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Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile

Hindi News Career Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile 2 दिन पहले कॉपी लिंक भारत के मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 26 अप्रैल को निधन हो गया। वे 83 साल के थे। रघु इंडियन फोटोग्राफी के जनक माने जाने वाले रघु राय अपनी तस्वीरों से कहानियां कहने के लिए मशहूर थे। देश- दुनिया की बड़ी घटनाएं आज भी उनकी तस्वीरों में जिंदा है। 1942 में भारत में जन्मे रघु राय बचपन से ही फोटोग्राफी के शौकीन थे। अक्सर पिता के कैमरे से फोटो लिया करते थे। 1964 में रघु ने उन्होंने पिता के कहने पर सिविल इंजीनियरिंग की। 1965 में फोटोग्राफी शुरू की और जल्द फोटोग्राफी की दुनिया में उनकी ख्याति ने उन्हें इस दुनिया का कल्ट फिगर बना दिया। पहली तस्वीर ‘लंदन टाइम्स’ में छपी रघु राय ने अपने कैमरे से जो पहली तस्वीर ली थी वो ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। उन्होंने एक बार अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने बड़ी मशक्कत से एक गधे की तस्वीर ली थी, जिसे उनके बड़े भाई एस पॉल ने विदेश के कुछ अखबारों के लिए भेज दिया था और उनकी वो तस्वीर सिलेक्ट भी हुई और उसे ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। इसके लिए उन्हें मौटी रकम भी मिली थी। मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा के करीब रहे रघु राय काम के सिलिसिले में मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा जैसी बड़ी हस्तियों के करीब रहे। सभी हस्तियों की ज्यादातर क्लोज अप तस्वीरें उन्होंने ली, जो आज तक भी सबसे चर्चित हैं। उनकी तस्वीरों में वे इन हस्तियों के इमोशन को बखूबी कैप्चर करते थे। मदर टेरेसा को रघु राय मां मानते थे। उनके साथ उनका ये रिश्ता लगभग पचास सालों तक रहा। 1967 से लेकर 1984 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या तक रघु राय ने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को कवर किया। दलाई लामा पर उन्होंने किताब लिखी- ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, जिसमें उन्होंने करीब 4 दशक तक की उनकी तस्वीरों को शामिल किया। दलाई लामा के 80वें जन्मदिन पर ली गई तस्वीर। गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर खींची ‘बरियल ऑफ एन अननोन चाइल्ड’ 2 दिसंबर 1984 को भोपाल में हुई गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर है। इसी तस्वीर से दुनिया ने इस त्रासदी के दर्द को पहचाना था। ये तस्वीर भी रघु राय ने ली थी, जो आज भी गैस त्रासदी का डॉक्यूमेंट है। 1984 में गैस त्रासदी में मरे बच्चे को दफनाते हुए ली गई फोटो। 1984 में गैस त्रासदी में एबोर्टेड फीटस। 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड प्लांट से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) के रिसाव से लगभग 3,500 लोगों की तुरंत मौत हो गई थी। बाद के सालों में इससे पीड़ित करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई। इस त्रासदी की तस्वीरें मैग्नम और कई वर्ल्ड मैगजीन्स में छपी। जिनसे दुनिया को इस त्रासद घटना की जानकारी मिली। त्रासदी में गैस लीक से अंधे हुए लोगों की तस्वीर। बांग्लादेश युद्ध को तस्वीरों में दर्ज किया, पद्मश्री मिला 1971 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान भारत आए शरणार्थियों की तस्वीरें ली। उन तस्वीरों में उन्होंने उनकी चिंताएं, बेचैनी और बेबसी कैद की, जो आज भी उस युद्ध के दहशत की याद दिलाती है। रघु ने इस युद्ध और 1971 में पाकिस्तानी आर्मी के सरेंडर को भी दर्ज किया है। 