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झारखंड

जामताड़ा के जीतपुर जंगल में प्रेमी जोड़े का मिला शव:लाश के पास...

जामताड़ा जिले के मिहिजाम थाना क्षेत्र के जीतपुर जंगल में शनिवार को एक युवक और एक युवती के शव बरामद हुए। झाड़ियों के बीच शव पड़े देखकर स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर मिहिजाम थाना प्रभारी प्रदीप राणा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शवों को कब्जे में लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक जांच में मृत युवक की पहचान बोदमा गांव निवासी सागेन हेंब्रम के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर शादीशुदा था। मृतका की पहचान पश्चिम बंगाल के सालनपुर थाना क्षेत्र के महेशपुर निवासी मालती मुर्मु के तौर पर की गई है। थाना प्रभारी प्रदीप राणा ने बताया कि घटनास्थल से जहर की एक बोतल बरामद हुई है। प्रथम दृष्टया यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है और आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने जहर खाकर आत्महत्या की है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस इस मामले में आत्महत्या और अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं से गहराई से जांच कर रही है। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। Source link

शिक्षा

NEET UG 2026 Exam Guidelines Issued by NTA; Over 22.79 Lakh Students...

Hindi News Career NEET UG 2026 Exam Guidelines Issued By NTA; Over 22.79 Lakh Students To Appear 1 घंटे पहले कॉपी लिंक मेडिकल एट्रेंस एग्जाम NEET UG 2026 का आयोजन कल यानी 3 मई 2026 को होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार इस एग्जाम के लिए 22.79 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया है। इस एग्जाम को क्लियर करने वाले स्टूडेंट्स को मेडिकल कॉलेजों में MBBS कोर्सेस में एडमिशन मिलेगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को होने वाली NEET UG परीक्षा के लिए ड्रेस कोड और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी : NTA ने नीट यूजी 2026 के लिए हेल्प लाइन नंबर 011-40759000 और 011-69227700 जारी किए हैं। साथ ही ई मेल neetug2026@nta.ac.in पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। एग्जाम से संबंधित अन्य जानकारी के लिए स्टूडेंट्स ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in and neet.nta.nic.in चेक करते रहें। फ्रिस्किंग, बायोमेट्रिक और CCTV से निगरानी : एग्जाम सेंटर पर एंट्री से पहले स्टूडेंट्स की गहन तलाशी (फ्रिस्किंग) की जाएगी। साथ ही बायोमेट्रिक हाजिरी और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर निगरानी रखी जाएगी। NEET UG एग्जाम 2026 : क्वालिफाइंग मार्क्स : जनरल : 50% क्वालिफाइंग मार्क्स अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग : 40% दिव्यांग : जनरल कैटेगरी होने पर 45 % पिछले साल 20.8 लाख कैंडिडेट्स ने दी थी एग्जाम साल 2025 में नीट – यूजी का आयोजन 4 मई को देश भर के 5 हजार से ज्यादा सेंटर पर हुआ था। 22.7 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने NEET UG के लिए रजिस्ट्रेशन किया था। इसमें 13.76 लाख लड़कियों और 9.98 लाख लड़के थे। इस तरह 20.8 लाख कैंडिडेट्स इस परीक्षा में शामिल हुए थे। नीट यूजी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की डायरेक्ट लिंक ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ——————- ये खबर भी पढ़ें : ISC, ICSE रिजल्ट 2026 जारी:10वीं में 98%, 12वीं में 99% स्टूडेंट्स पास, टॉपर्स की लिस्ट इस साल भी नहीं की गई रिलीज काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन यानी सीआइएससीई ने ICSE क्लास 10वीं और ISC 12वीं एग्जाम के रिजल्ट जारी कर दिए हैं। CISCE 10वीं में 98.18% स्टूडेंट्स पास हुए। यह एग्जाम 2.6 लाख स्टूडेंट्स ने दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

प्रिंस खान का गुर्गा शैफी उर्फ मेजर रिमांड पर:पुलिस ने फिर 3...

धनबाद में कुख्यात भगोड़े प्रिंस खान के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। उसके मुख्य गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को एक बार फिर तीन दिनों के रिमांड पर लिया गया है। पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे होने के बाद कार्रवाई तेज कर दी गई है। शैफी उर्फ मेजर की गिरफ्तारी के बाद धनबाद पुलिस को पहले तीन दिनों का रिमांड मिला था। शनिवार को कोर्ट से उसे फिर तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है। धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि 10 सदस्यीय विशेष टीम लगातार शैफी से पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस को प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। इनके आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनमें जमीन कारोबारी भी शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई हथियार भी बरामद किए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ सफेदपोश और मीडिया से जुड़े लोगों की भी प्रिंस खान से सांठगांठ थी। ये लोग उसके संगठन को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ धमकी भरे वीडियो के प्रचार-प्रसार में भी शामिल थे। पुलिस फिलहाल पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। Source link

ताज़ा खबर

नेताजी की हुंकार और ‘आचार्य’ का बड़प्पन, 1940 का वो वाकया जिसने...

Last Updated:May 02, 2026, 14:51 IST Town Hall Ghazipur History: गाजीपुर के टाउन हॉल का इतिहास देश के दो महान दिग्गजों, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव की एक अनोखी कहानी समेटे हुए है. साल 1940 में जब कांग्रेस और फॉरवर्ड ब्लॉक के बीच वैचारिक मतभेद चरम पर थे, तब टाउन हॉल में दोनों नेताओं की जनसभाएं एक ही समय पर आयोजित की गईं. तनावपूर्ण माहौल के बीच आचार्य नरेंद्र देव ने नेताजी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनके सामने भाषण देने से इनकार कर दिया, जो आज भी मिसाल है. Town Hall Ghazipur History: क्या आप जानते हैं कि जिस टाउन हॉल के पास से आप रोजाना गुजरते हैं, उसकी दीवारों में भारत की आजादी के सबसे दिलचस्प और तनावपूर्ण अध्यायों में से एक दफन है? यह कहानी है देश के दो सबसे बड़े दिग्गजों सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव के बीच की एक ऐसी ‘टकराहट’ की, जो होने से पहले ही आपसी सम्मान की मिसाल बन गई. आज नेताजी के गाजीपुर दौरे के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए, लोकल 18 आपको ले जा रहा है टाउनहॉल की उन गलियों में, जहां से कभी इंकलाब की हुंकार गूंजी थी. गाजीपुर के इस ऐतिहासिक वाक्य का विस्तृत जिक्र पीएन सिंह की चर्चित पुस्तक ‘गाजीपुर के गौरव-बिन्दु: साहित्य’ में मिलता है, जिसे प्रतिश्रुति प्रकाशन ने प्रकाशित किया है. पीजी कॉलेज, गाजीपुर के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविशंकर सिंह इसी पुस्तक के तथ्यों के आधार पर उस रोमांचक दौर का विवरण साझा करते हैं. 1938: जब बाबू परशुराम राय की जिद पर गाजीपुर आए नेताजीबताते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का गाजीपुर से गहरा नाता था. साल 1938 में पूर्वांचल की राजनीति में एक नया मोड़ आया, जब बाबू परशुराम राय के निमंत्रण पर नेताजी पहली बार यहां आए. रायगंज स्थित कांग्रेस दफ्तर और बाबू परशुराम राय का घर उस वक्त क्रांति का मुख्य केंद्र हुआ करता था. परशुराम राय का कारोबार कोलकाता तक फैला था और उन्हीं की जिद थी कि नेताजी गाजीपुर की धरती पर कदम रखें. उनके आने से पूरे पूर्वांचल में स्वाधीनता संग्राम की लहर तेज हो गई थी. 1940 का वो सियासी ड्रामा: कांग्रेस बनाम फॉरवर्ड ब्लॉककहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ 1940 में आता है. तब तक स्थितियां बदल चुकी थीं, नेताजी कांग्रेस छोड़ चुके थे और अपनी नई राह ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ के रूप में चुन चुके थे. वैचारिक मतभेद इतने गहरे थे कि जब नेताजी गाजीपुर पहुंचे, तो कांग्रेस की जिला इकाई (पंडित दालसिंगार दुबे के नेतृत्व में) ने उनके कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया. आलम यह था कि एक ही समय और एक ही स्थान (टाउन हॉल) पर दो समानांतर जनसभाएं रख दी गई थीं. टकराव का वो पल: जब आचार्य नरेंद्र देव ने पेश की मिसालटाउन हॉल में माहौल तनावपूर्ण था. एक तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मंच था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रखर वक्ता आचार्य नरेंद्र देव को मैदान में उतार दिया था. गाजीपुर की जनता सांसें थामे इस ऐतिहासिक टकराव को देखने के लिए खड़ी थी. लेकिन तभी आचार्य नरेंद्र देव ने अपनी महानता से सबको निरुत्तर कर दिया. उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि, ‘सुभाष के सामने मैं भाषण नहीं दूंगा.’ आचार्य जी ने नेताजी के सम्मान में मंच साझा करने या उनके विरोध में बोलने से साफ इनकार कर दिया. यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि गाजीपुर की उस पावन मिट्टी के संस्कार थे, जहां मतभेद तो हो सकते थे, लेकिन सम्मान में कभी कमी नहीं आती थी. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh Source link

झारखंड

जंगल के पत्तों से हर महीने हजारों कमा रहीं महिलाएं! इनके दोना-पत्तल...

Last Updated:May 02, 2026, 10:06 IST Jamshedpur News: जमशेदपुर के पास बड़ा तालसा गांव की महिलाएं पत्तों से हजारों कमाती हैं. दरअसल ये सुबह जंगल से साल के पत्ते तोड़ती हैं और फिर उनसे दोना-पत्तल बनाकर बाजार में बेचती हैं. इससे उनकी अच्छी आय होती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. जमशेदपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर तिरुलड़ी के बड़ा तालसा गांव की यह कहानी आधुनिकता और परंपरा के बीच एक खूबसूरत संतुलन को दिखाती है. जहां शहरों में शादी-पार्टी या किसी भी कार्यक्रम में प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेटों का इस्तेमाल आम बात हो गई है, वहीं यह गांव आज भी प्रकृति के करीब रहकर अपनी पुरानी परंपराओं को जिंदा रखे हुए है. सुबह 5 बजे चल देती हैं जंगल की ओरइस गांव की खासियत है यहां की महिलाएं, जो हर रोज सुबह 5 बजे ही अपने दिन की शुरुआत कर देती हैं. सूरज उगने से पहले ही वे समूह में जंगल की ओर निकल पड़ती हैं और वहां से साल के पत्ते तोड़कर लाती हैं. यह काम सिर्फ रोजमर्रा की जरूरत नहीं, बल्कि उनके जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. दिनभर की मेहनत के बाद शाम तक वे इन पत्तों से दोना और पत्तल तैयार कर लेती हैं. प्लास्टिक, थर्माकोल का नहीं होता इस्तेमालगांव की महिला श्रुति हेमरोम बताती हैं कि उनके यहां आज भी किसी भी प्रकार के प्लास्टिक, थर्माकोल या पेपर प्लेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता. गांव के लोग पूरी तरह से प्राकृतिक चीजों पर निर्भर हैं. साल के पत्तों और नीम की डंठल से बने दोना-पत्तल न सिर्फ पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि यह गांव की आय का एक मजबूत जरिया भी बन चुके हैं, जिससे लोग लाभ ले रहे हैं. हर महीने हजारों की कमाईइन महिलाओं की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे हर महीने हजारों रुपये की कमाई कर लेती हैं. खास बात यह है कि उनके बनाए हुए पत्तल और दोना खरीदने के लिए दूर-दराज के लोग भी गांव तक आते हैं. आसपास के इलाकों में लगने वाले ठेले – जहां समोसा, आलू चाप, वेजिटेबल चप और धुस्का जैसे स्थानीय व्यंजन मिलते हैं -वहां भी इन्हीं पत्तों से बने दोने-पत्तल का इस्तेमाल होता है. ऐसे जी सकते हैं बेहतर जीवनयह परंपरा सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक बेहतरीन मिसाल भी है. जहां एक तरफ शहरों में प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, वहीं बड़ा तालसा गांव यह सिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर भी बेहतर जीवन वो भी आसानी से जिया जा सकता है. इस गांव की महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह सिखा रही हैं कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना जरूरी है. बड़ा तालसा की यह पहल उन सभी के लिए एक प्रेरणा है, जो विकास के नाम पर प्रकृति को भूलते जा रहे हैं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

व्यापार

यूट्यूब से आइडिया लेकर शुरू किया अपना रोजगार, अब हर माह होती...

