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Bharatpur Man Desi Jugaad AC Cooler : भरतपुर में एक किसान द्वारा तैयार किया गया देसी और प्राकृतिक घर इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. घास-फूस, मिट्टी, बांस, लकड़ी और गाय के गोबर से बने इस घर की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक ठंडक है. भीषण गर्मी के मौसम में भी घर के अंदर का वातावरण सामान्य और आरामदायक बना रहता है, जबकि इसके लिए किसी AC या कूलर की जरूरत नहीं पड़ती. घर के मालिक कमल ने इसे पारंपरिक राजस्थानी निर्माण शैली को जीवित रखने के उद्देश्य से अपने खेतों के बीच बनाया है. नियमित गोबर लिपाई और प्राकृतिक सामग्री के उपयोग से यह घर पर्यावरण के अनुकूल भी है. आसपास के लोग और पर्यटक इस घर को देखने पहुंच रहे हैं और इसकी ठंडक का अनुभव कर रहे हैं. आधुनिक कंक्रीट के घरों के बीच यह अनोखा प्रयोग लोगों को प्रकृति के करीब रहने, कम लागत में बेहतर आवास बनाने और पारंपरिक ज्ञान की उपयोगिता को समझने का संदेश दे रहा है.
भरतपुर. भरतपुर के कमल ने पारंपरिक और प्राकृतिक तकनीकों का उपयोग करते हुए ऐसा घर तैयार किया है, जो इन दिनों खासकर गर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है. आधुनिक कंक्रीट के घरों के बीच यह देसी शैली का घर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इस घर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किया गया है, जिससे अंदर का तापमान स्वाभाविक रूप से ठंडा बना रहता है.
आज जब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर और कूलर पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं कमल का यह घर बिना किसी आधुनिक उपकरण के ठंडक का अहसास कराता है. प्राकृतिक सामग्री से तैयार यह घर न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पारंपरिक निर्माण शैली की उपयोगिता को भी सामने लाता है. यही वजह है कि यह घर आसपास के लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.
देसी तकनीक से तैयार हुआ अनोखा घर
इस अनोखे घर की दीवारें घास-फूस और मिट्टी से बनाई गई हैं, जबकि पूरे घर को नियमित रूप से गाय के गोबर से लीपा जाता है. ग्रामीण परंपरा में गोबर से लिपाई को केवल स्वच्छता का प्रतीक ही नहीं माना जाता, बल्कि यह तापमान संतुलित रखने में भी काफी प्रभावी मानी जाती है. यही कारण है कि भीषण गर्मी के बावजूद घर के अंदर ठंडक और सुकून का माहौल बना रहता है. घर का निर्माण बांस और लकड़ी की मदद से किया गया है, जिससे यह पूरी तरह इको-फ्रेंडली बन गया है. इस तरह की निर्माण शैली न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि कम लागत में भी तैयार हो जाती है. यही वजह है कि यह घर आधुनिक निर्माण तकनीकों के मुकाबले अधिक प्राकृतिक और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जा रहा है.
पारंपरिक संस्कृति को जीवित रखने की पहल
कमल ने यह घर अपने खेतों के बीच तैयार किया है, जहां शहर की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर शुद्ध वातावरण मिलता है. उनका कहना है कि उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति और देसी तकनीक को जीवित रखने के उद्देश्य से यह घर बनाया है. उनका मानना है कि पुराने समय की निर्माण शैली आज भी उतनी ही कारगर है, जितनी पहले हुआ करती थी. यही कारण है कि उनका यह प्रयोग धीरे-धीरे लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है. आसपास के लोग इस घर को देखने पहुंच रहे हैं और इसकी बनावट के साथ-साथ प्राकृतिक ठंडक को भी महसूस कर रहे हैं. यह घर केवल गर्मियों में राहत देने का माध्यम नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब रहने और पारंपरिक जीवनशैली को अपनाने का संदेश भी दे रहा है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें