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झारखंड

इस घर की छत पर परमानेंट पार्क रहता है हेलीकॉप्टर! सोशल मीडिया...

Last Updated:June 17, 2026, 09:03 IST Bokaro Ka Helicopter Wala Ghar: बोकारो का हेलीकॉप्टर वाला घर आजकल सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. दरअसल चंद्रपुरा प्रखंड के झरना बस्ती के जमुना प्रसाद महतो को बचपन से हेलीकॉप्टर का बहुत शौक था. जब उन्होंने घर बनवाया तो अपनी छत पर सीमेंट से हेलीकॉप्टर की आकृति तैयार करवायी जिस पर 50 हजार खर्च आया. आज उनके इस घर को देखने लोग दूर-दूर से आते हैं और यहां सेल्फी भी लेते हैं. ख़बरें फटाफट बोकारो. बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के झरना बस्ती इन दिनों एक अनोखी वजह से खूब चर्चा में है. यहां एक घर की छत पर बना विशाल हेलीकॉप्टर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है, और इस हेलीकॉप्टर की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसके बाद दूर-दूर से लोग इस अनोखे घर को देखने पहुंच रहे हैं और सेल्फी ले रहे हैं और साथ में फोटो खिंचवा रहे हैं. वहीं इस अनोखी पहल के पीछे घर के मालिक जमुना प्रसाद महतो हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर के प्रति विशेष लगाव रहा है और इसी दीवानगी को साकार करने और अपने घर को बाकी घरों से अलग पहचान देने के उद्देश्य से उन्होंने घर की छत पर हेलीकॉप्टर का निर्माण कराया है. 50 हजार में बना छत पर हेलीकॉप्टरसाल 2022 में जब वह अपना घर बनवा रहे थे, तभी उन्होंने छत पर हेलीकॉप्टर बनाने का निर्णय लिया था. इस हेलीकॉप्टर के निर्माण में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आई है और इसकी लंबाई करीब 12 फीट है. सीमेंट से बने इस हेलीकॉप्टर में पंखे, टायर जैसी आकृतियां भी तैयार की गई हैं, जिससे यह हूबहू असली हेलीकॉप्टर जैसा दिखाई देता है. वहीं उनके इस अनोखे विचार पर शुरुआत में परिवार के लोगों को थोड़ा अलग लगा, लेकिन फिर परिवार के हर सदस्य ने हर कदम पर उनका साथ दिया और आज यही हेलीकॉप्टर पूरे इलाके की पहचान बन चुका है. सोशल मीडिया पर वायरल घरवहीं स्थानीय निवासी रोशन महतो बताते हैं कि पिछले कुछ समय से यह घर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और आसपास के गांवों और शहरों से लोग यहां पहुंच रहे हैं. कई लोग हेलीकॉप्टर वाली छत के साथ फोटो और सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. उन्होंने घर भी बहुत सुंदर बनाया है. कुल मिलाकर बोकारो के घर में किया गया यह प्रयोग आज खूब चर्चा का विषय बना है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

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क्रॉस वोटिंग होने पर ही जीतेंगे नाथवाणी:प्रथम-द्वितीय वरीयता के वोट और क्रास...

