भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

ताज़ा खबर

हेलीकॉप्टर से दागे दो मिसाइल, भारत ने पहली बार दिखाया डबल अटैक...

नई दिल्ली/चांदीपुर: भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में एक नया और घातक अध्याय जुड़ गया है. ओडिशा के तट पर ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल – शॉर्ट रेंज’ (NASM-SR) का सफल ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) किया गया. यह परीक्षण इसलिए खास है क्योंकि पहली बार एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें एक साथ दागकर दुश्मन के जहाज को तबाह करने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया. यह मिसाइल मात्र एक हथियार नहीं, बल्कि स्वदेशी इंजीनियरिंग का नमूना है. इसमें वॉटरलाइन हिट क्षमता (Waterline Hit Capability) का सफल परीक्षण किया गया. इसका मतलब है कि यह मिसाइल दुश्मन के जहाज के उस हिस्से पर वार करती है जहाँ पानी और जहाज की बॉडी मिलती है. ऐसा करने से जहाज में तेजी से पानी भरता है और वह कुछ ही मिनटों में जलसमाधि ले लेता है. प्रमुख विशेषताएं और तकनीक· साल्वो लॉन्च की ताकत: एक साथ दो मिसाइलें दागने की क्षमता का मतलब है कि अगर दुश्मन का एक डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोक भी ले, तो दूसरी मिसाइल उसका काम तमाम कर देगी. · स्वदेशी ‘आंखें’ (Seeker): इसमें डीआरडीओ द्वारा विकसित उन्नत सीकर और फाइबर-ऑप्टिक जायरोस्कोप लगा है, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करता है. · प्रोपल्शन सिस्टम: मिसाइल में सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर और लॉन्ग-बर्न सस्टेनर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हवा में स्थिरता और लंबी दूरी तक मार करने की शक्ति देता है. · टू-वे डेटा लिंक: इस तकनीक की मदद से मिसाइल दागने के बाद भी उसे निर्देश दिए जा सकते हैं या उसकी दिशा में बदलाव किया जा सकता है. · इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स: इसके नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिए आधुनिक एल्गोरिद्म का उपयोग किया गया है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी सुरक्षित रखता है. क्यों खास है यह उपलब्धि?रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक भारतीय नौसेना इस तरह की मिसाइलों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर थी. NASM-SR के आने से अब नौसेना के हेलीकॉप्टर (जैसे सी-किंग या ध्रुव) हवा से ही दुश्मन के युद्धपोतों को डुबोने में सक्षम होंगे. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी छलांग है क्योंकि इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने मिलकर बनाया है. सवाल-जवाब ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? साल्वो लॉन्च का अर्थ है एक साथ या बहुत कम अंतराल पर एक से अधिक मिसाइलें दागना. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बचाव करना लगभग असंभव हो जाता है. ‘वॉटरलाइन हिट क्षमता’ से दुश्मन को क्या नुकसान होता है? यह क्षमता मिसाइल को जहाज के उस हिस्से पर वार करने की अनुमति देती है जो पानी की सतह के ठीक पास होता है. इससे जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो जाता है, जिससे जहाज तुरंत डूबने लगता है. इस मिसाइल को विकसित करने में किन संस्थानों की भूमिका रही? मुख्य रूप से हैदराबाद की RCI लेबोरेटरी ने इसे विकसित किया है, जिसमें पुणे (HEMRL), चंडीगढ़ (TBRL) और चांदीपुर (ITR) जैसी डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं का सहयोग रहा. Source link

झारखंड

कई पीढ़ियों का है गवाह! AC को भी फेल करता है झारखंड...

