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झारखंड

झारखंड के 14 जिलों में ट्रेजरी घोटाले की आशंका:एजी ऑफिस और वित्त...

झारखंड में चल रहे ट्रेजरी घोटाले में कई बड़े मामले सामने आ रहे हैं। इसमें से एक बड़ा मामला यह है कि कई जिलों के एसपी ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपने पदनाम से बैंक में खाते खोल रखे थे। जो पैसे सरकारी खजाने में रहने चाहिए थे, वो पैसे सीधे इन खातों में आते थे। फिर एसपी चेक के माध्यम से भुगतान करते थे। जबकि ट्रेजरी कोड में साफ कहा गया है कि जिसके लिए बिल ट्रेजरी भेजा जाएगा, भुगतान उसी के खाते में होगा। पांच जिले में मिले हैं इससे जुड़े सबूत जांच टीम को बोकारो, सरायकेला, रामगढ़, पलामू और जमशेदपुर में इसके सबूत मिले हैं। जमशेदपुर में वित्त वर्ष 2016-17 में एसपी के खाते में करीब 38 लाख रुपए आए थे, जो सिपाहियों को चेक से भुगतान किया गया था। फिलहाल 14 जिलों में ऐसी गड़बड़ी की आशंका है। एजी ऑफिस और वित्त विभाग के अधिकारी इसकी जांच में जुट गए हैं। जांच की जद में कई और एसपी व डीएसपी (डीडीओ) भी हैं। जांच में पता चला है कि सप्लायर से लेकर अन्य लोगों को किए गए भुगतान में भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। वर्ष 2016-17 से ऐसे भुगतान लगातार हो रहे हैं। वित्त विभाग अब पीएमयू के डेटा बेस से इन एसपी ऑफिस से हुए भुगतान की विस्तृत जांच कर रहा है। बोकारो में डेटा हटाए गए, रिकॉर्ड भी गायब इधर, ट्रेजरी घोटाला उजागर होने के बाद पुलिस विभाग के अंदरूनी सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में पता चला है कि वेतन निकासी से जुड़े रिकॉर्ड और खाते के डेटा से छेडछाड़ की गई है। इसमें एसपी ऑफिस से जुड़े सिस्टम भी जांच के दायरे में हैं। बोकारो में तो डेटा ही डिलीट कर दिया गया है, जबकि कुछ मामलों में रिकॉर्ड मिसिंग या बदला हुआ पाया गया है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन खातों के डेटा को जान-बूझकर हटाया या छिपाया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डेटा में छेड़छाड़ और रिकॉर्ड गायब होना इस घोटाले की सबसे अहम कड़ी है। किसी एसपी ऑफिस का यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया है। हालांकि फिलहाल किसी एसपी पर सीधे आरोप तय नहीं हुए हैं, लेकिन गड़बड़ी को देखते हुए जांच का दायर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकता है। क्योंकि अब इसकी भी जांच होगी कि डीआई बजट कार्यालय से लेकर डीडीओ ऑफिस में ट्रेजरी कोड का कितना उल्लंघन होता था। इनकी संपत्ति का पता लगा रही एसआईटी एसआईटी हजारीबाग से गिरफ्तार आरक्षी रजनीश कुमार सिंह, रजनीश की पत्नी खुशबू सिंह, आरक्षी धीरेंद्र सिंह, बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय और सतीश कुमार की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि आरक्षी रजनीश कुमार सिंह के नाम पर हजारीबाग के मसीपिढ़ी इलाके में दो मंजिला मकान है। वहीं आरक्षी धीरेंद्र सिंह का बिहार के बोधगया में एक बड़ा अपार्टमेंट है। हजारीबाग में एसआईटी ने की जांच हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) हजारीबाग के लौहसिंघना थाना पहुंची। टीम ने एफआईआर के साथ जमा किए गए दस्तावेज और आरोपियों से जब्त सामग्री को अपने कब्जे में लिया। एसआईटी अब यह प​ता लगा रही है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर निकाली गई राशि कहां निवेश किया, ताकि उन संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई कर सके। साथ ही सरकारी धन की वसूली हो सके। एसआईटी को पता चला है कि हजारीबाग से गिरफ्तार सिपाही शंभू कुमार ने इन पैसों का सबसे अधिक निवेश किया है। शंभू कुमार का बिहार के गयाजी जिले के पॉश इलाके एपी कॉलोनी में दो आलीशान मकान बनवाया है। पत्नी काजल कुमारी के नाम पर 18 कट्‌ठा जमीन खरीदी है। शंभू कुमार के नाम 9 व्यावसायिक और कृषि भूमि है। इनमें से बोधगया क्षेत्र में 7.84 डिसमिल जमीन भी शामिल है, जो शंभू की पत्नी काजल कुमारी और एक अन्य सहयोगी सोनी देवी के नाम पर है। एसआईटी जल्द ही इस मामले में हजारीबाग से गिरफ्तार शंभू कुमार और बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय से पूछताछ करेगी। —————————————– इसे भी पढ़ें….. ट्रेजरी घोटाला मामले में चाईबासा से चार अरेस्ट:9 साल में निकाले 27 लाख 21 हजार 717 रुपए, रिश्तेदारों के खातों में किए ट्रांसफर चाईबासा पुलिस विभाग में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक सिपाही सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सिपाही देवनारायण मुर्मू ने वर्ष 2017 से 2025 के बीच लगभग 60 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से 27 लाख 21 हजार 717 रुपए की फर्जी निकासी की। यह राशि उसने अपने करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें.. Source link

शिक्षा

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने...

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें… Source link

झारखंड

बोकारों के भर्रा कब्रिस्तान से कंकाल मिलने का मामला:डीएनए जांच के लिए...

बोकारो‎ में बीते सोमवार को भर्रा कब्रिस्तान से मिले ‎‎कंकाल की पहचान के लिए चीराचास पुलिस ‎ने सदर अस्पताल में लापता ‎‎खालिक अंसारी के माता-पिता का ब्लड‎ सैंपल लिया। पुलिस अब डीएनए जांच ‎के लिए ब्लड व कंकाल का सैंपल भेजकर ‎‎मिलान करेगी।‎ वहीं, दो आरोपी भर्रा के सलाउद्दीन और‎ गुड्‌डू को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया ‎‎गया है। बताया जाता है कि मृतक मिस्त्री का ‎‎काम करता था, ऐसे में गुड्‌डू उसके साथ ‎बतौर कर्मचारी जुड़ा हुआ था। सूत्रों के ‎अनुसार उक्त दोनों ने ही ‎‎खालिक की हत्या की‎ है। मास्टर माइंड‎ की गिरफ्तारी अभी बाकी उनके ही निशानदेही पर कंकाल बरामद ‎हुआ है। साथ ही मामले के मास्टर माइंड‎ की गिरफ्तारी अभी बाकी है। बता दें कि‎ बरमसिया ओपी क्षेत्र के अड़िता निवासी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ खालिक 2022 से लापता है। वह भर्रा में‎ किराए के मकान में रहता था। लापता होने‎ पर परिजनों ने चीराचास थाना में शिकायत‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ किया, लेकिन उसकी तलाश अधूरी रह गई।‎ बेटा का कुछ पता नहीं चलने पर उसके‎ परिजन हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट की फटकार‎ पर चीराचास पुलिस रेस हुई और सलाउद्दीन‎ के साथ गुड्‌डू को पूछताछ के लिए उठाया।‎ पूछताछ में उन्होंने शव दफनाने की बात ‎कही, जिसके बाद पुलिस ने भर्रा कब्रिस्तान ‎से कंकाल बरामद की।‎ पुलिस आरोपियों का पक्ष ले रही: परिजन वहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस पूरी‎ प्रक्रिया गोपनीय तरीके से कर रही है, ताकि ‎इसकी जानकारी सार्वजनिक न हो सके। ‎पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह‎ आरोपियों का पक्ष ले रही है और उन्हें‎ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।‎ सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीएनए ‎रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, तो पुलिस किस‎ आधार पर यह दावा कर रही है कि बरामद‎ कंकाल खालिक का ही है। फिलहाल हर‎ मामले में प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी देने ‎वाली पुलिस इस संवेदनशील मामले में ‎चुप्पी साधे हुए है, जिससे कई सवाल खड़े‎ हो रहे हैं।‎ Source link

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3, 7, 4, 5, 0… ये IPL में प्‍लेयर्स का स्‍कोर कार्ड...