झारखंड बनने से अबतक राज्य सभा के लिए यहां 7 उपचुनाव और 12 दो वर्षीय सहित 19 चुनाव हुए हैं। इस बार भी दो सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोट और क्रॉस वोटिंग की कहानी नई नहीं है। यहां इन वजहों से राज्यसभा चुनाव परिणाम और समीकरण कई बार बदल चुका है। इस बार भी इस खेल राजनीतिज्ञ और विधायी विशेषज्ञ इंकार नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत की वजह क्रॉस वोटिंग ही माना जा रहा है। रद्द हुआ एक भी वोट बदल देगा पूरा समीकरण ​इस चुनाव में सत्तारूढ़ झामुमो के लिए अपने पहले उम्मीदवार के लिए ठीक 28 मतों का दांव लगाना जोखिम से खाली नहीं है। यदि एक भी वोट रद्द होता है, तो पूरा समीकरण बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में यदि झामुमो अपने उम्मीदवार को सुरक्षित करने के लिए प्रथम वरीयता के 29 या 30 मत दिलाता है, तो सत्तारूढ़ गठबंधन के दूसरे उम्मीदवार के पास केवल 25 या 26 वोट बचेंगे। ऐसी स्थिति में दूसरे उम्मीदवार को जीतने के लिए विपक्ष से बड़ी सेंधमारी या अन्य दांव लगाने होंगे। ​ सत्तारूढ़ दल को अपनी दूसरी सीट और विपक्ष को अपनी एकमात्र सीट बचाने के लिए ‘द्वितीय वरीयता’ के वोटों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। झारखंड में राज्य सभा का चुनाव प्रत्याशी और प्रस्तावक के लिहाज से ही नहीं चुनाव परिणाम के लिए भी दिलचस्प रहा है। कभी सुनिश्चित जीत हार में तबदील हुआ तो कभी .01 के न्यूनतम मत के अंतर से हार जीत हुई है। आंकड़ों से समझिए कहां फंस सकता है पेंच इस बार झामुमो के 34 विधायक हैं। जीत के लिए उसे 28 ही चाहिए। इसलिए उसके उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। महागबंधन एक जुट रहा, तब ही कांग्रेस की जीत हो सकती है। अभी महागठबंधन में कुल 56 विधायक हैं। झामुमो के प्रथम वरीयता के 28 वोट के बाद 06 वोट शेष बचता है। कांग्रेस के पास कुल 16 विधायक हैं। झामुमो के शेष छह वोट मिलाकर कुल 22 वोट हो जाता है। छह वोट राजद के चार विधायक और माले के दो विधायक से पूरा हो जाता है। यदि महागठबंधन का वोट एकजुट रहा तो कांग्रेस की जीत सुनिश्चित हो जाएगी। यदि क्रॉस वोटिंग या भीतरघात हुओ तो मामला फंस सकता है। क्रॉस वोटिंग होने पर ही नाथवाणी की जीत होगी। एक्सपर्ट से समझिए तकनीकी बात झारखंड विधानसभा के रिटायर संयुक्त सचिव मधुकर भारद्वाज के मुताबिक राज्य सभा के मतदान में यदि झामुमो के सभी 34 विधायकों ने अपने प्रत्याशी को मत दिया तो कांग्रेस प्रत्याशी के लिए अधिकतम 22 मत और भाजपा समर्थित निर्दलीय के लिए 24-25 मत प्रथम वरीयता के उपलब्ध रहेंगे। सत्ता पक्ष की आपसी प्रतिबद्धता बनी रहे और कांग्रेस के प्रत्याशी को झामुमो के कम से कम 4 प्रथम वरीयता के मत मिले तभी वह प्रत्यक्षत: निर्दलीय प्रत्याशी से आगे रहेंगे और संभावित दूसरी वरीयता के लिए दौड़ में बनें रहेंगे। निर्दलीय प्रत्याशी को 24-25 मत निश्चित लगते हैं। अगर सदस्यों की अनुपस्थिति या त्रुटिपूर्ण मतपत्र के कारण कुल वैध मत 81 से कम हो जाते हैं तो निर्धारित कोटा कम होगा और परिस्थिति बदल सकती है। कुल मत का कम होना कांग्रेस के लिए परेशानी बढ़ाएगा। क्योंकि झामुमो के प्रथम वरीयता के मत के बिना वह निर्दलीय प्रत्याशी से चार मत यूं ही पीछे है। कांग्रेस के लिए जीत तभी संभव है जब झामुमो का कम से कम चार प्रथम वरीयता के और इतने ही दूसरी वरीयता का मत झामुमो को मिले मतपत्र से मिले। निर्दलीय प्रत्याशी की जीत के लिए कुल मतदान का कम होना और झामुमो के अतिरिक्त मत में चाहे प्रथम वरीयता का हो या द्वितीय वरीयता का शेयर लेना जरूरी होगा। Source link

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रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से मिले झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के...

रांची3 घंटे पहले कॉपी लिंक रांची| झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के नवनियुक्त कुलपति प्रो. (डॉ.) अभय कुमार सिंह ने मंगलवार को भारत सरकार के केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं एवं विकास से जुड़े विभि Source link

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मानसून में डूब जाएगी या बचेगी मक्के की फसल? कृषि एक्सपर्ट ने...

