रांची18 घंटे पहले
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बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) की रांची स्थित क्लबसाइड शाखा (पूर्व में मिड कॉरपोरेट शाखा) से 19.30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा कोलकाता ने बैंक की शिकायत पर नटराज राइस मिल्स, उसके पूर्व निदेशकों, कॉर्पोरेट गारंटर कंपनियों और अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एफआईआर के मुताबिक कोलकाता में रजिस्टर्ड और बिहार के लखीसराय के डकरा में राइस मिल चलाने वाली नटराज राइस मिल्स ने वर्ष 2013 से 2025 के बीच 20.43 करोड़ का लोन लिया था। इनमें 17 करोड़ कैश क्रेडिट और 3.43 करोड़ रुपए वर्किंग कैपिटल टर्म लोन था। कंपनी का काम धान खरीदकर चावल तैयार करना और थोक विक्रेताओं तक पहुंचाना था। लेकिन कंपनी ने लोन के पैसों को दूसरी कंपनियों और सहयोगियों के खाते में डायवर्ट कर दिया। लोन न चुकाने पर 24 जून 2025 को यह खाता 19.30 करोड़ बकाए के साथ एनपीए घोषित हो गया।
एफआईआर में इन्हें बनाया आरोपी
1. नटराज राइस मिल्स प्रा. लि., डायमंड आर्केड, जेसोर रोड कोलकाता
2. विवेक कुमार बांका, पूर्व निदेशक, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल
3. नीलू बांका, पूर्व निदेशक, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल
4. नीरज कुमार बांका, पूर्व निदेशक, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल
5.संदीप कुमार गोयल, पूर्व निदेशक, हरिओम टावर, रांची
6. रितेश कुमार बिंजराजमका, पूर्व निदेशक, एस्टेट एस्क्वायर, दीपाटोली रांची
7. डिलाइट इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट्स प्रा. लि., कोलकाता
8. लक्ष्मी डीलमार्क प्रा. लि., कोलकाता
9. तिरुपति स्टॉक कंसल्टेंट्स प्रा. लि., कोलकाता
10. अज्ञात लोक सेवक व अन्य अज्ञात
फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आईं ये गड़बड़ियां
फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि 8 नवंबर 2016 को कंपनी के पास 1.09 करोड़ रुपए का कैश बैलेंस था, जिसमें से 1.01 करोड़ रुपए पुराने 500-1000 के नोट थे। पूरी रकम बैंक खातों में जमा कराकर अघोषित आय को सफेद करने की कोशिश की गई। मैन्युफैक्चरिंग कंपनी होने के बावजूद शॉर्ट-टर्म लोन और एडवांस 45 लाख (वित्त वर्ष 2017) से उछलकर वित्त वर्ष 2023 में 23.83 करोड़ रुपए तक पहुंच गए, जो कंपनी की कुल संपत्ति का 40% से अधिक था। यह रकम संबंधित पक्षों को अग्रिम के तौर पर दी गई। बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, भगवती विंट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के साथ करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन किए गए, जिन्हें वित्तीय बही-खातों में सही ढंग से दर्ज नहीं किया गया। कंपनी ने घाटा छिपाने के लिए अपने क्लोजिंग स्टॉक और देनदारियों को कई करोड़ रुपए तक बढ़ाकर दिखाया। मूल निदेशक विवेक कुमार बांका और नीलू बांका ने बैंक की बिना अनुमति या एनओसी के 20 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया।
