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Author name: scsmdos@gmail.com

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अब यूरिया खाद पर नहीं होगी किचकिच! 100 लाख टन का गैप...

नई दिल्ली. भारत सरकार देश में खेती के लिए सबसे जरूरी यूरिया (Urea) खाद की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार ने एक नई निवेश नीति तैयार की है, जिसके लिए एक कैबिनेट नोट भी बना लिया गया है. इस नई नीति का मुख्य मकसद देश में यूरिया के नए कारखाने लगाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, ताकि विदेशों से खाद न मंगानी पड़े. फिलहाल भारत में यूरिया की जितनी जरूरत है और जितनी पैदावार हो रही है, उसके बीच करीब 100 लाख मीट्रिक टन का बड़ा अंतर है. इसी अंतर को भरने के लिए सरकार अब नई सुविधाओं और नियमों का ऐलान करने वाली है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. भारत में हर साल लगभग 380 से 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन देश में मौजूद कारखाने केवल 300 लाख मीट्रिक टन ही बना पाते हैं. इसका मतलब है कि हमें अपनी कुल जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से खरीदना पड़ता है. रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यूरिया की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है, इसलिए नई कंपनियां तब तक पैसा लगाने से डरती हैं जब तक उन्हें यह पता न हो कि उन्हें सरकार से कितनी सब्सिडी (Subsidy) मिलेगी. नई नीति में अगले 8 सालों के लिए सब्सिडी की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिससे निवेशकों को भविष्य का अंदाजा मिल सके और वे बेझिझक नए प्लांट लगा सकें. पुरानी नीति का असर इससे पहले साल 2012 में नई निवेश नीति (New Investment Policy – 2012) आई थी. उस नीति की वजह से देश में छह नए यूरिया कारखाने लगे थे, जिनमें गोरखपुर (Gorakhpur), सिंदरी (Sindri), बरौनी (Barauni), रामागुंडम (Ramagundam), पानागढ़ (Panagarh) और गड़ेपान (Gadepan) शामिल हैं. इन कारखानों से यूरिया की पैदावार काफी बढ़ी थी, लेकिन अब उस पुरानी नीति का समय खत्म हो गया है और मांग लगातार बढ़ती जा रही है. नई नीति के तहत सरकार कंपनियों को कारखाना लगाने के लिए सीधे पैसे नहीं देगी, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करेगी जिससे कंपनियों को मुनाफा मिल सके. कंपनियों को आमतौर पर नीति लागू होने के चार साल के भीतर कारखाना चालू करना होगा. वर्तमान में किसानों को यूरिया का एक बैग (45 किलो) लगभग 266 रुपये में मिलता है, जबकि इसे बनाने का खर्च 1,200 से 1,700 रुपये तक आता है. इस बीच का जो भी बड़ा अंतर है, वह सरकार सब्सिडी के तौर पर चुकाती है. गैस की उपलब्धता जरूरी यूरिया बनाने के लिए गैस की जरूरत होती है, जो काफी महंगी और सीमित है. अधिकारियों का कहना है कि भले ही हम देश में बहुत सारे कारखाने लगा लें, लेकिन अगर उनके पास पर्याप्त गैस नहीं होगी, तो फिर से दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा. इसके अलावा, वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है. बजट में सब्सिडी के लिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन अनुमान है कि यह खर्च बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. यूरिया के अलावा अन्य खादों जैसे एनपीके (NPK – Nitrogen, Phosphorus, Potassium) के नियम थोड़े अलग हैं, वहां सरकार एक तय मदद देती है और कंपनियां बाजार के हिसाब से दाम तय करती हैं, लेकिन यूरिया में पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है. नई नीति आने से उम्मीद है कि आने वाले सालों में भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बन पाएगा. Source link

झारखंड

ऑटो के इंजन से निकला जहरीला कोबरा सांप:महेशपुर पेट्रोल पंप पर वन...