होमवीडियोकृषि मानसून में डूब जाएगी या बचेगी मक्के की फसल? कृषि एक्सपर्ट ने बताया रामबाण तरीक X मानसून में डूब जाएगी या बचेगी मक्के की फसल? कृषि एक्सपर्ट ने बताया रामबाण तरीक   Maize farming : झारखंड में मानसून की दस्तक के साथ मक्के की खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को मेढ़ विधि अपनाने की सलाह दे रहे हैं. देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा के अनुसार, इस तकनीक में फसल को ऊंची मेढ़ों पर लगाया जाता है और बीच में नालियां छोड़ी जाती हैं, जिससे बारिश का अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है. इससे जड़ों में सड़न और गलन का खतरा कम होता है. मेढ़ों पर मिट्टी चढ़ाने से पौधे तेज हवा और आंधी में भी मजबूत बने रहते हैं. विशेषज्ञों ने VNR, 4226 और शक्तिवर्धक जैसी उन्नत किस्मों के बीज तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजीन के उपयोग की भी सलाह दी है. Source link

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रांची में यहां लगा है किसान मेला… एक ही छत के नीचे...

Last Updated:June 17, 2026, 07:29 IST रांची के मोराबादी मैदान में तीन दिवसीय निशुल्क कृषि व्यापार मेला लगा है. यहां किसानों को नई तकनीक, स्टार्टअप और फसल बीमा की जानकारी मिल रही है. मेले में ऑर्गेनिक खाद बनाने और एक एकड़ से आमदनी दोगुनी करने के गुर सिखाए जा रहे हैं. किसान रागी और लेमनग्रास जैसे उत्पादों की लाइव मार्केटिंग भी सीख रहे हैं. रांची के मोराबादी मैदान में तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला लगा हुआ है. किसानों के लिए यह मेला पूरी तरह निशुल्क है. यहां उन्हें खेती की नई तकनीक, नई फसलों और फसल बीमा की जानकारी मिलेगी. इसके साथ ही किसान अपनी मिट्टी की गुणवत्ता जांचने और फसल की बाजार में ब्रांडिंग करने के तरीके भी सीख सकते हैं. यहां किसानों के लिए विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की जा रही हैं. मेले में कंपनी शुरू करने की पूरी जानकारी उपलब्ध है, जिससे किसानों में काफी उत्साह है. यहां कृषि तकनीकों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हो रहा है, जहां लोग झारखंड के पारंपरिक गीतों का आनंद ले सकते हैं. इसके अलावा, मेले में खाने-पीने के भी बेहतरीन इंतजाम किए गए हैं. मेले में आपको ऐसे कई प्रगतिशील किसान मिलेंगे, जिन्होंने अपने उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाया है. उदाहरण के लिए, इंदु प्रकाश लेमनग्रास की खेती कर उसका तेल अंडमान-निकोबार तक सप्लाई कर रहे हैं. यहां आपको उन सफल किसानों से मिलने का मौका मिलेगा. जिन्होंने सिर्फ पारंपरिक खेती ही नहीं की, बल्कि अपनी खुद की बड़ी कंपनियाँ खड़ी कर दी हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कृषि पदाधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि मेले में किसानों को ऑर्गेनिक और बायोकेमिकल खाद के साथ फर्टिलाइजर बनाने की विधि सिखाई जा रही है. यहां किसानों को जानकारी दी जा रही है कि कैसे वे अपनी मात्र एक एकड़ जमीन का सही और अधिकतम उपयोग कर सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी दोगुनी हो सके. मेले में ऐसे कई स्टॉल हैं जहाँ किसान रागी उगाने के साथ-साथ रागी के लड्डू और आटा बनाकर खुद मार्केटिंग भी कर रहे हैं. यहां आकर दूसरे किसान यह आसानी से देख और समझ सकते हैं कि कैसे अपने कच्चे माल को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट (मूल्य वर्धित उत्पाद) में बदलकर बाजार में बेचना है और अपनी आमदनी को दोगुना करना है. Source link

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नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य पूरा होते ही मिलेगा स्लॉट:रांची से बेंगलुरु व हैदराबाद के...

