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झारखंड

राज्यसभा में फिर चमके परिमल नाथवानी, चौथी बार पहुंचे संसद; जानिए कौन...

Last Updated:June 18, 2026, 20:30 IST झारखंड की राजनीति में परिमल नाथवानी की पहचान ऐसे नेता के रूप में बन गई है, जो किसी बड़े राजनीतिक दल के सदस्य नहीं होने के बावजूद चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. उन्हें अलग-अलग दलों के नेताओं और विधायकों का समर्थन मिलता रहा है. यही वजह है कि उनकी जीत को सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है. ख़बरें फटाफट परिमल नाथवानी रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उद्योगपति और नेता परिमल नाथवानी की रही. वो निर्दलीय उम्मीदवार थे. लेकिन उन्हें बीजेपी का सपोर्ट था. नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर चौथी बार राज्यसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है. उनकी जीत ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में जीत के लिए 28 वोट जरूरी थे. परिमल नाथवानी को 28 वैध वोट मिले. जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को सिर्फ 20 वोट मिल सके. चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी चर्चा का विषय रही. बताया जा रहा है कि राजद और भाकपा (माले) के कुछ विधायकों ने भी नाथवानी के पक्ष में मतदान किया. कौन हैं परिमल नाथवानी?परिमल नाथवानी मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं. वे देश के जाने-माने उद्योगपति और कॉरपोरेट जगत की बड़ी हस्ती माने जाते हैं. कारोबार के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी मजबूत पहचान बनाई है. झारखंड और आंध्र प्रदेश में विकास कामो को लेकर उनका नाम अक्सर चर्चा में रहा है. कब-कब जीते राज्यसभा चुनाव? पहला कार्यकाल (2008-2014): नाथवानी का झारखंड से जुड़ाव नया नहीं है. उन्होंने पहली बार साल 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीता था. उस समय भी उन्हें अलग-अलग दलों के विधायकों का समर्थन मिला था. क्रॉस वोटिंग के जरिए उन्हें 21 वोट मिले. उन्होंने यूपीए समर्थित उम्मीदवार को हराया था. दूसरा कार्यकाल (2014-2020): साल 2014 में नाथवानी ने एक बार फिर झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे. इस चुनाव में भी उन्हें अलग-अलग दलों के विधायकों का समर्थन मिला. तीसरा कार्यकाल (2020-2026): जून 2020 में परिमल नाथवानी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए. वह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे. इस तरह उन्होंने पहली बार झारखंड के बाहर किसी दूसरे राज्य का प्रतिनिधित्व किया. चौथा कार्यकाल 2026: अब उन्होंने फिर झारखंड से वापसी की है और चौथी बार राज्यसभा सदस्य बने हैं. इस तरह परिमल नाथवानी अब तक चार बार राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं. इनमें से तीन बार झारखंड और एक बार आंध्र प्रदेश से चुने गए हैं. झारखंड से यह उनकी तीसरी जीत है. क्या है नाथवानी की ताकत?राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नाथवानी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सभी दलों के नेताओं से अच्छी रिश्तेदारी है. वर्षों से उन्होंने झारखंड में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा है. यही कारण है कि उन्हें कई बार पार्टी लाइन से हटकर भी समर्थन मिलता रहा है. काम की चर्चाराज्यसभा में अपने पिछले कार्यकालों के दौरान नाथवानी ने विकास, सड़क, बिजली, आदिवासी कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे उठाए. उन्होंने सांसद निधि से कई विकास कार्य भी कराए. गांवों में सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य परियोजनाओं पर भी काम कराया गया. कैसा सेट किया समीकरण?इस चुनाव से पहले उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात भी चर्चा में रही थी. बाद में उन्हें एनडीए का समर्थन मिला और वे चुनाव जीतने में सफल रहे. अपनी जीत के बाद परिमल नाथवानी ने कहा कि यह उनका चौथा राज्यसभा कार्यकाल है और झारखंड से तीसरी जीत है. उन्होंने कहा कि उनकी संसदीय यात्रा की शुरुआत इसी राज्य से हुई थी और यहां के लोगों से उनका विशेष लगाव है. About the Author Manish Kumar मनीष कुमार इस समय न्यूज18 हिंदी में बिहार, झारखंड और दिल्ली की टीम को लीड कर रहे हैं. इन राज्यों की बड़ी खबरों से लेकर खास फीचर स्टोरी तक, उनकी नजर हर अहम मुद्दे पर रहती है. उनका मुख्य उद्देश्य है कि हर जरूरी ख…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

