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16 जुलाई को सूर्य बदलेंगे अपनी चाल, इन 4 राशियों का शुरू...

होमताजा खबरधर्म 16 जुलाई को सूर्य बदलेंगे अपनी चाल, इन 4 राशियों का शुरू होगा शुभ समय! Last Updated:July 01, 2026, 11:45 IST July Solar Transit: 16 जुलाई को सूर्य मिथुन से कर्क में प्रवेश कर दक्षिणायन शुरू करेंगे. देवघर के पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार यह दिन पूजा और दान के लिए खास माना जाता है. राशियों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा खासकर कर्क, सिंह, कुंभ, मीन राशियों को इससे लाभ होने की संभावना है. ख़बरें फटाफट देवघर. जुलाई का महीना इस बार ज्योतिष के नजरिए से काफी खास माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है ग्रहों के राजा सूर्य का राशि परिवर्तन. हर महीने सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं और इसी बदलाव को संक्रांति कहा जाता है. इस बार 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस बार का सूर्य गोचर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन से सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन हो जाएंगे. ज्योतिष शास्त्र में दक्षिणायन का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों से जुड़े कार्यों का विशेष फल मिलता है. इसलिए इस अवसर को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्यपंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल, लाल फूल और थोड़ा-सा रोली या सिंदूर डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. सूर्य को जल अर्पित करते समय आदित्य हृदय स्तोत्र या फिर ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यों में सफलता मिलने लगती है. साथ ही मानसिक तनाव कम होता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है. करें इन चीजों का दानउन्होंने बताया कि सूर्य संक्रांति के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार लाल रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है. जैसे लाल वस्त्र, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल फल किसी जरूरतमंद व्यक्ति को देना लाभकारी होता है. इसके अलावा अगर किसी गरीब, असहाय या भूखे व्यक्ति को भोजन कराया जाए, तो सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है. पितरों की की जाती है पूजा-आराधनाज्योतिषाचार्य के अनुसार दक्षिणायन की शुरुआत के साथ पितरों की पूजा, तर्पण और श्राद्ध जैसे धार्मिक कार्यों के लिए भी यह समय शुभ माना जाता है. जो लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धा से तर्पण या दान-पुण्य करते हैं, उन्हें पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कई प्रकार की बाधाएं भी दूर होने लगती हैं. यही वजह है कि सनातन परंपरा में सूर्य के इस राशि परिवर्तन को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इन चार राशियों पर बरसेगी भगवान सूर्य की कृपापंडित नंद किशोर मुदगल ने खास तौर पर कहा कि कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि के जातकों को इस दिन बताए गए उपाय जरूर करने चाहिए. इन राशियों के लोगों के लिए सूर्य का यह गोचर विशेष प्रभाव डाल सकता है. अगर ये लोग श्रद्धा और नियम के साथ सूर्य को जल अर्पित करें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और दान-पुण्य करें, तो करियर, नौकरी, व्यापार और पारिवारिक जीवन में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है. साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी राहत मिल सकती है और मानसिक तनाव कम होगा. इसलिए 16 जुलाई का यह दिन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सकारात्मक शुरुआत का भी बेहतरीन अवसर माना जा रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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कोडरमा में हल्की बारिश से जलजमाव:स्कूल के बाहर गंदे पानी से गुजरने...

कोडरमा सहित पूरे झारखंड में मानसून की शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में हुई हल्की बारिश ने झुमरी तिलैया नगर परिषद क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। बुधवार को हुई इस हल्की बारिश ने नगर परिषद के साफ-सफाई के दावों की पोल खोल दी है। नगर परिषद कार्यालय से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित मध्य विद्यालय के बाहर की स्थिति सबसे खराब है। नाली के गंदे पानी को पार करने को मजबूर स्कूल से निकलने वाले बच्चों को अपने बस्ते के साथ नाली के गंदे पानी को पार कर घर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। जलजमाव के कारण कुछ स्कूली बच्चे परेशान दिखे, वहीं कुछ बच्चे इसी पानी में खेलते और मस्ती करते भी नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी अपनी कारों में आसानी से निकल जाते हैं, जबकि आम जनता और खासकर बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है। जल्द ही समाधान का आश्वासन: कार्यपालक पदाधिकारी इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अंकित गुप्ता ने बताया कि उक्त स्थान पर आउटलेट न होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा और फिलहाल कर्मचारियों को सफाई के निर्देश दिए गए हैं। Source link

