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झारखंड

क्रांति की आग कभी नहीं बुझती:सीएम हेमंत सोरेन ने सिदो-कान्हू को दी...

रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन ने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देने वाला ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। शोषण के खिलाफ आदिवासी समाज ने खोला था मोर्चा मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उस दौर में जब देश में शोषण के खिलाफ कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था, तब आदिवासी समाज के वीरों ने साहस दिखाते हुए अंग्रेजी हुकूमत और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने बिना परिणाम की चिंता किए क्रांति का बिगुल फूंका। यह आंदोलन केवल विद्रोह नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने की एक बड़ी पहल थी। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में जहां कहीं अन्याय होता है, वहां संघर्ष की शुरुआत इसी तरह के प्रतिरोध से होती है। ऐसे वीर सपूतों के कारण ही झारखंड को वीरों की धरती कहा जाता है। क्रांति की आग कभी नहीं बुझती मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रांति की आग कभी बुझती नहीं है और इसे बुझाया भी नहीं जा सकता। यह चिंगारी हमेशा समाज को दिशा देने का काम करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के कई स्मारकों पर आज भी निरंतर दीप जलते रहते हैं, जो वीरों के बलिदान की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की यह पावन भूमि वीरों के इतिहास से भरी हुई है, जिसे स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। इस अवसर पर उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे इन महान विभूतियों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के कमजोर वर्गों के हित में कार्य करें। Source link

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खेत में ट्यूबवेल खुदवाने से पहले क्यों पहुंचते हैं श्रद्धालु? जानिए जल...

Last Updated:June 30, 2026, 14:01 IST Religious Tourism Rajasthan: राजस्थान में आस्था और लोकविश्वास से जुड़े अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनमें जल की देवी का चमत्कारी दरबार अपनी अनूठी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि खेत में नया ट्यूबवेल या बोरवेल खुदवाने से पहले यदि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए और देवी से जल की प्रार्थना की जाए, तो पानी मिलने की संभावना बढ़ती है. इसी आस्था के चलते किसान और श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचकर जल की देवी का आशीर्वाद लेते हैं. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने इस स्थान को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाई है. यह मान्यता स्थानीय लोकविश्वास का हिस्सा है और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को दर्शाती है. ख़बरें फटाफट भीलवाड़ा: भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के मध्य स्थित 1400 वर्ष प्राचीन सगरा माता का मंदिर है, जो अपने पानी के चमत्कार को लेकर मशहूर है. इस मंदिर में बड़ी संख्या में किसान और श्रद्धालु अपने खेतों में ट्यूबवेल या बोरिंग खुदवाने से पहले पानी की अच्छी आवक की कामना लेकर पहुंचते हैं. लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से यहां मन्नत मांगने पर जल स्रोत अवश्य मिलता है और खेतों में पानी की कमी दूर होती है. इसी के चलते इस मंदिर को ‘जल की देवी’ के नाम से जाना जाता है. सगरा माता मंदिर के पुजारी देवीलाल गुर्जर ने बताया कि भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ के मध्य 6 लाइन हाईवे के निकट 700 फिट ऊची पहाड़ी पर स्थित सगरा माता मंदिर 1400 वर्ष प्राचीन है. यहां पर दो बहनों की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसमें एक मुख्य प्रतिमा सगरा माता, जबकि उनकी बहन नारसी देवी माता विराजमान हैं. सगरा माता को पानी की देवी भी कहा जाता है. यहां पर किसान अपने खेत में पानी की अर्जी लगाने के लिए पहुंचते हैं. किसान अपने खेत की जमीन की मिट्टी लेकर मंदिर आते हैं और माता रानी के दर्शन कर खेत पर कुआं और ट्यूबवेल की खुदाई के दौरान पानी की अर्जी लगाते हैं. जहां माता रानी जगह बता दें, वहां पानी की धारा प्रकट होती है. भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूरमंदिर पुजारी देवीलाल ने बताया कि सगरा माता मंदिर भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ 6 लाइन हाईवे के मध्य स्थित 700 फिट ऊची पहाड़ी पर है. भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर, जबकि चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से यह 12 किलोमीटर दूर है. यहां पर पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं, जिसमें पहला रास्ता 350 सीढ़ियों से चढ़कर आना होता है जबकि दूसरे रास्ते के लिए वाहन से भी पहुंचा जा सकता है. माता रानी ने उसे दर्शन दिए और बताया कि उसका धन कहांभक्त माधु लाल ने बताया कि सगरा नाम का एक बंजारा, जो यहां से गुजर रहा था, उसके धन की पोटली कहीं खो गई, जो उसे नहीं मिली थीं. वह उसे ढूंढते हुए इस पहाड़ पर पहुंचा, जहां उसने माता रानी से अरदास लगाई हैं. तब माता रानी ने उसे दर्शन दिए और बताया कि उसका धन कहां है, जिसके बाद बंजारा ने खुश होकर यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया. तब से यह मंदिर यहां स्थापित है और बंजारा के नाम से ही जाना जाता है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhilwara,Rajasthan Source link