एआई, वैश्विक अवसरों और नेतृत्व कौशल पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

आईआईएम रांची के इंडक्शन कार्यक्रम 2026 के तीसरे दिन बुधवार को एमबीए, एमबीए-एचआरएम, एमबीए-बीए और पीएचडी के नए विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिजनेस एनालिटिक्स, नेतृत्व विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की सीनियर एसोसिएट डीन प्रो. सुदीप्ता दासमहापात्रा ने कहा कि एआई आधारित बदलती दुनिया में सफल प्रबंधक बनने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ संवाद, सहयोग, वार्ता कौशल और नैतिक नेतृत्व भी जरूरी है। उन्होंने छात्रों को निरंतर सीखने, डेटा आधारित निर्णय लेने और जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने की सलाह दी। इसके बाद बाल्मर लॉरी एंड कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अधिप नाथ पालचौधरी ने अपने पेशेवर अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए अनुकूलन क्षमता, निरंतर सीखने की इच्छा और चुनौतियों का सकारात्मक तरीके से सामना करना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाने और नए अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। सत्र के दौरान आईआईएम रांची की अंतरराष्ट्रीय संबंध अध्यक्ष प्रो. नीलू ने स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय साझेदार संस्थानों की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को वैश्विक अनुभव हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से करियर, नेतृत्व और वैश्विक अवसरों से जुड़े कई सवाल भी पूछे। Source link

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दीदी नीलम आनंद की 21वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, 5 लाख पौधे...

सिटी रिपोर्टर | रांची शिव शिष्यता के प्रणेता साहब हरीन्द्रानंद की धर्मपत्नी दीदी राजमणि नीलम आनंद की 21वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को ‘साहब के उपवन’ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों शिव शिष्यों ने दीदी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। दीदी के बड़े पुत्र अर्चित आनंद ने बताया कि दीदी के प्रकृति प्रेम को देखते हुए 17 जून से 27 जुलाई तक वृहद पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत पांच लाख पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि दीदी का जीवन त्याग, सेवा और ममता का प्रतीक था। उन्होंने शिव शिष्यता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। मौके पर शिष्यों ने शिव शिष्यता के तीन सूत्रों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में शिव शिष्य हरीन्द्रानंद फाउंडेशन की अध्यक्ष बरखा दीदी, अभिनव, निहारिका, गौरी, रत्नम, हिना, मुन्ना, गोपाल, भूषण, आदित्य, अमन, गौतम, सरिता सहित पांच हजार से अधिक लोग उपस्थित थे। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण व निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। Source link

