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AAP वर्करों को IB के नाम पर आ रहे फोन? केजरीवाल ने...

होमताजा खबरदेश AAP वर्करों को IB के नाम पर आ रहे फोन? केजरीवाल ने खुद कॉलर से की बात, फिर… Last Updated:May 28, 2026, 20:31 IST आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया है कि गुजरात में काम कर रहे AAP कार्यकर्ताओं को खुफिया एजेंसी IB के नाम पर फर्जी फोन कॉल आ रहे हैं, जिनमें उनसे वेरिफिकेशन करवाने को कहा जा रहा है. केजरीवाल ने खुद उस नंबर पर फोन किया, लेकिन उनका नाम सुनते ही सामने वाले ने फोन काट दिया. केजरीवाल बोले-अगली बार गुजरात दौरे पर सीधे IB दफ्तर जाकर इसका जवाब मांगेंगे. (File Photo : PTI) आम आदमी पार्टी (AAP) और केंद्र सरकार के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है. लेकिन गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक अलग ही दावा किया है. केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी का काम देख रहे उनके कार्यकर्ताओं को खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नाम से लगातार फोन आ रहे हैं. उन्हें डराने-धमकाने या वेरिफिकेशन के नाम पर परेशान करने की कोशिश की जा रही है. इस पूरे विवाद की शुरुआत AAP नेता दुर्गेश पाठक के एक सोशल मीडिया (X) पोस्ट से हुई. दुर्गेश पाठक ने बुधवार 28 मई की शाम को एक पोस्ट में लिखा, ‘अभी थोड़ी देर पहले गुजरात में काम कर रहे हमारे एक कार्यकर्ता को 9512892492 नंबर से लगातार कॉल आ रहा है. उधर से कह रहे हैं कि वो IB से बोल रहे हैं. आकर वेरिफिकेशन करवाओ.’ पाठक ने आगे सवाल उठाया कि क्या एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने जाने पर IB में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है? केजरीवाल ने खुद किया फोन, फिर जो हुआ… दुर्गेश पाठक की इस पोस्ट को कोट करते हुए अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को बेहद संगीन बताया. केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने खुद उस नंबर पर कॉल किया. केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘मैंने इस नंबर पे फ़ोन किया.’ पूछा – ‘क्या आप IB से बोल रहे हैं?’ उसने कहा – ‘हां, तो मैंने कहा – ‘मैं अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूं. आप किस कानून में वेरिफिकेशन कर रहे हो? उसने नाम सुनते ही फोन काट दिया. उसके बाद से फोन नहीं उठा रहे.’ ये बहुत संगीन मामला है। मैंने इस नंबर पे फ़ोन किया। पूछा – “क्या आप IB से बोल रहे हैं?” उसने कहा – “हाँ”। मैंने कहा – “मैं अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूँ। आप किस क़ानून में verification कर रहे हो?” उसने फ़ोन काट दिया। उसके बाद से फ़ोन नहीं उठा रहे। Source link

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miyazaki mango craze in west champaran bid of 18 thousand for one...

होमताजा खबरकृषि OMG! इस एक आम के लिए लगी 18 हजार तक की बोली, नाम है सूरज का अंडा, आपने देखा? Last Updated:May 28, 2026, 19:50 IST Miyazaki Mango Craze In West Champaran: जापान के मियाजाकी आम, जिसे सूरज का अंडा भी कहते हैं. अभी चम्पारण में इस आम की खूब चर्चा है. यहां लोगों ने एक आम के लिए 15-18 हजार रु तक की बोली लगाई है. लेकिन मालिक ने बेचने से इनकार किया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह आम ढाई लाख रु किलो बिकता है. आइए जानते हैं इसकी खासियत. पश्चिम चम्पारण: जिले में इन दिनों मियाजाकी आम की चर्चा खूब हो रही है. जापान के मियाजाकी से निकला यह आम फिलहाल चम्पारण के लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में करीब ढाई लाख रुपए किलो तक बिकने वाले इस चर्चित आम की खरीदारी के लिए लोग बोली तक लगा रहे हैं. पश्चिम चम्पारण जिले के मुख्यालय बेतिया से एक ऐसा ही रोचक मामला सामने आया है. जिसमें मियाजाकी किस्म के सिर्फ एक आम की खरीदारी के लिए शौकीनों ने 15 से 18 हजार रुपए तक की बोली लगा दी है. घर की छत पर मियाजाकी आम की बागवानीबताते चलें कि इस आम का फलन बेतिया के प्रसिद्ध स्वर्ण व्यवसायी मुनेश्वर कुमार के घर पर हुआ है. मुनेश्वर अपने बड़े भाई योगेश के साथ मिलकर नंदनी ज्वेलर्स नामक दुकान का संचालन करते हैं. उन्होंने वर्ष 2025 के सितंबर महीने में घर की छत पर प्लास्टिक बैग में मियाज़ाकी आम के पौधे को लगाया था. जिसमें फिलहाल आम का फलन बड़ी ही खूबसूरती से हुआ है. दुर्लभ और एग्जॉटिक किस्म होने की वजह से उन्होंने इसकी चर्चा कृषि–बागवानी विशेषज्ञ रविकांत पांडे से की. रविकांत पिछले 10 वर्षों से कृषि बागवानी पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम करते हैं और कई कृषक समूहों का संचालन भी करते हैं. एक आम के लिए 18 हज़ार रु तक की बोलीउन्होंने इस आम की तस्वीर को सभी समूहों में साझा किया. जिसके बाद कुछ किसानों ने इसकी खरीदारी की इच्छा जताई. बकौल रविकांत, इस दौरान आश्चर्य की बात यह रही कि लोग इसे खरीदने के लिए 15 से 18 हजार रुपए तक देने को तैयार हो गए. हालांकि मुनेश्वर ने इसे बेचने से इनकार कर दिया और कहा कि वो इसे अपने परिवार के साथ ही सर्व करना चाहते हैं. घर की गृहिणियों ने पौधे को बड़े ही चाव से लगाया है, इसलिए इसपर सबसे पहला अधिकार उनका ही है. मियाजाकी के अन्य नामविशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी बहुत देख भाल से चम्पारण सहित पूरे बिहार में मियाजाकी की बागवानी की जा सकती है. जापान के मियाज़ाकी शहर से संबंधित होने की वजह से इसे मियाज़ाकी नाम से ही जाना जाता है. इसका रंग लालीमा के साथ उगने वाले सूर्य की तरह होता है, इसलिए इसे ‘एग ऑफ सन’ यानी सूरज का अंडा भी कहा जाता है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar Source link