झारखंड

रेलवे की नौकरी के साथ की तैयारी, बोकारो के दीपक प्रसाद ने...

Last Updated:June 30, 2026, 13:04 IST Bokaro Deepak BPSC Success Story: बोकारो के दीपक प्रसाद ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 138वीं रैंक पायी और एसडीएम पद पर सेलेक्ट हुए. ये उनका चौथा प्रयास था और दीपक भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद पर रहते हुए तैयारी कर रहे थे. दीपक के पिता किराना की दुकान चलाते हैं और उन्होंने इस सफर में उनका खूब साथ दिया. ख़बरें फटाफट बोकारो. बोकारो के दुदींबाग बाजार में किराना दुकान चलाने वाले वीरेंद्र प्रसाद के बेटे दीपक प्रसाद ने बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 138वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद के लिए चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है. खास बात यह है कि दीपक ने भारतीय रेलवे में नौकरी करते हुए यह सफलता अपने चौथे प्रयास में हासिल की है. दीपक वर्तमान में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं. नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने नियमित पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार सालों की मेहनत के बाद सफलता पायी है. यहां से की पढ़ाईदीपक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बोकारो इस्पात विद्यालय, सेक्टर-1सी से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने बोकारो इस्पात सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-2सी से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. वहीं, वर्ष 2017 में सागर कॉलेज, भोपाल से बीटेक करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. वहीं एमटेक की पढ़ाई के दौरान उनका चयन भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद पर हुआ. जरूर मिलती है सफलतावहीं, अनुभव साझा करते हुए दीपक ने बताया कि किसी भी परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले सिलेबस की पूरी जानकारी होना सबसे जरूरी है. इसके बाद अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान देकर मेहनत करते रहना चाहिए. वहीं, एक-दो बार असफलता मिलने से निराश नहीं होना चाहिए. अगर मेहनत और लगन ईमानदारी से की जाए, तो सफलता एक दिन जरूर मिलती है. दीपक ने अपनी सफलता का श्रेय खड़गपुर में कार्यरत कार्य प्रबंधक सिद्धांत वर्मा को दिया, जिन्हें वह अपना मेंटर मानते हैं. उन्होंने कहा कि सिद्धांत वर्मा के मार्गदर्शन और लगातार प्रोत्साहन से उन्हें कठिन समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली. इसके अलावा उनके माता-पिता और पत्नी मुक्ता कुमारी ने काफी सहयोग किया. परिवार ने दशकों किया संघर्षदीपक की सफलता के पीछे उनके परिवार का दशकों पुराना संघर्ष भी जुड़ा है. उनके दादा भगवान लाल साह और पिता वीरेंद्र प्रसाद मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के बैदापुर बिशनपुर गांव के निवासी हैं. वर्ष 1981 में बेहतर आजीविका की तलाश में उनके पिता बोकारो आए. यहां दुदींबाग बाजार में एक छोटी किराना दुकान शुरू कर परिवार का पालन-पोषण किया और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई. आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि परिवार के सभी बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं. दीपक की बड़ी बहन ने बीजीएच से नर्सिंग की पढ़ाई की और वर्तमान में टीएमसी, जमशेदपुर में कार्यरत हैं. वहीं, छोटे भाई आशुतोष प्रसाद सीआईएसएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इस तरह तीनों बच्चों ने अपने-अपने क्षेत्र में मुकाम हासिल किया और माता-पिता के संघर्ष को जाया नहीं होने दिया. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

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देवघर में मां-बेटे की धारदार हथियार से वार कर हत्या:मौके पर पहुंची...