Last Updated:April 29, 2026, 20:51 IST Kerala Exit Poll Latest News: केरल एग्जिट पोल्स के मुताबिक, इस राज्य में बीजेपी को सिंगल डिजिट या बेहद सीमित सीटें मिलने का अनुमान है. पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी को केरल में 2 ही सीटें म‍िलने का अनुमान है. सभी अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े देखें तो तस्वीर लगभग एक जैसी ही बनती दिख रही है. केरल के एग्‍ज‍िट पोल में क्‍या है बीजेपी का हाल? नई द‍िल्‍ली. एग्‍ज‍िट पोल में पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाती नजर आ रही है पर केरल में पार्टी की हालत अच्‍छी नहीं द‍िख रही है. पहली नजर में 3, 7, 4, 5, 0… जैसे आंकड़े आपको इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के किसी बल्लेबाज के स्कोरकार्ड जैसे लग सकते हैं लेकिन ये नंबर असल में एक राज्य के एग्जिट पोल में बीजेपी की संभावित सीटों का अनुमान हैं और तस्वीर पार्टी के लिए चौंकाने वाली है. केरल के पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी गठबंधन को महज 2 सीटें दी गई हैं. एक्‍सेस माई इंड‍िया के सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों के बीच रखा गया है. JVC के अनुमान के मुताबिक बीजेपी गठबंधन को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं, जबकि P-MARQ ने 1 से 4 सीटों की रेंज बताई है. Matrize के हिसाब से भी बीजेपी गठबंधन को 3 से 5 सीटों के बीच सिमटी दिख रही है. केरल में क्‍या है बीजेपी के ल‍िए सबसे चौंकाने वाला नतीजासबसे चौंकाने वाला अनुमान Peoples Pulse का है जहां बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों तक सीमित बताया गया है. यानी लगभग हर एजेंसी का सर्वे इस ओर इशारा कर रहा है कि इस चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रह सकता है. क्‍या है जानकारों का माननाराजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हुए तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा. खासकर तब जब पार्टी ने इस राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया था. हालांकि यह भी याद रखना होगा कि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते और कई बार असली नतीजे इन अनुमानों से बिल्कुल अलग निकल आते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 20:51 IST Source link

झारखंड

पलामू डीसी के कमरे में पहुंचा एक संदेश, कमरे से निकल सीढ़ियों...

Last Updated:April 29, 2026, 18:32 IST महिला की पीड़ा सुनकर डीसी ने तत्काल सदर अनुमंडल पदाधिकारी को मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही महिला को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब आपको दोबारा यहां आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपका काम जल्द पूरा किया जाएगा.” उपायुक्त के इस मानवीय व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करने लगे. ख़बरें फटाफट पलामू: झारखंड के पलामू जिले में बुधवार को जब समाधान दिवस की शुरुआत हुई इसमें पहले दिन जन समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश कर दी. कार्यक्रम के बीच डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत को सूचना मिली कि मेदिनीनगर की रहने वाली दिव्यांग महिला शीला कुमारी उनसे मिलने पहुंची हैं, लेकिन दोनों पैरों से असमर्थ होने के कारण समाहरणालय की सीढ़ियां चढ़ पाने में असहाय हैं. यह जानकारी मिलते ही डीसी ने बिना देर किए चल रहे जन समाधान कार्यक्रम को बीच में रोका और स्वयं नीचे सीढ़ियों तक पहुंच गए. सीढ़ियों पर बैठकर पलामू डीसी ने महिला की पूरी समस्या गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी. शीला कुमारी ने बताया कि वह और उनके पति दोनों दिव्यांग हैं और तीनकोनिया गैरेज के पास एक साल से कपड़ों की दुकान लगाकर किसी तरह जीवनयापन कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व दुकान संचालन में बाधा डालते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए धमकी भी देते हैं. जबकि वे नगर निगम की निर्धारित रसीद प्रतिदिन जमा करती हैं. महिला की पीड़ा सुनकर डीसी ने तत्काल सदर अनुमंडल पदाधिकारी को मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही महिला को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब आपको दोबारा यहां आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपका काम जल्द पूरा किया जाएगा.” उपायुक्त के इस मानवीय व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करने लगे. जन समाधान दिवस में अक्सर लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार एक अधिकारी का खुद फरियादी तक पहुंचना चर्चा का विषय बन गया. उपायुक्त श्री शेखावत की यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि संवेदनशील शासन वही है, जो जरूरतमंदों तक खुद पहुंचे. About the Author Rajneesh Singh जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 18:32 IST Source link

व्यापार

छोटा निवेश, बड़ा मुनाफा…. घर पर अगरबत्ती बनाने का आसान तरीका, ऐसे...