1971 बांग्लादेश युद्ध के दौरान आए शरणार्थियों में से एक बच्चा। 1971 में युद्ध के दौरान भारत में शरण लेने आए लोगों ने डिस्कार्डेड ह्यूम पाइप्स को अपना घर बनाया था। इस दौरान ली गई बेहतरीन तस्वीरों के लिए 1972 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 1960 के दशक से स्ट्रीट फोटोग्राफी में दिलचस्पी रघु राय ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा जैसी बड़ी हस्तियों की जिंदगी को तो तस्वीरों में कैद किया, लेकिन अपने समय की आम जिंदगी को असली रूप में कैप्चर करना उन्हें बेहद पसंद था। वे बनावटी या सजावटी फोटो खींचने में दिलचस्पी नहीं रखते थे। यही कारण है कि सिनेमा की दुनिया ने उन्हें कभी प्रभावित नहीं किया। उन्होंने भारतीय जन जीवन की हजारों तस्वीरें ली। अपनी तस्वीरों में उन्होंने भारतीय संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद खूबसूरती से कैद किया है। आजाद भारत के ‘विजुअल रिकॉर्ड’ कहे गए आजादी के बाद का भारत रघु की तस्वीरों में नजर आता है। उनकी तस्वीरें आजादी के बाद के बनते-बिगड़ते, उठते-गिरते-संभलते भारत की जीवंत दास्तान बताती हैं। इसलिए रघु राय को आजाद भारत का ‘विजुअल रिकॉर्ड’ यानी फोटो कथाकार भी कहा जाता है। 1964 में पुरानी दिल्ली का चावड़ी बाजार। 1970 में पुरानी दिल्ली में ली गई तस्वीर। ये लगभग बराबर उम्र के दो लोगों की बिलकुल अलग स्थितियों को दिखाती है। 1966 में हरियाणा में एक महिला। 1995 में मुबंई के चर्च गेट स्टेशन पर ली गई तस्वीर। ‘मैग्नम फोटोज’ के लिए नॉमिनेट हुए मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रेसन रघु के मेंटर थे। हेनरी, रघु के पेरिस में गैलरी डेलपायर एग्जिबिशन से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद हेनरी ने 1977 में मैग्नम फोटोज के लिए नॉमिनेट किया। मैग्नम वर्ल्ड्स प्रेस्टीजियस इंटरनेशनल फोटोग्राफर्स को-ऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन है। इसमें दुनियाभर के टॉप फोटोग्राफर्स ही शामिल हो सकते हैं। 1967 में दिल्ली में एक कांग्रेस बैठक में इंदिरा गांधी की एक सशक्त तस्वीर। सोशल स्ट्रक्चर को चैलेंज करती ऐसी कई तस्वीरें उन्होंने ली। 2017 में बेटी अवनी राय ने रघु राय: एन अनफ्रेम्ड डॉक्यूमेंट्री बनाई। इसे बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग बासु ने प्रोड्यूस की थी। रघु फोटोग्राफर नहीं होते तो माली होते रघु राय को फूल-पौधे बहुत पसंद थे। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मुझे फोटोग्राफर से जितना प्यार है, उतना ही लगाव मुझे बागवानी से है। अगर मैं फोटोग्राफर नहीं होता तो पक्का माली होता।’ वे अक्सर अपना छुट्टी का दिन अपने फार्म हाउस पर फूल-पौधों की देखभाल करते बिताते थे। उनकी छुट्टियां अक्सर ऐसी ही बीतती थी। उन्हें प्रकृति से इतना प्यार था कि दुनिया भर से फूल-पौधे इकट्ठा किया करते थे। 57 किताबें लिखी, वर्ल्ड कॉन्टेस्ट जज किया रघु राय ने करीब 57 किताबें लिखी हैं। ‘रघु राय की दिल्ली’, ‘सिख’, ‘कोलकाता’, ‘खजुराहो’, ‘ताजमहल’, ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, ‘भारत’ और ‘मदर टेरेसा’ किताबें काफी चर्चित हैं।

झारखंड

कॉपर वायर लूटकांड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार:गिरिडीह में 15 लाख से...

गिरिडीह जिले के निनियांघाट थाना क्षेत्र में हुए 15 लाख रुपए से अधिक के कॉपर वायर लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके पास से लूटे गए तार, घटना में प्रयुक्त वाहन, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। यह घटना 26/27 अप्रैल 2026 की रात डीबीसी निनियांघाट सब स्टेशन के पीछे एक खेत में हुई थी। यहां 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए रेलवे के माध्यम से केबल बिछाने का काम चल रहा था। मौके पर कनेक्शन लाइन के लिए भारी मात्रा में कॉपर वायर रखा हुआ था। अपराधियों ने वहां मौजूद गार्ड अनिल कुमार महतो और रंजीत ठाकुर को डरा-धमकाकर बंधक बना लिया और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद, उन्होंने लगभग 193 मीटर कॉपर वायर काट लिया, जिसकी अनुमानित कीमत 15 लाख 58 हजार 316 रुपए है। गार्डों से उनके मोबाइल फोन और करीब 5 हजार रुपए नकद भी छीन लिए गए। घटना के बाद निनियाँघाट थाना में कांड संख्या 41/26 के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुमित कुमार डुमरी और पुलिस निरीक्षक डुमरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। धनबाद निवासी तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने इस मामले में धनबाद निवासी तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान कल्लू कुमार उर्फ कल्लू पासी (23), राजू भुईयां उर्फ कारू भुईयां (25) और नरेश भुईयां उर्फ बिट्टवल भुईयां उर्फ कुटुम्ब (32) के रूप में हुई है। गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर पुलिस ने 267 किलोग्राम कॉपर तार, 39 किलोग्राम केबल का काला कवर, घटना में प्रयुक्त पिकअप, दो मोबाइल फोन, 38 हजार रुपए नकद, हेक्सा आरी और ब्लेड बरामद किए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सभी अपराधियों का आपराधिक इतिहास रहा है। कल्लू पासी वर्ष 2019 में, राजू भुईयां वर्ष 2016 में और नरेश भुईयां वर्ष 2023 में धनबाद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में जेल जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस इनके अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई में डुमरी अंचल के राजेंद्र प्रसाद महतो, थाना प्रभारी सुमन कुमार सहित निमियाँघाट थाना, डुमरी थाना और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मी शामिल रहे। Source link

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125 साल से दिल ठंडा कर रही राठी रबड़ी, आहोर की देसी...

X 125 साल से दिल ठंडा करती राठी रबड़ी, आहोर की देसी मिठास, देखें वीडियो   125 Year Old Rathi Rabri Of Jalore : राजस्थान की तपती गर्मी में जहां लोग ठंडक के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढते हैं, वहीं जालौर जिले के आहोर की एक खास देसी मिठाई लोगों को सुकून दे रही है. यह कोई आम मिठाई नहीं, बल्कि करीब 125 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी राठी रबड़ी है, जो अपने अनोखे स्वाद और ठंडक देने वाले गुणों के कारण आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. राजकीय अस्पताल के सामने स्थित राठी मिष्ठान भंडार पर तैयार होने वाली यह रबड़ी शुद्ध गाय के दूध से बनाई जाती है और इसमें बेहद कम शक्कर डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद हल्का, प्राकृतिक और अलग महसूस होता है. गर्मी के दिनों में इस रबड़ी की मांग इतनी बढ़ जाती है कि कई बार लोगों को पहले से ऑर्डर देना पड़ता है. रोजाना 10 से 12 किलो तक बनने वाली यह रबड़ी शादी-समारोहों और खास मौकों पर भी खूब पसंद की जाती है. खास बात यह है कि आम लोगों के साथ-साथ कई बड़े नेता और वीआईपी भी इसके स्वाद के दीवाने रह चुके हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी पुराने तरीके से निभाई जा रही है, जो इसे और खास बनाती है. Source link

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मां ने बेटियों को बचाया, खुद डैम में डूबी:कोडरमा के असराइन डैम...

कोडरमा जिले के सतगावां में असराइन डैम में बुधवार को एक महिला की डूबने से मौत हो गई। महिला अपनी दो बेटियों को बचाने के प्रयास में गहरे पानी में समा गई। यह घटना माधोपुर पंचायत के असराइन डैम में हुई। लेम्बो निवासी सरिता देवी (35) अपनी दो मासूम बेटियों के साथ डैम में कपड़े धोने गई थीं। कपड़े धोते समय अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी की ओर बहने लगीं। मां को डूबता देख दोनों बेटियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, पानी का बहाव और गहराई अधिक होने के कारण सरिता ने महसूस किया कि उनकी बेटियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर दोनों बच्चियों को सुरक्षित किनारे की ओर धकेल दिया। बेटियां तो बच गईं, लेकिन सरिता खुद को नहीं बचा सकीं और गहरे पानी में डूब गईं। बच्चियों ने भागकर गांव वालों को सूचना दी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद सरिता का शव पानी से बाहर निकाला। सतगावां थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल कोडरमा भेज दिया। ग्रामीणों के अनुसार, सरिता देवी का मायका बजानियां और ससुराल धर्मपुर में है। वह फिलहाल लेम्बो में आवास योजना के तहत बने अपने नए घर में रह रही थीं। सरिता अपने पीछे पांच बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। इस घटना के बाद पूरे माधोपुर पंचायत में शोक का माहौल है। असराइन डैम, जिसका उपयोग ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते हैं, अब इस दुखद हादसे का गवाह बन गया है। Source link

झारखंड

Jamshedpur की अर्पिता ने बनाई बच्चों के लिए नई राह, किताबों से...

Last Updated:April 29, 2026, 16:41 IST जमशेदपुर की जरूरतमंद बच्चों के लिए एक खास पहल कर रही हैं. उन्होंने एक छोटी लाइब्रेरी शुरू की है, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सीख भी दी जाती है. हर दिन शाम 5 से 8 बजे तक आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे यहां आते हैं. इस लाइब्रेरी की खास बात यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उनके हुनर को भी निखारा जाता है. जमशेदपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उनके पास अपने अलावा किसी और के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है. हर व्यक्ति अपने काम, मोबाइल और जिम्मेदारियों में उलझा रहता है. ऐसे समय में जमशेदपुर की अर्पिता एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं, जिन्होंने अपना समय जरूरतमंद बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है. अर्पिता पिछले कई वर्षों से इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) से जुड़ी हुई हैं. उनकी सोच सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. उनका मानना है कि जीवन में केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समझ भी उतनी ही जरूरी है. इसी विचार के साथ उन्होंने एक छोटी सी लाइब्रेरी की शुरुआत की, जो आज कई बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है. हर दिन शाम 5 बजे से 8 बजे तक अर्पिता अपनी लाइब्रेरी में आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बुलाती हैं. ये बच्चे मुख्य रूप से स्टाफ क्वार्टर और आउटहाउस में रहने वाले परिवारों से आते हैं. स्कूल और ट्यूशन के बाद वे यहां पहुंचते हैं, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पसंद की गतिविधियों में भाग लेने की पूरी आजादी मिलती है. इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया ही नहीं जाता, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को भी निखारा जाता है. कोई बच्चा गिटार बजाना सीख रहा है, तो कोई तबला और हारमोनियम में रुचि ले रहा है. कुछ बच्चे फेस पेंटिंग करते हैं, तो कुछ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति करना सीख रहे हैं. वहीं, कुछ बच्चे गजल गाने और उर्दू सीखने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यहां हर बच्चे को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है. अर्पिता बच्चों को समाज और इतिहास से जोड़ने का भी प्रयास करती हैं. अंबेडकर जयंती और अन्य महान व्यक्तित्वों की जयंती जैसे खास अवसरों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को देश के महान कलाकारों, लेखकों और समाजसेवियों के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक बनता है. वर्तमान में इस लाइब्रेरी में करीब 20 से 25 बच्चे नियमित रूप से आते हैं. यहां आकर वे न सिर्फ नई चीजें सीख रहे हैं, बल्कि अपने सपनों को भी साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अर्पिता का यह छोटा सा प्रयास इन बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है. वास्तव में, जहां एक ओर लोग अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं अर्पिता जैसे लोग समाज के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं. उनका यह कार्य सराहनीय है. साथ ही, यह भी दर्शाता है कि यदि इच्छा हो, तो हम भी किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 16:41 IST Source link

