में एनएचसी ने भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया. एनएचसी ने कहा कि लू की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता से हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विशेष रूप से बाहरी कामगार और बेघर लोग असमान रूप से प्रभावित होते हैं, जिनके पास अक्सर पर्याप्त आश्रय और संसाधन नहीं होते हैं. बुजुर्ग, बच्चे, शिशु और नवजात शिशु अत्यधिक तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य परिणामों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं. एनएचसी ने यह भी कहा कि लू के कारण आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग से संबंधित घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एनएचसी ने कहा कि 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में लू या लू लगने से 3,712 मौतें दर्ज की गईं. इसी कारण सरकारों से आग्रह है कि वे अपनी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करें. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय ने संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के माध्यम से जिला अधिकारियों से समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय को मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान (स्वयं) लेने का अधिकार है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 02:06 IST Source link

झारखंड

झुलसाती गर्मी में चाहिए सुकून के पल तो घूम आएं रानी तालाब,...

Last Updated:April 28, 2026, 08:35 IST Jamshedpur Famous Pond: जमशेदपुर के पास तिरुलडीह गांव में ऐतिहासिक रानी तालाब है, जिसकी एक नहीं कई विशेषताएं हैं. यह सालभर भरा रहता है, मछली और बत्तख पालन से लोगों को आजीविका का मौका देता है, खूबसूरत इतना है कि लोग यहां सुकून के पल बिताने आते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड का मूलभूत नारा ‘जल, जंगल, जमीन’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि इस राज्य की पहचान है. चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल, पहाड़ और जल स्रोत इसे प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में जब शहरों की गर्मी लोगों को परेशान करती है, तब ऐसे शांत और ठंडे स्थानों की तलाश बढ़ जाती है जहां कुछ समय सुकून से बिताया जा सके. ऐसे में जमशेदपुर के पास स्थित तिरुलडीह गांव का रानी तालाब एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आता है. इस वजह से पड़ा नामजमशेदपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर बड़ा तालसा पंचायत में स्थित यह रानी तालाब प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत उदाहरण है. इस तालाब का नाम ‘रानी तालाब’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसका निर्माण घाटशिला की रानी के समय में कराया गया था. वर्षों पुराना यह तालाब आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक आकर्षण को संजोए हुए है. आजीविका का भी साधनइस तालाब की सबसे खास बात यह है कि जहां आसपास के अधिकांश तालाब गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं, वहीं रानी तालाब सालभर पानी से भरा रहता है. यही कारण है कि यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गांव के लोग इस तालाब का उपयोग बत्तख पालन और मछली पालन के लिए भी करते हैं, जिससे उनकी आजीविका भी जुड़ी हुई है. गांव के निवासी कानू मुर्मू बताते हैं कि रानी तालाब का पानी बहुत ही पवित्र माना जाता है. यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य, शादी या त्योहार की शुरुआत इसी तालाब के पानी से करते हैं. इस आस्था और परंपरा ने इस स्थान को और भी खास बना दिया है. पर्यटन के लिए बेहद खासपर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो रानी तालाब का दृश्य खासकर शाम के समय बेहद मनमोहक हो जाता है. सूरज के ढलते ही आसमान के रंग और तालाब का पानी मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं, जो किसी विदेशी लोकेशन से कम नहीं लगता. चारों ओर फैले पहाड़, हरी-भरी घास और शांत वातावरण लोगों को प्रकृति के करीब ले जाता है. यहां बैठकर लोग सुकून के पल बिताते हैं और खूबसूरत सनसेट का आनंद लेते हैं. नेचर की असली खूबसूरतीअगर आप भी इस गर्मी में किसी शांत, ठंडी और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो तिरुलडीह का रानी तालाब आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह जगह न सिर्फ आपकी थकान दूर करेगी, बल्कि आपको प्रकृति की असली खूबसूरती का एहसास भी कराएगी. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 08:35 IST Source link

व्यापार

सरसों के डंठल को फेंकना छोड़िए, जानिए इससे कैसे होगी अच्छी कमाई,...