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महाभारत: युधिष्ठिर क्यों बार – बार रोए और कुंती की हैरान करने...

अगर ये सवाल पूछा जाए कि महाभारत में पांडव भाइयों में कौन सबसे ज्यादा मौकों पर रोता देखा गया. वह बार बार बार-बार भावुक होकर विलाप करने लगते थे. वह अपने पांडव भाइयों में और शायद महाभारत के सभी पुरुष पात्रों में सबसे ज्यादा रोने वाले और दुखी रहने वाले चरित्र थे. हालांकि कुंती का दहाड मारकर रोना भी सबको चकित कर गया. महाभारत में युधिष्ठिर ने कई बार रोये. कभी अपनी स्थिति के कारण तो कभी सगे संबंधियों, भाइयों और प्रियजनों की मृत्यु पर. युद्ध के दौरान और उसके बाद उनकी पीड़ा कई बार जाहिर हुई. वैसे केवल युधिष्ठिर ही क्यों महाभारत में तो धृतराष्ट्र, कर्ण, दुर्योधन सभी रोए. लेकिन सबसे ज्यादा दहाड़कर मारकर रोने वाली कुंती थीं. वो जिस तरह रोईं तो हर कोई हिल गया. पहले ये जानेंगे कि युधिष्ठिर की पीड़ा कब रोने के रूप में बाहर निकली. पांडव जब वनवास काट रहे थे. तो वो कभी कभी अपनी जगह बदलते थे. उस समय पांडव वन में निवास कर रहे थे. अर्जुन द्वियास्त्र हासिल करने के लिए इंद्र के पास चले गए थे. उनके बगैर भीम युधिष्ठिर से लगातार झगड़ते रहते थे. जरूरत से ज्यादा सहिष्णु और धैर्यवान होने के लिए युधिष्ठिर की आलोचना करते रहते थे. द्रौपदी अपने भाग्य पर रोती रहती थी, जिसने उन सभी को ये दिन दिखाए थे. तब युधिष्ठिर फफक पड़े इसी दौरान महान ऋषि वृहदश्व उनसे मिलने आए. युधिष्ठिर जो दुख और आत्मनिंदा से भरे हुए थे, ऋषि के सामने फूट-फूटकर रो पड़े. क्या आपने मुझसे अधिक दुर्भाग्यशाली को देखा या सुना है, कहकर वह सुबकने लगे. खैर ऋषि ने युधिष्ठिर को ढांढस बंधाया. अच्छे दिनों का आश्वासन दिया. कम से कम तीन बार रोए हालांकि ये युधिष्ठर का पहली बार रोना नहीं था. वह इसके बाद भी कई बार रोए. कम से कम तीन बार इसका जिक्र महाभारत में मिलता ही है. युद्ध के दौरान जब युधिष्ठिर को लगा कि अर्जुन मारा गया है, तो वह रोने लगे. यह स्थिति तब आई जब उन्होंने श्री कृष्ण की भयंकर शंखध्वनि सुनी, लेकिन गांडीव की टंकार नहीं सुनाई दी, जिससे उन्हें लगा कि अर्जुन की मृत्यु हो गई है. युद्ध में अपने भाइयों और सगे संबंधियों की मृत्यु से भी युधिष्ठिर को गहरा दुख और आत्मग्लानि हुई. इस पर भी उन्होंने विलाप किया. वे इसके चलते मनोवैज्ञानिक तौर पर बेचैन और व्याकुल हो गए. सपनों में युद्ध के दृश्य देखते थे. इस व्यथा को श्री कृष्ण के सामने भी जाहिर किया. युद्धस्थल में जब पांडवों की मां कुंती कर्ण के शव को गोद में लेकर दहाड़ मारकर रोईं तो हरकोई विचलित हो गया. (News18 AI) तब कुंती दहाड़कर मारकर रोईं जब युद्ध खत्म हुआ. कुंती कर्ण के मृत शरीर को गोद में लेकर रो रही थीं, तब युधिष्ठिर को यह पता चला कि कर्ण भी उनके भाई थे. इस तथ्य को जानकर वो भी भावुक हुए, रोए. गुस्से