व्यापार

नौकरी से थक गए? सिर्फ 50,000 में बनाएं अपना खुद का कारोबार,...

Last Updated:December 22, 2025, 16:43 IST अगर हर महीने की नौकरी, बढ़ता खर्च और सीमित आमदनी आपको परेशान कर रही है और मन में सवाल है कि क्यों न अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया जाए, तो यह खबर आपके लिए है. आज के दौर में सही सोच और सही प्लानिंग के साथ आप मात्र 50,000 में भी अपना मजबूत कारोबार खड़ा कर सकते हैं और कम निवेश में बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. आइए जानते है इसके बारे में.. अगर आप कम लागत में अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं और अच्छा मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो क्लाउड किचन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. इस बिज़नेस को आप सिर्फ 50 हजार में अपने घर की रसोई से शुरू कर सकते हैं. किराए की दुकान की जरूरत नहीं होती और ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स के साथ लोकल ऑर्डर से भी रोज़ की कमाई संभव है. स्वाद और सफाई का ध्यान रखकर महीने में लाखों रुपये तक का टर्नओवर बनाया जा सकता है. अगर आप कम पूंजी में खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो मशरूम फार्मिंग आपके लिए एक सही विकल्प है. इसे आप सिर्फ 40–50 हजार में किसी कमरे या शेड में शुरू कर सकते हैं. मशरूम 15–20 दिन में तैयार हो जाता है और होटल, सब्ज़ी मंडी और दुकानों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सही देखभाल और नियमित सप्लाई के साथ यह बिज़नेस कुछ ही महीनों में लाखों की कमाई देने लगता है. अगर आप कम जगह और कम लागत में खेती से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग एक आधुनिक और लाभकारी बिज़नेस है. इसे आप सिर्फ 30–50 हजार में घर की छत या कमरे से शुरू कर सकते हैं. माइक्रोग्रीन्स 7–10 दिन में तैयार हो जाते हैं और होटल, जिम और हेल्थ किचन में ऊंचे दामों पर बिकते हैं. तेजी से बढ़ती हेल्थ डिमांड इसे लाखों कमाने वाला भविष्य का बिज़नेस बनाती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आप कम पैसों में तेज़ मुनाफा कमाने वाला बिज़नेस ढूंढ रहे हैं, तो जूस और हेल्थ ड्रिंक स्टॉल एक शानदार विकल्प है. सिर्फ 50 हजार में ठेला, मशीन और कच्चा माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. गर्मी हो या सर्दी, हेल्दी ड्रिंक्स की मांग हमेशा बनी रहती है. रोज़ की नकद बिक्री और 50% से ज्यादा मुनाफा इसे आम लोगों के लिए फायदेमंद बिज़नेस बनाता है. अगर आप कम लागत में अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं और अच्छा मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो मोबाइल रिपेयरिंग एक बेहतरीन विकल्प है. आज हर व्यक्ति मोबाइल इस्तेमाल करता है और खराबी आना आम बात है. सिर्फ 40–50 हजार में टूल्स लेकर और कुछ दिनों की ट्रेनिंग से यह काम छोटी दुकान या घर से शुरू किया जा सकता है. मोबाइल रिपेयर के साथ कवर, चार्जर और एक्सेसरीज़ बेचकर कमाई और बढ़ाई जा सकती है. सही स्किल के साथ यह बिज़नेस लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : December 22, 2025, 16:43 IST Source link