Last Updated:August 02, 2024, 10:26 IST तेघरा की सुधा देवी ने बताया यूटयूब से झोला निर्माण का बिजनेस स्टार्टअप सीखकर घरों में निर्माण कार्य शुरु कर दिया, टाटा से सीमेंट का बोरा लाकर रोजाना 400 तक झोला सिलकर 2 .हज़ार तक की कमाई कर लेती हैं . आज का ये दौर सूचना क्रांति का है. टेलीकॉम कंपनियों ने भारत में 4G /5G इंटरनेट सेवा शुरु कर भारतीयों को गूगल, फेसबुक और यूटयूब से जोड़ने का काम किया है. ऐसे में हमारे देश में टेलीकॉम कंपनियों ने एक नए सिरे से परिभाषित करने का भी काम किया है. आज हम जिस कहानी की चर्चा कर रहे हैं. यह इसी सूचना क्रांति के उदाहरण के रूप में देखी जा सकती है. बेगूसराय की सुधा ने यूट्यूब पर वीडियो स्क्रोल करते करते बिजनेस आइडिया को पा लिया. धीरे धीरे इसी आइडिया पर काम कर अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. इन्होंने लोकल 18 बिहार से अपनी पूरी कहानी साझा की है. बेगूसराय जिले के गंगा किनारे बसे तेघरा प्रखंड के फुलवरिया पंचायत- 02, वार्ड 20 नगर परिषद बरौनी की रहने वाली सुधा देवी ने बताया एक दिन वह यूट्यूब पर वीडियो देख रहीं थी. इसी दौरान यूट्यूब पर वीडियो स्क्रोल करने के दौरान कम लागत में झोला निर्माण का काम देखा, जहां बताया जा रहा था कि महज 20 से 30 हजार में इस काम से हजारों की कमाई रोजाना कर सकते हैं. फिर इसी आइडिया पर काम करना शुरु कर दिया, नीतिश्री समूह से जुड़कर 30 हजार का लोन लेकर पहले एक सिलाई मशीन खरीदी फिर काम अच्छा चलता रहा तो एक ओर सिलाई मशीन खरीदकर एक पड़ोस की महिला को रोजाना के आधार पर ₹150 के रोज पर रोज़गार भी दे दिया. Add News18 as Preferred Source on Google सुधा देवी ने लोकल 18 बिहार से बताया झारखंड के टाटा से हर महीने 50 हज़ार का सीमेंट की खाली बोरा लाती हूं, एक बोरा की कीमत 4 रूपए तक पड़ती है. इसे सिलने में एक से दो रुपया तक का खर्च आ जाता है. यानी एक झोला निर्माण में 5 रूपए तक का सामने आता है. हमारी कमाई बिजली पर निर्भर करती है. अगर दिनभर सही बिजली रही तो घर बैठे 400 झोला का निर्माण कर लेती हूं. ऐसे में 2 हजार तक की कमाई रोजाना हो जाती है, बिजली सही न रही तो हजार से 1500 तक कमाई हो जाती है. वह कहती हैं कि उन्हें इन झोलों को बेचने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ती, बल्कि थोक व्यापारी खुद उनके पास आते हैं और झोला खरीदकर ले जाते हैं. वह कहती हैं कि एक झोले की कीमत बाजार में 10 से 15 रुपए है. इनके कम्यूनिटी मैनेजर ममता कुमारी, बीपीएम बिरजू कुमार के द्वारा समय समय में मदद करने की भी बात बताई. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : August 02, 2024, 10:26 IST Source link