रांची से बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए दो नई ट्रेनें चलेंगी। इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु सेक्शन में चल रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के पूरा होते ही नई ट्रेन के लिए स्लॉट उपलब्ध हो सकता है। यह विकास कार्य लगभग एक माह में पूरा होने की संभावना है। रांची से बेंगलुरु के लिए चलनेवाली ट्रेन बरकाकाना-गया-जबलपुर-नागपुर-काजीपेट-धर्मावरम मार्ग से होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। इस ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) करने की योजना है। रांची से हैदराबाद के लिए प्रस्तावित ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार) किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी दोनों ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में प्रस्तावित किया गया है और इनके संचालन के अनुभव के आधार पर आगे इन्हें नियमित ट्रेनों में बदला जा सकता है। जानिए दक्षिण की ओर जानेवाली ट्रेनों की स्थिति बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना लक्ष्य, हो रहा काम… इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य झारखंड को दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों से बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द ही ये ट्रेन सेवा शुरू हो सके, ताकि यात्रियों को लंबी वेटिंग और वैकल्पिक मार्गों की परेशानी से राहत मिल सके। – श्रेया सिंह, सीनियर डीसीएम, रांची फ्लाइट भी खाली नहीं, किराया भी बढ़ा हुआ रांची एयरपोर्ट से चेन्नई और बेंगलुरु जाने का किराया भी काफी बढ़ा हुआ है। बेंगलुरु और चेन्नई जाने का अगले पांच दिन तक किराया 9000 से 11000 रुपए तक है। ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि बेंगलुरु और चेन्नई के लिए सीटें जल्द भर जा रही हैं। अगले पांच दिनों तक 80 प्रतिशत तक सीटें भर चुकी हैं। मालूम हो कि बेंगलुरु और चेन्नई का सामान्य किराया 7000 से 7500 रुपए है। Source link

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3°C तक बढ़ा रांची का तापमान:रांची सहित 6 जिलों में आज बारिश...

झारखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 19 जून से 22 जून के बीच राज्य के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय होगा और तेज हवा, वज्रपात तथा रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए रांची समेत 17 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने के संकेत हैं। वहीं 17 जून को रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, सरायकेला, रामगढ़ और बोकारो में हल्की बारिश, वज्रपात और 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। तापमान में बढ़ोतरी से बढ़ी गर्मी मानसून के दो दिनों तक कमजोर रहने के कारण राज्य में तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रांची में अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि जमशेदपुर में 39.4 डिग्री, बोकारो में 39.2 डिग्री और चाईबासा में 39.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मेदिनीनगर का तापमान तो 42.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। रांची में मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान में करीब 3 डिग्री की बढ़ोतरी हुई, जिससे गर्मी और उमस बढ़ गई। दिन में तेज धूप के कारण सड़कों और बाजारों में दोपहर के समय भीड़ कम नजर आई। बारिश की कमी से बढ़ा उमस राजधानी रांची में बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। बिजली कटौती वाले इलाकों में स्थिति और भी खराब हो गई है, जहां बच्चों और बुजुर्गों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मौसम विभाग का कहना है कि कोल्हान क्षेत्र में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना कम है, जिससे गर्मी और उमस बनी रहेगी। ठनका गिरने से दो की मौत इस बीच राज्य में वज्रपात की घटनाएं भी सामने आई हैं। जामताड़ा के अंबा गांव में ठनका गिरने से 13 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई, जबकि बंदगांव में 16 वर्षीय युवक की जान चली गई। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने को कहा है। खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। विभाग के अनुसार, 18 जून से राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। Source link

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Uddhav Thackeray | Shiv Sena UBT crisis | Operation Tiger | सांसद...