शिक्षा

ISRO Opens Astronaut Cadre to Public for Gaganyaan Mission

Hindi News Career ISRO Opens Astronaut Cadre To Public For Gaganyaan Mission | STEM Experts Join 2 दिन पहले कॉपी लिंक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलने का फैसला किया है। इसरो की एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। हालांकि इसका क्राइटेरिया अभी जारी नहीं किया गया है। कमेटी की सिफारिश में कहा गया है कि गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के दूसरे बैच में वायुसेना के 6 पायलट के साथ 4 सिविलियन स्पेशलिस्ट शामिल किए जाएं। ये सिविलियन साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ (STEM) बैकग्राउंड से होंगे। पहला बैच सिर्फ पायलटों का, दूसरे में आम लोगों के एंट्री पहला बैच: गगनयान मिशन की शुरुआत के लिए (सिर्फ वायुसेना के पायलट)। दूसरा बैच: भविष्य के मिशनों और रिसर्च के लिए (पायलट + आम नागरिक/साइंटिस्ट)। ट्रेनिंग में साढ़े 4 साल लगेंगे, 2030 तक तैयार होगा दूसरा बैच एक एस्ट्रोनॉट को चुनने से लेकर उसकी ट्रेनिंग और मिशन की तैयारी में करीब साढ़े 4 साल (54 महीने) का समय लगता है। कमेटी ने लक्ष्य रखा है कि दूसरे बैच को अगले 72 महीनों में और तीसरे बैच को 96 महीनों में पूरी तरह तैयार कर लिया जाए। चौथे गगनयान मिशन से शुरू होगी सिविलियंस की उड़ान भले ही दूसरे बैच में सिविलियंस को शामिल किया जा रहा है, लेकिन वे तुरंत अंतरिक्ष में नहीं जाएंगे। कमेटी की योजना के अनुसार, सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स को चौथे मानव मिशन से चालक दल का हिस्सा बनाया जाएगा। दुनिया भर में यह परंपरा रही है कि तकनीक के परिपक्व होने से पहले मिलिट्री बैकग्राउंड वाले पायलटों को ही भेजा जाता है, इसके बाद ही नागरिकों की बारी आती है। गगनयान मिशन के पहले बैच में 4 एस्ट्रोनॉट्स शामिल मिशन गगनयान ISRO का पहला क्रू वाला स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम है, जो 2027 तक लॉन्च होगा। ये 3 दिन का एक मिशन होगा। इसमें 3 एस्ट्रोनॉट्स 400 किमी की यात्रा कर अंतरिक्ष में जाएंगे। उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले बैच में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं। ISRO के पहले बैच में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के टेस्ट पायलट शामिल थे। इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट किया गया था। इन एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट करने का उद्देशय पहले क्रू मिशन को सुरक्षित पहुंचाना है। पहले बैच में फाइटर प्लेन के एयर कमांडर प्रशांत बी नायर, जीपी कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जीपी कैप्टन अजीत कृष्णन, जीपी कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हुए थे। दूसरे बैच में इंडियन आर्मी के फाइटर जेट के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी शामिल हो सकते हैं। तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट में से 10 सिविलियन होंगे सातवें मिशन के बाद इसरो अपने मिशन की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे एक साथ 3 एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में जा सकेंगे। इसके लिए तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट्स की जरूरत होगी। इस बैच में रेशियो पूरी तरह बदल जाएगा, जिसमें केवल 2 मिशन पायलट और 10 सिविलियन स्पेशलिस्ट शामिल किए जाएंगे। ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है। सालाना दो मिशन और 40 एस्ट्रोनॉट्स का पूल बनाने की तैयारी इसरो अब एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत साल में दो मानव मिशन भेजने की योजना है। कमेटी ने अनुमान लगाया है कि लंबे समय की जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को देखते हुए भारत को कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का एक मजबूत पूल तैयार करना चाहिए। इन्फ्रास्ट्रक्चर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम में देरी बड़ी चुनौती मिशन की तैयारियों के बीच इसरो के सामने इन्फ्रास्ट्रक्चर की चुनौती भी है। फिलहाल देश में एस्ट्रोनॉट्स के लिए केवल एक अस्थायी ट्रेनिंग सेंटर है, स्थायी सुविधा बनाने की प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है। इसके अलावा, पहले मानवरहित मिशन के लिए ‘पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षक प्रणाली’ (ECLSS) जैसी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी का विकास भी अभी पीछे चल रहा है, जिसके बिना अंतरिक्ष में मानव जीवन संभव नहीं है। ——————- ये खबर भी पढ़ें.. बांग्लादेश युद्ध की तस्वीरें लेने वाले रघु राय का निधन:पीएम मोदी दो दिन के दौरे पर सिक्किम जाएंगे, 27 अप्रैल के करेंट अफेयर्स जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं…पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

गैंगस्टर के करीबी को धनबाद पुलिस ने रिमांड पर लिया:दुबई से भारत...

वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के करीबी सहयोगी सैफी अब्बास उर्फ ‘मेजर’ को धनबाद पुलिस ने रिमांड पर लिया है। उसे दुबई से भारत लौटते ही कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (दमदम) पर गिरफ्तारी के बाद कोलकाता पुलिस ने उससे शुरुआती पूछताछ की। बाद में उसे धनबाद पुलिस को सौंप दिया गया। धनबाद लाने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) ने पुलिस को तीन दिनों का रिमांड दिया। पुलिस 2 मई तक एक गुप्त स्थान पर मेजर से गहन पूछताछ कर रही है। इस दौरान कई डीएसपी और विभिन्न थानों की टीमें गैंग के नेटवर्क, फंडिंग और उसके सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हैं। जांच में सामने आया है कि मेजर, प्रिंस खान गैंग का ‘राइट हैंड’ था। वह व्यापारियों से रंगदारी वसूली, धमकी भरे ऑडियो-वीडियो भेजने और फायरिंग की घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाता था। धनबाद जिले में मेजर के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, आर्म्स एक्ट और रंगदारी समेत करीब 15 मामले दर्ज हैं। 25 से अधिक अन्य मामलों में भी उसका नाम सामने आ चुका है। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ से गैंग को संरक्षण देने वाले सफेदपोश चेहरों और बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। इससे पूरे मामले में कई अहम कड़ियां जुड़ने की संभावना है। Source link

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इस साल 6% रह जाएगी भारत की विकास दर! ईरान युद्ध के...