झारखंड

सारंडा जंगल से हथियारों का जखीरा बरामद:रूटुगुटू जंगल में सुरक्षाबलों को मिली...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र के रूटुगुटू जंगल में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। कोबरा 209 बटालियन के नेतृत्व में चलाए गए सघन सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। यह बरामदगी हाल ही में इसी क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद चलाए जा रहे फॉलो-अप अभियान के तहत हुई। कोबरा 209 बटालियन, जिला पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम रूटुगुटू के दुर्गम जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चला रही थी। खाली कारतूस और एके-47 का खाली खोखा भी मिला तलाशी के दौरान जवानों को नक्सलियों का छिपाया गया हथियारों का जखीरा मिला। बरामद सामानों में एक एसएलआर राइफल, एक कार्बाइन, एसएलआर की मैगजीन, 182 राउंड जिंदा कारतूस, बड़ी संख्या में खाली कारतूस और एके-47 का खाली खोखा शामिल है। इसके अतिरिक्त, लगभग पांच किलोग्राम जिलेटिन, डेटोनेटर और कॉर्टेक्स वायर भी बरामद किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह सामग्री किसी बड़ी नक्सली साजिश का संकेत देती है। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई से नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है। माना जा रहा है कि समय रहते इस जखीरे की बरामदगी से एक संभावित बड़ी घटना टल गई। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल जंगलों में छिपे अन्य हथियारों व नक्सलियों की तलाश में जुटे हैं। सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही हैं। Source link

झारखंड

जामताड़ा में हनुमान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव:500 कन्याओं संग 3500 श्रद्धालुओं ने...

जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर गांव में श्री श्री 108 हनुमान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। शनिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत हुई, जिसमें पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखा गया। इस कलश यात्रा में लगभग 500 कन्याओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। बड़ी संख्या में महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं की भागीदारी से यह यात्रा भव्य बन गई। कुल करीब 3500 श्रद्धालुओं ने इसमें सहभागिता की। यात्रा की शुरुआत मंदिर प्रांगण से हुई। श्रद्धालु बासपहाड़ी स्थित नदी तक पहुंचे, जहां से पवित्र जल भरकर लगभग 5 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए वापस मंदिर स्थल लौटे। जय श्री राम के जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया डीजे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के जयकारे लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। यात्रा में विभिन्न हिंदू संगठनों के सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान संजय परशुरामका, अनूप राय, सोनू सिंह, बीरेंद्र मंडल, सुजाता सिंह और हीरालाल मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मोहनपुर के मुख्य चौक पर निर्मित यह भव्य और आकर्षक हनुमान मंदिर अब पूरे बाजार क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण बन गया है। इसकी सुंदरता और भव्यता लोगों को अपनी ओर खींच रही है। हवन-पूजन की पूर्णाहुति के साथ भंडारा महोत्सव के तहत रविवार को वैदिक पूजन, मूर्ति नगर भ्रमण और संध्या आरती का आयोजन होगा। सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा हवन-पूजन की पूर्णाहुति के साथ भंडारा और प्रसाद वितरण किया जाएगा। पूरे आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है और स्थानीय श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन रहा है। Source link

ताज़ा खबर

मुनशी नान से हबीब शरबत तक! ये हैं पुराने हैदराबाद की 6...