देवघर जिले के सोनारायठाड़ी थाना क्षेत्र स्थित नवाडीह गांव में मां-बेटे की हत्या कर दी गई है। इस दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में सक्रियता बढ़ गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की। स्थानीय लोगों ने नवाडीह गांव में मां और बेटे के शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की सूचना है। मृतकों में जुबेदा खातून और उनका बेटा शामिल है। घटना की सूचना पर पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई। पुलिस द्वारा घटनास्थल से विभिन्न साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। फोरेंसिक टीम भी घटना के कारणों और आरोपियों की पहचान के लिए जांच कर रही है। संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटा रही पुलिस हत्या के कारणों का अभी तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस पारिवारिक विवाद, आपसी रंजिश और संपत्ति विवाद जैसे संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और सभी बिंदुओं पर गहन जांच जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही घटना के कारणों का खुलासा कर दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। नवाडीह गांव में हुई इस घटना के बाद पुलिस की टीम लगातार जांच में जुटी हुई है। पुलिस मामले के शीघ्र खुलासे का दावा कर रही है। कुल्हाड़ी और हथौड़े से हत्या करने की आशंका एसपी प्रवीण पुष्कर ने कहा बीती रात हमें सूचना प्राप्त हुई। लगभग साढ़े तीन चार बजे कि यहां सोनारिया ठाणी के इस गांव में रुबेना खातून तथा उनके बेटे की हत्या कर दी गई है। तुरंत यहां पर पुलिस की टीम पहुंची और यहां पर देखा कि उन दोनों की डेड बॉडी पड़ी है और काफी सारा खून बहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुल्हाड़ी और हथौड़े से उनकी हत्या की गई है। आगे पुलिस इस पर छानबीन कर रही है। Source link

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पलामू में युवती का अधजला शव मिला:हत्या कर पहचान छिपाने की आशंका,...

पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र स्थित करसो जंगल में सोमवार को एक युवती का अधजला शव मिला। संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। चैनपुर थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस को आशंका है कि युवती की हत्या के बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से शव को जलाने का प्रयास किया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हत्या किसी अन्य स्थान पर करके शव को जंगल में लाकर जलाया गया या वारदात को इसी जगह अंजाम दिया गया। थाना प्रभारी लालजी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर मौजूद हैं और हत्या से जुड़े संभावित सबूतों की तलाश कर रहे हैं। फिलहाल मृत युवती की पहचान नहीं हो सकी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। थाना प्रभारी लालजी ने बताया कि मौत के कारणों और घटना की वास्तविक जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। पुलिस आसपास के थानों से भी गुमशुदगी के मामलों की जानकारी जुटा रही है। दिनदहाड़े जंगल में अधजला शव मिलने की इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग इस वारदात को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस ने मामले का जल्द खुलासा करने का दावा किया है। Source link

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Sarla Bhatt murder case: जिस नर्स ने नहीं छोड़ी घाटी, उसे उठा...

होमताजा खबरदेश सरला भट्ट कौन थीं, 36 साल पहले उनके साथ क्या हुआ, कश्मीरी पंडितों को अब तक याद Last Updated:June 30, 2026, 12:58 IST करीब 34 साल पुराने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में यासीन मलिक समेत पांच आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. 18 अप्रैल 1990 को सरला भट्ट का श्रीनगर से अपहरण कर हत्या कर दी गई थी. SIA का दावा है कि 1990 में हुई सरला भट्ट की हत्या कश्मीरी पंडितों में दहशत फैलाकर उन्हें घाटी से पलायन के लिए मजबूर करने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के 36 साल पुराने हत्याकांड में पुलिस ने JKLF चीफ यासीन मलिक समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया है. कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट का करीब 36 साल पुराना हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है. जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी एसआईए (SIA) ने सोमवार को इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी. एजेंसी ने दावा किया है कि सरला भट्ट की हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि कश्मीरी पंडितों में दहशत फैलाकर उन्हें घाटी छोड़ने पर मजबूर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा थी. करीब 10 महीने पहले दोबारा खोली गई इस जांच में प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है. सरला भट्ट दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीबाग इलाके की रहने वाली थीं. वह श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं. 1990 की शुरुआत में जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद तेजी से फैल रहा था और कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो चुका था, तब भी सरला भट्ट ने घाटी छोड़ने से इनकार कर दिया था. उनका मानना था कि एक स्वास्थ्यकर्मी होने के नाते मरीजों की सेवा करना उनका कर्तव्य है. सरला भट्ट और गिरिजा टिक्कू की आतंकियों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी. 18 अप्रैल 1990 की रात कुछ हथियारबंद आतंकवादी उनके हॉस्टल में घुस आए और बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर ले गए. अगले दिन श्रीनगर के मल्लाबाग इलाके से उनका शव बरामद हुआ. उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे. मौके से एक हाथ से लिखी पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था. इसी आधार पर आतंकियों ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि वर्षों से कश्मीरी पंडित संगठनों का आरोप रहा है कि सरला भट्ट की हत्या से पहले उनके साथ बर्बरता की गई थी. कुछ संगठनों ने अपहरण, यातना और दुष्कर्म के आरोप भी लगाए, लेकिन तब के पुलिस रिकॉर्ड में इन आरोपों का जिक्र नहीं है. आधिकारिक जांच में केवल अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया था. कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सरला भट्ट सिर्फ एक नर्स नहीं, बल्कि 1990 के दौर में आतंकवाद का सामना करने वाली उन महिलाओं का प्रतीक मानी जाती हैं, जिन्होंने भय के माहौल के बावजूद घाटी नहीं छोड़ी. उनकी हत्या को आज भी कश्मीरी पंडितों के पलायन के सबसे चर्चित और दर्दनाक मामलों में गिना जाता है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Srinagar,Jammu and Kashmir 18 अप्रैल 1990 की रात कुछ हथियारबंद आतंकवादी उनके हॉस्टल में घुस आए और बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर ले गए. अगले दिन श्रीनगर के मल्लाबाग इलाके से उनका शव बरामद हुआ. उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे. मौके से एक हाथ से लिखी पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था. इसी आधार पर आतंकियों ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि वर्षों से कश्मीरी पंडित संगठनों का आरोप रहा है कि सरला भट्ट की हत्या से पहले उनके साथ बर्बरता की गई थी. कुछ संगठनों ने अपहरण, यातना और दुष्कर्म के आरोप भी लगाए, लेकिन तब के पुलिस रिकॉर्ड में इन आरोपों का जिक्र नहीं है. आधिकारिक जांच में केवल अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया था. कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सरला भट्ट सिर्फ एक नर्स नहीं, बल्कि 1990 के दौर में आतंकवाद का सामना करने वाली उन महिलाओं का प्रतीक मानी जाती हैं, जिन्होंने भय के माहौल के बावजूद घाटी नहीं छोड़ी. उनकी हत्या को आज भी कश्मीरी पंडितों के पलायन के सबसे चर्चित और दर्दनाक मामलों में गिना जाता है. इस हत्याकांड को लेकर दायर एसआईए की चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा चार अन्य JKLF आतंकियों के नाम शामिल किए गए हैं. इनमें अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सोफी की मौत हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चलकू अब भी फरार है और उसके पाकिस्तान में होने की आशंका जताई जा रही है. सरला भट्ट हत्याकांड को अगस्त 2025 में फिर से खोला गया. इससे पहले एसआईए ने कश्मीरी पंडित जज नीलकंठ गंजू की हत्या की जांच भी दोबारा शुरू की थी. गंजू की 1989 में हत्या कर दी गई थी. उन्होंने कभी JKLF के संस्थापक मकबूल भट्ट को फांसी की सजा सुनाई थी. जांच दोबारा शुरू होने के बाद एसआईए ने श्रीनगर में कई जगह छापेमारी की. इनमें यासीन मलिक का घर, पूर्व JKLF कमांडर जावेद अहमद मीर का ठिकाना और संगठन से जुड़े कई अन्य संदिग्धों के ठिकाने शामिल थे. कश्मीरी पंडित संगठन रूट्स इन कश्मीर ने 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि घटनाओं को 27 साल से ज्यादा समय बीत चुका है और अब पर्याप्त सबूत मिलना मुश्किल होगा. बाद में दाखिल क्यूरेटिव पिटीशन भी 2022 में खारिज कर दी गई. इसके बावजूद एसआईए ने 2023 से पुराने मामलों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की. कश्मीरी पंडितों की हत्या के मामलों की कोई आधिकारिक अंतिम संख्या उपलब्ध नहीं है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के 2008 के सर्वे के

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aiims delhi| Delhi AIIMS: फर्जी ST सर्टिफिकेट के सहारे MBBS में लिया...

