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हेलीकॉप्टर से दागे दो मिसाइल, भारत ने पहली बार दिखाया डबल अटैक...

नई दिल्ली/चांदीपुर: भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में एक नया और घातक अध्याय जुड़ गया है. ओडिशा के तट पर ‘नेवल एंटी-शिप मिसाइल – शॉर्ट रेंज’ (NASM-SR) का सफल ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) किया गया. यह परीक्षण इसलिए खास है क्योंकि पहली बार एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें एक साथ दागकर दुश्मन के जहाज को तबाह करने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया. यह मिसाइल मात्र एक हथियार नहीं, बल्कि स्वदेशी इंजीनियरिंग का नमूना है. इसमें वॉटरलाइन हिट क्षमता (Waterline Hit Capability) का सफल परीक्षण किया गया. इसका मतलब है कि यह मिसाइल दुश्मन के जहाज के उस हिस्से पर वार करती है जहाँ पानी और जहाज की बॉडी मिलती है. ऐसा करने से जहाज में तेजी से पानी भरता है और वह कुछ ही मिनटों में जलसमाधि ले लेता है. प्रमुख विशेषताएं और तकनीक· साल्वो लॉन्च की ताकत: एक साथ दो मिसाइलें दागने की क्षमता का मतलब है कि अगर दुश्मन का एक डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोक भी ले, तो दूसरी मिसाइल उसका काम तमाम कर देगी. · स्वदेशी ‘आंखें’ (Seeker): इसमें डीआरडीओ द्वारा विकसित उन्नत सीकर और फाइबर-ऑप्टिक जायरोस्कोप लगा है, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करता है. · प्रोपल्शन सिस्टम: मिसाइल में सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर और लॉन्ग-बर्न सस्टेनर का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हवा में स्थिरता और लंबी दूरी तक मार करने की शक्ति देता है. · टू-वे डेटा लिंक: इस तकनीक की मदद से मिसाइल दागने के बाद भी उसे निर्देश दिए जा सकते हैं या उसकी दिशा में बदलाव किया जा सकता है. · इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स: इसके नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिए आधुनिक एल्गोरिद्म का उपयोग किया गया है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी सुरक्षित रखता है. क्यों खास है यह उपलब्धि?रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक भारतीय नौसेना इस तरह की मिसाइलों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर थी. NASM-SR के आने से अब नौसेना के हेलीकॉप्टर (जैसे सी-किंग या ध्रुव) हवा से ही दुश्मन के युद्धपोतों को डुबोने में सक्षम होंगे. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी छलांग है क्योंकि इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने मिलकर बनाया है. सवाल-जवाब ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? साल्वो लॉन्च का अर्थ है एक साथ या बहुत कम अंतराल पर एक से अधिक मिसाइलें दागना. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बचाव करना लगभग असंभव हो जाता है. ‘वॉटरलाइन हिट क्षमता’ से दुश्मन को क्या नुकसान होता है? यह क्षमता मिसाइल को जहाज के उस हिस्से पर वार करने की अनुमति देती है जो पानी की सतह के ठीक पास होता है. इससे जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो जाता है, जिससे जहाज तुरंत डूबने लगता है. इस मिसाइल को विकसित करने में किन संस्थानों की भूमिका रही? मुख्य रूप से हैदराबाद की RCI लेबोरेटरी ने इसे विकसित किया है, जिसमें पुणे (HEMRL), चंडीगढ़ (TBRL) और चांदीपुर (ITR) जैसी डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं का सहयोग रहा. Source link

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3, 7, 4, 5, 0… ये IPL में प्‍लेयर्स का स्‍कोर कार्ड...

Last Updated:April 29, 2026, 20:51 IST Kerala Exit Poll Latest News: केरल एग्जिट पोल्स के मुताबिक, इस राज्य में बीजेपी को सिंगल डिजिट या बेहद सीमित सीटें मिलने का अनुमान है. पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी को केरल में 2 ही सीटें म‍िलने का अनुमान है. सभी अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े देखें तो तस्वीर लगभग एक जैसी ही बनती दिख रही है. केरल के एग्‍ज‍िट पोल में क्‍या है बीजेपी का हाल? नई द‍िल्‍ली. एग्‍ज‍िट पोल में पश्‍च‍िम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाती नजर आ रही है पर केरल में पार्टी की हालत अच्‍छी नहीं द‍िख रही है. पहली नजर में 3, 7, 4, 5, 0… जैसे आंकड़े आपको इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के किसी बल्लेबाज के स्कोरकार्ड जैसे लग सकते हैं लेकिन ये नंबर असल में एक राज्य के एग्जिट पोल में बीजेपी की संभावित सीटों का अनुमान हैं और तस्वीर पार्टी के लिए चौंकाने वाली है. केरल के पोल ऑफ पोल्‍स में बीजेपी गठबंधन को महज 2 सीटें दी गई हैं. एक्‍सेस माई इंड‍िया के सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों के बीच रखा गया है. JVC के अनुमान के मुताबिक बीजेपी गठबंधन को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं, जबकि P-MARQ ने 1 से 4 सीटों की रेंज बताई है. Matrize के हिसाब से भी बीजेपी गठबंधन को 3 से 5 सीटों के बीच सिमटी दिख रही है. केरल में क्‍या है बीजेपी के ल‍िए सबसे चौंकाने वाला नतीजासबसे चौंकाने वाला अनुमान Peoples Pulse का है जहां बीजेपी गठबंधन को 0 से 3 सीटों तक सीमित बताया गया है. यानी लगभग हर एजेंसी का सर्वे इस ओर इशारा कर रहा है कि इस चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रह सकता है. क्‍या है जानकारों का माननाराजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हुए तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका होगा. खासकर तब जब पार्टी ने इस राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाया था. हालांकि यह भी याद रखना होगा कि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते और कई बार असली नतीजे इन अनुमानों से बिल्कुल अलग निकल आते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 20:51 IST Source link