होमफोटोलाइफ़फूड मुनशी नान से हबीब शरबत तक! ये हैं हैदराबाद की 6 फेमस फूड शॉप, पता नोट करें Last Updated:May 02, 2026, 12:56 IST Hyderabad Street Food: हैदराबाद का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत और नवाबी स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां की तंग गलियों में मुनशी नान, निम्राह कैफे, मदीना होटल, हाजी साहब की दुकान और हबीब सॉफ्ट ड्रिंक जैसी दशकों पुरानी दुकानें आज भी अपनी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं. सुलेमान उस्मानी की मिठाइयों से लेकर ईरानी चाय, निहारी, कबाब और शरबत तक हर स्वाद में पुराने शहर की तहजीब झलकती है. ये ठिकाने सिर्फ भोजन नहीं बल्कि इतिहास और संस्कृति का अनुभव कराते हैं. हर जगह आज भी लोगों की भीड़ इस स्वाद को जीने आती है. जब बात मीठे और बेकरी प्रोडक्ट्स की आती है, तो सुलेमान उस्मानी का नाम सबसे ऊपर आता है. रमजान के दौरान यहां की हलीम और पूरे साल मिलने वाली डबल का मीठा और खुबानी का मीठा अपनी शुद्धता के लिए जाने जाते हैं. यहां की मिठाइयों में आज भी वही नजाकत है, जो पुराने वक्त के नवाबों को पसंद आती थी. दुकान पर सुबह से लेकर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. यहां का स्वाद लोगों को बार बार खींच लाता है और पुराने शहर की मिठास को जीवंत रखता है. हर पीढ़ी इसका आनंद लेती है. हैदराबाद का पुराना शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत और लाजवाब स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां की तंग गलियों में दशकों पुरानी दुकानें आज भी पारंपरिक मसालों और खास पकाने के अंदाज से लोगों को आकर्षित करती हैं. मुनशी नान, निम्राह की ईरानी चाय, हलीम, डबल का मीठा और खुबानी का मीठा जैसे व्यंजन यहां की पहचान बन चुके हैं. ये ठिकाने सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि हैदराबाद की तहजीब, संस्कृति और नवाबी स्वाद को जिंदा रखते हैं, जहां हर निवाला इतिहास और परंपरा का अहसास कराता है. मदीना होटल पत्थरगट्टी स्थित यह होटल हैदराबाद की पहचान से जुड़ा है. 1947 के आसपास खुला यह होटल अपनी निहारी और पाया के लिए मशहूर है. कहते हैं कि पुराने शहर की सुबह आज भी यहां की गरमा गरम निहारी और कुल्चे के बिना अधूरी मानी जाती है. इसका पारंपरिक स्वाद और पुराना आर्किटेक्चर आपको बीते दौर की याद दिलाता है. यहां सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लग जाती है. लोग दूर दूर से इसका स्वाद लेने आते हैं. यह जगह आज भी पुराने हैदराबाद की रसोई संस्कृति को जीवित रखे हुए है. हर बाइट में इतिहास झलकता है. Add News18 as Preferred Source on Google हाजी साहब की दुकान नामपल्ली के पास स्थित यह दुकान अपने कबाब और पराठों के लिए विख्यात है. यहां के लखमी और मटन समोसे शाम के वक्त सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. सादगी और स्वाद का ऐसा तालमेल यहां देखने को मिलता है कि शहर के रईस भी अपनी गाड़ियों से उतरकर यहां के कबाबों का लुत्फ लेते नजर आते हैं. गर्मागर्म पराठों के साथ परोसे जाने वाले कबाब यहां की खास पहचान हैं. शाम ढलते ही दुकान पर भीड़ बढ़ जाती है. पुराने हैदराबाद का असली स्वाद यहां हर बाइट में महसूस किया जा सकता है. यह जगह आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है. मुनशी नान 1851 में शुरू हुई यह दुकान नान के मामले में हैदराबाद का सबसे बड़ा नाम है. इसके संस्थापक हुसैन कासमी, निजाम के दरबार में मुनशी थे इसलिए इसका नाम मुनशी नान पड़ा. यहां के चौकोर और पान की शक्ल के नान आज भी लकड़ी के तंदूर में पारंपरिक तरीके से पकाए जाते हैं. मटन करी या हलीम के साथ इस नान का जोड़ बेजोड़ है. इसका स्वाद पुराने हैदराबाद की शाही रसोई की याद दिलाता है. हर दिन यहां ताजा नान तैयार किया जाता है. दूर दूर से लोग इसका स्वाद लेने आते हैं. यह जगह आज भी अपनी परंपरा और स्वाद के लिए जानी जाती है. निम्राह कैफे चारमीनार के बिल्कुल बगल में स्थित यह कैफे भले ही बहुत बड़ा न हो लेकिन इसका रुतबा बहुत ऊंचा है. यहां की ईरानी चाय और उस्मानिया बिस्किट का स्वाद चखे बिना चारमीनार का दौरा पूरा नहीं होता. सुबह की पहली किरण से लेकर रात के अंधेरे तक यहां लोगों का हुजूम सिर्फ उस एक कप चाय के लिए उमड़ता है जिसकी रेसिपी दशकों से गुप्त है. इसकी चाय की खुशबू दूर तक लोगों को खींच लाती है. पुराने हैदराबाद की कैफे संस्कृति को यह जगह आज भी जिंदा रखे हुए है. हर उम्र के लोग यहां का आनंद लेते हैं. यह जगह शहर की पहचान बन चुकी है. हबीब सॉफ्ट ड्रिंक पुरानी हवेली रोड पर स्थित यह दुकान अपने शरबत के लिए मशहूर है. खासकर इनका जामुन का शरबत और दूध का शरबत गर्मियों में राहत का दूसरा नाम है. यह कोई फैंसी जूस सेंटर नहीं है बल्कि एक छोटी सी दुकान है जिसने फलों के असली अर्क और पुराने तरीके को बचाकर रखा है. यहां हर शरबत ताजे फलों और पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. गर्मियों में यहां लोगों की लंबी कतार लगती है. इसका स्वाद आज भी पुराने हैदराबाद की सादगी और ताजगी को महसूस कराता है. यह जगह अपने देसी स्वाद के लिए खूब पसंद की जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