Last Updated:April 29, 2026, 14:14 IST Bokaro Bargad Tree: झारखंड में बोकारो के डनडबरा स्थित कालीथान परिसर में 200 साल पुराना विशाल बरगद का पेड़ है. यह ग्रामीणों के लिए ठंडी छांव और विश्राम का अहम ठिकाना बन गया है. ग्रामीणों के अनुसार इसकी हवाएं एसी से भी ज्यादा ठंडी हैं. आइये जानते हैं इस विशाल बरगद के पेड़ के बारे में. ख़बरें फटाफट बोकारो: झारखंड में बोकारो के डनडबरा स्थित कालीथान परिसर में खड़ा विशाल बरगद का पेड़ स्थानीय इलाके के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन वृक्षों में गिना जाता है. यहां के स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस पेड़ की उम्र 200 साल से भी अधिक है और कई पीढ़ियों ने इसकी घनी छांव में सुकून के पल बिताए हैं और खासकर गर्मियों के दौरान यहां लोगों का जमावड़ा लगा रहता है. जहां लोग ठंडी हवा और प्राकृतिक शांति का आनंद लेने के लिए रुकते हैं. आइये जानते हैं इस विशाल पेड़ के बारे में. एयर कंडीशनर को फेल करता है ये पेड़ डनडबरा गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग रमेश चंद्र राय बताते हैं कि उनके पूर्वजों के अनुसार यह पेड़ करीब 200 साल पुराना हो सकता है और लगभग 6 पीढ़ियां इसकी छांव का लाभ ले चुकी हैं. वे बताते हैं कि इस बरगद के साथ स्थित कालीथान का काली मंदिर भी काफी प्राचीन हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. वहीं, बोकारो सेक्टर-8 की अर्चना सिंह कहती हैं कि वह पिछले 50 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रही हैं और बचपन से ही इस पेड़ को देखती आ रही हैं. उनके अनुसार यह स्थान आज भी उतना ही हरा-भरा और शांतिपूर्ण है. जहां गर्मियों में पेड़ की ठंडी छांव के आगे एयर कंडीशनर भी फीका पड़ जाता है. गांव के दुसरे बुजुर्ग सीताराम महतो बताते हैं कि यह बरगद का पेड़ केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए एक अहम ठिकाना है और आसपास के गांव जैसे लेवाटाड, भतुवा, रानी पोखर, चौफान और आमाटाड़ जैसे इलाकों से रोजाना आने-जाने वाले लोग यहां रुककर विश्राम करते हैं. इस कालीथान परिसर में चपाकल और पानी की भी व्यवस्था है, जिससे यात्रियों को काफी सुविधा मिलती है. लताएं ले रही हैं पेड़ का रूप उन्होंने बताया कि सुबह और दोपहर के समय सब्जी बेचने वाली महिलाएं और मछुआरे भी यहां रुककर आराम करते हैं और फिर अपने काम के लिए आगे बढ़ते हैं. वहीं, सीताराम महतो के अनुसार वे 1955 से इस पेड़ को देख रहे हैं. इसकी कई लताएं अब खुद बड़े पेड़ों का रूप ले चुकी हैं, जो इसके बढ़ती उम्र का प्रमाण हैं. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 14:13 IST Source link

व्यापार

छोटा स्टार्टअप, डेली 5 हजार कमाई! परसराम के एग रोल स्टॉल की...

X छोटा स्टार्टअप, डेली 5 हजार कमाई! परसराम के एग रोल स्टॉल की गजब दिवानगी   Business Idea: छत्तीसगढ़ के चकरभांठा निवासी परसराम साहू ने सीमित पूंजी और संघर्ष के साथ साहू एग रोल स्टॉल शुरू कर आज प्रतिदिन 5000 रुपए से अधिक की इनकम कर रहे हैं. बनारस में 13 वर्ष तक कुक के रूप में काम करने के बाद उन्होंने 50 हजार रुपए से ठेला शुरू किया. एग रोल और चिकन चिल्ली की लोकप्रियता से उनकी दुकान क्षेत्र में पहचान और प्रेरणा का सफल उदाहरण बन गई है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

झारखंड के 14 जिलों में ट्रेजरी घोटाले की आशंका:एजी ऑफिस और वित्त...

