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झारखंड

कुंडहित बीआरसी में पहले चरण में 108 छात्रों को िमली साइकिलें

बागडेहरी | कुंडहित प्रखंड संसाधन केंद्र में झारखंड सरकार की ‘उन्नति के पहिए’ योजना के तहत कक्षा आठ के विद्यार्थियों को साइकिल वितरण शुरू किया गया। यह वितरण शैक्षणिक सत्र 2026-27 के सरकारी विद्यालयों के छात्रों के लिए है। कार्यक्रम का उद्घाटन ओपेश्वर हेम्ब्रम, जमाल ए. राजा, मिलन कुमार घोष और रीना मंडल ने किया। विद्यार्थियों को साइकिल की चाबी सौंपी गई। पहले चरण में उत्क्रमित उच्च विद्यालय नगरी और मध्य विद्यालय कुंडहित के कक्षा आठ के 108 विद्यार्थियों को साइकिलें दी गईं। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी मिलन कुमार घोष के अनुसार, सत्र 2026-27 में कुंडहित प्रखंड के सरकारी विद्यालयों के कुल 923 विद्यार्थियों को साइकिल देने का लक्ष्य रखा गया है। शेष विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से वितरण होगा। कंपनी के कर्मचारी बाकी साइकिलों की फिटिंग और तकनीकी जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद अगले चरण के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। छात्रों ने कहा कि इससे स्कूल आने-जाने में समय बचेगा। Source link

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800 KMPH की तूफानी रफ्तार, बुलेट ट्रेन का बाप, तेजस राजधानी-वंदे भारत...