में आकर उन्होंने महिलाओं को श्राप दिया कि वे अपने मन की बात छिपा नहीं पाएंगी. युद्ध के बाद भी युधिष्ठिर ने अपने परिवार और संबंधियों के विनाश पर गहरा शोक व्यक्त किया, जो कई बार उनके रोने और विलाप के रूप में सामने आया. कहा जाता है कि सबसे जबरदस्त विलाप कुंती ने किया था. वह कर्ण की मृत्यु के बाद उसके शव को गोद में लेकर दहाड़ें मारकर रोने लगीं. ये महाभारत का बहुत भावुक क्षण था. कुंती के विलाप को देखकर युधिष्ठिर भी भावुक हुए थे. हर कोई इसलिए भी तब हैरान था कि कुंती भला कर्ण के लिए क्यों इतना विलाप कर रही हैं. बाद में पता लगा कि कर्ण भी कुंती के बेटे थे. महाभारत में द्रौपदी कई बार रोईं. कभी सभा में सबसे सामने अपने अपमान पर तो कभी पुत्रों की मृत्यु पर (News18 AI) अर्जुन क्यों रोए महाभारत के पुरुष पात्रों में कई बार भावुक और रोने के प्रसंग आते हैं. अर्जुन ने तब विलाप किया और बहुत दुखी हो गए जबकि अभिमन्यु की मृत्यु के बारे में जाना. अर्जुन तब भी फफकर रो पड़े जब उन्होंने महाभारत युद्ध की शुरुआत अपने सगे संबंधियों को सामने देखा. तब वह श्रीकृष्ण के सामने भावुक होकर रो पड़े. युद्ध करने से मना कर दिया. भीम की आंखों में आंसू भीम की आंखों में तब आंसू आ गये जब द्रौपदी के चीरहरण के समय सबके सामने पांडवों को अपमानित होना पड़ा, तब भीम की आंखों में भी आंसू आ गए थे. महाभारत युद्ध के दौरान धृतराष्ट्र पुत्रों की मृत्यु के समाचार पर कई बार रोए. गांधारी भी दुर्योधन व अन्य पुत्रों की मृत्यु पर रोईं. जब उन्होंने श्रीकृष्ण को श्राप दिया, उससे पहले भी युद्धस्थल में जाकर वह रोईं थीं. अपने भाइयों और मित्रों की मृत्यु के बाद दुर्योधन ने भी युद्धभूमि में आंसू बहाए. कर्ण कब रोए कर्ण तब श्रीकृष्ण के सामने रो पड़े, जब उन्होंने कर्ण को पहली बार ये बताया कि वो पांडवों के भाई और कुंती के सबसे बड़े पुत्र हैं. ये रहस्य अब तक छिपा हुआ था लेकिन जब ये पता लगा तो कर्ण ने भावनात्मक तौर पर खुद को ऐसी स्थिति में पाया कि वो रोने लगे. सबसे ज्यादा बार द्रौपदी रोईं वैसे महाभारत के महिला पात्रों में सबसे ज्यादा रोने वालों में द्रौपदी हैं. वह पहली बार तब रोईं जब युधिष्ठर ने उन्हें दांव पर लगाया. सभा में उनका सबके सामने अपमान हुआ. तब भी वह फफक उठीं जब अभिमन्यु की मृत्यु की सूचना मिली. अपने पाचों पुत्रों (उपपांडवों) की अश्वतथामा द्वारा हत्या के बाद भी वह खूब रोईं. उनके आंसू थमने का नाम नहीं लेते थे. अगर पूरे महाभारत की बात करें, तो सबसे ज्यादा विलाप धृतराष्ट्र और गांधारी का है. धृतराष्ट्र अपने पुत्र-मोह में और गांधारी अपने 100 पुत्रों की मृत्यु के शोक में युद्ध के अंत में सबसे ज्यादा रोने वाले पात्रों में गिने जाते हैं. Source link

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NEET UG 2026:NEET: वायुसेना को मिल सकता है पेपर लाने ले जाने...