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Success Story | Indian Army

Last Updated:June 18, 2026, 19:38 IST Success Story Of Manav in Indian Army : जयपुर के जोबनेर के मानव कुमावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने, एनडीए और आईएमए से ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग जैसलमेर में मिली है. इनके इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. मानव की यह सफलता युवाओं को प्रेरित कर रही है. मानव की कहानी सचमुच में हर मेहनती और देश सेवा के लिए ख्वाब सजाए लोगों के लिए प्रेरणादायक है. जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे के रहने वाले मानव कुमावत ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं. उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. वे इसके लिए कई सालों से मेहनत कर रहे थे. मानव का कहना है कि रास्ता कितना भी कठिन हो लेकिन लगातार मेहनत से एक दिन सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने बताया कि लेफ्टिनेंट बनाना उनका बचपन का सपना था. जो, आज पूरा हो चुका है. मानव कुमावत ने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की थी. उन्होंने यहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की थी. सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सैन्य जीवन की मूलभूत जानकारी मिली और उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा राष्ट्रसेवा की भावना मजबूत हुई. इसी दौरान उन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया और उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास शुरू कर दिए. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मानव का चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), पुणे में हुआ. एनडीए में प्रवेश करने वाले मानव कुमावत कस्बे के पहले व्यक्ति थे. यह उनके और उनके परिवार के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं थी. यहां उन्होंने लेफ्टिनेंट बनने के लिए शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग प्राप्त की. प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को एक जिम्मेदार सैन्य अधिकारी के रूप में तैयार किया और अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए. Add News18 as Preferred Source on Google एनडीए का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद मानव ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए), देहरादून में एक साल के लिए विशेष सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस दौरान उन्हें सेना के अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक कौशल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिला. प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के कमीशन पद पर नियुक्ति दी गई. भारतीय सेना में अधिकारी बनने के बाद मानव कुमावत की पहली नियुक्ति राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में हुई है. यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है. यहां उनकी जिम्मेदारी देश की सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य दायित्वों का निर्वहन करना होगी. मानव ने कहा कि वे एनडीए और आईएमए में बेहतरीन सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है. इसी आधार पर जैसलमेर में उन्हें पोस्टिंग मिली है. मानव के परिवार ने शिक्षा की महता को समझते हुए शुरू से ही सेना में सेना में अधिकारी बनने के उनके सपने को प्राथमिकता दी. मानव के सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता रतनलाल कुमावत ने उनका एडमिशन सैनिक स्कूल में कराया. माता मंजू देवी ने भी उनको हमेशा उन्हें शिक्षा, अनुशासन और देशप्रेम के संस्कार दिए. उनके बड़े भाई राहुल कुमावत भी केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय में इंजीनियर अधिकारी हैं, जबकि भाभी अंजु कुमावत सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. मानव कुमावत के लेफ्टिनेंट बनने पर क्षेत्र के लोगों, समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं. लोगों का कहना है कि उनकी उपलब्धि न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है. साथ ही उनकी सफलता युवाओं को सेना में करियर बनाने, अनुशासित जीवन अपनाने और राष्ट्रसेवा के लिए आगे आने की प्रेरणा भी देगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

झारखंड

ज‍िसके ल‍िए बघेल भेजे गए, राहुल-प्र‍ियंका डायरेक्‍ट टच में थे, वही प्रणव...