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी भूचाल की चरम पर है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पार्टी से अलग होने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है. हालात ऐसे हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने सांसदों से फोन पर भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. कई सांसदों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं, जिससे मातोश्री की चिंता और बढ़ गई है. खबर है कि उद्धव ठाकरे और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता खुद सांसदों को मनाने और पार्टी के साथ बनाए रखने की कोशिश में जुट गए हैं. इसी बीच दिल्ली में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है. दिल्ली पहुंचे एकनाथ शिंदे, बागियों के साथ होगी बैठक महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में इस संभावित टूट को ‘ऑपरेशन टाइगर’ की संज्ञा दी जा रही है. इस बीच शिवसेना चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे दिल्ली पहुंच गए हैं. वहीं उनके बेटे और शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे के आज दिल्ली पहुंचने की संभावना है. बताया तो जा रहा है कि श्रीकांत शिंदे संसद की स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग में शामिल होने के लिए वह दिल्ली आ रहे हैं. लेकिन इन दोनों नेताओं के दौरे को इसी ऑपरेशन टाइगर से जोड़कर देखा जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के कुछ सांसद आज सुबह करीब 8:30 बजे श्रीकांत शिंदे के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक करेंगे. इस बैठक में शिंदे पिता-पुत्र भी मौजूद रहेंगे. बताया जा रहा है कि इसके बाद कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात कर सकते हैं. चर्चा यह है कि पहले लोकसभा में एक अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और बाद में उस समूह का विलय शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में कराया जा सकता है. किन सांसदों के नाम चर्चा में? सियासी गलियारों में जिन सांसदों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं. इसके अलावा राजाभाऊ वाजे का नाम भी संभावित बागियों की लिस्ट में जोड़ा जा रहा है. हालांकि इनमें से कुछ सांसदों ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी छोड़ने की बात से इनकार किया है. नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई नॉर्थ ईस्ट के सांसद संजय दीना पाटिल ने कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं. उद्धव की सेना ने चली ममता वाली चाल इस सारी अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने ममता बनर्जी वाली चाल चली है. पार्टी के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पार्टी के किसी भी सांसद के अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय के दावे को मान्यता न दी जाए. ठीक इसी तरह का पत्र ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी स्पीकर ओम बिरला को लिखा था. इस पत्र में कहा गया है कि शिवसेना यूबीटी एक ही राजनीतिक दल है, और कानून की नजर में वही मान्य है. पार्टी ने कहा कि संसद में पार्टी का अस्तित्व मूल राजनीतिक दल से आता है, इसलिए अलग-अलग गुट बनाकर उसी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं किया जा सकता. सावंत ने अपने पत्र में कहा है कि संविधान की दसवीं अनुसूची में 2003 के संशोधन के बाद अलग गुट बनाने का प्रावधान समाप्त हो चुका है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सांसद की वैधता राजनीतिक दल से आती है, न कि केवल संसदीय दल से. उन्होंने आग्रह किया कि यदि कोई समूह खुद को अलग गुट बताता है तो उसे किसी भी प्रकार की मान्यता, सुविधा या विशेष दर्जा न दिया जाए. मातोश्री की बैठक से बढ़ा सस्पेंस इससे पहले उद्धव ठाकरे ने रविवार को मातोश्री में अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी. लेकिन नौ में से केवल चार सांसद ही इस मीटिंग में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे. बाकी सांसदों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या फोन के जरिए हिस्सा लिया. इसी बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि आखिर कई सांसद व्यक्तिगत रूप से क्यों नहीं पहुंचे. पार्टी ने इसे सामान्य बताया, लेकिन विरोधी खेमा इसे असंतोष का संकेत बता रहा है. संजय देशमुख की मुलाकात से बढ़ी चर्चा इसके बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने अटकलों को और हवा दे दी. हालांकि दोनों नेताओं ने कहा कि यह मुलाकात केवल क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर थी और इसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए. इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित सियासी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है. शिंदे गुट ने खोले दरवाजे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रताप सरनाईक ने संकेत दिया है कि अगर उद्धव गुट के सांसद या विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा. सरनाईक ने कहा कि जो नेता बालासाहेब ठाकरे के विचारों में विश्वास रखते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं, उनके लिए शिवसेना के दरवाजे खुले हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी. संजय राउत का पलटवार इस बीच दिल्ली पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने टूट की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने की कोशिश की जा रही है. राउत ने दावा किया कि कुछ लोगों को सांसदों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए प्रति सांसद 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है. राउत ने यह भी कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में विश्वास जताते हैं. चौथी बरसी से पहले बढ़ी बेचैनी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में इस टूट की चर्चा ऐसे समय जोर पकड़ रही है, जब ठीक चार पहले वर्ष 2022 में इसी वक्त एकनाथ शिंदे

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आईसीयू में नर्सिंग एजुकेशन… 6 बैच के 12 हजार स्टूडेंट्स अटके, परीक्षा...