होमफोटोदेश 800 KMPH की तूफानी रफ्तार, बुलेट ट्रेन का बाप, तेजस-वंदे भारत तो बच्‍चा Last Updated:July 12, 2026, 08:20 IST Maglev vs Bullet Train: भारत में जल्‍द ही हाई-स्‍पीड ट्रेन के दौड़ने की संभावना है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है. इस प्रोजेक्‍ट पर तेजी से काम चल रहा है. हाई-स्‍पीड ट्रेन कॉरिडोर के एक सेक्‍शन पर जल्‍द ही बुलेट ट्रन फर्राटा भर सकती है. यह ट्रेन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफर तय करेगी. इससे लोगों को अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने में काफी कम समय लगेगा. इससे पहले तेजस और वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेनें चलाई जा रही हैं. ये दोनों ट्रेनें फिलहाल 130 से 140 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हैं, लेकिन इन ट्रेनों को 180 से 200 KMPH की स्‍पीड से चलने में सक्षम बनाया गया है. Maglev vs Bullet Train: इंडियन रेलवे लगातार इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को दुरुस्‍त कर रहा है, ताकि तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकें. भारत में सेमी हाई-स्‍पीड रेल प्रोजेक्‍ट के तहत तेजस राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनें देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में फर्राटा भर रही हैं. दूसरी तरफ, हाई-स्‍पीड प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने का सपना आने वाले कुछ महीनों में साकार हो जाएगा. बुलेट ट्रेन की रफ्तार 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है. भारत देश के अन्‍य हिस्‍सों में भी बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बना रहा है, ताकि आवागमन को और आसान बनाया जा सके. वहीं, पड़ोसी चीन तो सुपर हाई-स्‍पीड ट्रेन प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. यह ट्रेन 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भरने में सक्षम है. यानी बुलेट ट्रेन से दोगुनी से भी ज्‍यादा स्‍पीड. (फोटो: Reuters) चीन ने हाई-स्पीड मैग्लेव तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है. सेंट्रल चीन के हुबेई प्रांत स्थित ईस्ट लेक लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने 1110 किलोग्राम वजनी हाई-स्पीड रेल मॉडल को महज 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. यह उपलब्धि लेविटेशन (चुंबकीय प्रभाव) सपोर्ट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन टेक्‍नोलॉजी के जरिए हासिल की गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले छह महीनों में इसी परीक्षण प्लेटफॉर्म पर यह तीसरा विश्व रिकॉर्ड है. (फोटो: Reuters) ग्‍लोबल टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल में हाई-स्पीड रेल मॉडल को बिना पहियों के मैग्‍नेटिक फोर्स के सहारे ट्रैक के ऊपर तैराते हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन सिस्टम से अत्यधिक तेजी से गति दी गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के बाद एक महीने तक विभिन्न परीक्षण किए गए, जिनमें स्‍पीड ट्रायल की सटीकता, हाई-स्पीड लेविटेशन की स्थिरता, एनर्जी एफिशिएंट और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया गया. सभी मानक डिजाइन आवश्यकताओं के अनुरूप पाए गए. ग्‍लोबल रेलवे टेक्‍नोलॉजी में यह किसी रिवोल्‍यूशन से कम नहीं है. (फोटो: Reuters) Add News18 as Preferred Source on Google ग्‍लोबल टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल में हाई-स्पीड रेल मॉडल को बिना पहियों के मैग्‍नेटिक फोर्स के सहारे ट्रैक के ऊपर तैराते हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन सिस्टम से अत्यधिक तेजी से गति दी गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के बाद एक महीने तक विभिन्न परीक्षण किए गए, जिनमें स्‍पीड ट्रायल की सटीकता, हाई-स्पीड लेविटेशन की स्थिरता, एनर्जी एफिशिएंट और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया गया. सभी मानक डिजाइन आवश्यकताओं के अनुरूप पाए गए. ग्‍लोबल रेलवे टेक्‍नोलॉजी में यह किसी रिवोल्‍यूशन से कम नहीं है. (फोटो: Reuters) इनोवेशन सेंटर के निदेशक ली वेइचाओ के अनुसार, एक किलोमीटर लंबी यह हाई-स्पीड मैग्लेव टेस्ट लाइन 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. प्रोजेक्‍ट का काम पूरा होने के बाद आमलोगों को काफ सहूलियत मिलने की उम्‍मीद है. हजारों किलोमीटर की दूरी कुछ घंटों में ही तय किया जा सकेगा. इससे पहले विकसित हाई-स्पीड मैग्लेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन इनोवेशन सेंटर ने अपनी एक किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड मैग्लेव टेस्ट लाइन का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया था. उस दौरान 1030 किलोग्राम वजनी ट्रेन को 650 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचाया गया था, जिसे भी विश्व रिकॉर्ड बताया गया था. अब नए ट्रायल के साथ चीन ने अपनी ही उपलब्धि को और आगे बढ़ा दिया है. (फोटो: Reuters) भारत में भी बुलेट ट्रेन पर काम चल रहा है. देश की पहली बुलेट ट्रेन को मुंबई और अहमाबाद के बीच चलाने की योजना है. इस हाई-स्‍पीड बुलेट ट्रेन की स्‍पीड 250 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रहने वाली है. मतलब यह कि चाइनीज मैग्‍लेव ट्रेन की रफ्तार बुलेट ट्रेन से 3 गुना से भी ज्‍यादा है. फर्ज कीजिए कि दिल्‍ली और पटना के बीच यदि मैग्‍लेव ट्रेन चलती है तो 1000 किलोमीटर की दूरी महज सवा घंटे में ही तय हो जाएगी. मौजूदा समय में 12 से 14 घंटे तक का वक्‍त लगता है. (फोटो: Reuters) अब बात करते हैं तेजस राजधानी की. तेजस राजधानी ट्रेन औसतन 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है. इंडियन रेलवे सिस्‍टम में तेजस राजधानी ऐसी ट्रेन है जो यात्रियों को अपेक्षाकृत जल्‍दी और समय पर गंतव्‍य तक पहुंचाती है. हालांकि, मैग्‍लेव ट्रेन के सामने तेजस जैसी सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेनें फिसड्डी हैं. (फाइल फोटो) भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों का ऑपरेशन भी कर रहा है. इस सेमी हाई-स्‍पीड प्रीमियम ट्रेन के दो वेरिएंट हैं. एक में सिर्फ चेयर कार होते हैं, जबकि दूसरा संस्‍करण स्‍लीपर है. पहली वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन को कामख्‍या से मालदा के बीच चलाया गया है. इसकी गिनती भारत के लग्‍जरी ट्रेनों में होती है. यह ट्रेन भी फिलहाल 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की है. हालांकि, इनकी बोगियों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को (फोटो: Reuters) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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13-14 जुलाई को महासंयोग: एक ही अमावस्या में मिलेगा सोमवती और भौमवती...

होमताजा खबरधर्म 13-14 जुलाई को महासंयोग: एक ही अमावस्या में मिलेगा सोमवती और भौमवती का फल Last Updated:July 12, 2026, 07:46 IST इस बार 13-14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या पर दुर्लभ संयोग बन रहा है. श्रद्धालुओं को एक ही अमावस्या में सोमवती और भौमवती दोनों का पुण्य मिलेगा. धार्मिक कार्यों के लिए 14 जुलाई की उदयातिथि मुख्य है. इस दिन मौन रहकर पूजा, दान और तर्पण करने से राहु व पितृ दोष शांत होते हैं. ख़बरें फटाफट देवघर: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन इस बार आषाढ़ मास की अमावस्या कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ रहने वाली है. वजह है इसका अनोखा संयोग, जो हर साल देखने को नहीं मिलता. इस बार अमावस्या तिथि सोमवार की शाम से शुरू होकर मंगलवार तक रहेगी. ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही अमावस्या में सोमवती अमावस्या और भौमवती अमावस्या, दोनों का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह संयोग बहुत कम बनता है और धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसे में पूजा-पाठ, दान, तर्पण और पितरों की शांति के लिए किया गया कार्य कई गुना अधिक फलदायी माना जाएगा. क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?देवघर के ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस बार का संयोग वास्तव में दुर्लभ है. आमतौर पर अमावस्या किसी एक वार के साथ ही पड़ती है, लेकिन इस बार तिथि सोमवार की शाम से शुरू होकर मंगलवार तक रहेगी. हालांकि सनातन धर्म में उदयातिथि को ही मान्यता दी जाती है. इसलिए धार्मिक दृष्टि से मंगलवार, 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या का मुख्य पर्व माना जाएगा. इसी दिन स्नान, दान, पूजा और पितरों का तर्पण करना सबसे अधिक शुभ रहेगा. उनका कहना है कि ऐसे संयोग विरले ही बनते हैं और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है. इस दिन मौन रहकर करें पूजा ज्योतिषाचार्य के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए. इसके बाद पीपल के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करें, जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. यदि संभव हो तो पूरे दिन मौन व्रत रखें. मान्यता है कि मौन रहकर की गई पूजा मन को शांत करती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. पंचम भाव में राहु तो अमवास्या पर करे खास उपाय उन्होंने आगे बताया कि जिन लोगों की कुंडली में राहु पंचम भाव में है, या जो राहु के अशुभ प्रभाव, पितृ दोष अथवा बार-बार आने वाली परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह अमावस्या विशेष महत्व रखती है. ऐसे लोगों को इस दिन योग्य विद्वान से राहु शांति और पितृ दोष निवारण की पूजा करानी चाहिए. इसके अलावा अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की कई बाधाएं दूर होने लगती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए उपाय व्यक्ति के दुखों को कम करने और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाले माने जाते हैं. इसलिए इस बार की आषाढ़ अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग पूजा-पाठ और तर्पण की तैयारी में जुट गए हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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अंडर-15 में देवरी,अंडर-12 बालक में गांडेय व बालिका में बगोदर ने मारी...

भास्कर न्यूज | गिरिडीह झारखंड शिक्षा परियोजना के तत्वावधान में आयोजित 65वीं सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता एवं द्वितीय लिटिल चैंप फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन गिरिडीह प्लस टू हाई स्कूल के खेल मैदान में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में जिले के सभी 13 प्रखंडों की टीमों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।प्रतियोगिता के दूसरे दिन 10 जुलाई को 65वीं सुब्रतो कप के अंतर्गत अंडर-17 वर्ग के मुकाबले आयोजित किए गए। वहीं अंडर-15 बालक वर्ग के फाइनल मुकाबले में देवरी की टीम ने बेंगाबाद को 2-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया। शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।इसके बाद 11 जुलाई को द्वितीय लिटिल चैंप फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जिले के सभी प्रखंडों की अंडर-12 बालक एवं बालिका टीमों ने भाग लिया। बालक वर्ग के फाइनल मुकाबले में गांडेय की टीम ने तिसरी को 4-0 से हराकर विजेता बनने का गौरव हासिल किया। वहीं बालिका वर्ग में बगोदर की टीम ने गिरिडीह को 5-0 से पराजित कर चैंपियन बनने का सम्मान प्राप्त किया।सभी विजेता एवं उपविजेता टीमों को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया गया। खेल विभाग के अधिकारियों ने सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हार-जीत खेल का एक हिस्सा है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात प्रतियोगिता में भाग लेना और अपनी खेल भावना को बनाए रखना है। “खेल हमें अनुशासन, टीम भावना और विपरीत परिस्थितियों में भी लड़ना सिखाते हैं। सभी खिलाड़ी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। अधिकारियों ने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ आगे भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आह्वान किया। जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार ने बताया कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-15 बालक, अंडर-17 बालक एवं बालिका वर्ग की विजेता टीमें 13 जुलाई से हजारीबाग में आयोजित प्रमंडलीय स्तरीय सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लेंगी। इसके लिए सभी टीमें 12 जुलाई को गिरिडीह से हजारीबाग के लिए रवाना होंगी। कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार हेम्ब्रम, एडीपीओ प्रकाश कुमार, एपीओ नीरज कुमार एवं प्रदीप कुमार रवानी, बीपीओ भोला राय, फील्ड मैनेजर आदि लोग मौजूद थे। Source link

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सरकारी आईटीआई के लैब बनेंगे हाईटेक:ऐसे कोर्स शुरू होंगे जिनकी उद्योगों में...

आईटीआई में कोर्स करने वाले युवाओं को उद्योगों की मदद से मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण व जॉब झारखंड के आईटीआई में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब यहां केवल पारंपरिक ट्रेडों की पढ़ाई ही नहीं होगी, बल्कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार आधुनिक तकनीक और नए कौशल भी सिखाए जाएंगे। इसके लिए श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतू) योजना के तहत उद्योगों से साझेदारी के लिए रुचि मांगी है। विभाग ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है। राज्य में कुल 77 आईटीआई हैं। इनके इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भी बदलाव किए जाएंगे। पीएम-सेतू योजना का उद्देश्य सरकारी आईटीआई को आधुनिक और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण केंद्र बनाना है। इसके तहत झारखंड के चयनित आईटीआई में नई मशीनें लगाई जाएंगी, आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित होंगी और डिजिटल लर्निंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही ऐसे नए कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिनकी आज उद्योगों में सबसे ज्यादा मांग है। सरकार और उद्योग साथ में तैयार करेंगे योजना इस योजना की सबसे खास बात उद्योगों की सीधी भागीदारी है। प्रत्येक आईटीआई क्लस्टर के लिए एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) बनाया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार और उद्योग मिलकर संस्थान के विकास की योजना तैयार करेंगे। उद्योग केवल सलाह ही नहीं देंगे, बल्कि आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने, पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग देने, अप्रेंटिसशिप और छात्रों के प्लेसमेंट में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस योजना में पहली बार उद्योगों की सीधी भागीदारी होगी। उद्योग और सरकार मिलकर आईटीआई का संचालन करेंगे। कंपनियां यह तय करने में मदद करेंगी कि कौन-से नए कोर्स शुरू हों, किस तरह का प्रशिक्षण दिया जाए और छात्रों को अप्रेंटिसशिप व नौकरी कैसे मिले। इससे प्रशिक्षण पूरी तरह उद्योगों की जरूरत के अनुसार होगा। हब आईटीआई आसपास के अन्य आईटीआई को तकनीकी सहयोग देंगे और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेंगे। उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेंगे झारखंड सरकार का मानना है कि इस पहल से आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कौशल मिलेगा। इससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे और राज्य के उद्योगों को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध होगा। आधुनिक तकनीक, उद्योगों की भागीदारी और बेहतर प्लेसमेंट व्यवस्था के साथ झारखंड के आईटीआई युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बनेंगे। ये होंगे लाभ छात्रों को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक, सेवा क्षेत्र और मल्टी-स्किल जैसे आधुनिक विषयों की ट्रेनिंग मिलेगी। उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, सॉफ्ट स्किल्स, करियर काउंसलिंग और प्लेसमेंट सहायता भी दी जाएगी, ताकि प्रशिक्षण पूरा होते ही युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना बढ़ सके। ऐसी बन रही योजना हब आईटीआई: औसतन 4 नए कोर्स शुरू होंगे, 10 पुराने कोर्स आधुनिक बनाए जाएंगे। स्पोक आईटीआई: दो नए कोर्स शुरू होंगे और आठ पुराने कोर्सों को अपग्रेड किया जाएगा। “सरकारी आईटीआई संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। इस योजना पर काम किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।”- आदित्य कुमार आनंद, डायरेक्टर नियोजन एवं प्रशिक्षण Source link

