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Exit Poll 2026 Results LIVE | एग्जिट पोल पश्चिम बंगाल 2026 |...

Exit Poll Results LIVE Updates: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल नतीजे भी आज ही जारी किए जा रहे हैं. इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज 29 अप्रैल को वोट डाले गए. शाम 5 बजे तक राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाती है. चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार, शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर पाबंदी है. इसके बाद ही सर्वे एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर सकेंगी. Tamil Nadu Exit Poll 2026 लाइव: तमिलनाडु में गठबंधनों की जंग से बदला चुनावी समीकरण तमिलनाडु चुनाव 2026 में मुकाबला अब पूरी तरह गठबंधनों पर टिक गया है. डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन एम के स्टालिन के साथ मैदान में है. दूसरी तरफ एआईएडीएमके गठबंधन ई के पलानीस्वामी के नेतृत्व में चुनौती दे रहा है. इस बार विजय की तमिलगा वेत्री कषगम की एंट्री ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है. राज्यभर में त्रिकोणीय और बहुकोणीय टक्कर चुनावी तस्वीर बदल सकती है. तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026 लाइव: 10 हॉट सीटें जो तय करेंगी सत्ता की दिशा तमिलनाडु की कई हॉट सीटें ऐसी हैं जहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है. कोलाथुर में एम के स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो एडप्पाडी सीट ई के पलानीस्वामी के लिए अहम है. कोयंबटूर साउथ में शहरी वोटर बड़ा फैक्टर बन सकते हैं. मदुरै सेंट्रल और सलेम में सीधी टक्कर का माहौल है. तिरुचिरापल्ली वेस्ट को स्विंग सीट माना जा रहा है. चेन्नई सेंट्रल क्षेत्र शहरी रुझान दिखाएगा. बोडिनायकनूर, तिरुप्पुर और कन्याकुमारी में बहुकोणीय मुकाबला चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है. असम एग्जिट पोल LIVE: 75 सीटों के आसपास मजबूत बढ़त असम विधानसभा चुनाव का एग्जिट पोल: आंकड़ों के मुताबिक करीब 75 सीटों का आंकड़ा आरामदायक जीत की ओर इशारा करता है. यह स्थिति सरकार को स्थिरता देती है और भविष्य में उपचुनाव या दल बदल जैसे झटकों को संभालने की क्षमता बढ़ाती है. इससे शासन में निरंतरता और नीति लागू करने में तेजी देखने को मिल सकती है. असम एग्जिट पोल अपडेट LIVE: 64 सीट पार करते ही बहुमत तय, सरकार बनना लगभग तय असम विधानसभा में 64 सीट का आंकड़ा स्पष्ट बहुमत की सीमा माना जाता है. जो भी दल या गठबंधन इस आंकड़े को पार करेगा, वह बिना बाहरी समर्थन के सरकार बना सकेगा. साल 2021 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह आंकड़ा आसानी से पार किया था. एग्जिट पोल 2026 LIVE: क्या आपको एग्जिट पोल्स पर भरोसा करना चाहिए? एग्जिट पोल्स को अंतिम नतीजा नहीं, बल्कि एक ‘संकेत’ (Signal) के तौर पर देखना चाहिए. ये ट्रेंड समझने और हवा का रुख पहचानने के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन इन्हें 100% सटीक मान लेना सही नहीं है. असली तस्वीर तो 4 मई, 2026 को ही साफ होगी, जब ईवीएम (EVM) के पिटारे खुलेंगे. तब तक ये आंकड़े सिर्फ एक चर्चा और विश्लेषण का आधार मात्र हैं. Exit Poll 2026 Results LIVE: आखिर क्यों फेल हो जाते हैं बड़े-बड़े एग्जिट पोल्स? इतनी मेहनत और गणित के बावजूद एग्जिट पोल्स कई बार पूरी तरह गलत साबित होते हैं. इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं: साइलेंट वोटर: अगर कोई खास वर्ग अपनी पसंद छुपा ले, तो पूरा कैलकुलेशन बिगड़ जाता है. झूठे जवाब: कई बार वोटर दबाव में या डर के मारे गलत जानकारी दे देता है. सैंपल एरर: अगर सैंपल में हर वर्ग का सही प्रतिनिधित्व नहीं है, तो नतीजा गलत आएगा. टर्नआउट का अनुमान: सर्वे इस आधार पर होता है कि कितने लोग वोट देने आएंगे, लेकिन एक्चुअल टर्नआउट कम-ज्यादा होने पर गणित फेल हो जाता है. गठबंधन और लोकल फैक्टर: भारत जैसे विविधता वाले देश में गठबंधन और स्थानीय प्रत्याशियों का प्रभाव नेशनल लेवल के डेटा को मात दे देता है. Exit Poll Results 2026 LIVE: एजेंसियां अलग-अलग नतीजे क्यों दिखाती हैं? अक्सर देखा जाता है कि एक चैनल किसी पार्टी की जीत दिखा रहा है, तो दूसरा कड़े मुकाबले की बात करता है. इसके पीछे कई कारण हैं: सैंपलिंग में अंतर: कोई एजेंसी शहरी इलाकों पर ज्यादा फोकस करती है, तो कोई ग्रामीण बेल्ट पर. सवाल पूछने का तरीका: अगर सवाल पूछने का ढंग थोड़ा भी अलग हो, तो वोटर का जवाब बदल सकता है. नो-रिस्पॉन्स का इलाज: बहुत से लोग यह नहीं बताते कि उन्होंने किसे वोट दिया. एजेंसियां अपनी समझ के हिसाब से इन ‘साइलेंट वोटर्स’ का अनुमान लगाती हैं. वेटिंग फॉर्मूला: डेटा को एडजस्ट करने का हर एजेंसी का अपना सीक्रेट फॉर्मूला होता है. Exit Poll 2026 Results LIVE: डेटा की वेटिंग और वोटों से सीटों का पेचीदा गणित ग्राउंड से जो डेटा आता है, उसे वैसा का वैसा नहीं दिखाया जाता. इस ‘रॉ डेटा’ पर स्टैटिस्टिकल वेटिंग (Statistical Weighting) अप्लाई की जाती है. मान लीजिए किसी इलाके में महिलाओं ने कम जवाब दिए, तो उनके डेटा को आनुपातिक रूप से बढ़ा दिया जाता है ताकि बैलेंस बना रहे. सबसे कठिन काम है वोटों को सीटों में बदलना. भारत में ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ सिस्टम है. इसका मतलब है कि अगर किसी पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 1-2% भी ऊपर-नीचे होता है, तो सीटों की संख्या में भारी अंतर आ सकता है. यहीं पर अलग-अलग एजेंसियों के दावों में अंतर दिखने लगता है क्योंकि हर एजेंसी का कैलकुलेशन मॉडल अलग होता है. Exit Poll 2026 LIVE: भारत में एग्जिट पोल का प्रोसेस, जमीन पर क्या होता है? एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां जैसे एक्सिस माई इंडिया, सी-वोटर या CSDS-लोकनीति एक खास पैटर्न फॉलो करती हैं. यह प्रक्रिया कुछ स्टेप्स में पूरी होती है: निर्वाचन क्षेत्रों और पोलिंग बूथों का चुनाव: देश के हर बूथ पर जाकर सर्वे करना नामुमकिन है. इसलिए, एजेंसियां एक ‘रिप्रेजेंटेटिव सैंपल’ चुनती हैं. इसमें इलाके के पुराने वोटिंग पैटर्न, जातिगत समीकरण और डेमोग्राफिक फैलाव को ध्यान में रखा जाता है. ग्राउंड फील्ड सर्वे: वोटिंग के दिन सर्वे करने