Last Updated:November 27, 2025, 13:21 IST घर से छोटा-सा काम शुरू करना हो तो अगरबत्ती बनाना सबसे आसान और फायदेमंद काम माना जाता है. इसमें न ज्यादा निवेश लगता है और न बड़ा सेटअप चाहिए. मशीन लगते ही काम शुरू हो जाता है और इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. इसलिए लोग इसे भरोसेमंद घरेलू कमाई का तरीका मानते हैं. घर पर अगरबत्ती का बिजनेस आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसकी मशीन की कीमत ज्यादा नहीं होती, बेसिक मॉडल 10–15 हजार रुपए में मिल जाता है. इसे चलाने के लिए न ज्यादा जगह चाहिए और न ही भारी बिजली खर्च. बस दो प्लग की सपोर्ट मिल जाए तो काम आराम से चल जाता है. मशीन की सेटिंग भी आसान रहती है, बस पाउडर सही डालना होता है और स्पीड को जरूरत के हिसाब से सेट कर देना होता है. अगर आपके पास रोज़ सिर्फ तीन से चार घंटे का समय भी है, तो यह काम आराम से किया जा सकता है. मशीन तेज़ी से चलती है, इसलिए कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन हो जाता है. सुबह या शाम, जिसके पास थोड़ा खाली समय होता है, वह इस काम को आसानी से फिट कर सकता है. यही वजह है कि कई महिलाएं और युवा इसे पार्ट-टाइम के तौर पर अपनाते हैं. अगरबत्ती का पाउडर तैयार करना भी एकदम सीधी प्रक्रिया है. लकड़ी का बुरादा, खुशबू का मिश्रण और कोयला पाउडर बराबर मात्रा में मिलाया जाता है. फिर पानी डालकर हल्की-सी गीली मिट्टी जैसी लोई बना ली जाती है. अगर पानी ज्यादा हो जाए तो मशीन ठीक से नहीं चलती, इसलिए मिश्रण को थोड़ा सख्त रखना पड़ता है. अच्छी क्वालिटी का पाउडर अगरबत्ती को मजबूत बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google याद रखें कि ताजा बनी अगरबत्ती को तुरंत पैक नहीं किया जाता. इन्हें 4–6 घंटे किसी खुली और सूखी जगह पर फैलाकर रखना होता है. यदि धूप बहुत तेज़ हो, तो रंग उड़ सकता है, इसलिए हल्की धूप या छांव में सुखाना बेहतर है. जो लोग तेज़ प्रोडक्शन करते हैं, वे घर में एक छोटा-सा सुखाने वाला रैक भी बना लेते हैं. अच्छी तरह सूखना जरूरी है, वरना टूटने की संभावना रहती है. अगरबत्तियों की सुगंध ही उनकी पहचान होती है. सूखने के बाद इन्हें अलग ट्रे में रखकर खुशबू का स्प्रे किया जाता है. कुछ लोग इसमें गुलाब, चंदन, मोगरा या पारंपरिक फ्लोरल मिक्स का इस्तेमाल करते हैं. ध्यान रखें कि स्प्रे हल्का-सा हो, वरना अगरबत्तियां गीली पड़ जाती हैं. अच्छी खुशबू वाला प्रोडक्ट तुरंत ग्राहकों में लोकप्रिय बन जाता है. अगरबत्ती की पैकिंग जितनी साफ-सुथरी होगी, उतना भरोसा बढ़ेगा। छोटे 10–20 स्टिक वाले पैक ज्यादा चलते हैं. पैकिंग के दौरान टूटे हुए टुकड़े निकाल देना चाहिए, क्योंकि खरीदार पहली नज़र में पैक देखकर ही निर्णय लेता है. लोकल प्रिंट वाली सिंपल पॉलिथीन भी ठीक चल जाती है, बस उस पर खुशबू और मात्रा जरूर लिखें. यही छोटा-सा कदम बिक्री बढ़ा देता है. पूरे साल चलने वाली सुगंधों में चंदन, मोगरा, गुलाब और लवेंडर टॉप पर रहती हैं. त्योहारों के समय खास फ्रेगरेंस जैसे कस्तूरी और हवन-सुगंध ज्यादा चलने लगती हैं. दुकानदार अक्सर उन्हीं खुशबुओं की मांग करते हैं जिनकी बिक्री उनकी दुकानों पर तेज़ रहती है. अगर कोई नया व्यक्ति शुरुआत कर रहा है, तो इन 4–5 खुशबुओं से काम शुरू करना सबसे सुरक्षित रहता है. अगरबत्ती के काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश बहुत कम लगता है. एक बार मशीन, पाउडर और पैकिंग का सेटअप हो जाए तो रोज़ का खर्च बहुत ही मामूली रहता है. लगातार डिमांड होने के कारण किसी भी मौसम में प्रोडक्शन बंद नहीं होता. इसी वजह से कई लोग इसे घर बैठे नियमित कमाई के तौर पर अपनाते हैं और महीने में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं. First Published : November 27, 2025, 13:21 IST Source link

झारखंड

पाकुड़ में 121 घंटे का हरि नाम संकीर्तन शुरू:शिव शीतला मंदिर में...