Last Updated:May 28, 2026, 17:46 IST NEET Paper Leak Meeting: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार एक्शन मोड में है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और NTA महानिदेशक के साथ हाई-लेवल बैठक हुई. जिसके बाद चर्चा है कि नीट के पेपर की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी सेना को मिल सकती है. NEET Paper Leak Scam: नीट पेपर लीक मामले में किसी भी गलती को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा नई दिल्ली (NEET Paper Leak Meeting). नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में मचे भारी बवाल के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है. लाखों उम्मीदवारों के गुस्से और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक बुलाई गई है. इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. NEET को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री के बीच बैठक में विचार हुआ.एग्जाम को लेकर जिम्मेदारी पोस्टल डिपार्टमेंट से वायु सेना को जिम्मदारी दिये जाने पर विचार किया गया. लॉजिस्टिक में वायु सेना को जिम्मेदारी मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का एक ही साफ एजेंडा है नीट परीक्षा को लेकर छात्रों और पेरेंट्स के बीच खोई विश्वसनीयता को बहाल करना और दोषियों के खिलाफ ऐसा सख्त एक्शन लेना जो नजीर बन सके. सरकार की तरफ से स्पष्ट संकेत दिए जा चुके हैं कि उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली ‘किसी भी गलती को बख्शा नहीं जाएगा’. इस मैराथन बैठक में जांच की मौजूदा स्थिति और आगामी 21 जून को होने वाले री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है. राजनाथ सिंह के आवास पर नीट पेपर लीक का महामंथन नीट यूजी 2026 को पूरी तरह विवाद रहित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर बेहद महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय महामंथन हुआ. इस मैराथन बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के चीफ अभिषेक सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे. बैठक के दौरान नीट पेपर लीक, गंभीर शिकायतों, प्रशासनिक खामियों और उनके ठोस समाधानों पर गहराई से चर्चा की गई, जिससे सभी चिंताें पूरी तरह दूर की जा सकें. इसके अलावा, परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर जरूरी लॉजिस्टिक सपोर्ट को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल बिठाने तथा परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, हाई-टेक निगरानी और सख्त व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर खास फोकस रहा. बैठक के अंत में एनटीए चीफ से जमीनी तैयारियों का पूरा फीडबैक लिया गया और यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि परीक्षा तंत्र पर छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल करना ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. नीट री-एग्जाम पर पीएमओ की पैनी नजर 3 मई को रद्द हुई नीट परीक्षा में सामने आए पेपर लीक विवाद और गड़बड़ियों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार आगामी 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद नजर आ रही है. पिछली परीक्षा के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के भारी विरोध और राजनीतिक आलोचना को देखते हुए इस बार सरकार किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है. यह संवेदनशील मामला लाखों छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ा है, इसलिए इस बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी प्रक्रिया की कमान संभाल रहे हैं; पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक के हर फेज पर पीएमओ की कड़ी नजर है और प्रधानमंत्री को पल-पल की रिपोर्ट भेजी जा रही है. क्या है नीट विवाद का बैकग्राउंड? इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब 3 मई 2026 को आयोजित की गई नीट परीक्षा के तुरंत बाद राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से पेपर लीक होने की खबरें आईं. सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर एक ‘गेस पेपर’ वायरल हुआ, जिसके सवाल असली परीक्षा से हूबहू मैच कर रहे थे. चौतरफा दबाव और धांधली के पुख्ता सबूत मिलने के बाद एनटीए ने 12 मई 2026 को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया, जिससे 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं. वर्तमान में इस मामले की कमान CBI के हाथों में है, जो कई आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर ले चुकी है. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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भारत को चावल उत्‍पादन घटाने की जरूरत! देश के सबसे बड़े कृषि...