झारखंड में चल रहे ट्रेजरी घोटाले में कई बड़े मामले सामने आ रहे हैं। इसमें से एक बड़ा मामला यह है कि कई जिलों के एसपी ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपने पदनाम से बैंक में खाते खोल रखे थे। जो पैसे सरकारी खजाने में रहने चाहिए थे, वो पैसे सीधे इन खातों में आते थे। फिर एसपी चेक के माध्यम से भुगतान करते थे। जबकि ट्रेजरी कोड में साफ कहा गया है कि जिसके लिए बिल ट्रेजरी भेजा जाएगा, भुगतान उसी के खाते में होगा। पांच जिले में मिले हैं इससे जुड़े सबूत जांच टीम को बोकारो, सरायकेला, रामगढ़, पलामू और जमशेदपुर में इसके सबूत मिले हैं। जमशेदपुर में वित्त वर्ष 2016-17 में एसपी के खाते में करीब 38 लाख रुपए आए थे, जो सिपाहियों को चेक से भुगतान किया गया था। फिलहाल 14 जिलों में ऐसी गड़बड़ी की आशंका है। एजी ऑफिस और वित्त विभाग के अधिकारी इसकी जांच में जुट गए हैं। जांच की जद में कई और एसपी व डीएसपी (डीडीओ) भी हैं। जांच में पता चला है कि सप्लायर से लेकर अन्य लोगों को किए गए भुगतान में भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। वर्ष 2016-17 से ऐसे भुगतान लगातार हो रहे हैं। वित्त विभाग अब पीएमयू के डेटा बेस से इन एसपी ऑफिस से हुए भुगतान की विस्तृत जांच कर रहा है। बोकारो में डेटा हटाए गए, रिकॉर्ड भी गायब इधर, ट्रेजरी घोटाला उजागर होने के बाद पुलिस विभाग के अंदरूनी सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में पता चला है कि वेतन निकासी से जुड़े रिकॉर्ड और खाते के डेटा से छेडछाड़ की गई है। इसमें एसपी ऑफिस से जुड़े सिस्टम भी जांच के दायरे में हैं। बोकारो में तो डेटा ही डिलीट कर दिया गया है, जबकि कुछ मामलों में रिकॉर्ड मिसिंग या बदला हुआ पाया गया है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन खातों के डेटा को जान-बूझकर हटाया या छिपाया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि डेटा में छेड़छाड़ और रिकॉर्ड गायब होना इस घोटाले की सबसे अहम कड़ी है। किसी एसपी ऑफिस का यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया है। हालांकि फिलहाल किसी एसपी पर सीधे आरोप तय नहीं हुए हैं, लेकिन गड़बड़ी को देखते हुए जांच का दायर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकता है। क्योंकि अब इसकी भी जांच होगी कि डीआई बजट कार्यालय से लेकर डीडीओ ऑफिस में ट्रेजरी कोड का कितना उल्लंघन होता था। इनकी संपत्ति का पता लगा रही एसआईटी एसआईटी हजारीबाग से गिरफ्तार आरक्षी रजनीश कुमार सिंह, रजनीश की पत्नी खुशबू सिंह, आरक्षी धीरेंद्र सिंह, बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय और सतीश कुमार की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि आरक्षी रजनीश कुमार सिंह के नाम पर हजारीबाग के मसीपिढ़ी इलाके में दो मंजिला मकान है। वहीं आरक्षी धीरेंद्र सिंह का बिहार के बोधगया में एक बड़ा अपार्टमेंट है। हजारीबाग में एसआईटी ने की जांच हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) हजारीबाग के लौहसिंघना थाना पहुंची। टीम ने एफआईआर के साथ जमा किए गए दस्तावेज और आरोपियों से जब्त सामग्री को अपने कब्जे में लिया। एसआईटी अब यह प​ता लगा रही है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर निकाली गई राशि कहां निवेश किया, ताकि उन संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई कर सके। साथ ही सरकारी धन की वसूली हो सके। एसआईटी को पता चला है कि हजारीबाग से गिरफ्तार सिपाही शंभू कुमार ने इन पैसों का सबसे अधिक निवेश किया है। शंभू कुमार का बिहार के गयाजी जिले के पॉश इलाके एपी कॉलोनी में दो आलीशान मकान बनवाया है। पत्नी काजल कुमारी के नाम पर 18 कट्‌ठा जमीन खरीदी है। शंभू कुमार के नाम 9 व्यावसायिक और कृषि भूमि है। इनमें से बोधगया क्षेत्र में 7.84 डिसमिल जमीन भी शामिल है, जो शंभू की पत्नी काजल कुमारी और एक अन्य सहयोगी सोनी देवी के नाम पर है। एसआईटी जल्द ही इस मामले में हजारीबाग से गिरफ्तार शंभू कुमार और बोकारो से गिरफ्तार कौशल कुमार पांडेय से पूछताछ करेगी। —————————————– इसे भी पढ़ें….. ट्रेजरी घोटाला मामले में चाईबासा से चार अरेस्ट:9 साल में निकाले 27 लाख 21 हजार 717 रुपए, रिश्तेदारों के खातों में किए ट्रांसफर चाईबासा पुलिस विभाग में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक सिपाही सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सिपाही देवनारायण मुर्मू ने वर्ष 2017 से 2025 के बीच लगभग 60 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से 27 लाख 21 हजार 717 रुपए की फर्जी निकासी की। यह राशि उसने अपने करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें.. Source link