Last Updated:June 30, 2026, 12:17 IST RIMS Admission: फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने का मामला सामने आने के बाद रांची के रिम्स (RIMS) ने बड़ा एक्शन लिया है. जांच में दस्तावेज गलत पाए जाने पर 2025 बैच के एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया. यह मामला मेडिकल एडमिशन में दस्तावेजों की जांच और पारदर्शिता को लेकर फिर चर्चा में आ गया है. ख़बरें फटाफट RIMS Ranchi MBBS admission cancelled: रीम्‍स में एडमिशन में लगाया फर्जी सर्टिफ‍िकेट. RIMS Admission: रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS)ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले एक छात्र का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. जांच में यह सामने आया कि छात्र ने अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था.इसके बाद संस्थान ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसका एडमिशन निरस्त कर दिया. 2025 बैच के एमबीबीएस छात्र पर हुई कार्रवाई कार्रवाई का सामना करने वाले छात्र का नाम आशीष कुमार है जो 2025 बैच का एमबीबीएस छात्र था. वह झारखंड के साहिबगंज जिले का रहने वाला है. उसने ST श्रेणी का प्रमाण पत्र लगाकर RIMS में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया था. जांच में फर्जी निकला जाति प्रमाण पत्र संस्थान की ओर से जब छात्र के दस्तावेजों की जांच कराई गई तो उसके द्वारा जमा किया गया अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया. प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि उसने गलत दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल किया था. RIMS ने तत्काल प्रभाव से रद्द किया नामांकन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद RIMS प्रशासन ने बिना देरी किए आशीष कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया.संस्थान का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. फर्जी दस्तावेजों पर सख्त रुख यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिले के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जांच कितनी अहम होती है. RIMS ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण पत्र या गलत जानकारी के आधार पर प्रवेश लेता है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में भी जांच पूरी होने के बाद छात्र का एमबीबीएस एडमिशन रद्द कर दिया गया है. About the Author Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर <strong>न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल</strong> में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी पर काम करते हैं. करीब 16 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय है. <strong>दै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

पाकुड़ में धूमधाम से मनाया गया हूल दिवस:सिद्धू-कान्हू मुर्मू पार्क में शहीदों...

पाकुड़ में हूल दिवस पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के सिद्धू-कान्हू मुर्मू पार्क में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां वीर शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों, आदिवासी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने पार्क में स्थापित सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, उप विकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल सहित जिला प्रशासन के कई अधिकारियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए और शहीदों के बलिदान को याद किया। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए लोग हूल दिवस के उपलक्ष्य में शहर में विभिन्न आदिवासी संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा भव्य जुलूस निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी देखी गई। जुलूस में सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव की आकर्षक झांकियां भी शामिल थीं, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। आदिवासी छात्र-छात्राओं और संगठनों ने पारंपरिक वेशभूषा में रैली निकाली और सिद्धू-कान्हू मुर्मू पार्क पहुंचकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पूरे रास्ते नारेबाजी और सांस्कृतिक उत्साह देखने को मिला, जिससे शहर का माहौल उत्सवमय हो गया। मिटिलो टावर का भी किया दर्शन कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं पर फूल अर्पित किए। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी इस आयोजन में शामिल हुए और शहीदों के योगदान को याद किया। इस अवसर पर लोगों ने सिद्धू-कान्हू पार्क परिसर में स्थित ऐतिहासिक मिटिलो टावर का भी दर्शन किया। हूल दिवस से जुड़े इस स्थल का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके कारण लोगों में इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिला। Source link

झारखंड

आवारा कुत्ते के हमले में चार साल का बच्चा गंभीर:गिरिडीह से धनबाद...

गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गांडेय प्रखंड के जमजोरी गांव में आवारा कुत्ते के हमले में चार वर्षीय बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना उस समय हुई जब बच्चा अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक आवारा कुत्ता वहां पहुंचा और उस पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के चेहरे के बाईं ओर गाल के पास गहरे जख्म कर दिए। हमले के दौरान कुत्ता बच्चे को कुछ देर तक दबोचे रहा। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद कुत्ते को वहां से भगाया। स्थानीय अस्पताल से धनबाद, फिर रिम्स रेफर हमले के तुरंत बाद परिजन घायल बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को चिंताजनक बताते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रांची स्थित रिम्स भेजने का निर्णय लिया। फिलहाल बच्चे का इलाज रिम्स में चल रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है। आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की मांग इस घटना के बाद जमजोरी गांव सहित आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण डरे-सहमे हैं। Source link

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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी हुआ, यहां तो भगवान को ही...