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झींकपानी एसीसी सीमेंट प्लांट बंद करने का विरोध:18 किमी पैदल मार्च कर...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित एसीसी सीमेंट वर्क्स को बंद किए जाने की आशंका के बीच बुधवार को बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला। हजारों की संख्या में ग्रामीण, मजदूर और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। करीब 18 किलोमीटर पैदल मार्च कर जिला मुख्यालय चाईबासा पहुंचे। एसीसी बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने जमकर नारेबाजी की। नारों से पूरा शहर गूंजता रहा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा। प्लांट बंद होने से हजारों परिवारों पर संकट संघर्ष समिति का कहना है कि करीब 80 वर्ष पुराना यह सीमेंट प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक रीढ़ है। समिति के अनुसार, यदि प्लांट बंद होता है तो 74 स्थायी कर्मचारियों के साथ लगभग 1,600 अस्थायी मजदूर सीधे प्रभावित होंगे। इसके अलावा रैयतों, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों, ठेका कर्मियों, छोटे दुकानदारों और अन्य सहायक व्यवसायों से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका पर भी गहरा संकट आ जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन और राज्य सरकार से अगस्त माह से प्लांट बंद करने के नोटिस पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बाधित न हों और लोगों का रोजगार सुरक्षित रह सके। आंदोलन तेज करने की चेतावनी मुख्यमंत्री के नाम तैयार ज्ञापन में राज्य सरकार से कंपनी प्रबंधन के साथ जल्द वार्ता कर समाधान निकालने और प्लांट का संचालन पूर्व की भांति सुचारु रूप से जारी रखने की अपील की गई है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। Source link

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ओसामा के तरीके से ‘सूली’ चढ़ेगा केतन का हत्‍यारा, पुणे पुलिस कराने...

Last Updated:July 01, 2026, 16:30 IST केतन मर्डर केस की जांच में महाराष्ट्र पुलिस अब सीआईए की ‘गेट एनालिसिस’ टेक्निक का सहारा लेगी. दरअसल, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी चेतन चौधरी का चेहरा हुडी से ढका होने के कारण उसकी पहचान सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी चुनौती से निपटने के लिए महाराष्‍ट्र पुलिस अब सीआईए वाली ट्रिक का इस्‍तेमाल करने जा रही है. केतन हत्‍याकांड में पुणे पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस कराने का फैसला किया है. Ketan Murder Case: पाकिस्‍तान में छिपे अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकी ओसामा बिन लादेन की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक खास ट्रिक का इस्‍तेमाल किया था. अब सीआईए की इसी ट्रिक का इस्‍तेमाल महाराष्‍ट्र पुलिस केतन हत्‍याकांड में करने जा रही है. दरअसल, केतन हत्‍याकांड की जांच कर रही महाराष्‍ट्र पुलिस ने सबूत के तौर पर जो भी सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए हैं, उन सभी में आरोपी चेतन चौधरी हुडी पहने हुए नजर आ रहा है. हुडी के चलते चेतन चौधरी का चेहरा ढका हुआ है. ऐसे में, महाराष्‍ट्र पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि हुडी के अंदर मौजूद शख्‍स आरोपी चेतन चौधरी ही है. इस चुनौती से निपटने के लिए महाराष्‍ट्र पुलिस ने सीआईए वाली ट्रिक को अपनाने का फैसला किया है. जी हां, सीआईए की इस ट्रिक का नाम ‘गेट एनालिसिस’ है. सीआईए ने इसी गेट एनालिसिस के जरिए यह सुनिश्चित किया था कि पाकिस्तान के एबटाबाद स्थिति ठिकाने पर मौजूद शख्‍स ओसामा बिन लादेन ही है. गेट एनालिसिस से पुख्‍ता होने के बाद अमेरिकी सेना ने उसे ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. अब केतन हत्‍याकांड के आरोपी चेतन चौधरी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए गेट एनालिसिस कराने का फैसला किया गया है. ऐसे में, अब बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि गेट एनालिसिस क्‍या है और उससे चेतन की पहचान कैसे सुनिश्चित होगी. क्‍या है गेट एनालिसिस और कैसे होती है जांच? गेट एनालिसिस का मतलब किसी इंसान के चलने के तरीके का साइंटिफिक स्टडी करना होता है. इस स्‍टडी में एक्सपर्ट्स यह देखते हैं कि कोई व्यक्ति कैसे चलता है, कितनी स्पीड से चलता है, उसके कदम कितनी दूरी पर पड़ते हैं, शरीर का बैलेंस कैसा रहता है और चलते समय हाथ-पैर किस तरह मूव करते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर इंसान की चाल अलग होती है. किसी की चाल तेज होती है, कोई धीरे चलता है, कोई चलते समय थोड़ा झुक जाता है, तो कोई एक पैर पर ज्यादा वजन डालता है. उम्र, शरीर की बनावट, पुरानी चोट, जूते और रोजमर्रा की आदतें भी चाल को बदल देती हैं. एनाल‍िसिस के दौरान एक्सपर्ट्स यह देखते हैं कि आरोपी चलते समय कंधे कैसे हिलाता है, शरीर कितना आगे या पीछे झुकता है, हाथ कितनी तेजी से स्विंग करते हैं और किसी एक पैर पर ज्यादा वजन तो नहीं डालता. यह ऐसी चीजें हैं जिन्हें कोई इंसान हर समय कंट्रोल नहीं कर पाता. एक्‍सपर्ट्स के अनुसार जब किसी आरोपी का चेहरा साफ दिखाई नहीं देता, फिंगरप्रिंट नहीं मिलते या आवाज से पहचान मुश्किल होती है, तब आरोपी की चाल उसकी पहचान सुनिश्चित करने में काफी मददगार साबित होती है. इस एनालिसिस के जरिए पुलिस यह साबित कर सकती है कि नकाब के पीछे छिपा शख्‍स वही है. वहीं, जांच की बात करें तो गेट एनालिसिस की शुरुआत आमतौर पर सीसीटीवी फुटेज या किसी वीडियो रिकॉर्डिंग से होती है. सबसे पहले एक्सपर्ट्स उस वीडियो को कई बार देखते हैं. जरूरत पड़ने पर वीडियो को स्लो मोशन में चलाया जाता है और फ्रेम-बाय-फ्रेम भी देखा जाता है. इससे व्यक्ति के चलने के छोटे-छोटे पैटर्न समझ में आते हैं. अगर पुलिस के पास कोई संदिग्ध होता है, तो उसका भी अलग से वीडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है. कई बार उससे वही तरह के कपड़े पहनकर या उसी तरह के जूते पहनकर चलने को कहा जाता है, जैसे वह सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा हो. सजा दिलाने में कितनी अहम साबित होगी गेट एनालिसिस केतन हत्‍याकांड में फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि हुडी में मौजूद शख्‍स चेतन चौधरी ही है. गेट एनालिसिस के जरिए यह साइंटिफिक तरीके से प्रूफ हो जाएगा कि आरोपी सिया के साथ लोहागढ़ किले में दाखिल होने वाला शख्‍स कोई और नहीं बल्कि चेतन चौधरी ही है. महाराष्‍ट्र पुलिस इसी एनालिसिस रिपोर्ट के जरिए यह साबित कर सकती है कि हत्‍या के वक्‍त सिया के साथ मौजूद शख्‍स चेतन चौधरी था और उसके उसकी गुनाह की सही सजा दिलाई जा सकती है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Pune,Maharashtra Source link

झारखंड

80 साल की उम्र में भी जिंदा रखा पुश्तैनी हुनर, हाथों से...