यूजी और पीजी के लगभग सभी पाठ्यक्रमों का सत्र नियमित नहीं रहने को लेकर पहले से सवालों के घेरे में रही रांची यूनिवर्सिटी अब अपने ही परीक्षा कैलेंडर को पालन करने में विफल रही है। बेसिक और पोस्ट बेसिक नर्सिंग कोर्स के सेशन में सुधार को लेकर हाल ही में रजिस्ट्रेशन, परीक्षा और रिजल्ट से संबंधित कैलेंडर जारी किया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि कैलेंडर के अनुसार न तो समय पर परीक्षा हो रही है और न ही परिणाम घोषित हो रहे हैं। बेसिक नर्सिंग के 4 और पोस्ट बेसिक नर्सिंग के 2 बैच के अलग-अलग स्तर पर लगभग 12 हजार से अधिक छात्र फंसे हुए हैं। मंगलवार को स्टूडेंट्स समस्याओं को लेकर आरयू मुख्यालय पहुंचे और परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार सिंह व कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा से मिलकर कर लंबित रिजल्ट, रजिस्ट्रेशन में विलंब से अवगत कराया। छात्र बोले- परीक्षा व रिजल्ट के लिए लगा रहे चक्कर छात्रों ने कहा कि आरयू में दाखिला लेने के बाद उनका भविष्य अधर में लटक गया है। परीक्षा और परिणाम के लिए बार-बार विश्वविद्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। नर्सिंग सेकेंड और थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा अप्रैल में हुई थी, लेकिन दो महीने बाद भी परिणाम घोषित नहीं किया गया है। लोक भवन के आदेश के अनुसार परीक्षा समाप्त होने के एक माह के अंदर रिजल्ट जारी करना है, जिसमें विवि विफल रहा है। 15 दिनों के अंदर रिजल्ट जारी करने का दिया भरोसा परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार सिंह ने छात्रों को बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विलंब हुआ है। संबंधित केंद्रों को रिमाइंडर भेजा गया है। अपने स्तर से लगातार प्रयास कर रहे हैं। 15 दिनों के भीतर परिणाम जारी करने का भरोसा भी छात्रों को दिया। साथ ही कहा कि रजिस्ट्रेशन हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालांकि संबंधित विभाग को रजिस्ट्रेशन के लिए शीघ्र पत्र लिखूंगा। Source link

