पेड़ का पहला आम न पहुंचे बेटियों को तो सारे फल हो...
Last Updated:May 02, 2026, 09:02 IST Jamshedpur News: जमशेदपुर के सोपोडेरा गांव में एक घर के आंगन में आम का पेड़ है जो आज से करीब ढ़ाई दशक पहले घर की मालकिन इंद्रावती देवी ने लगाया था. उन्होंने अपने गुजरने से पहले घर पर कहा कि इसके फल सबसे पहले उनकी बेटियों तक पहुंचने चाहिए उसके बाद ही कोई खाए. आज भी अगर इस परंपरा का पालन न हो तो आम में कीड़े लग जाते हैं. वहां के लोग इसे चमत्कार मानते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. जमशेदपुर से सटे सोपोडेरा गांव की यह कहानी सिर्फ एक पेड़ की नहीं, बल्कि एक मां के वचन, परंपरा और विश्वास की ऐसी मिसाल है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती है. गांव के चौबे निवास का आंगन अपने आप में एक अनोखी पहचान बना चुका है. यहां खड़ा एक आम का पेड़ पिछले 25 सालों से सिर्फ फल ही नहीं दे रहा, बल्कि एक भावनात्मक रिश्ता भी निभा रहा है. पहले बेटियों के घर पहुंचेंगेकहानी की शुरुआत होती है इंद्रावती देवी से, जिन्होंने करीब ढाई दशक पहले अपने हाथों से इस आम के पेड़ को लगाया था. उस समय उन्होंने एक बात कही थी – ‘इस पेड़ के फल पहले मेरी बेटियों के घर जरूर पहुंचेंगे, उसके बाद ही कोई इसे खाएगा.’ यह सिर्फ एक साधारण बात नहीं थी, बल्कि एक मां का अपनी बेटियों के प्रति स्नेह और जुड़ाव का प्रतीक था. इसके बाद ही कोई खाता है आमइंद्रावती देवी की तीन बेटियां हैं – एक बेंगलुरु में और दो जमशेदपुर में ही रहती हैं. परिवार के बेटे बबलू चौबे भी जमशेदपुर में ही रहते हैं. समय के साथ यह बात पूरे गांव में फैल गई और एक परंपरा बन गई. हर साल जब आम का मौसम आता है, तो सबसे पहले इस पेड़ के आम बेटियों के घर भेजे जाते हैं, उसके बाद ही कोई और उन्हें खाता है. बाहर से सुंदर, अंदर से कीड़ेगुड़िया पांडे बताती हैं कि उनकी मां के इस वचन को पूरा करना पूरे परिवार की जिम्मेदारी बन गई है. लेकिन एक बार ऐसा हुआ, जब किसी कारण से आम समय पर बेटियों के घर नहीं पहुंच पाया. उस साल गांव वालों ने एक अजीब बात देखी – पेड़ पर आम तो खूब लगे थे, देखने में भी बेहद सुंदर थे, लेकिन जैसे ही उन्हें काटा गया, उनमें कीड़े निकले. तब तक कोई नहीं खाता, इस पेड़ का आमयह घटना पूरे गांव के लिए चौंकाने वाली थी. लोगों ने इसे इंद्रावती देवी के वचन से जोड़कर देखा. तभी से इस परंपरा को और भी सख्ती से निभाया जाने लगा. परिवार की बहू प्रीति भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि अब गांव के लोग खुद पूछते हैं – ‘क्या बेटियों के घर आम पहुंचा है?’ जब तक इसका जवाब ‘हां’ नहीं होता, कोई भी उस पेड़ का फल नहीं खाता. मां का कहा वचन, पीढ़ियों तक जिंदागांव की संगीता कहती हैं कि यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक विश्वास है, जो आज भी जिंदा है. इस पेड़ के आम न सिर्फ मीठे होते हैं, बल्कि उनका अचार भी पूरे गांव में बेहद पसंद किया जाता है. सोपोडेरा गांव की यह अनोखी परंपरा हमें यह सिखाती है कि रिश्तों की मिठास सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उन्हें निभाने में होती है. एक मां का कहा हुआ वचन कैसे पीढ़ियों तक जिंदा रह सकता है, यह इस आम के पेड़ ने बखूबी साबित कर दिया है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link