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Exit Poll 2026 Results LIVE | एग्जिट पोल पश्चिम बंगाल 2026 |...

Exit Poll Results LIVE Updates: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल नतीजे भी आज ही जारी किए जा रहे हैं. इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज 29 अप्रैल को वोट डाले गए. शाम 5 बजे तक राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाती है. चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार, शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर पाबंदी है. इसके बाद ही सर्वे एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर सकेंगी. Tamil Nadu Exit Poll 2026 लाइव: तमिलनाडु में गठबंधनों की जंग से बदला चुनावी समीकरण तमिलनाडु चुनाव 2026 में मुकाबला अब पूरी तरह गठबंधनों पर टिक गया है. डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन एम के स्टालिन के साथ मैदान में है. दूसरी तरफ एआईएडीएमके गठबंधन ई के पलानीस्वामी के नेतृत्व में चुनौती दे रहा है. इस बार विजय की तमिलगा वेत्री कषगम की एंट्री ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है. राज्यभर में त्रिकोणीय और बहुकोणीय टक्कर चुनावी तस्वीर बदल सकती है. तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026 लाइव: 10 हॉट सीटें जो तय करेंगी सत्ता की दिशा तमिलनाडु की कई हॉट सीटें ऐसी हैं जहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है. कोलाथुर में एम के स्टालिन की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो एडप्पाडी सीट ई के पलानीस्वामी के लिए अहम है. कोयंबटूर साउथ में शहरी वोटर बड़ा फैक्टर बन सकते हैं. मदुरै सेंट्रल और सलेम में सीधी टक्कर का माहौल है. तिरुचिरापल्ली वेस्ट को स्विंग सीट माना जा रहा है. चेन्नई सेंट्रल क्षेत्र शहरी रुझान दिखाएगा. बोडिनायकनूर, तिरुप्पुर और कन्याकुमारी में बहुकोणीय मुकाबला चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है. असम एग्जिट पोल LIVE: 75 सीटों के आसपास मजबूत बढ़त असम विधानसभा चुनाव का एग्जिट पोल: आंकड़ों के मुताबिक करीब 75 सीटों का आंकड़ा आरामदायक जीत की ओर इशारा करता है. यह स्थिति सरकार को स्थिरता देती है और भविष्य में उपचुनाव या दल बदल जैसे झटकों को संभालने की क्षमता बढ़ाती है. इससे शासन में निरंतरता और नीति लागू करने में तेजी देखने को मिल सकती है. असम एग्जिट पोल अपडेट LIVE: 64 सीट पार करते ही बहुमत तय, सरकार बनना लगभग तय असम विधानसभा में 64 सीट का आंकड़ा स्पष्ट बहुमत की सीमा माना जाता है. जो भी दल या गठबंधन इस आंकड़े को पार करेगा, वह बिना बाहरी समर्थन के सरकार बना सकेगा. साल 2021 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह आंकड़ा आसानी से पार किया था. एग्जिट पोल 2026 LIVE: क्या आपको एग्जिट पोल्स पर भरोसा करना चाहिए? एग्जिट पोल्स को अंतिम नतीजा नहीं, बल्कि एक ‘संकेत’ (Signal) के तौर पर देखना चाहिए. ये ट्रेंड समझने और हवा का रुख पहचानने के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन इन्हें 100% सटीक मान लेना सही नहीं है. असली तस्वीर तो 4 मई, 2026 को ही साफ होगी, जब ईवीएम (EVM) के पिटारे खुलेंगे. तब तक ये आंकड़े सिर्फ एक चर्चा और विश्लेषण का आधार मात्र हैं. Exit Poll 2026 Results LIVE: आखिर क्यों फेल हो जाते हैं बड़े-बड़े एग्जिट पोल्स? इतनी मेहनत और गणित के बावजूद एग्जिट पोल्स कई बार पूरी तरह गलत साबित होते हैं. इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं: साइलेंट वोटर: अगर कोई खास वर्ग अपनी पसंद छुपा ले, तो पूरा कैलकुलेशन बिगड़ जाता है. झूठे जवाब: कई बार वोटर दबाव में या डर के मारे गलत जानकारी दे देता है. सैंपल एरर: अगर सैंपल में हर वर्ग का सही प्रतिनिधित्व नहीं है, तो नतीजा गलत आएगा. टर्नआउट का अनुमान: सर्वे इस आधार पर होता है कि कितने लोग वोट देने आएंगे, लेकिन एक्चुअल टर्नआउट कम-ज्यादा होने पर गणित फेल हो जाता है. गठबंधन और लोकल फैक्टर: भारत जैसे विविधता वाले देश में गठबंधन और स्थानीय प्रत्याशियों का प्रभाव नेशनल लेवल के डेटा को मात दे देता है. Exit Poll Results 2026 LIVE: एजेंसियां अलग-अलग नतीजे क्यों दिखाती हैं? अक्सर देखा जाता है कि एक चैनल किसी पार्टी की जीत दिखा रहा है, तो दूसरा कड़े मुकाबले की बात करता है. इसके पीछे कई कारण हैं: सैंपलिंग में अंतर: कोई एजेंसी शहरी इलाकों पर ज्यादा फोकस करती है, तो कोई ग्रामीण बेल्ट पर. सवाल पूछने का तरीका: अगर सवाल पूछने का ढंग थोड़ा भी अलग हो, तो वोटर का जवाब बदल सकता है. नो-रिस्पॉन्स का इलाज: बहुत से लोग यह नहीं बताते कि उन्होंने किसे वोट दिया. एजेंसियां अपनी समझ के हिसाब से इन ‘साइलेंट वोटर्स’ का अनुमान लगाती हैं. वेटिंग फॉर्मूला: डेटा को एडजस्ट करने का हर एजेंसी का अपना सीक्रेट फॉर्मूला होता है. Exit Poll 2026 Results LIVE: डेटा की वेटिंग और वोटों से सीटों का पेचीदा गणित ग्राउंड से जो डेटा आता है, उसे वैसा का वैसा नहीं दिखाया जाता. इस ‘रॉ डेटा’ पर स्टैटिस्टिकल वेटिंग (Statistical Weighting) अप्लाई की जाती है. मान लीजिए किसी इलाके में महिलाओं ने कम जवाब दिए, तो उनके डेटा को आनुपातिक रूप से बढ़ा दिया जाता है ताकि बैलेंस बना रहे. सबसे कठिन काम है वोटों को सीटों में बदलना. भारत में ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ सिस्टम है. इसका मतलब है कि अगर किसी पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 1-2% भी ऊपर-नीचे होता है, तो सीटों की संख्या में भारी अंतर आ सकता है. यहीं पर अलग-अलग एजेंसियों के दावों में अंतर दिखने लगता है क्योंकि हर एजेंसी का कैलकुलेशन मॉडल अलग होता है. Exit Poll 2026 LIVE: भारत में एग्जिट पोल का प्रोसेस, जमीन पर क्या होता है? एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां जैसे एक्सिस माई इंडिया, सी-वोटर या CSDS-लोकनीति एक खास पैटर्न फॉलो करती हैं. यह प्रक्रिया कुछ स्टेप्स में पूरी होती है: निर्वाचन क्षेत्रों और पोलिंग बूथों का चुनाव: देश के हर बूथ पर जाकर सर्वे करना नामुमकिन है. इसलिए, एजेंसियां एक ‘रिप्रेजेंटेटिव सैंपल’ चुनती हैं. इसमें इलाके के पुराने वोटिंग पैटर्न, जातिगत समीकरण और डेमोग्राफिक फैलाव को ध्यान में रखा जाता है. ग्राउंड फील्ड सर्वे: वोटिंग के दिन सर्वे करने

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125 साल से दिल ठंडा कर रही राठी रबड़ी, आहोर की देसी...

X 125 साल से दिल ठंडा करती राठी रबड़ी, आहोर की देसी मिठास, देखें वीडियो   125 Year Old Rathi Rabri Of Jalore : राजस्थान की तपती गर्मी में जहां लोग ठंडक के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढते हैं, वहीं जालौर जिले के आहोर की एक खास देसी मिठाई लोगों को सुकून दे रही है. यह कोई आम मिठाई नहीं, बल्कि करीब 125 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी राठी रबड़ी है, जो अपने अनोखे स्वाद और ठंडक देने वाले गुणों के कारण आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. राजकीय अस्पताल के सामने स्थित राठी मिष्ठान भंडार पर तैयार होने वाली यह रबड़ी शुद्ध गाय के दूध से बनाई जाती है और इसमें बेहद कम शक्कर डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद हल्का, प्राकृतिक और अलग महसूस होता है. गर्मी के दिनों में इस रबड़ी की मांग इतनी बढ़ जाती है कि कई बार लोगों को पहले से ऑर्डर देना पड़ता है. रोजाना 10 से 12 किलो तक बनने वाली यह रबड़ी शादी-समारोहों और खास मौकों पर भी खूब पसंद की जाती है. खास बात यह है कि आम लोगों के साथ-साथ कई बड़े नेता और वीआईपी भी इसके स्वाद के दीवाने रह चुके हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी पुराने तरीके से निभाई जा रही है, जो इसे और खास बनाती है. Source link

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इस साल 6% रह जाएगी भारत की विकास दर! ईरान युद्ध के...