Last Updated:July 01, 2026, 15:11 IST Bokaro 80 Year Old Rope Artist: बदलते दौर में जहां मशीनों ने पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगरी की जगह ले ली है, वहीं झारखंड के बोकारो जिले के 80 वर्षीय दिगम जी आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को पूरी लगन से जीवित रखे हुए हैं. चास प्रखंड के काशी झरिया गांव के रहने वाले दिगम जी पुराने प्लास्टिक के बोरों से हाथों से मजबूत रस्सियां तैयार करते हैं और स्थानीय हाट-बाजारों में बेचकर अपना जीवनयापन करते हैं. घटती मांग और बढ़ती मशीनों के बावजूद उन्होंने अपने इस पारंपरिक पेशे को नहीं छोड़ा है. उनकी कहानी न सिर्फ मेहनत और आत्मसम्मान की मिसाल है, बल्कि लुप्त होती लोक कला और ग्रामीण कारीगरी को बचाने का प्रेरणादायक उदाहरण भी है. 80 साल की उम्र, हाथों में प्लास्टिक के पुराने बोरे और दशकों पुराना हुनर. बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित काशी झरिया गांव के दिगम जी आज भी वही काम कर रहे हैं, जो उन्होंने बरसों पहले अपने पिता से सीखा था, हाथों से रस्सी बनाने की कारीगरी, जो कभी ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी, आज धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, लेकिन दिगम जैसे कुछ कारीगर अब भी इस हुनर को जिंदा रखे हुए हैं. बता दें, दिगम प्लास्टिक के पुराने बोरों से मजबूत रस्सियां तैयार कर हाट-बाजारों में बेचते हैं और इन रस्सियों का उपयोग पशुओं को बांधने, कुएं से पानी निकालने और अन्य घरेलू कामों में किया जाता है. लोकल18 से खास बातचीत में दिगम जी ने बताया हैं कि वह कई दशकों से यह काम कर रहे हैं और इसकी शिक्षा उन्हें अपने पिता से मिली थी. पहले सोंनचाप पौधे के छिलके से रस्सियां बनाई जाती थीं, लेकिन समय के साथ कच्चे माल की उपलब्धता कम होने लगी. इसके बाद उन्होंने प्लास्टिक के बोरों की पतली पट्टियों का उपयोग शुरू किया. Add News18 as Preferred Source on Google दिगम जी ने आगे बताया कि एक पूरी रस्सी तैयार करने में करीब दो से तीन घंटे का समय लगता है. वह सप्ताह भर में लगभग 40 से 50 रस्सियां बना लेते हैं, जिन्हें आसपास के गांवों और स्थानीय हाट-बाजारों में बेचते हैं. वहीं, बकरियों के गले में बांधने वाली रस्सी की कीमत 50 रुपये जोड़ा है, जबकि बाल्टी या कुएं में उपयोग होने वाली बड़ी रस्सियों की कीमत 100 से 150 रुपये तक होती है. वहीं, रस्सी बनाने की प्रक्रिया को लेकर दिगम जी ने बताया कि सबसे पहले प्लास्टिक के बोरे की सिलाई को खोला जाता है. इसके बाद बोरे की पतली-पतली पट्टियों को अलग किया जाता है. फिर इन पट्टियों को एक साथ जोड़कर हाथों से मरोड़ते हुए मजबूती से गूंथा जाता है और कई चरणों की मेहनत के बाद एक मजबूत रस्सी तैयार होती है. दिगम जी ने आखिर में बताया कि वह गांव की आखिरी पीढ़ी हैं, जो यह काम कर रहे हैं और नई पीढ़ी के युवा अब इसमें रुचि नहीं रखते. वे मजदूरी के जरिए अपना जीवनयापन कर रहे हैं, और अब कई सालों से मशीनों से बनने वाली रस्सियों के बाजार में आने से हाथ से बनी रस्सियों की मांग लगातार घट गई है. पहले के समय में हफ्ते में उनकी 100 रस्सियां आसानी से बिक जाती थीं, वहीं अब बिक्री घटकर करीब 30 से 40 रस्सियों तक सीमित हो गई है और इसका सीधा असर उनकी आय पर भी पड़ा है. लेकिन अब यह उनकी पहचान बन गई है और वह आखिरी सांस तक रस्सी बनाने का काम करेंगे. Source link

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रामगढ़ में गिरिडीह के सब-रजिस्ट्रार हत्या मामला:भूमि विवाद में हुई वारदात, पुलिस...

रामगढ़ जिले के मांडू थाना क्षेत्र अंतर्गत बलसगरा में बीते दिन एक सब-रजिस्ट्रार की हत्या के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना पुराने भूमि विवाद को लेकर हुई थी। मंगलवार सुबह करीब 08:40 बजे मांडू थाना क्षेत्र में बालेश्वर पटेल (पिता- ननकु महतो, निवासी- रबोध, मांडू, रामगढ़) के साथ मारपीट की गई। बालेश्वर पटेल वर्तमान में गिरिडीह जिले में सब-रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत थे। उन्हें 11D0 के पुराने जमीनी विवाद को लेकर कुछ लोगों ने निशाना बनाया था। घटना की सूचना मिलते ही मांडू थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और घायल बालेश्वर पटेल को प्राथमिक उपचार के लिए होप हॉस्पिटल रामगढ़ पहुंचाया। हालांकि, इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मृतक की पत्नी के आवेदन पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। एफएसएल रांची की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधान शुरू किया गया। एफएसएल रांची की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। घटना की गंभीरता को देखते हुए, रामगढ़ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, रामगढ़ के नेतृत्व में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया। गठित टीम ने त्वरित छापेमारी कर इस मामले में संलिप्त कुल सात अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है। गिरफ्तार किए गए लोगों में संतोष कुमार साव उर्फ पम्पम, रामू साव उर्फ ज्ञानी, शकुंतला देवी, रूबी कुमारी, विनय कुमार, पूजा कुमारी, लक्ष्मी देवी उर्फ डोली कुमारी शामिल है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कुछ सामान भी जब्त किए हैं, जिनमें खून लगा ईंट का टुकड़ा और खून लगा बांस का डंडा शामिल हैं। Source link

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भाई ने 2 साल तक बहन का यौन शोषण किया:ग्रामीणों ने की...

पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र में बुधवार को यौन शोषण का एक मामला सामने आया है। यहां एक शादीशुदा भाई पर अपनी बहन का पिछले दो सालों से यौन शोषण करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी भाई को हिरासत में ले लिया है। यह मामला बुधवार को तब सामने आया, जब पीड़िता ने इसका विरोध किया। आरोप है कि इसके बाद उसे घर से निकाल दिया गया और उसका सामान फेंक दिया गया। पीड़िता ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने आरोपी भाई को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। मामले की सूचना मिलने पर पंचायत के मुखिया गांव पहुंचे और भीड़ से आरोपी को किसी तरह निकाला। उन्होंने नगर थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर थाने ले आई। पीड़िता बहन ने अपने भाई के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में लगी हुई है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) कुमार गौरव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि नगर थाना क्षेत्र में भाई द्वारा अपनी छोटी बहन के यौन शोषण की शिकायत मिली है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पीड़िता के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा। जानकारी के अनुसार, युवती अपने भाई के पास ही रहती थी। उसने कई बार विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उसे डरा-धमका कर चुप करा दिया जाता था। फिलहाल, पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। Source link

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Union Cabinet Decisions Today | केंद्रीय कैबिनेट के फैसले: दिल्ली में 6970...

होमताजा खबरदेश साउथ और वेस्ट दिल्ली की दूरी घटेगी, ₹6970 करोड़ से बनेगी टनल, UP में नया हाईवे Last Updated:July 01, 2026, 15:26 IST Modi Cabinet Decisions: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 14,115 करोड़ रुपये के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसमें दिल्ली के लिए 6,970 करोड़ रुपये की लागत वाला 6 लेन द्वारका टनल शामिल है. साथ ही यूपी में कानपुर से कबरई तक 4 लेन हाईवे के लिए 7,145 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को एक ब्रीफिंग में इन फैसलो की जानकारी दी. साउथ और वेस्ट दिल्ली की दूरी घटेगी, 8.1 किलोमीटर लंबा टनल पास. इसके अलावा कानपुर से कबरई तक बनेगा 4 लेन हाईवे, 14115 करोड़ के प्रोजेक्ट पास. (Photo made with AI) नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े फैसले हुए हैं. सरकार ने कुल 14,115 करोड़ रुपये के दो प्रमुख हाईवे और टनल प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगा दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रीफिंग के दौरान इन अहम प्रोजेक्ट्स की पूरी डिटेल शेयर की. दिल्ली में लंबे समय से भयंकर जाम से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. सरकार ने दिल्ली के अंदर 6 लेन वाले आधुनिक द्वारका टनल के निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी है. इस बड़े प्रोजेक्ट पर कुल 6,970 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा. इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य को भी विकास का एक बड़ा तोहफा मिला है. यूपी में कानपुर से कबरई तक एक बिल्कुल नया 4 लेन हाईवे बनाया जाएगा. इस एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट की कुल लागत 7,145 करोड़ रुपये तय की गई है. अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘ये फैसले देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देंगे’. दोनों प्रोजेक्ट्स को मिलाकर सरकार कुल 14,115 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है. क्या है दिल्ली के द्वारका टनल प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल और खासियत? दिल्ली के इस नए प्रोजेक्ट के तहत नेशनल हाईवे 148AE पर 6 लेन का टनल बनाया जाएगा. यह शिवमूर्ति इंटरचेंज को वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगा. शिवमूर्ति इंटरचेंज द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248 BB) का एक बहुत अहम हिस्सा है. इस टनल के बनने से वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच सफर काफी तेज हो जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी. सबसे खास बात यह है कि इसमें से 3.1 किलोमीटर लंबा टनल साउदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से गुजरेगा. सरकार ने इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 5 साल का समय तय किया है. इसका सीधा मतलब है कि दिल्लीवासियों को अगले कुछ सालों में जाम से बड़ी राहत मिल जाएगी. यह एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट प्रोजेक्ट है. इसे हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के आधार पर डेवलप किया जाएगा. मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: दिल्ली और यूपी को मिली ₹14115 करोड़ की सौगात. यूपी वालों की बल्ले-बल्ले: 242 किलोमीटर लंबे हाईवे से फर्राटे भरेंगी गाड़ियां यूपी को मिले 7,145 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट से विकास को तेज रफ्तार मिलेगी. सरकार ने कानपुर से कबरई तक 242 किलोमीटर लंबे 4 लेन हाईवे को मंजूरी दे दी है. यह अहम प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा है. इसे बीओटी मोड यानी टोल के आधार पर डेवलप किया जाएगा. इस हाईवे के बनने से कानपुर, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा. महोबा एक एस्पिरेशनल जिला है और वहां विकास की नई किरण पहुंचेगी. सरकार ने इस पूरे काम को सिर्फ ढाई साल में खत्म करने का लक्ष्य रखा है. कबरई में एग्रीगेट माइनिंग का बड़ा काम होता है. वहां से कानपुर और भोपाल तक माल की सप्लाई के लिए इस हाईवे की सख्त जरूरत थी. नए हाईवे से कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और कबरई में ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि कानपुर से कबरई का सफर अब साढ़े तीन घंटे की बजाय सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा होगा. सफर के समय में सीधे 58 प्रतिशत की भारी कमी आएगी. इस हाईवे पर गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की शानदार स्पीड से दौड़ सकेंगी. यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति के 4 इकोनॉमिक नोड्स और 10 लॉजिस्टिक नोड्स को भी आपस में जोड़ेगा. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor <strong>दीपक वर्मा</strong> (<em>Deepak Verma</em>) की‍ गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह <strong>News18हिंदी</strong> के साथ <strong>डिप्टी न्यूज़ एडिटर</strong> की भूमिका में ज…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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घर में खुशबू वाले पौधे लगाने से क्या सांपों को मिलता है...

Last Updated:July 01, 2026, 15:25 IST Does Some Plants Attracts Snake: मानसून में सांप घरों की तरफ आने लगते हैं और कुछ मान्यताएं हैं कि खास तरह के पौधों की खुशबू उन्हें आकर्षित करती है. जब इस बारे में एक्सपर्ट से बात की गई तो उनका जवाब कुछ इस प्रकार था. साथ ही उन्होंने बताया कि सांप कहां और क्यों जाते हैं और बचाव के लिए क्या करना चाहिए. ख़बरें फटाफट पलामू. बरसात के मौसम में सांप से खतरा बढ़ जाता है. इस मौसम में सर्पदंश के मामले भी ज्यादा देखने को मिलते हैं. इस वजह से इस समय सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है. सांप बरसात के मौसम में छिपने वाली जगह की तलाश करते हैं. जहां एक ओर घर और बगीचे को हरा-भरा व आकर्षक बनाने के लिए लोग तरह-तरह के पेड़-पौधे लगाते हैं. वहीं बरसात के मौसम में यही घने और झाड़ीनुमा पौधे अनजाने में सांपों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकते हैं. सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि कुछ पौधों की खुशबू से सांप आकर्षित होते हैं, लेकिन इस बारे में विशेषज्ञों का क्या कहना है, आइए जानते हैं. पलामू जिले के सर्प विशेषज्ञ डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि सांप किसी पौधे या सुगंध से आकर्षित होते हैं, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. वास्तव में सांप किसी पौधे की सुगंध से नहीं, बल्कि उसके आसपास बनने वाले अनुकूल वातावरण की वजह से वहां पहुंचते हैं. जहां वे अपने लिए सुरक्षित स्थान बनाते हैं. खुशबू नहीं, ठंडी और सुरक्षित जगह की होती है तलाशउन्होंने कहा कि सांप शीत-रक्त (कोल्ड ब्लडेड) जीव हैं, इसलिए उनके शरीर का तापमान आसपास के वातावरण पर निर्भर करता है. गर्मी और उमस के दिनों में वे ऐसी जगह तलाशते हैं, जहां ठंडक, नमी और छिपने की पर्याप्त व्यवस्था हो. वहीं घने पौधों की छांव में धूप कम पहुंचती है, जिससे जमीन नम और ठंडी बनी रहती है. यही कारण है कि झाड़ीनुमा पौधों, सूखी पत्तियों और घास वाले क्षेत्रों में सांप अधिक दिखाई दे सकते हैं. बरसात में बढ़ जाती है सांपों की सक्रियताउन्होंने आगे कहा कि गर्मी के मौसम में कई सांप ‘एस्टिवेशन’ (गर्मी के दौरान निष्क्रिय रहने की अवस्था) में रहते हैं. जबकि मानसून शुरू होते ही वे भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में बाहर निकलने लगते हैं. ऐसे समय में अगर घर के आसपास झाड़ियां, खरपतवार या कचरा जमा हो, तो सांपों के छिपने की संभावना बढ़ जाती है. डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने दूर किए भ्रमविशेषज्ञ डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने आगे कहा कि ऐसा कोई पौधा नहीं है, जिसकी खुशबू सांपों को आकर्षित करती हो. जैसे लेमनग्रास, बेला, चमेली, चंदन या अन्य सुगंधित पौधों से सांप आकर्षित होने की बातें केवल मिथक हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. सांप केवल ऐसी जगह चुनते हैं, जहां उन्हें सुरक्षित रूप से छिपने का मौका मिले. सांपों से बचाव के आसान उपायवे बचाव के उपाय के बारे में बताते हैं कि अगर घर या बगीचे में सांपों के आने की आशंका कम करनी है, तो आसपास की झाड़ियों, खरपतवार और सूखी पत्तियों की नियमित सफाई करें. जमीन से लगभग 8 इंच ऊपर तक क्षेत्र को साफ रखें, ताकि कोई भी जीव आसानी से नजर आ सके. लकड़ी, ईंट, पत्थर या कबाड़ का अनावश्यक ढेर न लगने दें और बगीचे की नियमित देखभाल करें. साफ-सुथरा और खुला परिसर सांपों के छिपने की संभावना को काफी हद तक कम कर देता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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टंडाबाड़ी में बीसीसीएल ने 16 अवैध आवास गिराए:भूधंसान के बाद सुरक्षा के...