Last Updated:January 19, 2026, 16:30 IST अगर आप गांव में रहते हैं और कुछ चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धान की भूसी से तेल निकालने जैसी कहावत की. इस समय सरसों की बुवाई हो चुकी है और कुछ ही दिनों में सरसों तैयार हो जाएगी. ऐसे में कई किसान सरसों तो रख लेते हैं, लेकिन उसका डंठल या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, जबकि यही डंठल उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है. सुल्तानपुर समेत अवध क्षेत्र में सरसों के डंठल को पिंजी कहा जाता है. यह सरसों के पौधे का सूखा हुआ भाग होता है, जो सरसों अलग करने के बाद बचता है. ऐसे में इसे ज्यादातर किसान कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही उनकी कमाई का जरिया बन सकता है और अच्छा मुनाफा दिला सकता है. पिंजी को ही सरसों का डंडा भी कहा जाता है, जो कई तरीकों से कमाई में फायदा देता है. किसान अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अगर सरसों के डंठल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इससे झाड़ू बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. हालांकि यह झाड़ू अस्थायी होती है, लेकिन बड़े क्षेत्रफल की सफाई के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है. इसे बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति झाड़ू के हिसाब से बेचा जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भूसा, उपले रखने और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए टटिया का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सरसों के डंठल और अरहर के डंठल के मिश्रण से टटिया बनाकर इसे बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति टटिया हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सरसों के डंठल को ईंट भट्ठों पर सप्लाई कर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल, सरसों का डंठल ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम आता है, क्योंकि कोयले को लपक देने के लिए यह ज्यादा कारगर होता है. बशर्ते इसकी मड़ाई की गई हो और इसे टुकड़ों में काटा गया हो. मड़ाई के बाद इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति कुंतल तक हो सकती है. अगर आप भी सरसों के डंठल का सही इस्तेमाल नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं कि इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है. जैविक खाद बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बड़ा और कम गहराई वाला गड्ढा खोदना होगा. उसके बाद उस गड्ढे में सरसों के डंठल को डालें और इसे लगभग 3 इंच मिट्टी से ढक दें. इसके बाद हल्का पानी डाल दें. 2 से 3 महीने बाद जब आप गड्ढा खोदेंगे, तो सरसों का डंठल सड़कर जैविक खाद के रूप में तैयार हो चुका होगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:41 IST Source link

ताज़ा खबर

Vrishchik Rashifal: आज झूठ बोलना पड़ेगा भारी! वृश्चिक राशि के लिए आज...