होमताजा खबरदेश राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, यहां तो भगवान को ही सोनार के पास ले गए, सोना गायब Last Updated:June 30, 2026, 12:08 IST Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद के बीच केरल के सबरीमाला मंदिर से भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के कथित गायब होने का मामला चर्चा में है. आरोप है कि गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर मूर्तियों को चेन्नई ले जाया गया और वापस आने पर उन पर पहले से चढ़े सोने का हिस्सा गायब मिला. मामले में केरल हाईकोर्ट ने दो वामपंथी नेताओं और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है. अयोध्या में दान विवाद, केरल में भगवान के गहने गायब! सबरीमाला के ‘सोना कांड’ अयोध्या में दान विवाद, केरल में भगवान के गहने गायब! सबरीमाला के ‘सोना कांड’ में हाईकोर्ट का बड़ा आदेशमें हाईकोर्ट का बड़ा आदेश Ayodhya Ram Mandir Daan Chori: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा छाया हुआ है. लखनऊ से अयोध्या तक हलचल है. रामभक्तों का खून खौल रहा है. दान चोरी से सबके अंदर गुस्सा है. राम मंदिर में दान गबन को लेकर माहौल गरम है. इसी बीच अब अयोध्या से 2000 किलोमीटर दूर भगवान की मूर्ति से सोने का गहना ही गायब हो गया है. जी हां, केरल के सबरीमाला मंदिर से भगवान के गहने चोरी होने का मामला लोगों को हैरान कर रहा है. इधर अयोध्या में तो राम मंदिर में चढ़ावा चोरी हुआ. यहां तो भगवान की मूर्तियों पर से सोना के कहना ही उतार लिया गया. भगवान की मूर्ति से सोना गायब होने का मामला अब अदालत में है. सोना गायब होने के मामले की जांच जारी है. अब केरल हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. आदेश के मुताबिक, दो वामपंथी नेताओं और टीडीबी यानी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज होगा. जी हां, केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर से कथित तौर पर सोना चोरी होने की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को निर्देश दिया कि वह एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के दो नेताओं और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करे. ये अधिकारी 2023 से 2025 के बीच मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रमुख पदों पर थे. क्या है सबरीमाला मंदिर में सोना कांडसबसे पहले इस मामले को समझते हैं. एसआईटी ने पिछले साल दो अन्य मामले दर्ज किए थे. इनमें सीपीआई एम नेता और पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया था. ये मामले उस चोरी से संबंधित थे, जो कथित तौर पर 2019 में राज्य में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली पहली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी. नया मामला 2023 में एलडीएफ सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल के दौरान मूर्तियों को चेन्नई ले जाने से जुड़े आरोपों से संबंधित है. गोल्ड प्लेटिंग के बहाने चेन्नई ले जाई गईं मूर्तियांइंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक की मूर्तियों पर 1998 में सोने की परत चढ़ाई गई थी. साल 2019 में इन्हें दोबारा गोल्ड प्लेटिंग कराने के बहाने चेन्नई भेजा गया. आरोप है कि जब मूर्तियां वापस लौटीं तो उन पर पहले से चढ़े सोने का कुछ हिस्सा गायब था. इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि 2023 में फिर से इन्हीं मूर्तियों को गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर चेन्नई ले जाने की योजना बनाई गई. अदालत का मानना है कि ऐसा पहले हुई कथित सोने की चोरी पर पर्दा डालने के लिए किया गया. हाईकोर्ट ने दर्ज कराया केसहाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश, भरोसा तोड़ने और फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं. इसके बाद कोर्ट ने कई आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. चीज़ों को दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए भेजने के फैसले के पीछे की कथित साजिश का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘इसका मकसद पहले की गड़बड़ियों को छिपाना था और इससे देवस्वोम को और नुकसान होगा’. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में एक सोनार यानी जौहरी और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अयोध्या विवाद से अलग मगर सवाल एक जैसे दरअसल, अयोध्या में विवाद राम मंदिर के चढ़ावे और उसकी पारदर्शिता को लेकर उठा है. वहीं, सबरीमाला का मामला भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के कथित गायब होने से जुड़ा है. दोनों मामलों की प्रकृति अलग है, लेकिन दोनों ने मंदिरों में चढ़ावे और बहुमूल्य आभूषणों की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब केरल हाई कोर्ट के लेटेस्ट आदेश के बाद अब इस मामले की आपराधिक जांच आगे बढ़ेगी. इसके बाद यह साफ होगा कि मूर्तियों से सोना गायब किसने किया और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है? About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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