Last Updated:April 29, 2026, 16:18 IST GDP Growth Rate : भारत की अर्थव्‍यवस्‍था की विकास दर इस साल गिरकर 6 फीसदी के आसपास पहुंच सकती है. ग्‍लोबल परामर्श कंपनी ईवाई ने क्रूड की बढ़ती कीमतों के दबाव में यह अनुमान लगाया है. उसका कहना है कि भारत पर महंगे क्रूड का ज्‍यादा असर दिखेगा. भारत की विकास दर चालू वित्‍तवर्ष में 6 फीसदी के आसपास रहने वाली है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बावजूद अभी तक ज्‍यादातर एजेंसियां भारत की विकास दर 7 फीसदी या उससे ज्‍यादा रहने का ही अनुमान लगा रहीं थी. लेकिन, अब पहली बार ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी ईवाई ने विकास दर के 6 फीसदी के आसपास जाने का अनुमान लगाया है. एजेंसी का कहना है क‍ि भारत पर सबसे ज्‍यादा असर बस एक ही चीज का पड़ेगा, क्‍योंकि आज भी इसकी 85 फीसदी खपत बाहरी बाजार से आयात के जरिये पूरी की जाती है. ईवाई इंडिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें अधिक रहने से चालू वित्तवर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर करीब 6 फीसदी रह सकती है, जबकि खुदरा महंगाई बढ़कर 6 फीसदी तक पहुंच सकती है. महंगाई का यह आंकड़ा रिजर्व बैंक के दायरे से बाहर जा सकता है. ग्‍लोबल सलाहकार कंपनी ने कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था ईंधन के लिए आज भी ग्‍लोबल मार्केट पर निर्भर है, जो उसे सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचा रहा है. क्‍यों दिख रहा जीडीपी पर दबावग्‍लोबल परामर्श कंपनी ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि यदि भारतीय कच्चे तेल ‘बास्केट’ की औसत कीमत वित्तवर्ष 2026-27 में 120 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वास्तविक जीडीपी वृद्धि करीब 6 फीसदी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर भी करीब 6 फीसदी तक रह सकती है. उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे पर दबाव कम करने के लिए बढ़ी ऊर्जा कीमतों का असर अपेक्षाकृत अधिक हद तक उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा. नीतिगत हस्‍तक्षेप अब सीमित हो रहाईवाई की इकॉनमी वॉच रिपोर्ट के मुताबिक, नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, लेकिन हालात को देखते हुए रेपो दर में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों में तेजी से विविधीकरण पर विचार किया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि आने वाले समय में लोन फिर महंगा हो सकता है. श्रीवास्तव ने पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने की आशंका जताते हुए कहा कि इसका हल निकल जाने पर भी कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति के सामान्य होने में खासा समय लग सकता है. ऐसे में काफी गुंजाइश है कि इस साल भारतीय बास्‍केट का तेल 120 डॉलर के आसपास ही घूमता रहेगा. अभी क्‍या है मार्केट की हालतअमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) के अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2026 की पहली तिमाही के औसत 81 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर दूसरी तिमाही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, संकट की दिशा बदलने पर कीमतों में नरमी भी आ सकती है. हालांकि, भारत की विकास दर के अन्‍य अनुमान ज्‍यादा बेहतर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है जबकि एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक ने क्रमशः 6.9 फीसदी और 6.6 फीसदी का अनुमान जताया है. रिजर्व बैंक ने हाल में विकास दर 6.9 फीसदी और औसत महंगाई दर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 16:12 IST Source link

झारखंड

बारियातू में कार-पिकअप-बाइक की भिड़ंत:9 लोग घायल, एक गंभीर रूप से रिम्स...

लातेहार स्थित बारियातू थाना क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे में कार, पिकअप और बाइक की टक्कर हो गई। इसमें कुल 9 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक घायल को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार, एक अर्टिगा कार कोडरमा के तिलैया डैम से डालटेनगंज में शादी समारोह में शामिल होकर लौट रही थी। बारियातू थाना के सामने कार ने पहले एक बाइक को टक्कर मारी। टक्कर के बाद कार अनियंत्रित होकर विपरीत दिशा से आ रही पिकअप वाहन से जा भिड़ी। इस हादसे में कार सवार सकलदेव भारती (60), अनिल गिरी (40), जलेसर गिरी (12), अमित गिरी (13) और राकेश गिरी (15) गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, बाइक पर सवार रूपलाल गंझू (15), राहुल कुमार (10) और सुनील कुमार (8) भी घायल हुए। बताया गया है कि बाइक पर सवार तीनों बच्चे नाबालिग थे और एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। दुर्घटना में पिकअप चालक दीपक गुप्ता (25) को भी गंभीर चोटें आई हैं। पिकअप वाहन टोटी हेसला से बारियातू बाजार की ओर आ रहा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार मिला। गंभीर रूप से घायल रूपलाल गंझू को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया। सूचना मिलने पर बारियातू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों क्षतिग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया। थाना प्रभारी रंजन पासवान ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Source link

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