पाकुड़ शहर के शिव शीतला मंदिर में बुधवार से 121 घंटे का अखंड हरि नाम संकीर्तन शुरू हो गया है। विद्वान पुरोहितों द्वारा पूजा-पाठ, वैदिक मंत्रोच्चार और हवन पूजन के बाद इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। इस संकीर्तन में पश्चिम बंगाल, बिहार और राज्य के कई जिलों से कीर्तन मंडलियां पहुंची हैं। अगले पांच दिनों तक हरि नाम संकीर्तन से पूरा शहर भक्तिमय रहेगा। हरि नाम संकीर्तन के साथ-साथ पांच दिनों तक रुद्राभिषेक का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें दुमका जिले के बासुकीनाथ से आए विद्वान पुरोहित शामिल होंगे। संकीर्तन के शुभारंभ पर बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजकों को उम्मीद है कि अगले पांच दिनों तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोग हरि नाम संकीर्तन सुनने पहुंचेंगे। इस पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन भंडारे की भी व्यवस्था की गई है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पाकुड़ के शिव शीतला मंदिर में लगभग 100 वर्षों से हरि नाम संकीर्तन की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी यह अनुष्ठान उसी परंपरा के तहत शुरू किया गया है। आयोजन समिति का गठन पहले ही कर लिया गया था, जिसने संकीर्तन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। संकीर्तन स्थल पर भगवान की प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जिसकी पूजा-अर्चना पुरोहितों द्वारा की गई। Source link