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महीनों से जेल में बंद उमर खालिद को जमानत क्‍यों नहीं? CJI...

होमताजा खबरदेश जेल में बंद उमर खालिद को जमानत क्‍यों नहीं? CJI सूर्यकांत UAPA पर क्‍या बोले Last Updated:July 12, 2026, 07:26 IST CJI Surya Kant News: दिल्‍ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद महीनों से जेल में बंद हैं. खालिद को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आरोपी बनाया गया है. लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद को जमानत भी नहीं मिल रही है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने इन तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी है. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA से जुड़े मामलों की सुनवाई में देरी पर अपनी राय रखी है. उमर खालिद को इसी कानून के तहत आरोपी बनाया गया है. CJI Surya Kant News: भारत में न्‍याय प्रणाली की सुस्‍त रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दशकों के बाद भी अदालती फैसले नहीं आते हैं. सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट तक में हजारों-लाखों की तादाद में मुकदमे लंबित हैं. टाइम-बाउंड तरीके से मामलों का निपटारा न होने की वजह से आम याची लंबे समय तक कोर्ट-कचहरी का चक्‍कर लगाने को मजबूर होते हैं. देश में कुछ कानून ऐसे भी हैं, जिनमें जमानत मिलना भी टेढ़ी खीर है. गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) उनमें से एक है. दिल्‍ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद को UAPA के प्रावधानों के तहत आरोपी बनया गया है. खालिद महीनों से जेल में बंद हैं, पर उन्‍हें जमानत नहीं मिल पा रही है. भारत के प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी है. देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं. खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं. इन सबके बीच CJI सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपी वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद हैं. इसके बावजूद उन्‍हें जामनत नहीं मिल रही है. उमर खालिद को जमानत न मिलने का मुद्दा अक्‍सर ही उठता रहता है. सीजेआई सूर्यकांत ने किसी विशेष मामले या व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा कि यह ऐसा विषय है, जिस पर न्यायपालिका को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है. स्‍पेशल कोर्ट से उम्‍मीद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे. CJI सूर्यकांत को किस बात का विश्‍वास सीजेआई सूर्यकांत ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में इन विशेष अदालतों के कारण मुकदमों की सुनवाई तेज होगी और इससे उन आरोपियों की शिकायतों का भी समाधान होगा, जो लंबे समय से ट्रायल पूरा न होने के कारण जेल में हैं. उनका कहना था कि अंतिम रूप से साक्ष्यों का ज्‍यूडिशियल ट्रायल और मुकदमे का निष्कर्ष ही यह तय करेगा कि आरोप कितने टिकाऊ हैं और इसी प्रक्रिया से न्याय सुनिश्चित होगा. दिल्ली दंगों और अन्य यूएपीए मामलों में कई आरोपी वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं. इन मामलों में ट्रायल की धीमी गति और जमानत को लेकर समय-समय पर न्यायपालिका की भूमिका पर बहस होती रही है. ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत का यह बयान संकेत देता है कि न्यायपालिका अब विशेष अदालतों के माध्यम से इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई में तेजी लाने पर जोर दे रही है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और टाइम-बाउंड बन सके. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

