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Homemade Wind Turbine: झारखंड के बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड से ‘देसी जुगाड़’ का एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां के एक साधारण बिजली मिस्त्री श्यामलाल महतो ने भारी बिजली कटौती से परेशान होकर महज ₹2000 में एक छोटा विंड टरबाइन मॉडल तैयार कर दिया है. पुराने टीन की चादरों, वाटर पंप की मोटर और कबाड़ के ऑटो (टेंपो) गियर को जोड़कर बने इस टरबाइन से तेज हवा में एलईडी लाइटें जलती हैं और मोबाइल भी चार्ज होता है. जानिए इस कमाल के अविष्कार की पूरी इनसाइड स्टोरी.
बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में एक साधारण बिजली मिस्त्री ने अपनी मेहनत और देसी जुगाड़ से कमाल कर दिखाया है. चंदनक्यारी प्रखंड के सिमुलिया गांव के रहने वाले श्यामलाल महतो ने एक छोटा विंड टरबाइन (पवन चक्की) मॉडल तैयार किया है. जो इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. यह टरबाइन तेज हवा चलने पर बिजली पैदा करता है. जिससे न सिर्फ एलईडी लाइटें जलाई जा सकती हैं. बल्कि मोबाइल फोन भी आसानी से चार्ज हो जाता है.
यूट्यूब वीडियो देखकर आया आइडिया
एक खास बातचीत में श्यामलाल महतो ने बताया कि गांव में अक्सर होने वाली भारी बिजली कटौती से वे काफी परेशान रहते थे. इसी परेशानी से निजात पाने के लिए वे कोई उपाय सोच रहे थे कि एक दिन उन्होंने यूट्यूब पर बड़े आकार के विंड टरबाइन का एक वीडियो देखा. हालांकि, बाजार में उपलब्ध उन मॉडलों की कीमत बहुत अधिक थी. जो उनके बजट से बाहर थी. इसके बाद श्यामलाल ने खुद ही कम लागत में ऐसा मॉडल बनाने की ठानी और महज ₹2000 की लागत में पुराने कबाड़ के सामान से इस विंड टरबाइन का निर्माण कर दिया.
कबाड़ और ऑटो के पार्ट्स से बनाया टरबाइन
श्यामलाल ने इस आविष्कार में कमाल की इंजीनियरिंग का प्रदर्शन किया है. उन्होंने बताया कि इस टरबाइन के पंखे (ब्लेड) बनाने के लिए उन्होंने टीन की पुरानी चादरों का उपयोग किया है. बिजली बनाने के लिए कबाड़ से एक पुराना मोटर पंप लगाया गया है. जबकि हवा की गति को नियंत्रित करने वाले गियर सिस्टम के लिए उन्होंने ऑटो (टेंपो) के पुराने गियर का इस्तेमाल किया है. कबाड़ की दुकान और गैरेज से अलग-अलग हिस्सों को जुगाड़ कर उन्होंने एक ऐसा सिस्टम तैयार कर दिया. जो हवा की गति को सीधे बिजली में बदल देता है.
पहले बना चुके हैं देसी ट्रैक्टर
यह पहली बार नहीं है जब श्यामलाल ने अपनी प्रतिभा से लोगों को चौंकाया है. इससे पहले भी उन्होंने इसी तरह की देसी तकनीक और जुगाड़ का इस्तेमाल कर एक छोटा ट्रैक्टर बनाया था. जिसकी पूरे जिले में काफी सराहना हुई थी.
हर घर की छत पर हो अपनी पवन चक्की
श्यामलाल का अगला लक्ष्य इस विंड टरबाइन मॉडल को और अधिक हल्का, छोटा और किफायती बनाना है. वे चाहते हैं कि ग्रामीण इलाकों के लोग इसे आसानी से अपने घरों की छतों पर लगा सकें. ताकि वे तेज हवा से मुफ्त में बिजली बनाकर अपनी छोटी-मोटी जरूरतें पूरी कर सकें और उन्हें भारी-भरकम बिजली बिल से भी राहत मिल सके.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें