Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile
Hindi News Career Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile 2 दिन पहले कॉपी लिंक भारत के मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 26 अप्रैल को निधन हो गया। वे 83 साल के थे। रघु इंडियन फोटोग्राफी के जनक माने जाने वाले रघु राय अपनी तस्वीरों से कहानियां कहने के लिए मशहूर थे। देश- दुनिया की बड़ी घटनाएं आज भी उनकी तस्वीरों में जिंदा है। 1942 में भारत में जन्मे रघु राय बचपन से ही फोटोग्राफी के शौकीन थे। अक्सर पिता के कैमरे से फोटो लिया करते थे। 1964 में रघु ने उन्होंने पिता के कहने पर सिविल इंजीनियरिंग की। 1965 में फोटोग्राफी शुरू की और जल्द फोटोग्राफी की दुनिया में उनकी ख्याति ने उन्हें इस दुनिया का कल्ट फिगर बना दिया। पहली तस्वीर ‘लंदन टाइम्स’ में छपी रघु राय ने अपने कैमरे से जो पहली तस्वीर ली थी वो ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। उन्होंने एक बार अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने बड़ी मशक्कत से एक गधे की तस्वीर ली थी, जिसे उनके बड़े भाई एस पॉल ने विदेश के कुछ अखबारों के लिए भेज दिया था और उनकी वो तस्वीर सिलेक्ट भी हुई और उसे ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। इसके लिए उन्हें मौटी रकम भी मिली थी। मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा के करीब रहे रघु राय काम के सिलिसिले में मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा जैसी बड़ी हस्तियों के करीब रहे। सभी हस्तियों की ज्यादातर क्लोज अप तस्वीरें उन्होंने ली, जो आज तक भी सबसे चर्चित हैं। उनकी तस्वीरों में वे इन हस्तियों के इमोशन को बखूबी कैप्चर करते थे। मदर टेरेसा को रघु राय मां मानते थे। उनके साथ उनका ये रिश्ता लगभग पचास सालों तक रहा। 1967 से लेकर 1984 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या तक रघु राय ने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को कवर किया। दलाई लामा पर उन्होंने किताब लिखी- ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, जिसमें उन्होंने करीब 4 दशक तक की उनकी तस्वीरों को शामिल किया। दलाई लामा के 80वें जन्मदिन पर ली गई तस्वीर। गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर खींची ‘बरियल ऑफ एन अननोन चाइल्ड’ 2 दिसंबर 1984 को भोपाल में हुई गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर है। इसी तस्वीर से दुनिया ने इस त्रासदी के दर्द को पहचाना था। ये तस्वीर भी रघु राय ने ली थी, जो आज भी गैस त्रासदी का डॉक्यूमेंट है। 1984 में गैस त्रासदी में मरे बच्चे को दफनाते हुए ली गई फोटो। 1984 में गैस त्रासदी में एबोर्टेड फीटस। 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड प्लांट से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) के रिसाव से लगभग 3,500 लोगों की तुरंत मौत हो गई थी। बाद के सालों में इससे पीड़ित करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई। इस त्रासदी की तस्वीरें मैग्नम और कई वर्ल्ड मैगजीन्स में छपी। जिनसे दुनिया को इस त्रासद घटना की जानकारी मिली। त्रासदी में गैस लीक से अंधे हुए लोगों की तस्वीर। बांग्लादेश युद्ध को तस्वीरों में दर्ज किया, पद्मश्री मिला 1971 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान भारत आए शरणार्थियों की तस्वीरें ली। उन तस्वीरों में उन्होंने उनकी चिंताएं, बेचैनी और बेबसी कैद की, जो आज भी उस युद्ध के दहशत की याद दिलाती है। रघु ने इस युद्ध और 1971 में पाकिस्तानी आर्मी के सरेंडर को भी दर्ज किया है। 