झारखंड राज्‍यसभा चुनाव में ऐसा खेला हो गया, ज‍िसकी गूंज 10 जनपथ के गलियारों तक सुनाई देगी. कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा शर्मिंदगी की बात ये है कि ज‍िसके ल‍िए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जैसे दिग्गज रणनीतिकार रांची भेजे गए, जिनसे खुद राहुल गांधी और प्र‍ियंका गांधी वाड्रा डायरेक्‍ट टच में थे, वही कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा चुनाव हार गए. यह सामान्य हार नहीं है, यह ऐसी पटखनी है जो इंडिया अलायंस को ह‍िलाकर रख देगी. आंकड़ों को देखें तो ज‍िस सीट को आसानी से इंड‍िया अलायंस के कैंड‍िडेट को जीतना चाह‍िए था, वही सीट वे हार गए और वह भी 8 वोटों के अंतर से… इस चुनाव ने कांग्रेस के रणनीतिकारों को दिन में तारे दिखा दिए होंगे. हार के बाद प्रणव झा ने कहा, मैं अपनी पार्टी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझ जैसे संगठन के कार्यकर्ता को झारखंड से उम्मीदवार बनाया. मैं हमारे सभी विधायकों का भी धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने कड़ी मेहनत की और अपनी कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी. हर पक्ष को मिले वोटों की संख्या से ही तय होता है कि कौन जीतेगा. राज्यसभा चुनाव में दो सीटें थीं और तीन उम्मीदवार मैदान में थे. विधायकों के डाले गए वोटों के आधार पर दो उम्मीदवार जीते. उनमें से एक झारखंड मुक्ति मोर्चा से हमारी पार्टी के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम थे. मैं उन्हें दिल से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी थे. मैं उन्हें भी शुभकामनाएं देता हूं. उन्हें मुझसे ज्‍यादा वोट मिले. मुझे उम्मीद है कि वे झारखंड के लोगों के लिए काम करेंगे और उनकी भलाई में योगदान देंगे. प्रणव झा के इस बयान में नाराजगी नहीं थी, कोई टीस भी नहीं थी, लेकिन इंड‍िया अलायंस में बवंडर होना तय है. जब बहुमत साथ था, तो कैसे लगी सेंध इस पूरे सियासी ड्रामे और हार-जीत के तिलिस्म को समझने के लिए आपको झारखंड विधानसभा के भीतर के गणित को बहुत बारीकी से देखना होगा. विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और राज्यसभा की एक सीट पर जीत पक्की करने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों की स्पष्ट दरकार थी. इंडिया अलायंस के झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस पार्टी के टोटल वोट म‍िला ल‍िए जाएं, तो उनके पास पूरे 56 विधायकों का मजबूत समर्थन था. गणित एकदम सीधा और सरल था. 28-28 वोट अपने दोनों उम्मीदवारों को दिलाइए और उन्हें शान से राज्‍यसभा भेज दीजिए. दूसरी तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास सिर्फ 24 विधायक थे, यानी जीत के जादुई 28 के आंकड़े से वे पूरे चार कदम पीछे खड़े थे. इसके बावजूद एनडीए ने हार मानकर मैदान खाली छोड़ने के बजाय एक बहुत बड़ा और आक्रामक दांव खेला. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को अपना पूर्ण समर्थन देकर मैदान में उतार दिया. यहीं से कांग्रेस के खेमे की नींद उड़नी शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन वो अपना 56 का आंकड़ा भी नहीं बचा पाए. नतीजा एनडीए के 24 विधायकों का समर्थन लेकर उतरे नथवानी ने सेंधमारी करते हुए 28 वोट बटोर लिए और राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ गए. कांग्रेस को मझधार में क‍िसने छोड़ा आंकड़े देखें तो झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी का किला तो पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया, लेकिन कांग्रेस को मझधार में डूबने के लिए बेसहारा छोड़ दिया. झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम को आराम से 30 वोट मिल गए और उनका राज्यसभा जाने का रास्ता एकदम साफ हो गया. इससे एक बात साफ तौर पर जाहिर होती है कि हेमंत सोरेन का अपनी पार्टी के विधायकों पर पूरा और मजबूत कंट्रोल था. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके उम्मीदवार के खाते में कोई भी सेंधमारी न हो सके और एक भी वोट इधर से उधर न जाए. सवाल क्‍यों उठ रहा सबसे बड़ा सवाल, क्या इंडिया अलायंस के अंदर दोनों सहयोगी पार्टियों के बीच कोई मजबूत समन्वय या ईमानदारी नहीं थी? झामुमो ने तो अपना काम बखूबी निकाल लिया, लेकिन जब बात गठबंधन धर्म निभाने की आई या कांग्रेस के विधायकों को एकजुट रखने में मदद करने की आई, तो वहां सब कुछ ताश के पत्तों की तरह बिखरता हुआ नजर आया. राजनीति की इस शतरंज की बिसात पर हेमंत सोरेन एक बेहद चतुर और सुलझे हुए खिलाड़ी साबित हुए, जबकि कांग्रेस के बड़े-बड़े रणनीतिकार सिर्फ बगलें झांकते और एक-दूसरे का मुंह ताकते रह गए. कांग्रेस के ल‍िए यह बड़ा झटका क्‍यों ? प्रणव झा को आलाकमान का आशीर्वाद प्राप्त था. वह पार्टी के बेहद करीबी माने जाते हैं. खुद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पल-पल की अपडेट ले रहे थे और क्रॉस वोटिंग के खौफ से ही चुनाव मैनेजमेंट के मास्टर माने जाने वाले भूपेश बघेल को स्‍पेशल ऑब्जर्वर बनाकर तुरंत रांची भेजा गया था. मतदान से ठीक एक रात पहले की सरगर्मी तो और भी ज्यादा दिलचस्प थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकारी आवास पर बाकायदा एक ‘मॉक पोल’ यानी डमी वोटिंग का अभ्यास भी आयोजित किया गया था, ताकि किसी भी विधायक से वोट डालने में कोई तकनीकी चूक न हो जाए या कोई बहाना न बना सके. लेकिन जब असली परीक्षा की घड़ी आई तो हकीकत यह रही कि प्रणव झा को मात्र 19 वोट ही नसीब हुए. यानी गठबंधन के जिन विधायकों ने डमी वोटिंग में तो साथ होने का पूरा दिखावा किया, जब असली बैलेट पेपर हाथ में आया तो उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार की पीठ में बेरहमी से खंजर घोंप दिया. Source link