शिक्षा

Union Bank 1865 Jobs Recruitment 2026

28 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1865 पदों पर भर्ती की, बिहार में हवलदार इंस्ट्रक्टर के 122 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने की। साथ में IIT भिलाई में नॉन टीचिंग के 47 पदों पर निकली ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1865 पदों पर भर्ती, आवेदन आज से शुरू यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। बैंक ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फीस जमा करने की लास्ट डेट भी 19 मई तय की गई है। स्टेट वाइस वैकेंसी डिटेल्स : स्टेट का नाम पदों की संख्या उत्तर प्रदेश 335 आंध्र प्रदेश 303 महाराष्ट्र 196 तेलंगाना 164 कर्नाटक 131 मध्य प्रदेश 116 तमिलनाडु 95 बिहार 60 गुजरात 58 ओडिशा 58 पश्चिम बंगाल 56 दिल्ली (NCT) 48 केरल 39 झारखंड 34 राजस्थान 32 हरियाणा 30 असम 29 छत्तीसगढ़ 25 पंजाब 21 उत्तराखंड 10 चंडीगढ़ 6 गोवा 5 दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव 2 जम्मू और कश्मीर 2 सिक्किम 2 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 1 हिमाचल प्रदेश 1 लद्दाख 1 लक्षद्वीप 1 मेघालय 1 नागालैंड 1 पुदुचेरी 1 त्रिपुरा 1 कुल 1865 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन की डिग्री। ग्रेजुएशन का रिजल्ट 1 अप्रैल 2026 या उससे पहले जारी हो जाना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 28 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम लोकल लैंग्वेज टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम स्टाइपेंड : ग्रामीण या सेमी-अर्बन (अर्ध-शहरी) एरिया : 15,000 रुपए प्रतिमाह शहरी क्षेत्र में पोस्टिंग होने पर : 18,000 रुपए प्रतिमाह मेट्रो सिटी में पोस्टिंग होने पर : 20,000 रुपए प्रतिमाह फीस : कैटेगरी का नाम एग्जाम फीस इंटिमेशन फीस टोटल सामान्य/ओबीसी पुरुष 600 रुपए 200 रुपए 944 रुपए सामान्य/ओबीसी महिला 400 रुपए 200 रुपए 708 रुपए एससी/एसटी 0 200 रुपए 236 रुपए पीडब्ल्यूबीडी (PwBD) 0 200 रुपए 236 रुपए ट्रांसजेंडर 0 200 रुपए 236 रुपए जरूरी डॉक्यूमेंट्स : 10वीं की मार्कशीट 12वीं की मार्कशीट ग्रेजुएशन / डिग्री / डिप्लोमा उम्मीदवार का फोटो और सिग्नेचर जाति प्रमाण पत्र उम्मीदवार का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी आधार कार्ड एग्जाम पैटर्न : सब्जेक्ट टोटल क्वेश्चन टोटल मार्क्स जनरल/फायनेंशियल अवेयरनेस 25 25 जनरल इंग्लिश 25 25 क्वांटिटेटिव एंड रीजनिंग एप्टीट्यूड 25 25 कंप्यूटर नॉलेज 25 25 टोटल 100 100 ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट unionbankofindia.co.in पर जाएं। होम पेज पर भर्ती से संबंधित लिंक पर क्लिक करें। Click here for New Registration पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। अन्य जानकारी अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक बिहार में हवलदार इंस्ट्रक्टर के 122 पदों पर भर्ती, BPSSC ने बिहार पुलिस हवलदार इंस्ट्रक्टर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या सामान्य 48 एससी 19 एसटी 2 ओबीसी ईडब्ल्यूएस 12 ईबीसी 22 बीसी 15 बीसी – डब्ल्यू (पिछड़े वर्ग की महिलाएं) 4 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल बिहार सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट सैलरी : 25,500 – 81,100 रुपए प्रतिमाह फीस : सभी वर्ग के लिए : 100 रुपए एग्जाम पैटर्न : एग्जाम टाइप ऑब्जेक्टिव कुल प्रश्नों की संख्या 100 कुल अंक 100 (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का) ड्यूरेशन 02 घंटे न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स 30% एग्जाम सिलेबस : लैंग्वेज: हिन्दी, अंग्रेजी। मैथ्स: बेसिक एरिदमेटिक सोशल साइंस : हिस्ट्री, जियोग्राफी, सिविक्स एंड इकोनॉमिक्स साइंस: फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, बॉटनी जनरल नॉलेज: जनरल नॉलेज एंड करेंट अफेयर्स ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट btsc.bihar.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए भर्ती विज्ञापन पर क्लिक करें। ई ऑनलाइन पर क्लिक करके फॉर्म भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म भरकर फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. आईआईटी भिलाई में 47 पदों पर भर्ती, एज लिमिट 40 साल आईआईटी भिलाई में नॉन टीचिंग के 47 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या असिस्टेंट रजिस्ट्रार 2 जूनियर सुपरिटेंडेंट 4 जूनियर असिस्टेंट 15 टेक्निकल ऑफिसर 2 असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर 1 मेडिकल ऑफिसर 1 जूनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट 3 जूनियर स्पोर्ट्स ऑफिसर 1 जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट 14 जूनियर मैकेनिक 4 कुल पदों की संख्या 47 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : असिस्टेंट रजिस्ट्रार : मास्टर डिग्री, 8 साल का अनुभव जूनियर सुपरिटेंडेंट : मास्टर डिग्री, 3 साल का अनुभव जूनियर असिस्टेंट : बैचलर डिग्री टेक्निकल ऑफिसर : एम टेक, एमई, 5 साल का एक्सपीरियंस असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर : बीटेक, एमई, 7 साल का एक्सपीरियंस मेडिकल ऑफिसर : एमबीबीएस, 3 साल का एक्सपीरियंस जूनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट : बैचलर डिग्री जूनियर स्पोर्ट्स ऑफिसर : बीपीएड के साथ एक्सपीरियंस जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट : इंजीनियरिंग की डिग्री जूनियर मैकेनिक : इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ एक्सपीरियंस एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल आयु में छूट नियमों के अनुसार दी जाएगी। फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (समूह ए) : 1000 रुपए एससी,एसटी,पीडब्ल्यूडी (समूह ए) : 500 रुपए सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (समूह बी, सी) : 500 रुपए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/दिव्यांग (समूह बी, सी) : 250 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम स्किल टेस्ट इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल टेस्ट सैलरी : पद के अनुसार, लेवल – 3 – लेवल – 10 के अनुसार एग्जाम सिलेबस : जनरल टॉपिक्स : जनरल नॉलेज रीजनिंग क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड इंग्लिश, हिंदी टेक्निकल टॉपिक्स : इंजीनियरिंग सब्जेक्ट आई, नेटवर्किंग मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल कॉन्सेप्ट्स कंप्यूटर नॉलेज ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.ibitf.co.in पर जाएं। अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके डिटेल्स दर्ज

झारखंड

वज्रपात से दो की मौत, चार घायल:गिरिडीह के चंदौरी में हुई घटना,...