धनबाद में बीसीसीएल प्रबंधन ने टंडाबाड़ी बस्ती में सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी कार्रवाई की है। बीसीसीएल एरिया-3 के सोनारडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंडाबाड़ी बस्ती में चिन्हित 16 अवैध और खतरनाक आवासों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान सोनारडीह ओपी पुलिस और सीआईएसएफ के जवान मौजूद रहे। यह कार्रवाई 31 मार्च को टंडाबाड़ी में हुई भयावह भूधंसान की घटना के बाद की गई है। उस हादसे में कई घर जमीन में समा गए थे, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद बस्ती को खाली करा दिया गया था और प्रभावित परिवारों को बीसीसीएल द्वारा बेलगड़िया में पुनर्वासित किया गया था। पुनर्वास के बावजूद, डेंजर जोन में मौजूद क्षतिग्रस्त और खतरनाक आवासों को चिन्हित कर हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बीसीसीएल ने कुल 21 चिन्हित घरों में से 16 आवासों को ध्वस्त किया। कार्रवाई से पहले प्रबंधन ने माइकिंग के जरिए लोगों को इसकी सूचना दी थी। अन्य खतरनाक आवासों पर भी कार्रवाई की जाएगी बीसीसीएल साउथ गोविंदपुर कोलियरी के मैनेजर अभिषेक तिवारी ने बताया कि भूधंसान से प्रभावित परिवारों को पहले ही सुरक्षित स्थान बेलगड़िया में स्थानांतरित किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं प्रभावित और क्षतिग्रस्त आवासों को हटाया गया है। नियमानुसार, प्रभावित लोगों को मुआवजा राशि भी दी जाएगी। प्रबंधन के अनुसार, भूधंसान के कारण टंडाबाड़ी क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है। अन्य इलाकों में रहने वाले लोगों के कागजातों की जांच की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आवश्यकता पड़ने पर अन्य खतरनाक आवासों पर भी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में टंडाबाड़ी बस्ती में कोई परिवार निवास नहीं कर रहा है, हालांकि लोग जमीन और मुआवजे से जुड़े कार्यों के लिए यहां पहुंच रहे हैं। Source link

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