झारखंड

गिरिडीह में कार बिजली पोल से टकराई:गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह...

गिरिडीह में गुरुवार शाम एक सड़क हादसे में देवघर के छह पर्यटक घायल हो गए। बेंगाबाद थाना क्षेत्र के खंडोली मोड़ के पास एक अनियंत्रित आई-20 कार बिजली के खंभे से टकरा गई, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। जानकारी के अनुसार, देवघर जिले के दुलमपुर निवासी छह युवक आई-20 कार से गिरिडीह के खंडोली घूमने आए थे। शाम को घर लौटते समय खंडोली मोड़ से पहले चालक का वाहन पर से नियंत्रण बिगड़ गया और कार सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से जा टकराई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। उन्होंने घायलों को कार से बाहर निकाला और इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों की पहचान देवघर के दुलमपुर निवासी 25 वर्षीय राजा खान, 23 वर्षीय हुसैन खान और 24 वर्षीय आर्यन खान के रूप में हुई है। इन सभी का इलाज सदर अस्पताल में जारी है। कार में सवार अन्य तीन लोगों को मामूली चोटें आई हैं। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना का प्रारंभिक कारण वाहन का अनियंत्रित होना बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। Source link

शिक्षा

IIT Delhi Tops India, No Indian in Top 200

Hindi News Career QS World University Ranking 2027: IIT Delhi Tops India, No Indian In Top 200 1 घंटे पहले कॉपी लिंक QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 जारी हो गई है। इस रैंकिंग द्वारा जारी टॉप 100 यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में एक भी भारत का संस्थान शामिल नहीं हो सका है। वहीं टॉप 200 की लिस्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने एक बार फिर भारत के सबसे अच्छे एजुकेशन और रिसर्च संस्थान के तौर पर अपनी जगह बनाई है। इस संस्थान ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए वैश्विक स्तर पर 118वां स्थान हासिल किया है। MIT पिछले 15 सालों से नंबर वन QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में इस साल भी अमेरिका की MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने दुनिया की नंबर-1 यूनिवर्सिटी के तौर पर जगह बनाई है। खास बात यह है कि MIT लगातार 15वें साल इस रैंकिंग में टॉप पर है। DU और JNU की रैंकिंग में सुधार दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू और जामिया मिलिया ने भी अपना दबदबा बनाए रखा है। डीयू ने पिछले साल की 328वीं रैंक से ऊपर उठकर 322वीं रैंक हासिल की है। वहीं, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की रैंकिंग पिछले साल 558वें नंबर पर थी, लेकिन अब ग्लोबल लेवल पर 555वें नंबर पर पहुंच गई है। 52 भारतीय संस्थान रैंकिंग में शामिल QS की इस रैंकिंग में वर्ष 2017 में जहां सिर्फ 14 भारतीय संस्थान इस लिस्ट में शामिल थे। वहीं, अब यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दुनिया के 106 देशों और क्षेत्रों की 1500 से ज्यादा यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन किया गया है। इन 3 यूनिवर्सिटी की रैकिंग में सबसे ज्यादा सुधार सबसे ज्यादा सुधार करने वाले संस्थानों में वीआईटी, बिट्स पिलानी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया शामिल हैं। वीआईटी ने 94 स्थानों की छलांग लगाकर 597वीं रैंक हासिल की है। वहीं, बिट्स पिलानी 93 स्थान ऊपर चढ़कर 575वें स्थान पर पहुंच गया है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने भी 75 से ज्यादा रैंक की बढ़त के साथ 686वीं रैंक हासिल की है। ये खबर भी पढ़ें AIIMS के किसी भी संस्थान में भर्ती का मौका:1484 पद भरे जाएंगे, 1 लाख 42 हजार तक सैलरी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (CRE-5) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके अनुसार, देशभर के विभिन्न एम्स संस्थानों और केंद्र सरकार के मेडिकल संस्थानों में ग्रुप-B और ग्रुप-C के 1484 पदों पर भर्ती की जाएगी। पूरी खबर यहा पढ़ें : दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