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित एक पेट्रोल पंप पर ऑटो के इंजन से एक जहरीले कोबरा सांप को बचाया गया। बुधवार को तेल भरवाते समय लोगों ने सांप को देखा, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग के सर्प मित्र ने काफी मशक्कत के बाद सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया। यह घटना महेशपुर प्रखंड के गड़बाड़ी के पास स्थित दीपक कुमार के पेट्रोल पंप पर हुई। बुधवार को वाहनों की लंबी कतार लगी थी। एक मालवाहक ऑटो में तेल भरा जा रहा था, तभी पेट्रोल पंप के कर्मचारियों और वहां मौजूद कुछ लोगों की नजर ऑटो के इंजन से बाहर निकलते एक विशाल सांप पर पड़ी। तेल लेने आए लोग इधर-उधर भागने लगे सांप को देखते ही लोगों में हड़कंप मच गया और अफरातफरी फैल गई। तेल लेने आए लोग इधर-उधर भागने लगे, जबकि कुछ लोग मौके पर भीड़ लगाकर खड़े हो गए। तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के सर्प मित्र मोहम्मद अशराफुल शेख अपनी टीम के साथ पेट्रोल पंप पहुंचे। उन्होंने ऑटो के चारों ओर मुआयना किया और पाया कि इंजन के पास एक जहरीला कोबरा सांप छिपा हुआ था। सर्प मित्र ने काफी प्रयास के बाद कोबरा सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के बाद सर्प मित्र अशराफुल शेख ने बताया कि पकड़े गए सांप की लंबाई लगभग 5 फीट है और यह एक जहरीला कोबरा है, जो काफी खतरनाक होता है। उन्होंने आशंका जताई कि संभवतः रात के समय जब ऑटो घर में खड़ा रहा होगा, तब सांप इंजन के पास छिप गया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सांप ड्राइवर के केबिन तक पहुंच जाता तो कोई भी अनहोनी हो सकती थी। Source link

झारखंड

बॉयज गैंग का मस्ती करने का प्लान है तो बेस्ट है यह...

Last Updated:April 29, 2026, 09:24 IST Ranchi Best Spot For Free Swimming: रांची के पास बुंडू साइड पर तिनकोनिया तालाब है जो गर्मी के दिनों में मस्ती करने का बेस्ट स्पॉट हो सकता है. घने जंगलों के बीच होने के कारण यह खासतौर पर ब्वॉयज गैंग के लिए अच्छा माना जाता है. इसके साफ पानी में आप जितनी चाहें, उतना फ्री में स्वीमिंग कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट रांची. रांची से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बुंडू साइड पर आपको तिनकोनिया तालाब देखने को मिलेगा. दरअसल, यह थोड़ा अंदर है. आपको जंगल के बीच में जाना पड़ेगा. चारों तरफ जंगल हैं और बीच में यह बड़ा ही खूबसूरत तालाब है और पानी इतना साफ है कि आप चाहें तो उसको पी सकते हैं. लोग यहां पर दोपहर के 12 बजे नहाने के लिए चले आते हैं. कोई स्विमिंग करता है तो कोई बैठकर यूं ही मस्ती करता है. लड़कों के लिए है बेस्ट स्पॉटचूंकि यह जंगलों के बीच में है, तो ऐसे में खासतौर पर लड़कों का ग्रुप यहां आता है. अगर मस्ती करने के लिए कोई जगह ढूंढ रहे हैं, जहां स्विमिंग भी प्राकृतिक रूप से हो जाए, आम भी तोड़ लिया जाए और ऋषिकेश वाला मजा लिया जाए, तो फिर आप पूरे ग्रुप के साथ यहां पर आ सकते हैं. क्योंकि जंगल के बीच में होने के कारण यहां महिलाएं कम ही देखने को मिलती हैं. कोई डिस्टर्ब करने वाला नहींइस खूबसूरत तालाब का पानी एकदम ठंडा होता है. इसलिए खासतौर पर लोग दोपहर के 12:00 बजे ही आते हैं. आराम से एक बजे तक जल क्रीड़ा का आनंद लेते हैं. कोई छलांग लगाता है तो कोई स्विमिंग करता है, तो कोई यूं ही पानी में नाचता है. जिसको जो पसंद. गर्मी के मौसम में तो आपका पूरा मूड फ्रेश हो जाएगा. यहां आपको घने जंगल नजर आएंगे और आपको कोई डिस्टर्ब करने वाला कोई भी नहीं. यहां पर जाने का रास्ता भी है खूबसूरतयहां पर जाने का रास्ता भी बड़ा ही खूबसूरत है. आपको लगेगा कि आप घने जंगलों के बीच में समा रहे हैं. चारों तरफ पहाड़ हैं और बीच में आपको यह तालाब दिखेगा. यहां के स्थानीय निवासी रंजीत कहते हैं कि हमारा घर तो पास में ही है, लेकिन घर में नहीं नहाते. बल्कि घर में पानी की दिक्कत भी नहीं है. फिर भी यहीं आकर पूरे 1 घंटे नहाता हूं, मजे से स्विमिंग करता हूं. क्योंकि यहां का मजा ही कुछ और है, दिल एकदम खुश हो जाता है. पानी एकदम साफयहां पर पानी आपको एकदम साफ नजर आएगा. किसी तरह की कोई भी गंदगी नहीं है और खास बात यह है कि इस तालाब की गहराई भी बहुत अधिक नहीं है तो डूबने का डर भी नहीं होता. लोग यहां पर अपने कपड़े धोते हैं. यहां पर सर्फ-साबुन का इस्तेमाल करना मना है. आसपास के लोग ऐसा करने से आपको टोक सकते हैं, ताकि पानी गंदा न हो. एकदम सुनसान और वीरानअगर आप यहां आना चाहते हैं और खासतौर पर आप महिला हैं, तो अपने साथ तीन, चार, पांच लोगों को लेकर ही आएं. अकेली महिला आने से बचें. वहीं अगर आप पुरुष गैंग हैं, फिर तो कोई टेंशन नहीं, आराम से आ सकते हैं. एक बात का और ध्यान रखें कि शाम के 5:00 बजने के बाद निश्चित रूप से यहां से निकल जाएं. जंगलों के बीच में होने के कारण यह एकदम सुनसान और वीरान हो जाता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 09:24 IST Source link

व्यापार

नया साल, नई कमाई! जनवरी में महिलाएं शुरू करें ये आसान बिजनेस,...

Last Updated:January 07, 2026, 15:17 IST आइये जानते हैं कुछ ऐसे बिजनेस आइडिया, जिन्हें महिलाएं जनवरी के महीने में कम निवेश के साथ आसानी से शुरू कर सकती हैं. खास बात यह है कि इन कामों को आप घर बैठे या नौकरी के साथ भी कर सकती हैं. नए साल में लोग नई चीजों पर खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं, जिससे कम समय में काम चलने लगता है और कुछ ही महीनों में अच्छी कमाई का रास्ता खुल जाता है. आइये जानते हैं कुछ ऐसे बिजनेस आइडिया, जिन्हें महिलाएं जनवरी के महीने में कम निवेश के साथ आसानी से शुरू कर सकती हैं. खास बात यह है कि इन कामों को आप घर बैठे या नौकरी के साथ भी कर सकती हैं. नए साल में लोग नई चीजों पर खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं, जिससे कम समय में काम चलने लगता है और कुछ ही महीनों में अच्छी कमाई का रास्ता खुल जाता है. अगर आपको मेकअप, फेशियल या ब्यूटी के काम में दिलचस्पी है, तो ब्यूटी पार्लर का बिजनेस आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसे आप अपने घर के एक छोटे से कमरे से भी शुरू कर सकती हैं. शुरुआत में फेशियल, वैक्सिंग, थ्रेडिंग और सिंपल मेकअप जैसी सर्विस देकर काम शुरू किया जा सकता है. थोड़ी सी ट्रेनिंग और बेसिक सामान के साथ आप कुछ ही महीनों में अच्छी कमाई करने लगेंगी. आजकल लोग यूनिक और हैंडमेड गिफ्ट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अगर आप क्रिएटिव हैं, तो हैंडीक्राफ्ट गिफ्ट का काम आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. इसमें आप होम डेकोर आइटम, पर्सनलाइज्ड गिफ्ट, फोटो फ्रेम या फेस्टिव सजावटी सामान तैयार कर सकती हैं. इस काम को घर से ही आराम से शुरू किया जा सकता है और सोशल मीडिया व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ऑर्डर भी आसानी से मिल जाते हैं. कम लागत में शुरू होने वाला यह काम अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है. अगर आपके हाथ के बने खाने की लोग तारीफ करते हैं, तो क्लाउड किचन आपके लिए एक शानदार बिजनेस आइडिया हो सकता है. इसमें न तो रेस्टोरेंट खोलने की जरूरत होती है और न ही ज्यादा स्टाफ रखने की. आप घर से ही किचन सेटअप करके ऑनलाइन फूड ऐप्स के जरिए ऑर्डर ले सकती हैं. शुरुआत में सीमित मेन्यू रखें, धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ते हैं और कुछ ही महीनों में अच्छा मुनाफा मिलने लगता है. Add News18 as Preferred Source on Google घर से बेकिंग का बिजनेस आजकल काफी ट्रेंड में है, क्योंकि लोग घर पर बने केक और कुकीज़ ज्यादा पसंद करते हैं. कम खर्च में ओवन और जरूरी सामान लेकर इसकी शुरुआत की जा सकती है. बर्थडे, सालगिरह और त्योहारों पर ऑर्डर ज्यादा मिलते हैं. सोशल मीडिया पर अपने प्रोडक्ट की फोटो डालकर प्रमोशन करें, स्वाद अच्छा होगा तो ग्राहक खुद दोबारा ऑर्डर देंगे. अगर आपको सिलाई या कढ़ाई का काम आता है, तो यह बिजनेस कम निवेश में शुरू किया जा सकता है. महिलाएं ब्लाउज, सूट और बच्चों के कपड़े सिलवाने के लिए हमेशा टेलर की तलाश में रहती हैं. आप घर पर ही सिलाई मशीन लगाकर काम शुरू कर सकती हैं. शुरुआत में जान-पहचान वालों से ऑर्डर मिल जाते हैं, फिर धीरे-धीरे आपका नाम चलता है और कमाई भी बढ़ती जाती है. शहरों में कामकाजी लोग और स्टूडेंट्स अक्सर घर जैसा खाना तलाशते हैं, ऐसे में टिफिन सर्विस का बिजनेस काफी फायदेमंद साबित होता है. अगर आप रोज साफ-सुथरा और स्वादिष्ट खाना बना सकती हैं, तो इसकी शुरुआत घर से ही की जा सकती है. शुरुआत में 5–10 लोगों के लिए टिफिन बनाकर काम शुरू करें. इसमें खर्च कम होता है और हर महीने तय कमाई होती है, जिससे घर का बजट आसानी से संभाला जा सकता है. अगर आपको कपड़ों की अच्छी समझ है, तो ऑनलाइन कपड़े बेचने का काम शुरू किया जा सकता है. आप व्हाट्सएप, फेसबुक या इंस्टाग्राम के जरिए साड़ी, कुर्ती या ड्रेस बेच सकती हैं. शुरुआत में कम स्टॉक रखें और ऑर्डर मिलने पर ही सामान मंगवाएं या बेचें. यह बिजनेस घर बैठे आसानी से संभाला जा सकता है और समय के साथ ग्राहकों की संख्या भी बढ़ती चली जाती है. अगरबत्ती और मोमबत्ती की मांग पूरे साल रहती है. इसे घर से ही कम लागत में शुरू किया जा सकता है. बाजार में इसके कच्चे माल आसानी से मिल जाते हैं. शुरुआत में छोटी मात्रा में बनाकर लोकल दुकानों या जान-पहचान वालों को बेचा जा सकता है. त्योहारों में इसकी बिक्री और बढ़ जाती है. मेहनत और धैर्य से यह बिजनेस अच्छी कमाई देने लगता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 07, 2026, 15:17 IST Source link

शिक्षा

अब एंट्री लेवल जॉब्स सफलता की गारंटी नहीं:नौकरी के भरोसे नहीं सीधे...

अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी से 2024 में ग्रेजुएट हुई एशले टेरेल ने सोचा था कि मार्केटिंग में अच्छी नौकरी मिलेगी। डिग्री, इंटर्नशिप और अनुभव के बावजूद महीनों कोशिश के बाद उन्हें सिर्फ एक ऑफर स्टोर में काम करने का मिला। वह हर दिन नौकरी ढूंढती रहीं, यहां तक कि व्यस्त समय में भी आवेदन करती थीं। लेकिन उन्हें पसंदीदा नौकरी नहीं मिली। यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंट्री-लेवल नौकरियां तेजी से घट रही हैं। ऐसे में युवा विकल्प के तौर पर अब एआई टूल्स का उपयोग करके कंटेंट क्रिएशन, ऐप डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी के जरिए अपना रास्ता खुद बना रहे हैं। अमेजन में काम करने वाली 25 वर्षीय मैडिसन, खाली समय में एआई की मदद से सोशल मीडिया एप बना रही हैं। उन्होंने बताया कि बिना एआई यह काम महीनों और बड़ी टीम के बिना संभव नहीं था, लेकिन अब एक महीने में प्रोटोटाइप तैयार हो गया। इसी तरह सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़े सुहित अग्रवाल को बड़ी कंपनियों से जवाब नहीं मिला, तो स्टार्टअप्स में काम शुरू किया और एआई टूल्स की मदद से बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। अब इनके लिए तकनीक सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि खुद कुछ नया करने का साधन भी बन रही है। 22 वर्षीय सेलेस्टे अमाडॉन ने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जेपी मॉर्गन की इंटर्नशिप छोड़ खुद का डेटिंग एप ‘नोन’ शुरू किया। शुरू में परिवार ने विरोध किया, लेकिन बाद में जब उन्हें निवेश मिला, तो वही समर्थक बन गया। एलिजाह खासाबो, जो पहले कपड़े फोल्ड करते थे, आज अपनी टीम संभाल रहे हैं। हालांकि इसमें स्थिर आमदनी बड़ी चुनौती है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर जोसेफ फुलर के मुताबिक खुद का काम शुरू करना आसान नहीं है। ज्यादातर स्टार्टअप स्थिर आमदनी के अभाव में फेल होते हैं, फिर भी युवा इसमें करियर पर नियंत्रण देख रहे हैं। फुलर कहते हैं, एआई ने पारंपरिक नौकरियां घटाने के साथ नए काम के औजार भी दिए हैं। युवाओं के लिए बड़ा बदलाव यह है कि जॉब सुरक्षा कम हुई है, अपने दम पर कुछ बनाने का भरोसा भी बढ़ा है। नई पीढ़ी के लिए जॉब्स का पहला पड़ाव ही मुश्किल- एक्सपर्ट फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 22-27 साल के युवाओं में बेरोजगारी कोविड के बाद ऊंचे स्तर पर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे एंट्री-लेवल जॉब्स प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि इनमें दोहराव वाले काम अब एआई कर रहा है। अर्थशास्त्री डैनियल झाओ कहते हैं ‘पहली सीढ़ी पर पैर रखना ही मुश्किल हो गया है।’ कई युवाओं को डिग्री के बाद भी रिटेल व पार्ट-टाइम काम करना पड़ रहा है। Source link

झारखंड

कोडरमा में हाई वोल्टेज करंट से मजदूर की मौत:निर्माणाधीन मकान में काम...

कोडरमा जिले के तिलैया थाना क्षेत्र के मड़ुआटांड़ में एक निर्माणाधीन मकान में काम करते समय एक मजदूर की 11 हजार वोल्ट के हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। यह घटना बुधवार सुबह हुई। मृतक की पहचान जयनगर थाना क्षेत्र के कन्द्रपडीह गांव निवासी 45 वर्षीय मनोज रजक उर्फ करू रजक के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मड़ुआटांड़ रेलवे ब्रिज के पास उमेश मोदी नामक व्यक्ति के मकान का निर्माण कार्य चल रहा था। मनोज रजक बुधवार सुबह मकान के दूसरे माले पर सरिया रखने के लिए वहां पहुंचे थे। सरिया 11 हजार हाई वोल्टेज तार से सटा उमेश मोदी के पुत्र अंकित ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि मनोज घर के बाहर रखे सरिया को छत के दूसरे माले पर खींच रहा था। इसी दौरान, सरिया मकान के बगल से गुजर रहे 11 हजार हाई वोल्टेज तार की चपेट में आ गया। इससे मनोज को जोरदार झटका लगा और वह दूसरे माले से नीचे जमीन पर गिर गया। मकान मालिक से मुआवजे की मांग करंट लगने और ऊंचाई से गिरने के कारण मनोज का शरीर सुन्न पड़ गया। इसके बाद उमेश मोदी उसे अपने निजी वाहन से सदर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे। वे गहरे सदमे में हैं और मकान मालिक से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलने पर तिलैया थाना के पैंथर जवान घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है। मनोज की मौत के बाद मकान मालिक उमेश मोदी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।मृतक मनोज अपने पीछे दो पुत्रियों और एक पुत्र को छोड़ गए हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। Source link

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सिर्फ एकादशी पर ही खुलते हैं त्रेता के ठाकुर मंदिर के कपाट,...

Last Updated:April 29, 2026, 13:15 IST अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है, जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं. अयोध्या: आस्था इतिहास और परंपराओं की नगरी अयोध्या अपने भीतर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है जो इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग पहचान देते हैं. यहां स्थित मंदिरों की विशेषता सिर्फ उनकी प्राचीनता ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अनोखी परंपराएं भी हैं. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा से जुड़ा है स्वर्ग द्वार के अंदर स्थित त्रेता के ठाकुर मंदिर है जो पूरे महीने में सिर्फ दो दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. सरयू तट के समीप स्वर्ग द्वार मोहल्ले में स्थित यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. त्रेता के ठाकुर मंदिर  त्रेता के ठाकुर नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा की जाती है. मंदिर का इतिहास भी उतना ही रोचक है जितनी इसकी परंपरा. मंदिर के पुजारी सुनील कुमार मिश्र के अनुसार इस मंदिर का मूल निर्माण प्राचीन काल में सरयू नदी के किनारे हुआ था. कहा जाता है कि आठवीं शताब्दी के आसपास यहां एक भव्य मंदिर था. बाद में वर्ष 1680 ईस्वी में मुगल शासक औरंगजेब के समय इस मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. उस समय जो मूर्तियां वहां स्थापित थीं, उन्हें सुरक्षित रखते हुए वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया. यही स्थान आगे चलकर त्रेता के ठाकुर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ. महीने केवल दो बार खुलता है मंदिर इस मंदिर की सबसे विशेष बात इसकी खुलने की परंपरा है. यह मंदिर हर महीने केवल दो बार, यानी दोनों एकादशी के दिन ही खोला जाता है वह भी सिर्फ शाम के समय, जब भक्तों को भगवान के दर्शन करने का अवसर मिलता है. सालों से चली आ रही इस परंपरा का पालन आज भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है.मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु लगातार तीन वर्षों तक हर महीने की दोनों एकादशी के दिन इस मंदिर में आकर दीपक जलाता है.उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी आस्था के कारण दूर-दूर से भक्त इन दो विशेष दिनों का इंतजार करते हैं और मंदिर खुलने पर बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है. जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ayodhya,Faizabad,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 13:15 IST Source link

झारखंड

Jharkhand Naxal Encounter | Western Singhbhum Search Operation

पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा और टोंटो थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित बोरोई के पास बुधवार सुबह सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच आमना-सामना हो गया। . गुप्त सूचना के आधार पर कोबरा 209 बटालियन के जवान इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान जंगल के भीतर संदिग्ध हलचल देखी गई, जिसके बाद दोनों ओर से हल्की गोलीबारी हुई। सर्च अभियान के दौरान जंगल के भीतर संदिग्ध हलचल देखी गई, जिसके बाद दोनों ओर से हल्की गोलीबारी हुई। हालांकि अब तक किसी बड़े मुठभेड़ या जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए इलाके में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। इनामी नक्सली कमांडर के होने की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बोरोई और आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ समय से माओवादी गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। खुफिया इनपुट के आधार पर यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस दस्ते में एक करोड़ रुपए का इनामी नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा भी शामिल हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इस दस्ते में एक करोड़ रुपए का इनामी नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा भी शामिल हो सकता है। पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों का अभियान अभी जारी है। पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जवान पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। घने जंगल और पहाड़ी बन रही सर्च में चुनौती बोरोई का इलाका घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिससे सुरक्षाबलों के लिए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बन गया है। इसके बावजूद जवानों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय स्तर पर भी सूचना तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय स्तर पर भी सूचना तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि माओवादियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी और तब तक सर्च अभियान लगातार जारी रहेगा। ————————————— इसे भी पढ़ें… सारंडा में 40 घंटे चली मुठभेड़ थमी, अब सर्च अभियान:कभी ग्रामीणों को डराते थे, अब नक्सली ही मांग रहे मदद, निशाने पर बड़े नक्सली चाईबासा के सारंडा के चड़राडेरा इलाके में बुधवार से शुरू हुई सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ करीब 40 घंटे बाद थम गई है। शुक्रवार को तीसरे दिन गोलीबारी नहीं हुई, लेकिन इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। इस लंबी कार्रवाई ने कई बड़े और नामी नक्सलियों को दबाव में ला दिया है। आलम यह है कि कभी ग्रामीणों को डरा-धमका कर अपनी स्थिति नक्सलियों ने मजबूत की थी, वहीं आज वे उन्हीं ग्रामीणों से मदद मांग रहे हैं। ग्रामीणों से चावल और दूसरी जरूरत की चीजें वे मांग रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… Source link