1971 बांग्लादेश युद्ध के दौरान आए शरणार्थियों में से एक बच्चा। 1971 में युद्ध के दौरान भारत में शरण लेने आए लोगों ने डिस्कार्डेड ह्यूम पाइप्स को अपना घर बनाया था। इस दौरान ली गई बेहतरीन तस्वीरों के लिए 1972 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 1960 के दशक से स्ट्रीट फोटोग्राफी में दिलचस्पी रघु राय ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा जैसी बड़ी हस्तियों की जिंदगी को तो तस्वीरों में कैद किया, लेकिन अपने समय की आम जिंदगी को असली रूप में कैप्चर करना उन्हें बेहद पसंद था। वे बनावटी या सजावटी फोटो खींचने में दिलचस्पी नहीं रखते थे। यही कारण है कि सिनेमा की दुनिया ने उन्हें कभी प्रभावित नहीं किया। उन्होंने भारतीय जन जीवन की हजारों तस्वीरें ली। अपनी तस्वीरों में उन्होंने भारतीय संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद खूबसूरती से कैद किया है। आजाद भारत के ‘विजुअल रिकॉर्ड’ कहे गए आजादी के बाद का भारत रघु की तस्वीरों में नजर आता है। उनकी तस्वीरें आजादी के बाद के बनते-बिगड़ते, उठते-गिरते-संभलते भारत की जीवंत दास्तान बताती हैं। इसलिए रघु राय को आजाद भारत का ‘विजुअल रिकॉर्ड’ यानी फोटो कथाकार भी कहा जाता है। 1964 में पुरानी दिल्ली का चावड़ी बाजार। 1970 में पुरानी दिल्ली में ली गई तस्वीर। ये लगभग बराबर उम्र के दो लोगों की बिलकुल अलग स्थितियों को दिखाती है। 1966 में हरियाणा में एक महिला। 1995 में मुबंई के चर्च गेट स्टेशन पर ली गई तस्वीर। ‘मैग्नम फोटोज’ के लिए नॉमिनेट हुए मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रेसन रघु के मेंटर थे। हेनरी, रघु के पेरिस में गैलरी डेलपायर एग्जिबिशन से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद हेनरी ने 1977 में मैग्नम फोटोज के लिए नॉमिनेट किया। मैग्नम वर्ल्ड्स प्रेस्टीजियस इंटरनेशनल फोटोग्राफर्स को-ऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन है। इसमें दुनियाभर के टॉप फोटोग्राफर्स ही शामिल हो सकते हैं। 1967 में दिल्ली में एक कांग्रेस बैठक में इंदिरा गांधी की एक सशक्त तस्वीर। सोशल स्ट्रक्चर को चैलेंज करती ऐसी कई तस्वीरें उन्होंने ली। 2017 में बेटी अवनी राय ने रघु राय: एन अनफ्रेम्ड डॉक्यूमेंट्री बनाई। इसे बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग बासु ने प्रोड्यूस की थी। रघु फोटोग्राफर नहीं होते तो माली होते रघु राय को फूल-पौधे बहुत पसंद थे। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मुझे फोटोग्राफर से जितना प्यार है, उतना ही लगाव मुझे बागवानी से है। अगर मैं फोटोग्राफर नहीं होता तो पक्का माली होता।’ वे अक्सर अपना छुट्टी का दिन अपने फार्म हाउस पर फूल-पौधों की देखभाल करते बिताते थे। उनकी छुट्टियां अक्सर ऐसी ही बीतती थी। उन्हें प्रकृति से इतना प्यार था कि दुनिया भर से फूल-पौधे इकट्ठा किया करते थे। 57 किताबें लिखी, वर्ल्ड कॉन्टेस्ट जज किया रघु राय ने करीब 57 किताबें लिखी हैं। ‘रघु राय की दिल्ली’, ‘सिख’, ‘कोलकाता’, ‘खजुराहो’, ‘ताजमहल’, ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, ‘भारत’ और ‘मदर टेरेसा’ किताबें काफी चर्चित हैं।









