होमताजा खबरदेश सरला भट्ट कौन थीं, 36 साल पहले उनके साथ क्या हुआ, कश्मीरी पंडितों को अब तक याद Last Updated:June 30, 2026, 12:58 IST करीब 34 साल पुराने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में यासीन मलिक समेत पांच आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. 18 अप्रैल 1990 को सरला भट्ट का श्रीनगर से अपहरण कर हत्या कर दी गई थी. SIA का दावा है कि 1990 में हुई सरला भट्ट की हत्या कश्मीरी पंडितों में दहशत फैलाकर उन्हें घाटी से पलायन के लिए मजबूर करने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के 36 साल पुराने हत्याकांड में पुलिस ने JKLF चीफ यासीन मलिक समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया है. कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट का करीब 36 साल पुराना हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है. जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी एसआईए (SIA) ने सोमवार को इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी. एजेंसी ने दावा किया है कि सरला भट्ट की हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि कश्मीरी पंडितों में दहशत फैलाकर उन्हें घाटी छोड़ने पर मजबूर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा थी. करीब 10 महीने पहले दोबारा खोली गई इस जांच में प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है. सरला भट्ट दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीबाग इलाके की रहने वाली थीं. वह श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं. 1990 की शुरुआत में जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद तेजी से फैल रहा था और कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो चुका था, तब भी सरला भट्ट ने घाटी छोड़ने से इनकार कर दिया था. उनका मानना था कि एक स्वास्थ्यकर्मी होने के नाते मरीजों की सेवा करना उनका कर्तव्य है. सरला भट्ट और गिरिजा टिक्कू की आतंकियों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी. 18 अप्रैल 1990 की रात कुछ हथियारबंद आतंकवादी उनके हॉस्टल में घुस आए और बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर ले गए. अगले दिन श्रीनगर के मल्लाबाग इलाके से उनका शव बरामद हुआ. उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे. मौके से एक हाथ से लिखी पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था. इसी आधार पर आतंकियों ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि वर्षों से कश्मीरी पंडित संगठनों का आरोप रहा है कि सरला भट्ट की हत्या से पहले उनके साथ बर्बरता की गई थी. कुछ संगठनों ने अपहरण, यातना और दुष्कर्म के आरोप भी लगाए, लेकिन तब के पुलिस रिकॉर्ड में इन आरोपों का जिक्र नहीं है. आधिकारिक जांच में केवल अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया था. कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सरला भट्ट सिर्फ एक नर्स नहीं, बल्कि 1990 के दौर में आतंकवाद का सामना करने वाली उन महिलाओं का प्रतीक मानी जाती हैं, जिन्होंने भय के माहौल के बावजूद घाटी नहीं छोड़ी. उनकी हत्या को आज भी कश्मीरी पंडितों के पलायन के सबसे चर्चित और दर्दनाक मामलों में गिना जाता है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Srinagar,Jammu and Kashmir 18 अप्रैल 1990 की रात कुछ हथियारबंद आतंकवादी उनके हॉस्टल में घुस आए और बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर ले गए. अगले दिन श्रीनगर के मल्लाबाग इलाके से उनका शव बरामद हुआ. उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे. मौके से एक हाथ से लिखी पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था. इसी आधार पर आतंकियों ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि वर्षों से कश्मीरी पंडित संगठनों का आरोप रहा है कि सरला भट्ट की हत्या से पहले उनके साथ बर्बरता की गई थी. कुछ संगठनों ने अपहरण, यातना और दुष्कर्म के आरोप भी लगाए, लेकिन तब के पुलिस रिकॉर्ड में इन आरोपों का जिक्र नहीं है. आधिकारिक जांच में केवल अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया था. कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सरला भट्ट सिर्फ एक नर्स नहीं, बल्कि 1990 के दौर में आतंकवाद का सामना करने वाली उन महिलाओं का प्रतीक मानी जाती हैं, जिन्होंने भय के माहौल के बावजूद घाटी नहीं छोड़ी. उनकी हत्या को आज भी कश्मीरी पंडितों के पलायन के सबसे चर्चित और दर्दनाक मामलों में गिना जाता है. इस हत्याकांड को लेकर दायर एसआईए की चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा चार अन्य JKLF आतंकियों के नाम शामिल किए गए हैं. इनमें अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सोफी की मौत हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चलकू अब भी फरार है और उसके पाकिस्तान में होने की आशंका जताई जा रही है. सरला भट्ट हत्याकांड को अगस्त 2025 में फिर से खोला गया. इससे पहले एसआईए ने कश्मीरी पंडित जज नीलकंठ गंजू की हत्या की जांच भी दोबारा शुरू की थी. गंजू की 1989 में हत्या कर दी गई थी. उन्होंने कभी JKLF के संस्थापक मकबूल भट्ट को फांसी की सजा सुनाई थी. जांच दोबारा शुरू होने के बाद एसआईए ने श्रीनगर में कई जगह छापेमारी की. इनमें यासीन मलिक का घर, पूर्व JKLF कमांडर जावेद अहमद मीर का ठिकाना और संगठन से जुड़े कई अन्य संदिग्धों के ठिकाने शामिल थे. कश्मीरी पंडित संगठन रूट्स इन कश्मीर ने 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि घटनाओं को 27 साल से ज्यादा समय बीत चुका है और अब पर्याप्त सबूत मिलना मुश्किल होगा. बाद में दाखिल क्यूरेटिव पिटीशन भी 2022 में खारिज कर दी गई. इसके बावजूद एसआईए ने 2023 से पुराने मामलों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की. कश्मीरी पंडितों की हत्या के मामलों की कोई आधिकारिक अंतिम संख्या उपलब्ध नहीं है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के 2008 के सर्वे के