झारखंड

ट्रेजरी घोटाला मामले में चाईबासा से चार अरेस्ट:9 साल में निकाले 27...

चाईबासा पुलिस विभाग में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक सिपाही सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सिपाही देवनारायण मुर्मू ने वर्ष 2017 से 2025 के बीच लगभग 60 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से 27 लाख 21 हजार 717 रुपए की फर्जी निकासी की। यह राशि उसने अपने करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मृत कर्मियों के नाम पर निकाली गई राशि आरोपी सिपाही ने कंप्यूटर डेटा में हेरफेर कर मृत पुलिसकर्मियों के वेतन, भत्ते और अन्य मदों से संबंधित राशि को अवैध तरीके से निकाला। इस प्रक्रिया में उसने छोटी-छोटी रकम निकालकर संदेह से बचने की कोशिश की। निकाली गई राशि को उसने अपने जीजा अरुण कुमार मार्डी, साला सरकार हेंब्रम और ओडिशा के मयूरभंज निवासी अपने मित्र गोराचांद मार्डी के बैंक खातों में स्थानांतरित किया। मामले में सभी आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विभागीय जांच अभी जारी है। पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड की होगी जांच घोटाले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तत्काल प्रभाव से वेतन निकासी की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब किसी भी कर्मचारी के वेतन भुगतान से पहले उसकी सेवा पुस्तिका, पद, जन्मतिथि और बैंक खाते का अनिवार्य सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक बिल पर निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के हस्ताक्षर और प्रमाणन भी जरूरी कर दिया गया है। प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे पिछले 10 वर्षों के वेतन और बकाया मदों की निकासी की विस्तृत जांच करें। इस घोटाले के कारण कई कर्मियों का वेतन भुगतान भी प्रभावित हुआ है। Source link

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लातेहार में कोयला लदे हाइवा में लगी आग:टायर फटने से हुआ हादसा,...

लातेहार जिले के हेरहंज थाना क्षेत्र अंतर्गत नवादा गांव के पास मंगलवार रात करीब 8 बजे एक बड़ा हादसा हो गया। कोयला लदा एक हाइवा वाहन अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे पूरा वाहन जलकर राख हो गया। हालांकि, इस घटना में चालक बाल-बाल बच गया। जानकारी के अनुसार, हाइवा तुबेद कोल माइंस से कोयला लेकर बालूमाथ साडिंग जा रहा था। रास्ते में अचानक वाहन का टायर फट गया (ब्लास्ट)। टायर फटने के तुरंत बाद वाहन में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे हाइवा को अपनी चपेट में ले लिया। हाइवा चालक ने बताया कि तेज धमाके के साथ टायर फटते ही आग तेजी से फैलने लगी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उसने तुरंत वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें और धुआं दूर से ही दिखाई दे रहा था। 40 से 50 लाख रुपए का अनुमानित नुकसान स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वाहन पूरी तरह जल चुका था। बताया जा रहा है कि यह हाइवा बिहार का था और आदर्श ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के अधीन संचालित हो रहा था। इस घटना में ट्रक मालिक को 40 से 50 लाख रुपए का अनुमानित नुकसान हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। हेरहंज थाना प्रभारी कृष्ण पाल सिंह पवैया ने पुष्टि की कि हाइवा का टायर फटने से आग लगी है और मामले की जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Source link

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