Last Updated:May 28, 2026, 16:44 IST Indias Crop Production : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक ने कहा है कि हमें चावल उत्‍पादन के रकबे को 5 करोड़ हेक्‍टेयर तक बढ़ाने की जरूरत नहीं है. इसके लिए 3.5 करोड़ हेक्‍टेयर ही काफी है और शेष रकबे को तिलहन व दलहन उत्‍पादन को दिया जा सकता है. भारत में दाल और तिलहन का उत्‍पादन बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. नई दिल्‍ली. आपको जानकर हैरान होगी कि देश के सबसे बड़े कृषि अधिकारी और वैज्ञानिक ने चावल उत्‍पादन और उसका रकबा घटाने की सलाह दी है. उनका कहना है कि भारत को ज्‍यादा चावल उगाने की बजाय इस रकबे का इस्‍तेमाल दलहन उत्‍पादन बढ़ाने के लिए करना चाहिए. दुनिया में बढ़ते खाद्य संकट और अल नीनो जैसे जलवायु प्रभाव के बीच यह सुझाव काफी मायने रखता है. कृषि अधिकारी का दावा है कि भारत के लिए चावल का मौजूदा उत्‍पादन काफी है और अब दूसरी फसलों में निर्भरता पर जोर दिया जाना चाहिए. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एमएल जाट ने कहा कि भारत में साल 2047 के लिए निर्धारित चावल उत्पादन लक्ष्य पहले ही हासिल हो चुके हैं, जिससे फसल विविधीकरण की आवश्यकता और बढ़ जाती है. फिलहाल हमें 5 करोड़ हेक्टेयर में चावल उगाने की जरूरत नहीं है. साल 2047 तक 3.5 करोड़ हेक्टेयर का रकबा चावल उत्‍पादन के लिए पर्याप्त होगा. लिहाजा यदि शेष बचे 1.5 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को कम किया जाए, तो उसे तिलहन और दालों की ओर मोड़ा जा सकता है. इससे हम इन फसलों में आत्मनिर्भर बन सकते हैं. अल नीनो से निपटने के लिए तैयार है भारतकेंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इस साल की खरीफ फसल पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने एकीकृत खेती और दालों व तिलहनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया. मंत्री ने कहा कि बदलती जलवायु के प्रति चिंता करने के बजाय तैयारी जरूरी है. प्रभावित जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं बनाई जाएंगी और जहां आवश्यक होगा, वहां फसलों में बदलाव पर विचार किया जाएगा. क्‍या है सरकार की तैयारीउन्होंने बताया कि मंत्रालय अल नीनो के प्रभाव की स्थिति में वैकल्पिक फसलों के लिए जिलों की पहचान करने और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 13 अप्रैल को जारी अपने प्रथम चरण के पूर्वानुमान में साल 2026 के लिए सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान लगाया है जिसमें वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 फीसदी रहने की संभावना है. अल नीनो से गर्म हो जाता है मौसमविश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने मई-जुलाई के बीच अल नीनो जैसी परिस्थितियों की वापसी की संभावना जताई है. वहीं अमेरिका स्थित राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने 11 मई के अपने ‘ईएनएसओ अपडेट’ में कहा कि मई-जून के दौरान अल नीनो परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं और साल के अंत तक बनी रह सकती हैं. अल नीनो स्थिति प्रशांत महासागर के पूर्वी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है. इससे भारत में अधिक गर्म और शुष्क मौसम बन जाता है. राज्‍यों की ढिलाई बर्दाश्‍त नहींचौहान ने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत 2025-26 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 37.656 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड हासिल करने की दिशा में अग्रसर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.88 करोड़ टन अधिक है. अल नीनो से निपटने के उपायों को लागू करने में राज्‍यों ढिलाई बर्दाश्‍त नहीं की जाएगी. अगर राज्‍यों के कृषि मंत्री इससे जुड़ी बैठकों में नहीं आते तो सीधे मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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PM नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बशीर बद्र के किस शेर को...

होमताजा खबरदेश PM नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बशीर बद्र के किस शेर को पढ़ा था? पूरे देश में हुई थी चर्चा, जुल्फिकार भुट्टो-इंदिरा गांधी का भी है कनेक्शन Last Updated:May 28, 2026, 15:44 IST यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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MBA New Trend Courses: मार्केटिंग-फाइनेंस को भूल जाइए! 2026 में इन MBA...