गिरिडीह जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के चंदौरी गांव में बुधवार शाम वज्रपात हुआ। सकरी नदी किनारे आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम अचानक मौसम बदला और तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए बेलवाना निवासी 30 वर्षीय आफताब अंसारी, चंदौरी निवासी 26 वर्षीय राजू तुरी, 12 वर्षीय नूनमनी कुमार, 24 वर्षीय अमन कुमार तुरी, चरना रविदास और चंदन कुमार सकरी नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान तेज आवाज के साथ वज्रपात हुआ, जिसकी चपेट में सभी छह लोग आ गए। वज्रपात इतना तीव्र था कि नूनमनी कुमार और अमन कुमार तुरी की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। चंदौरी स्थित एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया आफताब अंसारी और राजू तुरी गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि चरना रविदास और चंदन कुमार को भी चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सभी घायलों को चंदौरी स्थित एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया। निजी क्लीनिक में आफताब अंसारी और राजू तुरी का इलाज चल रहा है। मृतकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। Source link

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Exit Poll 2026 Results LIVE | एग्जिट पोल पश्चिम बंगाल 2026 |...

Exit Poll Results LIVE Updates: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल नतीजे भी आज ही जारी किए जा रहे हैं. इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज 29 अप्रैल को वोट डाले गए. शाम 5 बजे तक राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाती है. चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार, शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर पाबंदी है. इसके बाद ही सर्वे एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर सकेंगी. Tamil Nadu Exit Poll 2026 लाइव: तमिलनाडु में गठबंधनों की जंग से बदला चुनावी समीकरण तमिलनाडु चुनाव 2026 में मुकाबला अब पूरी तरह गठबंधनों पर टिक गया है. डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन एम के स्टालिन के साथ मैदान में है. दूसरी तरफ एआईएडीएमके गठबंधन ई के पलानीस्वामी के नेतृत्व में चुनौती दे रहा है. इस बार विजय की तमिलगा वेत्री कषगम की एंट्री ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है. राज्यभर में त्रिकोणीय और बहुकोणीय टक्कर चुनावी तस्वीर बदल सकती है. तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026 लाइव: 10 हॉट सीटें जो तय करेंगी सत्ता की दिशा तमिलनाडु की कई हॉट सीटें ऐसी हैं जहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है. कोलाथुर में एम के स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो एडप्पाडी सीट ई के पलानीस्वामी के लिए अहम है. कोयंबटूर साउथ में शहरी वोटर बड़ा फैक्टर बन सकते हैं. मदुरै सेंट्रल और सलेम में सीधी टक्कर का माहौल है. तिरुचिरापल्ली वेस्ट को स्विंग सीट माना जा रहा है. चेन्नई सेंट्रल क्षेत्र शहरी रुझान दिखाएगा. बोडिनायकनूर, तिरुप्पुर और कन्याकुमारी में बहुकोणीय मुकाबला चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है. असम एग्जिट पोल LIVE: 75 सीटों के आसपास मजबूत बढ़त असम विधानसभा चुनाव का एग्जिट पोल: आंकड़ों के मुताबिक करीब 75 सीटों का आंकड़ा आरामदायक जीत की ओर इशारा करता है. यह स्थिति सरकार को स्थिरता देती है और भविष्य में उपचुनाव या दल बदल जैसे झटकों को संभालने की क्षमता बढ़ाती है. इससे शासन में निरंतरता और नीति लागू करने में तेजी देखने को मिल सकती है. असम एग्जिट पोल अपडेट LIVE: 64 सीट पार करते ही बहुमत तय, सरकार बनना लगभग तय असम विधानसभा में 64 सीट का