Last Updated:April 29, 2026, 16:18 IST GDP Growth Rate : भारत की अर्थव्‍यवस्‍था की विकास दर इस साल गिरकर 6 फीसदी के आसपास पहुंच सकती है. ग्‍लोबल परामर्श कंपनी ईवाई ने क्रूड की बढ़ती कीमतों के दबाव में यह अनुमान लगाया है. उसका कहना है कि भारत पर महंगे क्रूड का ज्‍यादा असर दिखेगा. भारत की विकास दर चालू वित्‍तवर्ष में 6 फीसदी के आसपास रहने वाली है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बावजूद अभी तक ज्‍यादातर एजेंसियां भारत की विकास दर 7 फीसदी या उससे ज्‍यादा रहने का ही अनुमान लगा रहीं थी. लेकिन, अब पहली बार ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी ईवाई ने विकास दर के 6 फीसदी के आसपास जाने का अनुमान लगाया है. एजेंसी का कहना है क‍ि भारत पर सबसे ज्‍यादा असर बस एक ही चीज का पड़ेगा, क्‍योंकि आज भी इसकी 85 फीसदी खपत बाहरी बाजार से आयात के जरिये पूरी की जाती है. ईवाई इंडिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें अधिक रहने से चालू वित्तवर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर करीब 6 फीसदी रह सकती है, जबकि खुदरा महंगाई बढ़कर 6 फीसदी तक पहुंच सकती है. महंगाई का यह आंकड़ा रिजर्व बैंक के दायरे से बाहर जा सकता है. ग्‍लोबल सलाहकार कंपनी ने कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था ईंधन के लिए आज भी ग्‍लोबल मार्केट पर निर्भर है, जो उसे सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचा रहा है. क्‍यों दिख रहा जीडीपी पर दबावग्‍लोबल परामर्श कंपनी ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि यदि भारतीय कच्चे तेल ‘बास्केट’ की औसत कीमत वित्तवर्ष 2026-27 में 120 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वास्तविक जीडीपी वृद्धि करीब 6 फीसदी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर भी करीब 6 फीसदी तक रह सकती है. उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे पर दबाव कम करने के लिए बढ़ी ऊर्जा कीमतों का असर अपेक्षाकृत अधिक हद तक उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा. नीतिगत हस्‍तक्षेप अब सीमित हो रहाईवाई की इकॉनमी वॉच रिपोर्ट के मुताबिक, नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, लेकिन हालात को देखते हुए रेपो दर में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों में तेजी से विविधीकरण पर विचार किया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि आने वाले समय में लोन फिर महंगा हो सकता है. श्रीवास्तव ने पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने की आशंका जताते हुए कहा कि इसका हल निकल जाने पर भी कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति के सामान्य होने में खासा समय लग सकता है. ऐसे में काफी गुंजाइश है कि इस साल भारतीय बास्‍केट का तेल 120 डॉलर के आसपास ही घूमता रहेगा. अभी क्‍या है मार्केट की हालतअमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) के अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2026 की पहली तिमाही के औसत 81 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर दूसरी तिमाही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, संकट की दिशा बदलने पर कीमतों में नरमी भी आ सकती है. हालांकि, भारत की विकास दर के अन्‍य अनुमान ज्‍यादा बेहतर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है जबकि एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक ने क्रमशः 6.9 फीसदी और 6.6 फीसदी का अनुमान जताया है. रिजर्व बैंक ने हाल में विकास दर 6.9 फीसदी और औसत महंगाई दर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 16:12 IST Source link

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Exit Poll Results LIVE: पांच राज्यों में किसका होगा राज्याभिषेक? एग्जिट पोल...