प्रधानाध्यापक के कार्य के 1 वर्ष पूरे, बच्चों को परोसा गया विशेष...

राजकीयकृत मध्य विद्यालय, बीएमपी-1, डोरंडा में प्रधानाध्यापक अशोक प्रसाद सिंह के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर विद्यालय परिवार द्वारा वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मध्याह्न भोजन) योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए विशेष तिथि भोजन का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) विनय कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) बादल राज और झारखंड शिक्षा परियोजना के सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी अखिलेश कुमार व सतीश मिश्रा उपस्थित रहे। इनके अलावा प्रभा सहाय, अन्य परियोजना कर्मी, संकुल साधन सेवी और पूर्व प्रधानाध्यापक सुधांशु रंजन प्रामाणिक भी शामिल हुए। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर जिला प्रशासन, रांची की इस पहल से स्कूलों में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। इस तरह के आयोजनों से विद्यालयों में छात्रों की औसत नियमित उपस्थिति बढ़कर 80-90 प्रतिशत हो गई है, जिससे गुणात्मक शिक्षा के स्तर में भी सुधार हो रहा है। Source link

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बिजली की समस्या से तंग आए ग्रामीण, कंधों पर उठाया ट्रांसफार्मर! 3...

Last Updated:June 18, 2026, 18:55 IST राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया. ख़बरें फटाफट सिरोही : जिले के दुर्गम पहाड़ों के बीच बसे उतरज गांव के ग्रामीणों ने बार–बार बिजली गुल होने की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर 3 किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव तक पहुंचाया. बिजली विभाग की ओर से सड़क मार्ग गुरुशिखर तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया गया था. इसके आगे उतरज गांव तक सड़क मार्ग नहीं होने से ट्रांसफार्मर आगे ले जाना संभव नहीं था. समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने सहयोग करते हुए ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया. राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने यह कदम उठाया और अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाकर ही राहत की सांस ली. स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में पहुंचाया ट्रांसफार्मरग्रामीणों ने स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में बिजली की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी डीपी को दुर्गम, फिसलन भरी पहाड़ी और पथरीले रास्ते से कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया. इस कार्य में बड़े बुजुर्ग सबने अपनी भूमिका निभाई. गांव में ट्रांसफार्मर के लगने से ग्रामीणों की बिजली की समस्या दूर हो सकेगी. 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा गांव, आबादी 400 लोगों कीजिले के माउंट आबू उपखंड का उतरज गांव 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा हैं. इस गांव की आबादी वर्ष 2011 में 290 थी जो बढ़कर 400 के करीब हो गई हैं. आज भी ये गांव इंटरनेट सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. यहां एक मात्र आटा चक्की हैं. जिसे ग्रामीणों ने अपने कंधों पर उठाकर लाया था. गांव का एक मात्र ट्रेक्टर भी पिछले वर्ष ग्रामीण इसी तरह कंधों पर उठाकर लाए थे. गांव के विकास में सबसे बड़ी बाधा गांव तक सड़क मार्ग नहीं होना हैं. दुर्गम पहाड़ों के बीच बसा गांव होने की वजह से यहां सड़क नहीं बन सकती है. नरेगा से गुरुशिखर से कुछ मीटर तक पथरीली पगडंडी बनाई गई है, लेकिन हर वर्ष बारिश में ये पगडंडी भी चलने लायक नहीं रहती है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sirohi,Rajasthan Source link