Last Updated:April 29, 2026, 00:03 IST Aaj ka Vrishchik Rashifal 29 April 2026: वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन नैतिक परीक्षा का है. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार आज का मूल मंत्र स्पष्ट संवाद है. जानें क्यों आज एक छोटा सा झूठ आपके करियर और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. ख़बरें फटाफट सीतामढ़ी: आज 29 अप्रैल 2026 का दिन वृश्चिक राशि के जातकों के लिए एक नैतिक और आध्यात्मिक अग्निपरीक्षा के समान है. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार आज के ग्रहों की स्थिति स्पष्ट संकेत दे रही है कि सच्चाई ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है. सुबह के समय आपके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. जहां आपको लगेगा कि एक छोटा सा झूठ बोलने से काम आसान हो जाएगा या आप किसी अप्रिय स्थिति से बच जाएंगे. लेकिन सावधानी बरतें, क्योंकि आज बोला गया एक छोटा सा झूठ भी भविष्य में आपके लिए बड़े आर्थिक या सामाजिक नुकसान का कारण बन सकता है. आज का मूल मंत्र सीधा और स्पष्ट संवादकार्यक्षेत्र और करियर के लिहाज से आज का दिन पूरी तरह से पारदर्शिता की मांग करता है. यदि आप नौकरी पेशा हैं या व्यवसाय में हैं तो आज किसी भी कार्य को गोपनीय रखने या शॉर्टकट अपनाने से बचें. सितारों की चाल बताती है कि आज छुपाकर किया गया कोई भी काम या अधूरी जानकारी बाद में अधिकारियों या भागीदारों के सामने आ सकती है. जिससे आपकी साख पर आंच आ सकती है. आज अपने काम में ईमानदारी बरतें और जो भी स्थिति हो उसे वरिष्ठों के सामने स्पष्ट रखें. यही स्पष्टता आपके भविष्य के मार्ग प्रशस्त करेगी. आर्थिक मामलों और निवेश आज का दिन बेहद सतर्क रहने का है. ज्योतिषाचार्य की सलाह है कि आज अपने लेन-देन और हिसाब-किताब को बिल्कुल साफ रखें. धन के मामले में थोड़ी सी भी लापरवाही या दस्तावेजों को नजरअंदाज करना आपको भारी वित्तीय चपत लगा सकता है. निजी रिश्तों की बात करें तो आज पार्टनर के साथ पूर्ण ईमानदारी बरतने से आपके संबंधों में नई ऊर्जा और मजबूती आएगी. आज अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय खुलकर व्यक्त करें. इससे न केवल आपसी विश्वास बढ़ेगा बल्कि पुरानी गलत फहमियां भी जड़ से समाप्त होंगी. जानिए लकी नंबर और कलरआज के दिन को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाने के लिए वृश्चिक राशि वालों का लकी नंबर 9 और लकी कलर गहरा लाल है. मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए एक विशेष उपाय सुझाया गया है. आज एक दीपक जलाएं और लगभग 30 सेकंड तक उसकी लौ को एकटक देखें. यह ‘त्राटक’ जैसी सूक्ष्म क्रिया आपके विचलित मन को स्थिर करेगी. आपको सही निर्णय लेने की आंतरिक शक्ति प्रदान करेगी. अंततः आज का दिन वही लोग जीतेंगे जो हर परिस्थिति में सच का साथ देने का साहस दिखाएंगे. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar First Published : April 29, 2026, 00:03 IST Source link

झारखंड

तिलापिया मछली के लिए बौराए रहते हैं कोडरमा वाले, कई किमी से...

Last Updated:April 28, 2026, 09:22 IST Koderma Tilapiya Fish On High Demand: कोडरमा के तिलैया डैम पर खास तिलापिया मछली मिलती है. स्वाद के शौकीन इसे इतना पसंद करते हैं कि कई किमी दूर से खरीदने आते हैं और घंटो इंतजार करते हैं. इसकी कीमत 160 रुपये किलो होती है. जानते हैं इसमें ऐसा क्या खास है. ख़बरें फटाफट कोडरमा. कोडरमा का तिलैया डैम प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ताजा मछलियों के लिए भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है. यहां मिलने वाली विभिन्न प्रजातियों की मछलियां दूर-दराज से आने वाले लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इन सबमें तिलापिया मछली की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है. इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इसे खरीदने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और फिर भी मछली मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती. घंटों इंतजार करते हैं लोग, बड़े कांटे से खाने में काफी सहूलियततिलैया डैम में कोडरमा जिले के अलावा हजारीबाग, रांची समेत कई अन्य इलाकों से लोग ताजा मछली खरीदने पहुंचते हैं. मछुआरे जैसे ही डैम से मछलियां निकालकर किनारे स्टॉल पर लाते हैं. पहले से इंतजार कर रहे खरीदारों की भीड़ टूट पड़ती है और कुछ ही पलों में सारी तिलापिया मछलियां बिक जाती हैं. करीब 20 किलोमीटर दूर झुमरी तिलैया शहर से मछली खरीदने पहुंचे मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि तिलापिया मछली की सबसे बड़ी खासियत इसके बड़े कांटे हैं. उन्होंने कहा कि ‘दूसरी मछलियों में छोटे-छोटे कांटे होने के कारण अक्सर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खाने में परेशानी होती है. कई बार कांटे गले या दांतों के बीच में फंसने से दिक्कत भी हो जाती है. लेकिन तिलापिया में बड़े कांटे होने से इसे खाने में काफी सहूलियत होती है.’ स्वाद के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूरवे आगे कहते हैं कि ‘इस मछली की मांग लगातार बढ़ रही है. बच्चे भी इसे आसानी से खा लेते हैं. स्वाद के मामले में भी तिलापिया किसी से कम नहीं है. इसे अन्य मछलियों की तरह ही पकाया जाता है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है.’ मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि इस मछली को खरीदने के लिए उन्हें करीब चार घंटे इंतजार करना पड़ा. यह मछली स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. यही कारण है कि लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी पसंद कर रहे हैं. तिलैया डैम के समीप ताजा तिलापिया मछली फिलहाल 160 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:22 IST Source link