तुमने उसे शॉपिंग क्यों कराई? दो बीवियों के बीच पिस गए BJP...

Last Updated:May 02, 2026, 12:50 IST Dhanbad News: धनबाद में एक भाजपा नेता की संदिग्ध मौत से सनसनी फैल गई. उनके घर पर कमरे के अंदर से लाश मिली. परिवार का आरोप है कि दोनों बीवियों का मौत से ठीक एक दिन पहले विवाद हुआ था. उन्हीं ने मिलकर पति की हत्या की है. फिलहाल, पुलिस जांच में जुटी है. सांकेतिक तस्वीर (AI Generated) धनबादः झारखंड के धनबाद से भाजपा नेता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया. भाजपा एससी मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष अमृत दास की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. घर के अंदर ही उनका शव मिला. परिवार का आरोप है कि उनकी दोनों पत्नियों ने ही मिलकर उनकी हत्या की है. कहा जा रहा है कि वह अपनी दूसरी पत्नी को लेकर शॉपिंग करने गए थे. लौटने पर पहली पत्नी ने इस बात को लेकर कलेश किया. विवाद के एक बाद उनकी कमरे से लाश बरामद की गई. मामला धनबाद के गोविंदपुर क्षेत्र का है. जहां शुक्रवार को भाजपा एससी मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष अमृत दास की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. घटना गोविंदपुर थाना क्षेत्र के उपर बाजार की है. जहां उनका शव घर के अंदर मिला. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मृतक के परिजनों ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं. मां और बहन का कहना है कि अमृत दास दोनों पत्नियों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था. परिजनों का आरोप है कि दोनों पत्नियों ने मिलकर अमृत दास की हत्या की है. मृतक की दोनों पत्नियां रिश्ते में सगी बहनेंपरिवार कहना है कि अमृतदास की दोनों पत्नियां सगी बहनें हैं. उनकी आपस में नहीं बनती थी, हर बार किसी ने किसी बात को लेकर विवाद होता था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना से एक दिन पहले अमृत दास अपनी दूसरी पत्नी को शॉपिंग कराने ले गए थे. इसी बात को लेकर घर में विवाद बढ़ गया था. इसके बाद अचानक उनकी मौत की खबर सामने आई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. जांच में जुटी पुलिसवहीं, गोविंदपुर थाना प्रभारी विष्णु प्रसाद रावत ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा. फिलहाल, पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है. मृतक के साथी नेता ने बताया कि वह मजबूत कार्यकर्ता थे, उनके अचानक निधन से शोक का माहौल है. मामले की पड़ताल की जाए और अगर यह हत्या है, तो दोषियों को सजा दी जाए. About the Author Mahesh Amrawanshi कहानी सुनने, गुनने और लिखने का शौकीन. शुद्ध कीबोर्ड पीटक. माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से शिक्षा-दीक्षा. द सूत्र, खबरिया न्यूज़, दैनिक नई दुनिया (अखबार) से सीखते हुए हाल मुकाम News18 है. 5 साल से पत्रकार…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Dhanbad,Dhanbad,Jharkhand Source link

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