शिक्षा

Dainik Bhaskar series Antim Artificial intelligence Career

नई दिल्ली4 घंटे पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI शॉर्ट-टर्म कोर्स जॉब के लिए काफी नहीं हैं। देश में आने वाली कुल जॉब वैकेंसी में करीब 14% में सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI स्किल की मांग की जा रही है और यह रफ्तार लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि AI से जुड़े कोर्स की बाढ़ आ गई है। मगर नैसकॉम और इंडीड की संयुक्त रीस्किलिंग व टेक हायरिंग रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट में चल रहे करीब 70% कोर्स सिर्फ ‘धोखा’ दे रहे हैं। दरअसल, कंपनियों के पास 4 साल की डिग्री का इंतजार करने का समय नहीं है, इसलिए वे उन्हें तुरंत हायर कर रही हैं जो 3-6 महीने के फास्टट्रैक कोर्स के जरिए इन विशिष्ट भूमिकाओं के लिए तैयार होकर आ रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स यह चेतावनी भी देती हैं कि सिर्फ सर्टिफिकेट बेचने वाले फर्जी बूटकैंप्स से बचें। बाजार केवल उसी फास्ट-ट्रैक कोर्स को तवज्जो दे रहा है, जिसके अंत में छात्र के पास 3 से 4 लाइव, डिप्लॉयड पब्लिक प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो मौजूद हो। सवाल: AI इतनी तेज सीख रहा, ये कोर्स ‘बेकार’ नहीं हो जाएंगे इसे दो हिस्सों में समझें- पहला: टूल-बेस्ड स्किल्स (अल्पकालिक): ‘चैटजीपीटी’ सिखाने वाले कोर्स की प्रासंगिकता 6 महीने भी नहीं रहेगी। AI खुद ये काम आसान बना देगा। दूसरा: कोर प्रिंसिपल्स (दीर्घकालिक): डेटा लिटरेसी, एथिकल AI, प्रॉब्लम फ्रेमिंग और AI सिस्टम डायरेक्शन जैसे बुनियादी सिद्धांत सिखाने वाले कोर्स लंबे समय (3-5 साल+) तक प्रासंगिक रहेंगे। दैनिक भास्कर ने ‘100% जॉब गारंटी’ के दावों में छिपी शर्तें को लेकर इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (ISF) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुचिता दत्ता से बात की। उनसे कुछ सवाल किए, जिनके जवाब उन्होंने दिए शॉर्ट-टर्म कोर्स जॉब के लिए काफी हैं?बिल्कुल नहीं। बाजार उन्हें पुरस्कृत करता है, जिसके पास पारंपरिक डिग्री के बुनियादी आधार के साथ-साथ व्यावहारिक AI की समझ और लाइव प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो हो। ‘100% जॉब गारंटी’ के दावे सही हैं?ऐसे दावों में न्यूनतम वेतन (अक्सर 3-4 लाख रु. सालाना), अनिवार्य उपस्थिति और रीलोकेशन जैसी कड़ी शर्तें छिपी होती हैं। कई कोर्सेज में पुराना पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। क्या AI स्किल्स जानने वालों को वेतन में कोई विशेष लाभ मिल रहा है?हां, बाजार में AI स्किल्स की भारी डिमांड है। डेटा के अनुसार, जिन नौकरियों में AI कौशल की मांग की जाती है, वहां मिलने वाला औसत वेतन प्रीमियम पिछले वर्ष के 25% से बढ़कर अब सीधे 56% हो चुका है। जेनेरेटिव AI, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps में सैलरी का क्या ट्रेंड है?इन आधुनिक क्षेत्रों में असली प्रीमियम स्किल्स और लाइव प्रोजेक्ट को मिलता है। बाजार में जेनेरेटिव AI, एलएलएम इंजीनियरिंग और MLOps की भूमिकाएं मिड-लेवल पर लगभग 18-35 लाख सालाना पैकेज दे रहीं। कौन-सी जॉब ज्यादा प्रभावित हो रहीं?अनुमानों के मुताबिक, AI शुरुआती स्तर की भूमिकाओं को 20 से 25% तक कम कर रहा है। एंट्री लेवल की नियुक्तियों में महीने-दर-महीने 23% और साल-दर-साल 44% की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें सबसे ज्यादा असर रूटीन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बेसिक कस्टमर सपोर्ट और जूनियर-कोडिंग जैसे कामों पर पड़ रहा है। आईएमएफ के अनुसार, भारत के 26% कार्यबल पर जनरेटिव AI का प्रभाव पड़ रहा है, जिसमें से 12% पर सीधे नौकरी जाने का खतरा है। जून 2026 में भारत की टेक हायरिंग 28 महीने के निचले स्तर पर आ गई। इंटरव्यू का तरीका कैसे बदल गया?अब कोडिंग टेस्ट नहीं होते हैं। समस्या को समझने, निर्णय लेने की क्षमता व सही प्रॉम्प्ट देने की योग्यता देखते हैं। AI सीखने-समझने की शुरुआत AI for Everyone से करें किसी महंगे या भारी-भरकम कोडिंग कोर्स में सीधे पैसा और समय लगाने की जल्दबाजी न करें। पहले ‘AI साक्षरता’ और ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ को मजबूत करें। सबसे पहला कोर्स जो आपको अभी से शुरू करना चाहिए- कोर्स का नाम : ‘AI for Everyone’ (एंड्रयू एनजी) कहां उपलब्ध : Coursera (फ्री है, अगर सर्टिफिकेट चाहिए तो ही पैसे लगते हैं। इसमें सर्टिफिकेट लेना ज्यादा जरूरी नहीं है) समय: मात्र 6 से 10 घंटे। क्यों जरूरी है: AI की दुनिया के सबसे बड़े गुरु एंड्रयू एनजी का यह कोर्स आपको बिना किसी कोडिंग के यह सिखाएगा कि AI वास्तव में काम कैसे करता है? न्यूरल नेटवर्क क्या हैं? और आप अपने दैनिक काम या बिजनेस में AI के अवसरों को कैसे पहचान सकते हैं? यह आपकी नींव (फाउंडेशन) तैयार कर देगा। ……………….. एआई से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- 2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर: 40% कंपनियों में डिग्री+AI वालों को तवज्जो; चीन ने 12000 डिग्रियां खत्म कीं, एआई कोर्स शुरू देश में आईटी, कानून, कॉमर्स,ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं। एचआर कंपनी टीमलीज का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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