आंकड़ा स्पष्ट बहुमत की सीमा माना जाता है. जो भी दल या गठबंधन इस आंकड़े को पार करेगा, वह बिना बाहरी समर्थन के सरकार बना सकेगा. साल 2021 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह आंकड़ा आसानी से पार किया था. एग्जिट पोल 2026 LIVE: क्या आपको एग्जिट पोल्स पर भरोसा करना चाहिए? एग्जिट पोल्स को अंतिम नतीजा नहीं, बल्कि एक ‘संकेत’ (Signal) के तौर पर देखना चाहिए. ये ट्रेंड समझने और हवा का रुख पहचानने के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन इन्हें 100% सटीक मान लेना सही नहीं है. असली तस्वीर तो 4 मई, 2026 को ही साफ होगी, जब ईवीएम (EVM) के पिटारे खुलेंगे. तब तक ये आंकड़े सिर्फ एक चर्चा और विश्लेषण का आधार मात्र हैं. Exit Poll 2026 Results LIVE: आखिर क्यों फेल हो जाते हैं बड़े-बड़े एग्जिट पोल्स? इतनी मेहनत और गणित के बावजूद एग्जिट पोल्स कई बार पूरी तरह गलत साबित होते हैं. इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं: साइलेंट वोटर: अगर कोई खास वर्ग अपनी पसंद छुपा ले, तो पूरा कैलकुलेशन बिगड़ जाता है. झूठे जवाब: कई बार वोटर दबाव में या डर के मारे गलत जानकारी दे देता है. सैंपल एरर: अगर सैंपल में हर वर्ग का सही प्रतिनिधित्व नहीं है, तो नतीजा गलत आएगा. टर्नआउट का अनुमान: सर्वे इस आधार पर होता है कि कितने लोग वोट देने आएंगे, लेकिन एक्चुअल टर्नआउट कम-ज्यादा होने पर गणित फेल हो जाता है. गठबंधन और लोकल फैक्टर: भारत जैसे विविधता वाले देश में गठबंधन और स्थानीय प्रत्याशियों का प्रभाव नेशनल लेवल के डेटा को मात दे देता है. Exit Poll Results 2026 LIVE: एजेंसियां अलग-अलग नतीजे क्यों दिखाती हैं? अक्सर देखा जाता है कि एक चैनल किसी पार्टी की जीत दिखा रहा है, तो दूसरा कड़े मुकाबले की बात करता है. इसके पीछे कई कारण हैं: सैंपलिंग में अंतर: कोई एजेंसी शहरी इलाकों पर ज्यादा फोकस करती है, तो कोई ग्रामीण बेल्ट पर. सवाल पूछने का तरीका: अगर सवाल पूछने का ढंग थोड़ा भी अलग हो, तो वोटर का जवाब बदल सकता है. नो-रिस्पॉन्स का इलाज: बहुत से लोग यह नहीं बताते कि उन्होंने किसे वोट दिया. एजेंसियां अपनी समझ के हिसाब से इन ‘साइलेंट वोटर्स’ का अनुमान लगाती हैं. वेटिंग फॉर्मूला: डेटा को एडजस्ट करने का हर एजेंसी का अपना सीक्रेट फॉर्मूला होता है. Exit Poll 2026 Results LIVE: डेटा की वेटिंग और वोटों से सीटों का पेचीदा गणित ग्राउंड से जो डेटा आता है, उसे वैसा का वैसा नहीं दिखाया जाता. इस ‘रॉ डेटा’ पर स्टैटिस्टिकल वेटिंग (Statistical Weighting) अप्लाई की जाती है. मान लीजिए किसी इलाके में महिलाओं ने कम जवाब दिए, तो उनके डेटा को आनुपातिक रूप से बढ़ा दिया जाता है ताकि बैलेंस बना रहे. सबसे कठिन काम है वोटों को सीटों में बदलना. भारत में ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ सिस्टम है. इसका मतलब है कि अगर किसी पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 1-2% भी ऊपर-नीचे होता है, तो सीटों की संख्या में भारी अंतर आ सकता है. यहीं पर अलग-अलग एजेंसियों के दावों में अंतर दिखने लगता है क्योंकि हर एजेंसी का कैलकुलेशन मॉडल अलग होता है. Exit Poll 2026 LIVE: भारत में एग्जिट पोल का प्रोसेस, जमीन पर क्या होता है? एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां जैसे एक्सिस माई इंडिया, सी-वोटर या CSDS-लोकनीति एक खास पैटर्न फॉलो करती हैं. यह प्रक्रिया कुछ स्टेप्स में पूरी होती है: निर्वाचन क्षेत्रों और पोलिंग बूथों का चुनाव: देश के हर बूथ पर जाकर सर्वे करना नामुमकिन है. इसलिए, एजेंसियां एक ‘रिप्रेजेंटेटिव सैंपल’ चुनती हैं. इसमें इलाके के पुराने वोटिंग पैटर्न, जातिगत समीकरण और डेमोग्राफिक फैलाव को ध्यान में रखा जाता है. ग्राउंड फील्ड सर्वे: वोटिंग के दिन सर्वे करने

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