झारखंड

पलामू में बुजुर्ग की गोली मारकर हत्या:घर से बुलाकर ले गए थे...

पलामू जिले के पिपराटांड़ थाना क्षेत्र के करमा गांव में एक 60 वर्षीय वृद्ध की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान राजमुनि पाठक के रूप में हुई है। बुधवार सुबह उनका खून से लथपथ शव घर से कुछ दूरी पर खेत में बरामद हुआ। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8:30 बजे दो अज्ञात लोग राजमुनि पाठक के घर पहुंचे। उन्होंने पाठक को घर से बाहर बुलाया और अपने साथ ले गए। घर से कुछ दूर आगे ले जाकर आरोपियों ने उनके सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय घर में केवल राजमुनि पाठक की पत्नी मौजूद थीं। शुरुआत में उन्हें लगा कि पहचान वाले लोग राजमुनि को ले गए हैं और वे बातचीत के बाद लौट आएंगे। जब राजमुनि रात भर नहीं लौटे, तो बुधवार सुबह उनकी पत्नी ने खेत में शव देखकर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पिपराटांड़ थाना प्रभारी निलेश कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू की। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस सभी बिंदुओं पर अनुसंधान कर रही है। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि राजमुनि पाठक का किसी के साथ जमीन विवाद चल रहा था। पुलिस इस जमीन विवाद के पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौके पर जमा हो गए थे। Source link

झारखंड

घर के पीछे खाली पड़ी जमीन को बना दिया, ‘न्यूट्रीशन गार्डन’, अब...

Last Updated:April 29, 2026, 16:28 IST Jamshedpur News: जमशेदपुर के पास हालुदबानी गांव में महिलाओं ने अपने घर के पीछे पड़े खाली एरिया का ऐसा इस्तेमाल किया है कि अब पूरा घर जैविक तरीके से उगी शुद्ध सब्जियां खा रहा है. इस काम में एक संस्था ने उनकी मदद की और बैकयार्ड न्यूट्रीशन गार्डन बन गया. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड के गांवों की पहचान अब सिर्फ सादगी और परंपरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यहां की महिलाएं अब अपने हुनर और समझदारी से एक नई मिसाल कायम कर रही हैं. जमशेदपुर के पास स्थित हालुदबानी गांव इसका जीता-जागता उदाहरण बनकर उभरा है, जहां की महिलाएं आज शहर की महिलाओं से भी एक कदम आगे सोच रही हैं. घर के पीछे की जमीन का गजब इस्तेमालइस गांव में कुल 35 घर हैं और हर घर के पीछे थोड़ी-बहुत खाली जमीन मौजूद है. पहले ये जगह यूं ही खाली पड़ी रहती थी, लेकिन अब यही जमीन गांव की ताकत बन चुकी है. यहां की महिलाओं ने मिलकर इन खाली जगहों को ‘बैकयार्ड किचन न्यूट्रिशन गार्डन’ में बदल दिया है. इस पहल के पीछे TMILL संस्था का बड़ा योगदान है, जिसने गांव की महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई. परिवार का स्वास्थ्य हो रहा बेहतरअब हालुदबानी गांव के हर घर के पीछे एक छोटा-सा हरा-भरा बगीचा नजर आता है. इन गार्डन में भिंडी, बैंगन, मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, नेनुआ और बरबटी जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां उगाई जा रही हैं. खास बात यह है कि ये सब्जियां पूरी तरह से ताजा और जैविक हैं, जिससे परिवार का स्वास्थ्य भी बेहतर हो रहा है. गुजरने वाले, जरूर रुककर देखते हैंगांव की एक महिला, चंचल किस्कू, बताती हैं कि पहले उन्हें सब्जियों के लिए बाजार जाना पड़ता था, लेकिन अब उनके घर के पीछे ही सब कुछ उपलब्ध है. इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है. इतना ही नहीं, जब कभी राहगीर इस रास्ते से गुजरते हैं और इन हरे-भरे बगीचों को देखते हैं, तो रुककर तारीफ करते हैं. कई बार लोग सब्जियां मांगकर भी ले जाते हैं, जिसे महिलाएं खुशी-खुशी बांट देती हैं. यह पहल सिर्फ सब्जियां उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर और जागरूक बना रही है. अब उन्हें यह समझ आ गया है कि छोटी-सी जगह का सही उपयोग करके भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. छोटी जगह का बड़ा इस्तेमालहालुदबानी गांव आज एक प्रेरणा बन चुका है. यहां की महिलाएं यह संदेश दे रही हैं कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत सच्ची, तो किसी भी संसाधन का सही उपयोग कर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है. उन्होंने साबित कर दिया है कि गांव की महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने परिवार और समाज के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभा रही हैं. सच में, यह झारखंड का एक अनोखा गांव है, जहां हर घर के पीछे सिर्फ एक बगीचा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और उम्मीद की हरियाली खिल रही है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 16:26 IST Source link

व्यापार

पटना सोना चांदी रेट दिसंबर 2024: जानें आज के ताजा दाम और...