Exit Poll Results LIVE Updates: पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के एग्जिट पोल नतीजे भी आज ही जारी होंगे. इन पांचों राज्यों में वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज 29 अप्रैल को वोट डाले जा रहे हैं. दोपहर 1 बजे तक राज्य में 61 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई है, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाती है. चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है. चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार, शाम 6:30 बजे तक किसी भी तरह के एग्जिट पोल पर पाबंदी है. इसके बाद ही सर्वे एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर सकेंगी. Exit Poll Results LIVE: एग्जिट पोल ने लगाया था 2021 में तमिलनाडु में द्रमुक की वापसी का सही अंदाजा Exit Polls: तमिलनाडु के मामले में सर्वे एजेंसियां काफी हद तक सही साबित हुई थीं. सभी एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की थी कि एमके स्टालिन की द्रमुक (DMK) सत्ता में वापसी करेगी. द्रमुक और उसके गठबंधन ने 159 सीटें जीतीं, जबकि अन्नाद्रमुक को 75 सीटें मिलीं. ‘टीवी9-पोलस्ट्रेट’ और ‘शाइनिंग इंडिया’ के आंकड़े नतीजों के सबसे करीब रहे थे. हालांकि, ‘इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया’ ने द्रमुक को 190 के पार दिखा दिया था, जो जमीनी हकीकत से थोड़ा ज्यादा था. यहां पोलस्टर्स ने द्रमुक की सीटों को औसतन 7 नंबर से ओवरशूट किया था. Exit Poll West Bengal LIVE: 2021 का इतिहास, जब सर्वे करने वालों के पसीने छूट गए 2021 में बंगाल का चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था. उस समय किसी भी एग्जिट पोल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की इतनी बड़ी जीत का अंदाजा नहीं लगाया था. लगभग सभी पोलस्टर्स ने भाजपा की सीटों को बहुत ज्यादा बढ़ाकर दिखाया था. टीएमसी ने तब 215 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 पर सिमट गई थी. ‘टुडेज चाणक्य’ ने टीएमसी को 169 से 191 सीटें दी थीं, जो असलियत के थोड़ा करीब था. वहीं ‘जन की बात’ ने तो भाजपा की सरकार ही बना दी थी. औसतन, पोलस्टर्स ने टीएमसी की ताकत को 61 सीटों से कम आंका था. एग्जिट पोल रिजल्ट LIVE: क्या इस बार भी फेल होंगे एग्जिट पोल? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग पूरी होने के साथ ही एग्जिट पोल का बाजार गर्म हो गया है. केरल, असम और तमिलनाडु में पहले ही मतदान हो चुका है. अब 4 मई को आने वाले नतीजों से पहले एग्जिट पोल यह बताने की कोशिश करेंगे कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा. हालांकि, 2021 के चुनावों का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इन आंकड़ों पर आंख मूंदकर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. West Bengal Exit Poll LIVE: बंगाल में दूसरे चरण के मतदान पर गरमाई सियासत, बीजेपी का तीखा हमला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा नेता तरुण चुघ ने दावा किया कि राज्य की जनता विकास, सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को समर्थन दे रही है. उन्होंने वंशवाद, जिहादी मानसिकता और भ्रष्टाचार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता बदलाव चाहती है. चुघ ने संकेत दिया कि मतदाता अब ममता बनर्जी सरकार से आगे बढ़ने के मूड में हैं. #WATCH दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान पर भाजपा नेता तरुण चुघ ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार के विकास, सुरक्षा और पारदर्शिता के पक्ष में नरेंद्र मोदी को वोट कर रही है। वंशवाद, जिहादी मानसिकता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता आज लामबंद है और… pic.twitter.com/YHAnFX0q35 — ANI_HindiNews (@AHindinews) April 29, 2026 Kerala Exit Polls Result 2026 LIVE: केरल चुनाव नतीजों से पहले सियासी हलचल तेज, कांग्रेस उत्साहित तो लेफ्ट अलर्ट केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों में अब सिर्फ छह दिन बाकी हैं और राज्य में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. 140 सदस्यीय केरल विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को संपन्न हुआ था. अब मुकाबला मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के नेतृत्व वाले कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच माना जा रहा है. वहीं, बीजेपी नीत एनडीए, जो 2021 में अपनी एकमात्र सीट भी गंवा चुका था, इस बार त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद लगाए बैठा है. चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में मिले-जुले अनुमान सामने आए हैं और किसी भी दल को स्पष्ट बढ़त नहीं दिखाई गई है. हालांकि मतदान के बाद राजनीतिक माहौल में बयानबाजी तेज हो गई है. यूडीएफ खेमे में सत्ता में वापसी को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है. पार्टी नेता और समर्थक खुलकर जीत का दावा कर रहे हैं. दूसरी ओर, पिनराई विजयन का खेमा चुप्पी साधे हुए है, जिससे अटकलें और बढ़ गई हैं. Bengal Chunav LIVE: भवानीपुर सीट पर झड़प, सुवेंदु को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेरा बंगाल चुनाव लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण की वोटिंग चल रही है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर सीएम ममता बनर्जी को इस बार भाजपा के दिग्‍गज नेता शुवेंदु अधिकारी टक्‍कर दे रहे हैं. उसी सीट से हिंसा और झड़प की खबरें सामने आ रही हैं. इससे पहले टीएमसी नेता जहांगी खान की फालटा विधानसभा से चौंकाने वाली घटना सामने आई. भाजपा ने आरोप लगाया कि कुछ बूथ पर ईवीएम पर बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल छाप को टेप से ढक दिया गया है. चुनाव आयोग से अविलंब हस्‍तक्षेप की भी मांग की गई है. दूसरी तरफ, साउथ 24 परगना की बसंती विधानसभा सीट से भाजपा उम्‍मीदवार विकास सरदार की कार पर हमला कर दिया गया. इस घटना में बीजेपी नेता की कार के शीशे चकनाचूर हो गए. Puducherry Exit Polls Result 2026 LIVE: पुदुचेरी में भी ऐतिहासिक वोटिंग, जानिए कब होगी काउंटिंग पुदुचेरी एग्जिट पोल रिजल्‍ट लाइव: केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में इस बार 89.87 फीसदी का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया। यह 1964 के पहले विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है. पांचों राज्यों में रिकॉर्ड

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अब यूरिया खाद पर नहीं होगी किचकिच! 100 लाख टन का गैप...

नई दिल्ली. भारत सरकार देश में खेती के लिए सबसे जरूरी यूरिया (Urea) खाद की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार ने एक नई निवेश नीति तैयार की है, जिसके लिए एक कैबिनेट नोट भी बना लिया गया है. इस नई नीति का मुख्य मकसद देश में यूरिया के नए कारखाने लगाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, ताकि विदेशों से खाद न मंगानी पड़े. फिलहाल भारत में यूरिया की जितनी जरूरत है और जितनी पैदावार हो रही है, उसके बीच करीब 100 लाख मीट्रिक टन का बड़ा अंतर है. इसी अंतर को भरने के लिए सरकार अब नई सुविधाओं और नियमों का ऐलान करने वाली है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. भारत में हर साल लगभग 380 से 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन देश में मौजूद कारखाने केवल 300 लाख मीट्रिक टन ही बना पाते हैं. इसका मतलब है कि हमें अपनी कुल जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से खरीदना पड़ता है. रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यूरिया की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है, इसलिए नई कंपनियां तब तक पैसा लगाने से डरती हैं जब तक उन्हें यह पता न हो कि उन्हें सरकार से कितनी सब्सिडी (Subsidy) मिलेगी. नई नीति में अगले 8 सालों के लिए सब्सिडी की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिससे निवेशकों को भविष्य का अंदाजा मिल सके और वे बेझिझक नए प्लांट लगा सकें. पुरानी नीति का असर इससे पहले साल 2012 में नई निवेश नीति (New Investment Policy – 2012) आई थी. उस नीति की वजह से देश में छह नए यूरिया कारखाने लगे थे, जिनमें गोरखपुर (Gorakhpur), सिंदरी (Sindri), बरौनी (Barauni), रामागुंडम (Ramagundam), पानागढ़ (Panagarh) और गड़ेपान (Gadepan) शामिल हैं. इन कारखानों से यूरिया की पैदावार काफी बढ़ी थी, लेकिन अब उस पुरानी नीति का समय खत्म हो गया है और मांग लगातार बढ़ती जा रही है. नई नीति के तहत सरकार कंपनियों को कारखाना लगाने के लिए सीधे पैसे नहीं देगी, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करेगी जिससे कंपनियों को मुनाफा मिल सके. कंपनियों को आमतौर पर नीति लागू होने के चार साल के भीतर कारखाना चालू करना होगा. वर्तमान में किसानों को यूरिया का एक बैग (45 किलो) लगभग 266 रुपये में मिलता है, जबकि इसे बनाने का खर्च 1,200 से 1,700 रुपये तक आता है. इस बीच का जो भी बड़ा अंतर है, वह सरकार सब्सिडी के तौर पर चुकाती है. गैस की उपलब्धता जरूरी यूरिया बनाने के लिए गैस की जरूरत होती है, जो काफी महंगी और सीमित है. अधिकारियों का कहना है कि भले ही हम देश में बहुत सारे कारखाने लगा लें, लेकिन अगर उनके पास पर्याप्त गैस नहीं होगी, तो फिर से दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा. इसके अलावा, वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है. बजट में सब्सिडी के लिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन अनुमान है कि यह खर्च बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. यूरिया के अलावा अन्य खादों जैसे एनपीके (NPK – Nitrogen, Phosphorus, Potassium) के नियम थोड़े अलग हैं, वहां सरकार एक तय मदद देती है और कंपनियां बाजार के हिसाब से दाम तय करती हैं, लेकिन यूरिया में पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है. नई नीति आने से उम्मीद है कि आने वाले सालों में भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बन पाएगा. Source link

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सिर्फ एकादशी पर ही खुलते हैं त्रेता के ठाकुर मंदिर के कपाट,...