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गांव की मिट्टी में छुपा है पैसा, 1 लाख में शुरू करें...

Last Updated:January 22, 2026, 11:37 IST आज के समय में गांव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यहां से भी अच्छी कमाई के नए रास्ते निकल रहे हैं. कम पूंजी में शुरू होने वाले छोटे-छोटे बिजनेस गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. दूध, खेती, पैकिंग और घरेलू प्रोडक्ट जैसे काम अब घर बैठे शुरू किए जा सकते हैं. सही प्लानिंग और मेहनत से यही छोटे काम आगे चलकर मजबूत कमाई का जरिया बन जाते हैं. गांव में डेयरी शुरू करना सबसे आसान और भरोसेमंद काम है. इसकी शुरुआत आप 2 से 4 गाय या भैंस से कर सकते हैं. सुबह-शाम दूध बेचकर रोज की कमाई होती है. दूध के साथ दही, घी और पनीर भी बनाया जा सकता है. यह बिजनेस सालभर चलता है. आसपास के कस्बों में सप्लाई करने से मुनाफा और बढ़ जाता है. बकरी पालन कम खर्च में शुरू होने वाला बिजनेस है. 10 से 15 बकरियों से शुरुआत की जा सकती है. बकरी का दूध, बच्चे और मीट तीनों बिकते हैं. इसे किसी भी मौसम में शुरू किया जा सकता है. चारे की व्यवस्था गांव में आसानी से हो जाती है. मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इस काम में कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है. इस टाइम मुर्गी पालन गांव में तेजी से चलने वाला बिजनेस है. इसमें 200 से 500 मुर्गियों से शुरुआत की जा सकती है. इसके अंडे और मीट दोनों की अच्छी डिमांड रहती है और 30 से 40 दिन में ही कमाई शुरू हो जाती है. सही देखभाल और साफ-सफाई से नुकसान कम होता है. शहरों में सप्लाई करने से मुनाफा दोगुना हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google गांव में आटा चक्की की जरूरत हमेशा रहती है. इसके लिए 40 से 60 हजार रुपये में मशीन आ जाती है और आप चाहें तो गेहूं पिसाई के साथ मसाले पीसने का काम भी जोड़ सकते हैं. रोजाना 500 से 1500 रुपये तक की कमाई हो सकती है. यह काम पूरे साल चलता है और इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती. गांव में अचार, जैम और जूस बनाने का काम घर से ही आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसमें लोकल फल और सब्जियों का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत कम रहती है. शुरुआत में थोड़ी मात्रा बनाकर आसपास के लोगों और बाजार में बेच सकते हैं. अगर स्वाद अच्छा रहा तो लोग खुद दोबारा खरीदने लगते हैं. त्योहारों और मेलों के समय इसकी बिक्री ज्यादा होती है. धीरे-धीरे पैकिंग सुधारकर शहरों तक भी सप्लाई की जा सकती है. गांव में बीज, खाद और कीटनाशक की दुकान हमेशा चलती है. किसान सीधे जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं. थोड़ी जानकारी और सही कंपनी से माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. खेती के मौसम में बिक्री ज्यादा होती है. भरोसा बनने के बाद ग्राहक खुद आते हैं और कमाई लगातार होती रहती है. अगर गांव में फल और सब्जी की पैदावार होती है तो उनकी पैकिंग का काम बढ़िया कमाई का जरिया बन सकता है. टमाटर, आलू, नींबू या हरी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छांटकर और साफ पैक करके बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी शुरुआत बहुत कम खर्च में हो जाती है. जब माल साफ और सही पैक होता है तो ग्राहक भरोसा करते हैं. यही भरोसा शहरों में भी अच्छा दाम दिलाता है. गांव में तुलसी, नीम और आंवला जैसे पौधों की खेती करना मुनाफे वाला काम है. इन पौधों को ज्यादा पानी या खास देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए खर्च भी कम आता है. एक बार खेत तैयार हो जाए तो सालों तक इनसे फायदा मिलता रहता है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियां इन्हें अच्छे दाम पर खरीदती हैं. यही वजह है कि यह खेती आज के साथ-साथ आने वाले समय के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 22, 2026, 11:37 IST Source link