पटना : बिहार की राजधानी पटना में दिसंबर माह की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेजी का दौर जारी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और निवेशकों के सुरक्षित निवेश की ओर रुझान ने गोल्ड रेट को मजबूती दी है. 24 कैरेट सोना लगातार बढ़त के साथ नए उच्च स्तर की ओर बढ़ रहा है. कल के मुकाबले आज इसमें 600 रूपये की बढ़ोतरी देखने को मिली है. दूसरी ओर, नवंबर के आखिरी दिनों में चांदी में रिकॉर्डतोड़ उछाल देखने को मिला था, लेकिन पिछले दो दिनों से इसमें स्थिरता है. इंडस्ट्रियल डिमांड सामान्य रहने और निवेशकों की खरीद में थोड़ी नरमी आने से चांदी में उतार-चढ़ाव सीमित देखा जा रहा है. कुल मिलाकर, सोना मजबूती से ऊपर जा रहा है. जबकि चांदी स्थिर है, लेकिन कभी भी लंबी छलांग लगा सकती है. जानें आगे कैसे रहेंगी कीमतें पटना के ज्वेलर्स का मानना है कि दिसंबर की शुरुआत में बाजार में हल्की स्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन वैश्विक संकेतों के आधार पर कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं. साल के अंत में आम तौर पर सोने-चांदी की खरीद बढ़ती हैं. इससे स्थानीय बाजारों में भी तेजी की संभावना बनी रहती है. फिलहाल, तेजी को देखते हुए निवेशक सोच-समझकर खरीदारी करें. अगर कीमतें स्थिर होती हैं तो दिसंबर के मध्य में खरीदारी करना सही समय हो सकता है. जानें क्या है लेटेस्ट रेट आज पटना के ज्वेलरी बाजार में 24 कैरेट सोने का दाम 1,29,600 रूपये से बढ़कर 1,30,200 रूपये प्रति 10 ग्राम है. अगर जीएसटी जोड़ दिया जाए तो इसकी कीमत 1,34,106 रूपये प्रति 10 ग्राम हो जाती है. बिना जीएसटी जोड़े 22 कैरेट सोना 120,500 रूपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 98,400 रूपये प्रति 10 ग्राम बिक रहा है. चांदी के दाम में बनी स्थिरता पटना के ज्वेलरी बाजार में एक किलो चांदी की बिक्री 1,77,000 रूपये प्रति किलो है. इस तरह, एक किलो हॉल मार्क वाले चांदी के आभूषणों बिक्री 1,75,000 रूपये प्रति किलो हो रही है. अगर जीएसटी जोड़ दिया जाए, तो इसकी कीमत 1,80,250 रूपये हो जाती है. जानें आभूषणों का एक्सचेंज रेट 22 कैरेट वाले सोने के पुराने आभूषणों का एक्सचेंज रेट 117,500 रूपये है. जबकि 18 कैरेट सोने के पुराने आभूषण 95,400 रूपये में एक्सचेंज हो रहे हैं. वहीं, चांदी में हॉलमार्क आभूषणों का एक्सचेंज रेट 170 रूपये प्रति ग्राम है. जबकि बिना हॉलमार्क वाले आभूषणों का एक्सचेंज रेट 166 रूपये प्रति ग्राम है. Source link

