Last Updated:May 02, 2026, 14:51 IST Town Hall Ghazipur History: गाजीपुर के टाउन हॉल का इतिहास देश के दो महान दिग्गजों, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव की एक अनोखी कहानी समेटे हुए है. साल 1940 में जब कांग्रेस और फॉरवर्ड ब्लॉक के बीच वैचारिक मतभेद चरम पर थे, तब टाउन हॉल में दोनों नेताओं की जनसभाएं एक ही समय पर आयोजित की गईं. तनावपूर्ण माहौल के बीच आचार्य नरेंद्र देव ने नेताजी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनके सामने भाषण देने से इनकार कर दिया, जो आज भी मिसाल है. Town Hall Ghazipur History: क्या आप जानते हैं कि जिस टाउन हॉल के पास से आप रोजाना गुजरते हैं, उसकी दीवारों में भारत की आजादी के सबसे दिलचस्प और तनावपूर्ण अध्यायों में से एक दफन है? यह कहानी है देश के दो सबसे बड़े दिग्गजों सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव के बीच की एक ऐसी ‘टकराहट’ की, जो होने से पहले ही आपसी सम्मान की मिसाल बन गई. आज नेताजी के गाजीपुर दौरे के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए, लोकल 18 आपको ले जा रहा है टाउनहॉल की उन गलियों में, जहां से कभी इंकलाब की हुंकार गूंजी थी. गाजीपुर के इस ऐतिहासिक वाक्य का विस्तृत जिक्र पीएन सिंह की चर्चित पुस्तक ‘गाजीपुर के गौरव-बिन्दु: साहित्य’ में मिलता है, जिसे प्रतिश्रुति प्रकाशन ने प्रकाशित किया है. पीजी कॉलेज, गाजीपुर के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविशंकर सिंह इसी पुस्तक के तथ्यों के आधार पर उस रोमांचक दौर का विवरण साझा करते हैं. 1938: जब बाबू परशुराम राय की जिद पर गाजीपुर आए नेताजीबताते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का गाजीपुर से गहरा नाता था. साल 1938 में पूर्वांचल की राजनीति में एक नया मोड़ आया, जब बाबू परशुराम राय के निमंत्रण पर नेताजी पहली बार यहां आए. रायगंज स्थित कांग्रेस दफ्तर और बाबू परशुराम राय का घर उस वक्त क्रांति का मुख्य केंद्र हुआ करता था. परशुराम राय का कारोबार कोलकाता तक फैला था और उन्हीं की जिद थी कि नेताजी गाजीपुर की धरती पर कदम रखें. उनके आने से पूरे पूर्वांचल में स्वाधीनता संग्राम की लहर तेज हो गई थी. 1940 का वो सियासी ड्रामा: कांग्रेस बनाम फॉरवर्ड ब्लॉककहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ 1940 में आता है. तब तक स्थितियां बदल चुकी थीं, नेताजी कांग्रेस छोड़ चुके थे और अपनी नई राह ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ के रूप में चुन चुके थे. वैचारिक मतभेद इतने गहरे थे कि जब नेताजी गाजीपुर पहुंचे, तो कांग्रेस की जिला इकाई (पंडित दालसिंगार दुबे के नेतृत्व में) ने उनके कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया. आलम यह था कि एक ही समय और एक ही स्थान (टाउन हॉल) पर दो समानांतर जनसभाएं रख दी गई थीं. टकराव का वो पल: जब आचार्य नरेंद्र देव ने पेश की मिसालटाउन हॉल में माहौल तनावपूर्ण था. एक तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मंच था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रखर वक्ता आचार्य नरेंद्र देव को मैदान में उतार दिया था. गाजीपुर की जनता सांसें थामे इस ऐतिहासिक टकराव को देखने के लिए खड़ी थी. लेकिन तभी आचार्य नरेंद्र देव ने अपनी महानता से सबको निरुत्तर कर दिया. उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि, ‘सुभाष के सामने मैं भाषण नहीं दूंगा.’ आचार्य जी ने नेताजी के सम्मान में मंच साझा करने या उनके विरोध में बोलने से साफ इनकार कर दिया. यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि गाजीपुर की उस पावन मिट्टी के संस्कार थे, जहां मतभेद तो हो सकते थे, लेकिन सम्मान में कभी कमी नहीं आती थी. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh Source link