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30 रुपये की साड़ी, लाखों का बिजनेस! कमाल है छत्तीसगढ़ के विनय...

Last Updated:February 04, 2026, 12:02 IST Saree Business Idia : रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट में शादी सीजन के चलते साड़ियों की जबरदस्त मांग बढ़ गई है. यहां 30-35 रुपये से शुरू होने वाली साड़ियां अच्छी क्वालिटी में उपलब्ध हैं. होलसेल बाजार होने के कारण छोटे व्यापारी यहां से सस्ती साड़ियां खरीदकर अपने क्षेत्रों में बेचकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. बाजार सुबह 9:30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है. Saree Business Idia : छत्तीसगढ़ में शादी का सीजन एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और इसके साथ ही बाजारों में रौनक लौट आई है. रायपुर के पंडरी इलाके में स्थित ऐतिहासिक कपड़ा मार्केट इन दिनों ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है. यहां साड़ियां मात्र 30 से 35 रुपये की शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं और इतनी सस्ती दर पर नहीं मिलतीं. कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियांपंडरी कपड़ा मार्केट के साड़ी व्यापारी विनय जैन ने बताया कि कम कीमत का मतलब यह नहीं है कि क्वालिटी से समझौता किया गया है. यहां कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियां मिल जाती हैं. जैसे-जैसे ग्राहक अधिक कीमत वाली साड़ियों की ओर बढ़ते हैं, उन्हें और बेहतर डिजाइन व कपड़े की क्वालिटी मिलती है. यही वजह है कि इस बाजार में हर महीने साड़ियों की लगातार मांग बनी रहती है. विनय जैन के अनुसार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में साड़ी का विशेष महत्व है. यहां की महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनना पसंद करती हैं, विशेषकर विवाह, पूजा-पाठ और सामाजिक आयोजनों में. शादी के सीजन की शुरुआत होते ही बाजार में ग्राहकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो जाती है. पसंद के अनुसार चयन करने में आसानीउन्होंने बताया कि यहां उपलब्ध साड़ियां 8 से 10 रंगों में आती हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार चयन करने में आसानी होती है. पंडरी मार्केट की खासियत यह है कि यहां अधिकतर दुकानें थोक विक्रेता (होलसेल) हैं. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारी यहां से कम कीमत में साड़ियां खरीदकर अपने इलाकों में खुदरा बिक्री करते हैं. जो लोग साड़ियों का व्यापार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए पंडरी कपड़ा मार्केट सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है. कम पूंजी में व्यापार शुरू करने की सुविधा यहां मौजूद है. दुकानें सुबह साढ़े 9 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती हैं, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को पर्याप्त समय मिलता है. विनय जैन ने बताया कि इच्छुक व्यापारी उनसे मोबाइल नंबर 9981299492 पर संपर्क कर सकते हैं. शादी सीजन के चलते इन दिनों बाजार में भारी भीड़ देखी जा रही है और साड़ियों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. पंडरी कपड़ा मार्केट न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में साड़ी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : February 04, 2026, 12:02 IST Source link

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