शिक्षा

Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile

Hindi News Career Padmashri Raghu Rai Death | Bangladesh War Photographers Profile 2 दिन पहले कॉपी लिंक भारत के मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 26 अप्रैल को निधन हो गया। वे 83 साल के थे। रघु इंडियन फोटोग्राफी के जनक माने जाने वाले रघु राय अपनी तस्वीरों से कहानियां कहने के लिए मशहूर थे। देश- दुनिया की बड़ी घटनाएं आज भी उनकी तस्वीरों में जिंदा है। 1942 में भारत में जन्मे रघु राय बचपन से ही फोटोग्राफी के शौकीन थे। अक्सर पिता के कैमरे से फोटो लिया करते थे। 1964 में रघु ने उन्होंने पिता के कहने पर सिविल इंजीनियरिंग की। 1965 में फोटोग्राफी शुरू की और जल्द फोटोग्राफी की दुनिया में उनकी ख्याति ने उन्हें इस दुनिया का कल्ट फिगर बना दिया। पहली तस्वीर ‘लंदन टाइम्स’ में छपी रघु राय ने अपने कैमरे से जो पहली तस्वीर ली थी वो ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। उन्होंने एक बार अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने बड़ी मशक्कत से एक गधे की तस्वीर ली थी, जिसे उनके बड़े भाई एस पॉल ने विदेश के कुछ अखबारों के लिए भेज दिया था और उनकी वो तस्वीर सिलेक्ट भी हुई और उसे ‘लंदन टाइम्स’ में आधे पन्ने पर छपी थी। इसके लिए उन्हें मौटी रकम भी मिली थी। मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा के करीब रहे रघु राय काम के सिलिसिले में मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा जैसी बड़ी हस्तियों के करीब रहे। सभी हस्तियों की ज्यादातर क्लोज अप तस्वीरें उन्होंने ली, जो आज तक भी सबसे चर्चित हैं। उनकी तस्वीरों में वे इन हस्तियों के इमोशन को बखूबी कैप्चर करते थे। मदर टेरेसा को रघु राय मां मानते थे। उनके साथ उनका ये रिश्ता लगभग पचास सालों तक रहा। 1967 से लेकर 1984 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या तक रघु राय ने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को कवर किया। दलाई लामा पर उन्होंने किताब लिखी- ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, जिसमें उन्होंने करीब 4 दशक तक की उनकी तस्वीरों को शामिल किया। दलाई लामा के 80वें जन्मदिन पर ली गई तस्वीर। गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर खींची ‘बरियल ऑफ एन अननोन चाइल्ड’ 2 दिसंबर 1984 को भोपाल में हुई गैस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर है। इसी तस्वीर से दुनिया ने इस त्रासदी के दर्द को पहचाना था। ये तस्वीर भी रघु राय ने ली थी, जो आज भी गैस त्रासदी का डॉक्यूमेंट है। 1984 में गैस त्रासदी में मरे बच्चे को दफनाते हुए ली गई फोटो। 1984 में गैस त्रासदी में एबोर्टेड फीटस। 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड प्लांट से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) के रिसाव से लगभग 3,500 लोगों की तुरंत मौत हो गई थी। बाद के सालों में इससे पीड़ित करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई। इस त्रासदी की तस्वीरें मैग्नम और कई वर्ल्ड मैगजीन्स में छपी। जिनसे दुनिया को इस त्रासद घटना की जानकारी मिली। त्रासदी में गैस लीक से अंधे हुए लोगों की तस्वीर। बांग्लादेश युद्ध को तस्वीरों में दर्ज किया, पद्मश्री मिला 1971 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान भारत आए शरणार्थियों की तस्वीरें ली। उन तस्वीरों में उन्होंने उनकी चिंताएं, बेचैनी और बेबसी कैद की, जो आज भी उस युद्ध के दहशत की याद दिलाती है। रघु ने इस युद्ध और 1971 में पाकिस्तानी आर्मी के सरेंडर को भी दर्ज किया है। 1971 बांग्लादेश युद्ध के दौरान आए शरणार्थियों में से एक बच्चा। 1971 में युद्ध के दौरान भारत में शरण लेने आए लोगों ने डिस्कार्डेड ह्यूम पाइप्स को अपना घर बनाया था। इस दौरान ली गई बेहतरीन तस्वीरों के लिए 1972 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 1960 के दशक से स्ट्रीट फोटोग्राफी में दिलचस्पी रघु राय ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा जैसी बड़ी हस्तियों की जिंदगी को तो तस्वीरों में कैद किया, लेकिन अपने समय की आम जिंदगी को असली रूप में कैप्चर करना उन्हें बेहद पसंद था। वे बनावटी या सजावटी फोटो खींचने में दिलचस्पी नहीं रखते थे। यही कारण है कि सिनेमा की दुनिया ने उन्हें कभी प्रभावित नहीं किया। उन्होंने भारतीय जन जीवन की हजारों तस्वीरें ली। अपनी तस्वीरों में उन्होंने भारतीय संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद खूबसूरती से कैद किया है। आजाद भारत के ‘विजुअल रिकॉर्ड’ कहे गए आजादी के बाद का भारत रघु की तस्वीरों में नजर आता है। उनकी तस्वीरें आजादी के बाद के बनते-बिगड़ते, उठते-गिरते-संभलते भारत की जीवंत दास्तान बताती हैं। इसलिए रघु राय को आजाद भारत का ‘विजुअल रिकॉर्ड’ यानी फोटो कथाकार भी कहा जाता है। 1964 में पुरानी दिल्ली का चावड़ी बाजार। 1970 में पुरानी दिल्ली में ली गई तस्वीर। ये लगभग बराबर उम्र के दो लोगों की बिलकुल अलग स्थितियों को दिखाती है। 1966 में हरियाणा में एक महिला। 1995 में मुबंई के चर्च गेट स्टेशन पर ली गई तस्वीर। ‘मैग्नम फोटोज’ के लिए नॉमिनेट हुए मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रेसन रघु के मेंटर थे। हेनरी, रघु के पेरिस में गैलरी डेलपायर एग्जिबिशन से काफी प्रभावित हुए। इसके बाद हेनरी ने 1977 में मैग्नम फोटोज के लिए नॉमिनेट किया। मैग्नम वर्ल्ड्स प्रेस्टीजियस इंटरनेशनल फोटोग्राफर्स को-ऑपरेटिव ऑर्गेनाइजेशन है। इसमें दुनियाभर के टॉप फोटोग्राफर्स ही शामिल हो सकते हैं। 1967 में दिल्ली में एक कांग्रेस बैठक में इंदिरा गांधी की एक सशक्त तस्वीर। सोशल स्ट्रक्चर को चैलेंज करती ऐसी कई तस्वीरें उन्होंने ली। 2017 में बेटी अवनी राय ने रघु राय: एन अनफ्रेम्ड डॉक्यूमेंट्री बनाई। इसे बॉलीवुड डायरेक्टर अनुराग बासु ने प्रोड्यूस की थी। रघु फोटोग्राफर नहीं होते तो माली होते रघु राय को फूल-पौधे बहुत पसंद थे। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मुझे फोटोग्राफर से जितना प्यार है, उतना ही लगाव मुझे बागवानी से है। अगर मैं फोटोग्राफर नहीं होता तो पक्का माली होता।’ वे अक्सर अपना छुट्टी का दिन अपने फार्म हाउस पर फूल-पौधों की देखभाल करते बिताते थे। उनकी छुट्टियां अक्सर ऐसी ही बीतती थी। उन्हें प्रकृति से इतना प्यार था कि दुनिया भर से फूल-पौधे इकट्ठा किया करते थे। 57 किताबें लिखी, वर्ल्ड कॉन्टेस्ट जज किया रघु राय ने करीब 57 किताबें लिखी हैं। ‘रघु राय की दिल्ली’, ‘सिख’, ‘कोलकाता’, ‘खजुराहो’, ‘ताजमहल’, ‘अ गॉड इन एग्जाइल’, ‘भारत’ और ‘मदर टेरेसा’ किताबें काफी चर्चित हैं।