Jharkhand Rain Alert | Santhal Pargana Heavy Showers; Orange Alert July 13-14

रांची28 मिनट पहले कॉपी लिंक बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर अब झारखंड के लगभग सभी जिलों में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने 12 जुलाई को जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में वज्रपात के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं राजधानी रांची सहित अन्य जिलों में पूरे दिन बादल छाए रहने और एक से दो बार हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम में अचानक आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है। 13-14 जुलाई को और तेज होगा असर मौसम विभाग के अनुसार 13 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां समेत कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है। 14 जुलाई को चतरा, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो सहित उत्तर और पूर्वी हिस्सों में भी तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के 24 जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। साथ ही 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है। राज्य में अब तक 36% कम बारिश एक जून से 11 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि रांची में 13 प्रतिशत की कमी है। रांची में अब तक 263.6 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 308.3 मिमी है। मेदिनीनगर में 40 प्रतिशत और गढ़वा में 75 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले 24 घंटों में रांची, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर समेत कई जिलों में अच्छी बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई है। गुमला में वज्रपात से दो की मौत गुमला जिले में वज्रपात की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई है, जिससे खतरे की गंभीरता स्पष्ट हो रही है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। किसानों को मौसम को ध्यान में रखते हुए खेती के कार्य करने की सलाह दी गई है। दक्षिणी और पूर्वी झारखंड में आज सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा, जबकि पलामू, गढ़वा और लातेहार में उमस बनी रह सकती है। वहीं रांची, खूंटी और गुमला जैसे जिलों में मौसम सुहावना रहने के आसार हैं। गढ़वा, चतरा और पाकुड़ में सबसे कम बारिश झारखंड में 1 जून से 11 जुलाई 2026 तक के वर्षा आंकड़े बताते हैं कि अब तक राज्य में 36 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। गढ़वा में 75 प्रतिशत, चतरा में 66 प्रतिशत और पाकुड़ में 60 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। यहां सूखे जैसे हालात हैं। इसके अलावा देवघर (-52%), गोड्डा (-51%), हजारीबाग (-47%) और गिरिडीह (-41%) जैसे जिलों में भी वर्षा की स्थिति कमजोर बनी हुई है। वहीं राजधानी रांची में 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर सिमडेगा (-12%), सरायकेला-खरसावां (-13%) और पश्चिमी सिंहभूम (-22%) जैसे जिलों में बारिश सामान्य के करीब रही है। हालांकि हाल के दिनों में सक्रिय मानसून और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से बारिश में तेजी आने की संभावना जताई गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

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स्नातक सेमेस्टर-1 की पहली मेधा सूची जारी, 23 तक चलेगी सत्यापन प्रक्रिया