नई दिल्ली (MBA New Trend Courses). एक दौर में बिजनेस की दुनिया में कदम रखने का मतलब सिर्फ एमबीए यानी फाइनेंस, मार्केटिंग या ह्यूमन रिसोर्स में डिग्री लेना होता था. लेकिन साल 2026 में कॉर्पोरेट जगत का पूरा ढांचा ही बदल चुका है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा और क्लाइमेट चेंज जैसे फैक्टर्स ने कंपनियों के काम करने का तरीका पूरी तरह पलटकर रख दिया है. अब कंपनियों को ऐसे मैनेजर्स नहीं चाहिए जो सिर्फ पुरानी थ्योरी रटकर आए हों, बल्कि उन्हें ऐसे स्मार्ट प्रोफेशनल्स की तलाश है जो बदलती हुई टेक्नोलॉजी और ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ बिजनेस को आगे ले जा सकें. यही वजह है कि एमबीए के एजुकेशन पैटर्न में भी बड़ा और दिलचस्प बदलाव आया है. आज के समय में कई ऐसे ‘न्यू एज’ या ‘न्यू ट्रेंड’ एमबीए कोर्सेस मार्केट में आ चुके हैं, जो टेक-सैवी युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं. ये ट्रेंडिंग मैनेजमेंट कोर्सेस आपको न सिर्फ भीड़ से अलग करते हैं, बल्कि उन सेक्टर्स के लिए तैयार करते हैं जहां अगले एक दशक तक अच्छी सैलरी वाली नौकरियों की बंपर बौछार होने वाली है. अगर आप भी इस साल एमबीए करने का मन बना रहे हैं तो पुरानी लीक छोड़िए और जानिए कि इस समय मैनेजमेंट की दुनिया में कौन से नए कोर्सेस धूम मचा रहे हैं. एमबीए के सबसे लेटेस्ट कोर्सेस किसी भी स्ट्रीम से बैचलर्स की डिग्री लेने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स एमबीए कोर्स में एडमिशन लेते हैं. लेकिन अच्छी सैलरी वाली नौकरी हासिल करने के लिए सही और ट्रेंडिंग एमबीए कोर्स में एडमिशन लेना जरूरी है. 1. एमबीए इन बिजनेस एनालिटिक्स और डेटा साइंस आज की तारीख में डेटा ही सबसे बड़ा ‘सोना’ है. हर छोटी-बड़ी कंपनी अपने ग्राहकों को समझने के लिए डेटा पर निर्भर है. इस कोर्स में स्टूडेंट्स को लाखों-करोड़ों डेटा पॉइंट्स का एनालिसिस करके बिजनेस के बड़े फैसले लेना सिखाया जाता है. अगर आपकी रुचि नंबर्स, कोडिंग के बेसिक्स और स्ट्रेटेजी में है तो यह कोर्स बेस्ट है. ई-कॉमर्स से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक, सभी इस समय इन प्रोफेशनल्स को हाथों-हाथ ले रहे हैं. 2. एमबीए इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग चैटजीपीटी और एआई टूल्स के आने के बाद अब हर बिजनेस को ‘एआई-ड्रिवेन’ बनाया जा रहा है. इस कोर्स का मकसद स्टूडेंट्स को कोडिंग सिखाना नहीं, बल्कि यह सिखाना है कि बिजनेस ऑपरेशंस, कस्टमर सर्विस और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जाए. यह कोर्स टेक और मैनेजमेंट का बेहतरीन और बेहद हाई-पेइंग फ्यूजन है. 3. एमबीए इन सस्टेनेबिलिटी एंड ग्रीन बिजनेस दुनियाभर की कंपनियां अब पर्यावरण को लेकर गंभीर हो रही हैं. कार्बन फुटप्रिंट कम करना, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल तैयार करना आज हर बड़ी कंपनी के लिए अनिवार्य हो चुका है. ऐसे में ‘ग्रीन मैनेजर्स’ की मांग तेजी से बढ़ी है. यह कोर्स सिखाता है कि कैसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना मुनाफे वाला बिजनेस चलाया जा सकता है. 4. एमबीए इन डिजिटल हेल्थकेयर एंड हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोरोना महामारी के बाद से हेल्थकेयर सेक्टर का पूरा चेहरा बदल गया है. टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और रोबोटिक सर्जरी जैसी चीजें अब आम हो रही हैं. इस एमबीए कोर्स के जरिए छात्र सीखते हैं कि मॉडर्न हॉस्पिटल, फार्मा कंपनियों और हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स को कुशलता से कैसे मैनेज किया जाए. नॉन-मेडिकल बैकग्राउंड वालों के लिए भी इस सेक्टर में करियर बनाने का शानदार मौका है. 5. एमबीए इन डिजिटल मार्केटिंग एंड ई-कॉमर्स पारंपरिक विज्ञापन का दौर अब ढलान पर है. इन दिनों सारा खेल इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब, एसईओ और ऑनलाइन सेलिंग का है. यह एमबीए कोर्स सिखाता है कि इंटरनेट की दुनिया में किसी ब्रैंड को कैसे खड़ा किया जाता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए सेल्स को कैसे करोड़ों में पहुंचाया जाता है. अगर आप क्रिएटिव हैं और सोशल मीडिया की नब्ज समझते हैं तो यह मैनेजमेंट कोर्स आपके लिए परफेक्ट है. सही एमबीए कोर्स कैसे चुनें? एमबीए का कोई भी न्यू ट्रेंड कोर्स चुनने से पहले केवल उसकी ‘हाइप’ या सैलरी पैकेज न देखें, बल्कि अपनी व्यक्तिगत रुचि और बैकग्राउंड का भी आकलन करें. अगर आपका झुकाव तकनीक की तरफ है तो एआई या एनालिटिक्स चुनें. वहीं, अगर आप समाज और पर्यावरण के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सस्टेनेबिलिटी बेहतरीन विकल्प हो सकता है. भविष्य इन्हीं नए कोर्सेस का है, इसलिए समझदारी से फैसला लें और अपने करियर को नई उड़ान दें. Source link

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DK Shivakumar: 23 साल की उम्र में प्रधानमंत्री के खिलाफ लड़ा चुनाव,...

होमताजा खबरदेश DK Shivakumar: 23 साल की उम्र में प्रधानमंत्री के खिलाफ लड़ा चुनाव, 36 सालों से नहीं हारा कोई इलेक्‍शन, अब ‘कनकपुरा के चट्टान’ के हाथों में कर्नाटक की कमान Last Updated:May 28, 2026, 13:43 IST यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Operation Sheruwali LIVE: राजौरी में घिरा पाक कमांडर इलियास फौजी, छठे दिन...

होमताजा खबरदेश LIVE: ऑपरेशन शेरूवाली का छठा दिन, इलियास फौजी को घेरे बैठे सुरक्षाबल Last Updated:May 28, 2026, 12:43 IST Operation Sheruwali LIVE: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ लगातार छठे दिन भी जारी है. सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के पूर्व कमांडो और PAFF के खतरनाक कमांडर इलियास फौजी को 10 हजार फीट ऊ…और पढ़ें राजौरी में ऑपरेशन शेरूवाली छठे दिन भी जारी. (फाइल फोटो PTI) Rajouri Terrorist Encounter Live: जम्मू-कश्मीर के राजौरी के घने जंगल एक बार फिर आतंक के खिलाफ सबसे बड़े रणक्षेत्र में बदल गए हैं. पिछले छह दिनों से सुरक्षाबल लगातार पहाड़ियों, खाइयों और घने जंगलों के बीच आतंकियों को घेरने में जुटे हैं. इस ऑपरेशन को नाम दिया गया है ‘ऑपरेशन शेरूवाली’. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस बार निशाने पर कोई छोटा आतंकी नहीं बल्कि पाकिस्तान का पूर्व कमांडो और PAFF का खूंखार कमांडर इलियास फौजी है. बताया जा रहा है कि वह 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले इलाके में फंसा हुआ है. सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और पैरा कमांडो की संयुक्त टीम लगातार जंगलों की घेराबंदी कर रही है. इस ऑपरेशन को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि राजौरी-पुंछ बेल्ट में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. सुरक्षाबलों ने आतंकियों के कई ठिकाने तबाह कर दिए हैं और अब माना जा रहा है कि आतंकियों के पास बच निकलने के रास्ते बेहद कम बचे हैं. राजौरी के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चल रहा यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. इलाके में घना जंगल, खराब मौसम और खड़ी पहाड़ियां जवानों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं. लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया है. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के मुख्य हाइडआउट को ध्वस्त कर दिया गया है. वहां से राशन, कपड़े और जरूरी सामान भी बरामद हुआ है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लंबे समय तक जंगल में छिपे रहने की आतंकियों की योजना अब टूट चुकी है. मुठभेड़ वाले इलाके में लगी आग भी आतंकियों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है. सेना ने पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा है. जंगल में तबाह हुए आतंकी ठिकाने राजौरी के जंगलों में पिछले छह दिनों से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सुरक्षाबलों को इनपुट मिला था कि पाकिस्तान से जुड़ा आतंकी नेटवर्क इस इलाके में सक्रिय है. इसके बाद सेना ने बड़े स्तर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया. बताया जा रहा है कि इलियास फौजी अपने कुछ साथियों के साथ ऊंचाई वाले इलाके में छिपा हुआ है. सुरक्षाबलों ने आतंकियों के मुख्य ठिकाने को ध्वस्त कर दिया है. वहां से राशन, कपड़े और अन्य सामान बरामद किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इससे आतंकियों की सप्लाई लाइन कमजोर पड़ गई है. अब जंगलों में लंबे समय तक छिपे रहना उनके लिए मुश्किल होगा. इलाके में ड्रोन और आधुनिक निगरानी उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. 10 हजार फीट की ऊंचाई पर घेरा ऑपरेशन शेरूवाली के तहत सेना ने 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में मजबूत घेराबंदी की है. आतंकियों के भागने के संभावित रास्तों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक मुठभेड़ के बाद जंगल के कुछ हिस्सों में आग लग गई थी, जिसका फायदा सुरक्षाबलों को मिल सकता है क्योंकि इससे आतंकियों के छिपने की जगहें कम हो रही हैं. पैरा कमांडो और अतिरिक्त फोर्स तैनात ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए पैरा कमांडो समेत बड़ी संख्या में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है. पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि इलियास फौजी का नेटवर्क इस इलाके में सक्रिय था और इस ऑपरेशन से उसे बड़ा झटका लग सकता है. सेना का फोकस आतंकियों को जिंदा पकड़ने के साथ-साथ पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर है. Rajouri Encounter Live: राजौरी में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी Operation Sheruwali LIVE: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के गंभीर मुगलान के डोरी माल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ छठे दिन में प्रवेश कर गई है. यह ऑपरेशन पिछले शनिवार को खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया था. सेना और सुरक्षा एजेंसियां इलाके में लगातार सर्च अभियान चला रही हैं और आतंकियों की तलाश जारी है. अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन अभी भी जारी है, जबकि सुरक्षा कारणों से घटनास्थल के दृश्य फिलहाल जारी नहीं किए गए हैं. VIDEO | Rajouri, Jammu and Kashmir: Encounter between security forces and terrorists has entered the sixth. The encounter started on last Saturday when an intelligence-based operation was launched by forces in Dori Maal area of Gambhir Mughalan in Rajouri district.… pic.twitter.com/i56Da9KR08 — Press Trust of India (@PTI_News) May 28, 2026 Operation Sheruwali LIVE: पैरा कमांडो समेत भारी फोर्स तैनात Rajouri Encounter Live: ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए पैरा कमांडो समेत भारी संख्या में अतिरिक्त जवानों को मौके पर भेजा गया है. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इलाके में और आतंकी भी छिपे हो सकते हैं. इसी वजह से राजौरी के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सेना का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक पूरे नेटवर्क को खत्म नहीं कर दिया जाता. Rajouri Encounter Live: जंगल में लगी आग से बढ़ीं आतंकियों की मुश्किलें Rajouri Encounter Live: मुठभेड़ वाले इलाके के कुछ हिस्सों में आग लगने की खबर भी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार सुरक्षाबलों को इसका रणनीतिक फायदा मिल सकता है क्योंकि घने जंगलों में छिपे आतंकियों की लोकेशन ट्रैक करना आसान हो जाएगा. सेना लगातार ऊंचाई वाले इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर रही है. Operation Sheruwali LIVE: आतंकियों का मुख्य हाइडआउट तबाह Rajouri Encounter Live: सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के मुख्य हाइडआउट को ध्वस्त कर दिया है. वहां से राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान बरामद हुआ है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे आतंकियों की सप्लाई लाइन टूट गई है और लंबे समय तक जंगलों में छिपे रहना अब उनके लिए मुश्किल होगा. इलाके में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. Rajouri Encounter Live: 10 हजार फीट की ऊंचाई पर मजबूत घेराबंदी Operation Sheruwali