Last Updated:April 29, 2026, 13:15 IST अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है, जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं. अयोध्या: आस्था इतिहास और परंपराओं की नगरी अयोध्या अपने भीतर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है जो इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग पहचान देते हैं. यहां स्थित मंदिरों की विशेषता सिर्फ उनकी प्राचीनता ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अनोखी परंपराएं भी हैं. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा से जुड़ा है स्वर्ग द्वार के अंदर स्थित त्रेता के ठाकुर मंदिर है जो पूरे महीने में सिर्फ दो दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. सरयू तट के समीप स्वर्ग द्वार मोहल्ले में स्थित यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. त्रेता के ठाकुर मंदिर  त्रेता के ठाकुर नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा की जाती है. मंदिर का इतिहास भी उतना ही रोचक है जितनी इसकी परंपरा. मंदिर के पुजारी सुनील कुमार मिश्र के अनुसार इस मंदिर का मूल निर्माण प्राचीन काल में सरयू नदी के किनारे हुआ था. कहा जाता है कि आठवीं शताब्दी के आसपास यहां एक भव्य मंदिर था. बाद में वर्ष 1680 ईस्वी में मुगल शासक औरंगजेब के समय इस मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. उस समय जो मूर्तियां वहां स्थापित थीं, उन्हें सुरक्षित रखते हुए वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया. यही स्थान आगे चलकर त्रेता के ठाकुर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ. महीने केवल दो बार खुलता है मंदिर इस मंदिर की सबसे विशेष बात इसकी खुलने की परंपरा है. यह मंदिर हर महीने केवल दो बार, यानी दोनों एकादशी के दिन ही खोला जाता है वह भी सिर्फ शाम के समय, जब भक्तों को भगवान के दर्शन करने का अवसर मिलता है. सालों से चली आ रही इस परंपरा का पालन आज भी पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है.मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु लगातार तीन वर्षों तक हर महीने की दोनों एकादशी के दिन इस मंदिर में आकर दीपक जलाता है.उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी आस्था के कारण दूर-दूर से भक्त इन दो विशेष दिनों का इंतजार करते हैं और मंदिर खुलने पर बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. अयोध्या की यही विशेषता है कि यहां हर मंदिर अपने आप में एक कथा, एक विश्वास और एक परंपरा को जीवित रखे हुए है. त्रेता के ठाकुर मंदिर भी उसी आस्था का प्रतीक है. जहां सीमित समय के लिए होने वाले दर्शन भक्तों के लिए और भी अधिक विशेष और पुण्यदायी बन जाते हैं. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ayodhya,Faizabad,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 13:15 IST Source link

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पीएम मोदी ने सर्वार्थ सिद्धि योग में किया काशी विश्वनाथ में पूजा,...

Last Updated:April 29, 2026, 12:09 IST PM Narendra Modi In Kashi:काशी के ज्योतिषी के अनुसार इस योग में बाबा के पूजन से उन्हें ⁠⁠विजय प्राप्ति का फल मिलेगा.पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि वैशाख का महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित माह है.इसमें आज शिव की पूजा,जलाभिषेक का भी खासा महत्व है.ऐसे में सर्वार्थ सिद्धि योग में उनका पूजन पीएम मोदी की हर मनोकामना की पूर्ति करेगा. वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी में हैं. अपने दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया. पीएम मोदी ने जिस दिन और जिस समय में बाबा विश्वनाथ का पूजन किया है वो समय बेहद शुभ है. इस समय में ग्रह नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बना हुआ है जो हर मनोकामना की पूर्ति करने वाला है. वैदिक पंचांग के अनुसार, 29 अप्रैल को वैशाख का पवित्र महीना, त्रयोदशी तिथि के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बना हुआ है. काशी के ज्योतिषी के अनुसार इस योग में बाबा के पूजन से उन्हें ⁠⁠विजय प्राप्ति का फल मिलेगा. पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि वैशाख का महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित माह है. इसमें आज शिव की पूजा, जलाभिषेक का भी खासा महत्व है. ऐसे में सर्वार्थ सिद्धि योग में उनका पूजन पीएम मोदी की हर मनोकामना की पूर्ति करेगा. इसके अलावा ये देश और देशवासियों के लिए भी काफी हितकारी होने वाला है. क्या होता है सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिषशास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को सबसे प्रशस्त योग माना जाता है. इसमें किए गए पूजन अनुष्ठान का शत प्रतिशत फल मिलता है. यह योग सर्व रूप से सिद्ध योग है जो मनुष्य के मनोवांछित मनोकामना को पूरा करता है.यह योग विशिष्ट वार और नक्षत्रों के संयोग से बनता है. बंगाल में जीत का मिल गया आशीर्वाद पीएम मोदी एक ओर जब काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन कर रहे थे, तो उस समय दूसरी ओर बंगाल चुनाव के आखिरी चरण के लिए मतदान भी जारी था. पीएम मोदी ने 2014 के चुनाव से पहले भी काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजन अर्चन कर बाबा से जीत का आशीर्वाद लिया था. ऐसे में माना जा रहा है आज काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजन के जरिये फिर पीएम मोदी ने उनके बंगाल जीत का आशीर्वाद लिया है.  14 KM रोड शो में जगह जगह स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब साढ़े 8 बजे वाराणसी के बरेका गेस्ट हाउस से निकलें. इस दौरान करीब 14 किलोमीटर का रोड शो करतें हुए पीएम मोदी करीब 9 बजे काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे. इस रोड शो के दौरान जगह जगह कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी का शंख ध्वनि, डमरू और पुष्प वर्षा से उनका स्वागत किया. पीएम मोदी ने भी हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Varanasi,Varanasi,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 12:09 IST Source link

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West Bengal Chunav Voting | Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari | घर...

