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Solar Village In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले का एक छोटा सा गांव लछुआ आज पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन चुका है. इस गांव की करीब 75 फीसदी आबादी ने पारंपरिक बिजली को अलविदा कहकर सौर ऊर्जा (Solar Energy) को अपना लिया है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि गांव के कई घरों का मासिक बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य हो गया है. सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के बेहतर तालमेल से गांव में यह हरित क्रांति आई है. अब पंचायत का लक्ष्य गांव के हर एक घर को सोलर कनेक्शन से जोड़कर इसे शत-प्रतिशत आत्मनिर्भर बनाने का है.

सीतामढ़ी: जिले का महुआबा पंचायत के अंतर्गत आने वाला लछुआ गांव आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता और नवीकरणीय ऊर्जा की एक नई मिसाल पेश कर रहा है. विकास की इस दौड़ में लछुआ गांव ने पारंपरिक बिजली ग्रिड पर अपनी निर्भरता को बेहद कम कर दिया है. आज इस गांव की लगभग 75 प्रतिशत आबादी अपनी रोजमर्रा की बिजली जरूरतों के लिए पूरी तरह से सोलर सिस्टम (सौर ऊर्जा) का इस्तेमाल कर रही है. गांव के अधिकांश घरों की छतों पर चमकते सोलर पैनल इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण अब पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ ऊर्जा को अपना रहे हैं. यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी बड़ा सुधार ला रहा है.

बिजली बिल से मिली बड़ी राहत, जेब का बोझ हुआ कम
इस बेहतरीन और आधुनिक बदलाव का सबसे सीधा और सकारात्मक असर ग्रामीणों की जेब पर देखने को मिल रहा है. सोलर पैनल अपनाने के बाद यहां के अधिकांश घरों का मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 100 से 150 रुपये तक सिमट गया है. स्थानीय ग्रामीण कृष्णनंदन कुमार और राम इकबाल महतो बताते हैं कि पहले बिजली कटने की बड़ी समस्या थी, लेकिन अब सोलर की वजह से 24 घंटे लाइट रहती है. ग्रामीण बताते हैं कि बिजली बिल अब नाममात्र का आता है. कई गरीब व बीपीएल (BPL) परिवारों का बिल तो अब बिल्कुल शून्य (0) आने लगा है. सौर ऊर्जा से मिल रही इस बड़ी वित्तीय राहत के कारण पूरा गांव बेहद खुश और उत्साहित है.

स्थानीय प्रशासन की पहल और सरकारी योजनाओं का मिला साथ
लछुआ गांव को ‘सोलर विलेज’ बनाने में स्थानीय मुखिया संजीव भूषण और पंचायत प्रशासन की भूमिका बेहद सराहनीय रही है. मुखिया के सहयोग से पंचायत के करीब 70 प्रतिशत घरों में सोलर प्लेट्स लगाई जा चुकी हैं. इसके अलावा गांव की सुरक्षा और रोशनी के लिए 17 प्रमुख सार्वजनिक जगहों पर 150 से अधिक सोलर लाइटें और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. महुअवा पंचायत के मुखिया संजीव भूषण ने बताया कि वर्तमान में ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत लगभग 95 नए आवेदन स्वीकृत हैं. स्कूल की इमारतों पर भी सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों को दी जा रही सब्सिडी इस मुहिम को और तेज कर रही है.

भविष्य का लक्ष्य और आत्मनिर्भरता की नई ‘सौर क्रांति’
लछुआ गांव में शुरू हुई यह सौर क्रांति अब थमने वाली नहीं है, बल्कि इसका दायरा और तेजी से बढ़ने वाला है. गांव के लोग अब सोलर पावर का इस्तेमाल न केवल रोशनी के लिए, बल्कि इंडक्शन चूल्हों पर खाना पकाने के लिए भी कर रहे हैं. पंचायत प्रशासन का आगामी लक्ष्य गांव के शत-प्रतिशत घरों को इस योजना से जोड़ना है, जिसके तहत आने वाले समय में 85% के लक्ष्य को पूरा करते हुए लगभग 700 घरों में सीधे सोलर बिजली का उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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