भास्कर न्यूज | जामताड़ा जामताड़ा महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित स्नातक सेमेस्टर-1, सत्र 2026-30 के नामांकन के लिए शनिवार को पहली मेधा सूची जारी की गई। प्रभारी प्राचार्य प्रो. कौशल, नामांकन प्रभारी प्रो. नीलम कुजूर, अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में चयनित अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित हुई। मेधा सूची जारी होते ही नामांकन का पहला चरण शुरू हो गया। महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार पहली मेधा सूची में चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन 13 जुलाई 2026, सोमवार से होगा। सत्यापन 23 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान चयनित विद्यार्थियों को महाविद्यालय परिसर में पहुंचकर सभी जरूरी शैक्षणिक और अन्य प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही आगे की नामांकन प्रक्रिया पूरी होगी। प्रो. कौशल ने कहा कि विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार नामांकन तय समय-सारिणी में चल रहा है। उन्होंने कहा कि चांसलर पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन करने वाले जिन विद्यार्थियों का नाम पहली मेधा सूची में है, वे तय तिथि के भीतर दस्तावेज सत्यापन जरूर कराएं। उन्होंने बताया कि तय अवधि के बाद सत्यापन नहीं कराने वाले अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। प्रो. नीलम कुजूर ने कहा कि सत्यापन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए संबंधित काउंटरों पर शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति होगी। Source link

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कश्‍मीर में दो जगहों पर फटे बादल, अनंतनाग-पहलगाम में फ्लैश फ्लड –...

होमताजा खबरदेश कश्‍मीर में दो जगहों पर फटे बादल, अनंतनाग-पहलगाम में फ्लैश फ्लड से तबाही Last Updated:July 12, 2026, 06:22 IST Kashmir Cloudburst: जम्‍मू-कश्‍मीर में दो जगहों पर बादल फटने से व्‍यापक पैमाने पर मची है. स्‍थानीय घरों के साथ ही होटलों में भी फ्लैश फ्लड का पानी घुस गया. इससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया. स्‍थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बिजली सप्‍लाई बंद कर दी है. वहीं, राहत एवं बचाव का काम युद्धस्‍तर पर चलाया जा रहा है. दक्षिण कश्‍मीर में बदल फटने से पहलगाम में व्‍यापक तबाही मची है. Kashmir Cloudburst: जम्‍मू-कश्‍मीर में दो जगहों पर बादल फटने से व्‍यापक पैमाने पर नुकसान हुआ है. अचानक आई बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड से घर, खेत, होटल सब डूब गए. बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी होटलों और घरों तक में घुस गया. खेतों में पानी घुसने से किसानों को काफी नुकसान होने का अंदेशा है. इससे पहले डोडा में भी बादल फटा था, जिससे काफी तबाही मची थी. मौसम विभाग ने जम्‍मू-कश्‍मीर के कई ह‍िस्‍सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है. जानकारी के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में शनिवार देर शाम दो अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं के बाद अचानक आई फ्लैश फ्लड से शंगस और पहलगाम क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई. प्रशासन के अनुसार, दोनों घटनाओं में कृषि भूमि, बाग-बगीचों, झोपड़ियों और कुछ होटलों को नुकसान पहुंचा है. पहली घटना शंगस क्षेत्र के चिटरगुल (चाटेरगुल) की ऊपरी पहाड़ियों में हुई, जहां बादल फटने के बाद आरिपथ (अरपत) नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया. तेज बहाव के साथ आया पानी, कीचड़ और मलबे ने धान के खेतों, बागों और आसपास के रिहायशी इलाकों में घुस गया. घर-मकान के साथ इससे खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है. स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है. Source link

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विद्यार्थियों ने भगवान जगन्नाथ व सुभद्रा का रूप धारण कर निकाली रथ...

गिरिडीह | बीएनएस डीएवी पब्लिक स्कूल में शनिवार को बाल वाटिका (नर्सरी से कक्षा 2) के विद्यार्थियों के लिए रथ यात्रा उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनमें आस्था एवं सम्मान का भाव विकसित करना था। इस अवसर पर विद्यालय परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का स्वरूप धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में भाग लिया। सजे-धजे रथ के साथ बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ यात्रा निकाली। भक्ति गीतों, जयघोष और धार्मिक वातावरण ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भगवान जगन्नाथ की महिमा पर आधारित मनमोहक भाव-नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों ने खूब सराहा। प्राचार्य सचिन गर्ग ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन बच्चों को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। Source link

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