झारखंड

कॉपर वायर लूटकांड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार:गिरिडीह में 15 लाख से...

गिरिडीह जिले के निनियांघाट थाना क्षेत्र में हुए 15 लाख रुपए से अधिक के कॉपर वायर लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके पास से लूटे गए तार, घटना में प्रयुक्त वाहन, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। यह घटना 26/27 अप्रैल 2026 की रात डीबीसी निनियांघाट सब स्टेशन के पीछे एक खेत में हुई थी। यहां 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए रेलवे के माध्यम से केबल बिछाने का काम चल रहा था। मौके पर कनेक्शन लाइन के लिए भारी मात्रा में कॉपर वायर रखा हुआ था। अपराधियों ने वहां मौजूद गार्ड अनिल कुमार महतो और रंजीत ठाकुर को डरा-धमकाकर बंधक बना लिया और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद, उन्होंने लगभग 193 मीटर कॉपर वायर काट लिया, जिसकी अनुमानित कीमत 15 लाख 58 हजार 316 रुपए है। गार्डों से उनके मोबाइल फोन और करीब 5 हजार रुपए नकद भी छीन लिए गए। घटना के बाद निनियाँघाट थाना में कांड संख्या 41/26 के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुमित कुमार डुमरी और पुलिस निरीक्षक डुमरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। धनबाद निवासी तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने इस मामले में धनबाद निवासी तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान कल्लू कुमार उर्फ कल्लू पासी (23), राजू भुईयां उर्फ कारू भुईयां (25) और नरेश भुईयां उर्फ बिट्टवल भुईयां उर्फ कुटुम्ब (32) के रूप में हुई है। गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर पुलिस ने 267 किलोग्राम कॉपर तार, 39 किलोग्राम केबल का काला कवर, घटना में प्रयुक्त पिकअप, दो मोबाइल फोन, 38 हजार रुपए नकद, हेक्सा आरी और ब्लेड बरामद किए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सभी अपराधियों का आपराधिक इतिहास रहा है। कल्लू पासी वर्ष 2019 में, राजू भुईयां वर्ष 2016 में और नरेश भुईयां वर्ष 2023 में धनबाद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में जेल जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस इनके अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई में डुमरी अंचल के राजेंद्र प्रसाद महतो, थाना प्रभारी सुमन कुमार सहित निमियाँघाट थाना, डुमरी थाना और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मी शामिल रहे। Source link

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125 साल से दिल ठंडा कर रही राठी रबड़ी, आहोर की देसी...

X 125 साल से दिल ठंडा करती राठी रबड़ी, आहोर की देसी मिठास, देखें वीडियो   125 Year Old Rathi Rabri Of Jalore : राजस्थान की तपती गर्मी में जहां लोग ठंडक के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढते हैं, वहीं जालौर जिले के आहोर की एक खास देसी मिठाई लोगों को सुकून दे रही है. यह कोई आम मिठाई नहीं, बल्कि करीब 125 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी राठी रबड़ी है, जो अपने अनोखे स्वाद और ठंडक देने वाले गुणों के कारण आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. राजकीय अस्पताल के सामने स्थित राठी मिष्ठान भंडार पर तैयार होने वाली यह रबड़ी शुद्ध गाय के दूध से बनाई जाती है और इसमें बेहद कम शक्कर डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद हल्का, प्राकृतिक और अलग महसूस होता है. गर्मी के दिनों में इस रबड़ी की मांग इतनी बढ़ जाती है कि कई बार लोगों को पहले से ऑर्डर देना पड़ता है. रोजाना 10 से 12 किलो तक बनने वाली यह रबड़ी शादी-समारोहों और खास मौकों पर भी खूब पसंद की जाती है. खास बात यह है कि आम लोगों के साथ-साथ कई बड़े नेता और वीआईपी भी इसके स्वाद के दीवाने रह चुके हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी पुराने तरीके से निभाई जा रही है, जो इसे और खास बनाती है. Source link

झारखंड

मां ने बेटियों को बचाया, खुद डैम में डूबी:कोडरमा के असराइन डैम...

कोडरमा जिले के सतगावां में असराइन डैम में बुधवार को एक महिला की डूबने से मौत हो गई। महिला अपनी दो बेटियों को बचाने के प्रयास में गहरे पानी में समा गई। यह घटना माधोपुर पंचायत के असराइन डैम में हुई। लेम्बो निवासी सरिता देवी (35) अपनी दो मासूम बेटियों के साथ डैम में कपड़े धोने गई थीं। कपड़े धोते समय अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी की ओर बहने लगीं। मां को डूबता देख दोनों बेटियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, पानी का बहाव और गहराई अधिक होने के कारण सरिता ने महसूस किया कि उनकी बेटियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर दोनों बच्चियों को सुरक्षित किनारे की ओर धकेल दिया। बेटियां तो बच गईं, लेकिन सरिता खुद को नहीं बचा सकीं और गहरे पानी में डूब गईं। बच्चियों ने भागकर गांव वालों को सूचना दी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद सरिता का शव पानी से बाहर निकाला। सतगावां थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल कोडरमा भेज दिया। ग्रामीणों के अनुसार, सरिता देवी का मायका बजानियां और ससुराल धर्मपुर में है। वह फिलहाल लेम्बो में आवास योजना के तहत बने अपने नए घर में रह रही थीं। सरिता अपने पीछे पांच बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। इस घटना के बाद पूरे माधोपुर पंचायत में शोक का माहौल है। असराइन डैम, जिसका उपयोग ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते हैं, अब इस दुखद हादसे का गवाह बन गया है। Source link

झारखंड

Jamshedpur की अर्पिता ने बनाई बच्चों के लिए नई राह, किताबों से...

Last Updated:April 29, 2026, 16:41 IST जमशेदपुर की जरूरतमंद बच्चों के लिए एक खास पहल कर रही हैं. उन्होंने एक छोटी लाइब्रेरी शुरू की है, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सीख भी दी जाती है. हर दिन शाम 5 से 8 बजे तक आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे यहां आते हैं. इस लाइब्रेरी की खास बात यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उनके हुनर को भी निखारा जाता है. जमशेदपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उनके पास अपने अलावा किसी और के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है. हर व्यक्ति अपने काम, मोबाइल और जिम्मेदारियों में उलझा रहता है. ऐसे समय में जमशेदपुर की अर्पिता एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं, जिन्होंने अपना समय जरूरतमंद बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है. अर्पिता पिछले कई वर्षों से इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) से जुड़ी हुई हैं. उनकी सोच सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. उनका मानना है कि जीवन में केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समझ भी उतनी ही जरूरी है. इसी विचार के साथ उन्होंने एक छोटी सी लाइब्रेरी की शुरुआत की, जो आज कई बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है. हर दिन शाम 5 बजे से 8 बजे तक अर्पिता अपनी लाइब्रेरी में आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बुलाती हैं. ये बच्चे मुख्य रूप से स्टाफ क्वार्टर और आउटहाउस में रहने वाले परिवारों से आते हैं. स्कूल और ट्यूशन के बाद वे यहां पहुंचते हैं, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पसंद की गतिविधियों में भाग लेने की पूरी आजादी मिलती है. इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया ही नहीं जाता, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को भी निखारा जाता है. कोई बच्चा गिटार बजाना सीख रहा है, तो कोई तबला और हारमोनियम में रुचि ले रहा है. कुछ बच्चे फेस पेंटिंग करते हैं, तो कुछ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति करना सीख रहे हैं. वहीं, कुछ बच्चे गजल गाने और उर्दू सीखने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यहां हर बच्चे को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है. अर्पिता बच्चों को समाज और इतिहास से जोड़ने का भी प्रयास करती हैं. अंबेडकर जयंती और अन्य महान व्यक्तित्वों की जयंती जैसे खास अवसरों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को देश के महान कलाकारों, लेखकों और समाजसेवियों के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक बनता है. वर्तमान में इस लाइब्रेरी में करीब 20 से 25 बच्चे नियमित रूप से आते हैं. यहां आकर वे न सिर्फ नई चीजें सीख रहे हैं, बल्कि अपने सपनों को भी साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अर्पिता का यह छोटा सा प्रयास इन बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है. वास्तव में, जहां एक ओर लोग अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं अर्पिता जैसे लोग समाज के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं. उनका यह कार्य सराहनीय है. साथ ही, यह भी दर्शाता है कि यदि इच्छा हो, तो हम भी किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 16:41 IST Source link

व्यापार

नौकरी से थक गए? सिर्फ 50,000 में बनाएं अपना खुद का कारोबार,...

Last Updated:December 22, 2025, 16:43 IST अगर हर महीने की नौकरी, बढ़ता खर्च और सीमित आमदनी आपको परेशान कर रही है और मन में सवाल है कि क्यों न अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया जाए, तो यह खबर आपके लिए है. आज के दौर में सही सोच और सही प्लानिंग के साथ आप मात्र 50,000 में भी अपना मजबूत कारोबार खड़ा कर सकते हैं और कम निवेश में बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. आइए जानते है इसके बारे में.. अगर आप कम लागत में अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं और अच्छा मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो क्लाउड किचन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. इस बिज़नेस को आप सिर्फ 50 हजार में अपने घर की रसोई से शुरू कर सकते हैं. किराए की दुकान की जरूरत नहीं होती और ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स के साथ लोकल ऑर्डर से भी रोज़ की कमाई संभव है. स्वाद और सफाई का ध्यान रखकर महीने में लाखों रुपये तक का टर्नओवर बनाया जा सकता है. अगर आप कम पूंजी में खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो मशरूम फार्मिंग आपके लिए एक सही विकल्प है. इसे आप सिर्फ 40–50 हजार में किसी कमरे या शेड में शुरू कर सकते हैं. मशरूम 15–20 दिन में तैयार हो जाता है और होटल, सब्ज़ी मंडी और दुकानों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सही देखभाल और नियमित सप्लाई के साथ यह बिज़नेस कुछ ही महीनों में लाखों की कमाई देने लगता है. अगर आप कम जगह और कम लागत में खेती से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग एक आधुनिक और लाभकारी बिज़नेस है. इसे आप सिर्फ 30–50 हजार में घर की छत या कमरे से शुरू कर सकते हैं. माइक्रोग्रीन्स 7–10 दिन में तैयार हो जाते हैं और होटल, जिम और हेल्थ किचन में ऊंचे दामों पर बिकते हैं. तेजी से बढ़ती हेल्थ डिमांड इसे लाखों कमाने वाला भविष्य का बिज़नेस बनाती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आप कम पैसों में तेज़ मुनाफा कमाने वाला बिज़नेस ढूंढ रहे हैं, तो जूस और हेल्थ ड्रिंक स्टॉल एक शानदार विकल्प है. सिर्फ 50 हजार में ठेला, मशीन और कच्चा माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. गर्मी हो या सर्दी, हेल्दी ड्रिंक्स की मांग हमेशा बनी रहती है. रोज़ की नकद बिक्री और 50% से ज्यादा मुनाफा इसे आम लोगों के लिए फायदेमंद बिज़नेस बनाता है. अगर आप कम लागत में अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं और अच्छा मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो मोबाइल रिपेयरिंग एक बेहतरीन विकल्प है. आज हर व्यक्ति मोबाइल इस्तेमाल करता है और खराबी आना आम बात है. सिर्फ 40–50 हजार में टूल्स लेकर और कुछ दिनों की ट्रेनिंग से यह काम छोटी दुकान या घर से शुरू किया जा सकता है. मोबाइल रिपेयर के साथ कवर, चार्जर और एक्सेसरीज़ बेचकर कमाई और बढ़ाई जा सकती है. सही स्किल के साथ यह बिज़नेस लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : December 22, 2025, 16:43 IST Source link

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