शिक्षा

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने...

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें… Source link

झारखंड

बोकारों के भर्रा कब्रिस्तान से कंकाल मिलने का मामला:डीएनए जांच के लिए...

बोकारो‎ में बीते सोमवार को भर्रा कब्रिस्तान से मिले ‎‎कंकाल की पहचान के लिए चीराचास पुलिस ‎ने सदर अस्पताल में लापता ‎‎खालिक अंसारी के माता-पिता का ब्लड‎ सैंपल लिया। पुलिस अब डीएनए जांच ‎के लिए ब्लड व कंकाल का सैंपल भेजकर ‎‎मिलान करेगी।‎ वहीं, दो आरोपी भर्रा के सलाउद्दीन और‎ गुड्‌डू को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया ‎‎गया है। बताया जाता है कि मृतक मिस्त्री का ‎‎काम करता था, ऐसे में गुड्‌डू उसके साथ ‎बतौर कर्मचारी जुड़ा हुआ था। सूत्रों के ‎अनुसार उक्त दोनों ने ही ‎‎खालिक की हत्या की‎ है। मास्टर माइंड‎ की गिरफ्तारी अभी बाकी उनके ही निशानदेही पर कंकाल बरामद ‎हुआ है। साथ ही मामले के मास्टर माइंड‎ की गिरफ्तारी अभी बाकी है। बता दें कि‎ बरमसिया ओपी क्षेत्र के अड़िता निवासी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ खालिक 2022 से लापता है। वह भर्रा में‎ किराए के मकान में रहता था। लापता होने‎ पर परिजनों ने चीराचास थाना में शिकायत‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ किया, लेकिन उसकी तलाश अधूरी रह गई।‎ बेटा का कुछ पता नहीं चलने पर उसके‎ परिजन हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट की फटकार‎ पर चीराचास पुलिस रेस हुई और सलाउद्दीन‎ के साथ गुड्‌डू को पूछताछ के लिए उठाया।‎ पूछताछ में उन्होंने शव दफनाने की बात ‎कही, जिसके बाद पुलिस ने भर्रा कब्रिस्तान ‎से कंकाल बरामद की।‎ पुलिस आरोपियों का पक्ष ले रही: परिजन वहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस पूरी‎ प्रक्रिया गोपनीय तरीके से कर रही है, ताकि ‎इसकी जानकारी सार्वजनिक न हो सके। ‎पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह‎ आरोपियों का पक्ष ले रही है और उन्हें‎ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।‎ सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीएनए ‎रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, तो पुलिस किस‎ आधार पर यह दावा कर रही है कि बरामद‎ कंकाल खालिक का ही है। फिलहाल हर‎ मामले में प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी देने ‎वाली पुलिस इस संवेदनशील मामले में ‎चुप्पी साधे हुए है, जिससे कई सवाल खड़े‎ हो रहे हैं।‎ Source link

ताज़ा खबर

3, 7, 4, 5, 0… ये IPL में प्‍लेयर्स का स्‍कोर कार्ड...

Last Updated:April 29, 2026, 20:51 IST Kerala Exit Poll Latest News: केरल एग्जिट पोल्स के मुताबिक, इस राज्य में बीजेपी को सिंगल डिजिट या बेहद सीमित सीटें मिलने का अनुमान है. पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी को केरल में 2 ही सीटें म‍िलने का अनुमान है. सभी अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े देखें तो तस्वीर लगभग एक जैसी ही बनती दिख रही है. केरल के एग्‍ज‍िट पोल में क्‍या है बीजेपी का हाल? नई द‍िल्‍ली. एग्‍ज‍िट पोल में पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाती नजर आ रही है पर केरल में पार्टी की हालत अच्‍छी नहीं द‍िख रही है. पहली नजर में 3, 7, 4, 5, 0… जैसे आंकड़े आपको इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के किसी बल्लेबाज के स्कोरकार्ड जैसे लग सकते हैं लेकिन ये नंबर असल में एक राज्य के एग्जिट पोल में बीजेपी की संभावित सीटों का अनुमान हैं और तस्वीर पार्टी के लिए चौंकाने वाली है. केरल के पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी गठबंधन को महज 2 सीटें दी गई हैं. एक्‍सेस माई इंड‍िया के सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों के बीच रखा गया है. JVC के अनुमान के मुताबिक बीजेपी गठबंधन को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं, जबकि P-MARQ ने 1 से 4 सीटों की रेंज बताई है. Matrize के हिसाब से भी बीजेपी गठबंधन को 3 से 5 सीटों के बीच सिमटी दिख रही है. केरल में क्‍या है बीजेपी के ल‍िए सबसे चौंकाने वाला नतीजासबसे चौंकाने वाला अनुमान Peoples Pulse का है जहां बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों तक सीमित बताया गया है. यानी लगभग हर एजेंसी का सर्वे इस ओर इशारा कर रहा है कि इस चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रह सकता है. क्‍या है जानकारों का माननाराजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हुए तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा. खासकर तब जब पार्टी ने इस राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया था. हालांकि यह भी याद रखना होगा कि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते और कई बार असली नतीजे इन अनुमानों से बिल्कुल अलग निकल आते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 20:51 IST Source link

झारखंड

पलामू डीसी के कमरे में पहुंचा एक संदेश, कमरे से निकल सीढ़ियों...

Last Updated:April 29, 2026, 18:32 IST महिला की पीड़ा सुनकर डीसी ने तत्काल सदर अनुमंडल पदाधिकारी को मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही महिला को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब आपको दोबारा यहां आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपका काम जल्द पूरा किया जाएगा.” उपायुक्त के इस मानवीय व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करने लगे. ख़बरें फटाफट पलामू: झारखंड के पलामू जिले में बुधवार को जब समाधान दिवस की शुरुआत हुई इसमें पहले दिन जन समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश कर दी. कार्यक्रम के बीच डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत को सूचना मिली कि मेदिनीनगर की रहने वाली दिव्यांग महिला शीला कुमारी उनसे मिलने पहुंची हैं, लेकिन दोनों पैरों से असमर्थ होने के कारण समाहरणालय की सीढ़ियां चढ़ पाने में असहाय हैं. यह जानकारी मिलते ही डीसी ने बिना देर किए चल रहे जन समाधान कार्यक्रम को बीच में रोका और स्वयं नीचे सीढ़ियों तक पहुंच गए. सीढ़ियों पर बैठकर पलामू डीसी ने महिला की पूरी समस्या गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी. शीला कुमारी ने बताया कि वह और उनके पति दोनों दिव्यांग हैं और तीनकोनिया गैरेज के पास एक साल से कपड़ों की दुकान लगाकर किसी तरह जीवनयापन कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व दुकान संचालन में बाधा डालते हैं, अभद्र व्यवहार करते हैं और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए धमकी भी देते हैं. जबकि वे नगर निगम की निर्धारित रसीद प्रतिदिन जमा करती हैं. महिला की पीड़ा सुनकर डीसी ने तत्काल सदर अनुमंडल पदाधिकारी को मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही महिला को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब आपको दोबारा यहां आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपका काम जल्द पूरा किया जाएगा.” उपायुक्त के इस मानवीय व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करने लगे. जन समाधान दिवस में अक्सर लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार एक अधिकारी का खुद फरियादी तक पहुंचना चर्चा का विषय बन गया. उपायुक्त श्री शेखावत की यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि संवेदनशील शासन वही है, जो जरूरतमंदों तक खुद पहुंचे. About the Author Rajneesh Singh जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 18:32 IST Source link