झारखंड

parimal nathwani and baidyanath Ram wins jharkhand rajya sabha election 2026

Last Updated:June 18, 2026, 18:51 IST Jharkhand Rajya Sabha elections 2026: झारखंड राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नथवानी ने 28 वोट पाकर जीत दर्ज की. कांग्रेस के प्रणव झा को 19 वोट मिले. वहीं 3 वोट को अमान्य घोषित किया गया है. इस चुनाव भी महागठबंधन की रणनीति फेल हो गई है. वहीं एक सीट पर जेएमएम के बैद्यानाथ राम जीते हैं. उनको 30 मत मिले. झारखंड राज्यसभा चुनाव: NDA समर्थित परिमल नथवानी और JMM के वैद्यनाथ राम की बड़ी जीत, कांग्रेस को झटका रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए बेहद हाई-प्रोफाइल मुकाबले में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीजेपी और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जादुई आंकड़ा छूते हुए राज्यसभा चुनाव जीत लिया है. हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से इसकी औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है. लेकिन बीजेपी विधायक प्रदीप यादव ने इस जीत की पुष्टि कर दी है. बता दें की दो सीटों में जेएमएम के बैद्यनाथ राम को 30 वोट, एनडीए प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 28 वोट और कांग्रेस उम्मीदवार को प्रणव झा को 19 वोट मिले हैं. तीन मत को अमान्य घोषित किया गया है. नथवानी को मिले 28 वोट, कांग्रेस खेमे में मायूसीबीजेपी खेमे से आ रही जानकारी के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को जीत के लिए जरूरी प्रथम वरीयता के पूरे 28 वोट मिले हैं. दूसरी तरफ सत्ताधारी महागठबंधन के बहुमत के दावों के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को करारा झटका लगा है. प्रणव झा को महज 19 वोटों से ही संतोष करना पड़ा है. इस चुनाव में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वोटिंग के दौरान 3 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया. जिसने पूरे सियासी समीकरण को पलट कर रख दिया. महागठबंधन के आंकड़ों का गणित फेल!चुनाव से पहले सत्ताधारी महागठबंधन (झामुमो-कांग्रेस-राजद) के पास 56 विधायकों का प्रचंड बहुमत था. झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम पहली सीट बेहद आसानी से निकाल रहे थे. जिसके बाद भी कांग्रेस के प्रणव झा के लिए पूरे 28 वोट बचने का दावा किया जा रहा था. लेकिन मतदान के वक्त हुई क्रॉस-वोटिंग और 3 वोटों के अमान्य होने से कांग्रेस की रणनीतियों पर पानी फिर गया. परिमल नथवानी की इस जीत के साथ ही झारखंड की सियासी जमीन पर बीजेपी समर्थित रणनीति एक बार फिर कामयाब साबित हुई है. जबकि सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को अपनी सीट गंवानी पड़ी है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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