West Bengal election phase 2 voting : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग हो रही है. पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में 142 सीटों पर आखिरी चरण में वोट डाले जा रहे हैं. बड़ी संख्या में वोटर घरों से बाहर निकल रहे हैं. इस चरण में सबसे अहम मुकाबला भवानीपुर सीट पर है. यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं. सुबह से ही दोनों फील्ड में बूथों का दौरा कर रहे हैं. एक वक्त तो ऐसा भी हुआ, जब भवानीपुर के जिस बूथ के बाहर ममता बनर्जी एक घर में बैठी थीं, वहीं पर सुवेंदु अधिकारी भी आ धमके. दरअसल, टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर के चक्रबेरिया स्थित एक मतदान केंद्र के बाहर आईं. वहां काफी देर तक बैठी रहीं. उनका आरोप था कि टीएमसी के लोगों की मौजूदगी को जानबूझकर कम कर दिया गया. उनके झंटे हटा दिए गए. जब ममता बनर्जी जिस घर में थीं, उसके ठीक सामने सुवेंदु अधिकारी भी आ गए थे. कुछ देर तक सुवेंदु अधिकारी वहीं डटे रहें. इसके बाद तो उन्होंने गरज कर यह तक कह दिया कि ममता का डर अच्छा लग रहा है. ममता पर बरसे सुवेंदु अधिकारी न्यूज18 इंडिया से बातचीत में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता की पुलिस नहीं है तो उनको डर लग रहा है. अगर कुछ बोलना है तो चुनाव आयोग को बोलें. ममता बनर्जी 50-60 लोगों को लेकर आईं. मेरे आने पर सब भाग गए. वो क्लीयर नहीं करेगा तो मैं क्लीयर करूंगा. ये डर अच्छा लग रहा है. उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी 30 हजार वोटों से हारेंगी. ममता भी पीछे नहीं रहीं दरअसल, पश्चिम बंगाल में जारी मतदान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्रीय बलों और चुनाव पर्यवेक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ये लोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं और राज्य के कई हिस्सों में मतदान प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं. ममता बनर्जी ने दावा किया कि ‘कई पर्यवेक्षक बाहर से आए हैं और बीजेपी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं.’ उन्होंने मतदान प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया. मतदान की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘लोगों को वोट डालना है, क्या ऐसे मतदान हो सकता है?’ विस्तार से समझिए पूरा मामला दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को अपने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा किया. ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल और चुनाव पर्यवेक्षक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं. गौरतलब है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, जहां उनकी नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से प्रतिष्ठा की लड़ाई है. इस मुकाबले को नंदीग्राम की लड़ाई की तरह ही देखा जा रहा है, जहां 2021 में अधिकारी ने बनर्जी को हरा दिया था. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख आमतौर पर मतदान के दिन दोपहर में अपने कालीघाट स्थित आवास से निकलकर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल में वोट डालने जाती हैं. हालांकि, इस बार वह सुबह आठ बजे से पहले ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा करने निकल पड़ीं, जिनमें दक्षिण कोलकाता के चेतला इलाके के मतदान केंद्र भी शामिल हैं. बाद में वह भवानीपुर के चक्रबेड़िया स्थित एक मतदान केंद्र के बाहर बैठीं और पत्रकारों से बात करते हुए अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय बलों और पर्यवेक्षकों के जरिए मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने कहा, ‘कई पर्यवेक्षक बाहर से आए हैं और भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. लोगों को मतदान करना है- क्या इस तरह मतदान हो सकता है?’ ममता ने क्या आरोप लगाए? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के सभी पार्टी झंडे पहले ही हटा दिए गए और बाहरी लोग मतदान प्रक्रिया में दखल दे रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘वे वार्ड नंबर 70 के पार्षद को बाहर निकलने नहीं दे रहे हैं. वे हमारे सभी कार्यकर्ताओं को पकड़ रहे हैं. अभिषेक और मैं पूरी रात जागते रहे.’ ममता बनर्जी ने दावा किया कि राज्य के बाहर से कुछ लोग निर्वाचन क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. अभिषेक बनर्जी का क्या दावा? हालांकि, भाजपा ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी जनता के गुस्से को भांपकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. तृणमूल में दूसरे नंबर के नेता माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल 2021 की तुलना में अधिक सीटें जीतकर सत्ता में लौटेगी. डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने मित्रा इंस्टीट्यूशन में मतदान करने के बाद विभिन्न स्थानों पर चुनाव पर्यवेक्षकों द्वारा मनमानी करने का आरोप लगाया. सुवेंदु अधिकारी ने किया पलटवार वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री यह चुनाव हार जाएंगी. विपक्ष के नेता ने निर्वाचन क्षेत्र के खिदिरपुर इलाके में दो मंदिरों में पूजा-अर्चना की. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि लोग बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए बाहर निकल रहे हैं और चुनाव आयोग ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्थाएं की हैं. तृणमूल प्रमुख के मतदान के दिन सुबह-सुबह बाहर निकलने के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, ‘कोई फर्क नहीं पड़ता, वह हार जाएंगी.’ कहां-कहां और कब तक वोटिंग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 142 सीटों पर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है. मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्धमान जिलों के मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं. 4 मई को आएगा रिजल्ट इस चरण का परिणाम महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है क्योंकि इसमें दक्षिण बंगाल शामिल है, जिसे तृणमूल का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जहां भाजपा पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा. पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत था.मतगणना चार

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