व्यापार

छोटा निवेश, बड़ा मुनाफा…. घर पर अगरबत्ती बनाने का आसान तरीका, ऐसे...

Last Updated:November 27, 2025, 13:21 IST घर से छोटा-सा काम शुरू करना हो तो अगरबत्ती बनाना सबसे आसान और फायदेमंद काम माना जाता है. इसमें न ज्यादा निवेश लगता है और न बड़ा सेटअप चाहिए. मशीन लगते ही काम शुरू हो जाता है और इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. इसलिए लोग इसे भरोसेमंद घरेलू कमाई का तरीका मानते हैं. घर पर अगरबत्ती का बिजनेस आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसकी मशीन की कीमत ज्यादा नहीं होती, बेसिक मॉडल 10–15 हजार रुपए में मिल जाता है. इसे चलाने के लिए न ज्यादा जगह चाहिए और न ही भारी बिजली खर्च. बस दो प्लग की सपोर्ट मिल जाए तो काम आराम से चल जाता है. मशीन की सेटिंग भी आसान रहती है, बस पाउडर सही डालना होता है और स्पीड को जरूरत के हिसाब से सेट कर देना होता है. अगर आपके पास रोज़ सिर्फ तीन से चार घंटे का समय भी है, तो यह काम आराम से किया जा सकता है. मशीन तेज़ी से चलती है, इसलिए कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन हो जाता है. सुबह या शाम, जिसके पास थोड़ा खाली समय होता है, वह इस काम को आसानी से फिट कर सकता है. यही वजह है कि कई महिलाएं और युवा इसे पार्ट-टाइम के तौर पर अपनाते हैं. अगरबत्ती का पाउडर तैयार करना भी एकदम सीधी प्रक्रिया है. लकड़ी का बुरादा, खुशबू का मिश्रण और कोयला पाउडर बराबर मात्रा में मिलाया जाता है. फिर पानी डालकर हल्की-सी गीली मिट्टी जैसी लोई बना ली जाती है. अगर पानी ज्यादा हो जाए तो मशीन ठीक से नहीं चलती, इसलिए मिश्रण को थोड़ा सख्त रखना पड़ता है. अच्छी क्वालिटी का पाउडर अगरबत्ती को मजबूत बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google याद रखें कि ताजा बनी अगरबत्ती को तुरंत पैक नहीं किया जाता. इन्हें 4–6 घंटे किसी खुली और सूखी जगह पर फैलाकर रखना होता है. यदि धूप बहुत तेज़ हो, तो रंग उड़ सकता है, इसलिए हल्की धूप या छांव में सुखाना बेहतर है. जो लोग तेज़ प्रोडक्शन करते हैं, वे घर में एक छोटा-सा सुखाने वाला रैक भी बना लेते हैं. अच्छी तरह सूखना जरूरी है, वरना टूटने की संभावना रहती है. अगरबत्तियों की सुगंध ही उनकी पहचान होती है. सूखने के बाद इन्हें अलग ट्रे में रखकर खुशबू का स्प्रे किया जाता है. कुछ लोग इसमें गुलाब, चंदन, मोगरा या पारंपरिक फ्लोरल मिक्स का इस्तेमाल करते हैं. ध्यान रखें कि स्प्रे हल्का-सा हो, वरना अगरबत्तियां गीली पड़ जाती हैं. अच्छी खुशबू वाला प्रोडक्ट तुरंत ग्राहकों में लोकप्रिय बन जाता है. अगरबत्ती की पैकिंग जितनी साफ-सुथरी होगी, उतना भरोसा बढ़ेगा। छोटे 10–20 स्टिक वाले पैक ज्यादा चलते हैं. पैकिंग के दौरान टूटे हुए टुकड़े निकाल देना चाहिए, क्योंकि खरीदार पहली नज़र में पैक देखकर ही निर्णय लेता है. लोकल प्रिंट वाली सिंपल पॉलिथीन भी ठीक चल जाती है, बस उस पर खुशबू और मात्रा जरूर लिखें. यही छोटा-सा कदम बिक्री बढ़ा देता है. पूरे साल चलने वाली सुगंधों में चंदन, मोगरा, गुलाब और लवेंडर टॉप पर रहती हैं. त्योहारों के समय खास फ्रेगरेंस जैसे कस्तूरी और हवन-सुगंध ज्यादा चलने लगती हैं. दुकानदार अक्सर उन्हीं खुशबुओं की मांग करते हैं जिनकी बिक्री उनकी दुकानों पर तेज़ रहती है. अगर कोई नया व्यक्ति शुरुआत कर रहा है, तो इन 4–5 खुशबुओं से काम शुरू करना सबसे सुरक्षित रहता है. अगरबत्ती के काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश बहुत कम लगता है. एक बार मशीन, पाउडर और पैकिंग का सेटअप हो जाए तो रोज़ का खर्च बहुत ही मामूली रहता है. लगातार डिमांड होने के कारण किसी भी मौसम में प्रोडक्शन बंद नहीं होता. इसी वजह से कई लोग इसे घर बैठे नियमित कमाई के तौर पर अपनाते हैं और महीने में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं. First Published : November 27, 2025, 13:21 IST Source link

झारखंड

पाकुड़ में 121 घंटे का हरि नाम संकीर्तन शुरू:शिव शीतला मंदिर में...

पाकुड़ शहर के शिव शीतला मंदिर में बुधवार से 121 घंटे का अखंड हरि नाम संकीर्तन शुरू हो गया है। विद्वान पुरोहितों द्वारा पूजा-पाठ, वैदिक मंत्रोच्चार और हवन पूजन के बाद इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। इस संकीर्तन में पश्चिम बंगाल, बिहार और राज्य के कई जिलों से कीर्तन मंडलियां पहुंची हैं। अगले पांच दिनों तक हरि नाम संकीर्तन से पूरा शहर भक्तिमय रहेगा। हरि नाम संकीर्तन के साथ-साथ पांच दिनों तक रुद्राभिषेक का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें दुमका जिले के बासुकीनाथ से आए विद्वान पुरोहित शामिल होंगे। संकीर्तन के शुभारंभ पर बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजकों को उम्मीद है कि अगले पांच दिनों तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में लोग हरि नाम संकीर्तन सुनने पहुंचेंगे। इस पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन भंडारे की भी व्यवस्था की गई है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पाकुड़ के शिव शीतला मंदिर में लगभग 100 वर्षों से हरि नाम संकीर्तन की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी यह अनुष्ठान उसी परंपरा के तहत शुरू किया गया है। आयोजन समिति का गठन पहले ही कर लिया गया था, जिसने संकीर्तन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। संकीर्तन स्थल पर भगवान की प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जिसकी पूजा-अर्चना पुरोहितों द्वारा की गई। Source link

Scroll to Top