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आम का कलाकंद और गुलकंद लस्सी का स्वाद बना रहा लोगों को...

होमफोटोलाइफ़फूड स्वाद और ठंडक का डबल धमाका! गन्ने का जूस, आम का कलाकंद और लस्सी छाई बाजार में Last Updated:May 28, 2026, 11:38 IST Ajmer Pushkar Food News: भीषण गर्मी के बीच अजमेर और पुष्कर में आम का कलाकंद, गन्ने का ताजा जूस और गुलकंद लस्सी लोगों को स्वाद और ठंडक का अनोखा अनुभव दे रहे हैं. स्थानीय बाजारों और मिठाई की दुकानों पर इन खास व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ रही है. आम के फ्लेवर से तैयार कलाकंद मिठास और ताजगी का स्वाद दे रहा है, वहीं गुलकंद लस्सी और गन्ने का जूस गर्मी से राहत पहुंचाने में लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. पर्यटक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इन देसी स्वादों का आनंद ले रहे हैं, जिससे अजमेर-पुष्कर की फूड कल्चर को नई पहचान मिल रही है. अजमेर के केसरगंज क्षेत्र में रसीला जूस पार्लर गर्मियों में लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल है. यहां ताजे फलों से तैयार फ्रेश फ्रूट जूस, पपीता शेक और मिक्स फ्रूट शेक का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. ठंडे शेक, आइसक्रीम ड्रिंक्स और स्पेशल फलाहारी जूस युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं. गर्मी से राहत पाने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. अजमेर के डीएवी कॉलेज रोड पर स्थित गन्ने के जूस की यह दुकान गर्मियों में लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. यहां खास बात यह है कि पारंपरिक लकड़ी की मशीन से गन्ने का ताजा जूस निकाला जाता है, जिसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है. बर्फ और नींबू के साथ परोसा जाने वाला यह ठंडा जूस गर्मी में राहत देता है. सुबह से शाम तक यहां ग्राहकों की अच्छी भीड़ दिखाई देती है. राजस्थान की तपती गर्मियों में अजमेर शहर अपने स्वादिष्ट और ठंडक देने वाले पेय पदार्थों के लिए खास पहचान रखता है. यहां की कई प्रसिद्ध जगहों पर मिलने वाले जूस, लस्सी, सोडा और पारंपरिक मिठाइयां लोगों को गर्मी से राहत देने के साथ स्वाद का अनोखा अनुभव भी देती हैं. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक इन ठंडी चीजों का खूब आनंद लेते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अजमेर के अजयनगर क्षेत्र में स्थित सोनू जूस सेंटर युवाओं का पसंदीदा स्पॉट बना हुआ है. यहां अलग-अलग फ्लेवर के ड्रिंक्स खास तरीके से तैयार किए जाते हैं. नींबू, पुदीना, सोडा और बर्फ को मैश कर बनाए गए अलग-अलग ड्रिंक्स लोगों को गर्मियों में खूब राहत देता है. शाम के समय यहां युवाओं की अच्छी भीड़ देखने को मिलती है. पुष्कर का लक्ष्मी मिष्ठान भंडार अपने स्वादिष्ट मालपुओं के साथ-साथ खास गुलकंद लस्सी के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है. यहां ताजे पुष्कर के गुलाबों से तैयार गुलकंद डालकर पारंपरिक तरीके से लस्सी बनाई जाती है, जिसका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. गर्मियों में यह ठंडी और स्वाद से भरपूर लस्सी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ताजगी और राहत देती है. अजमेर के फव्वारा सर्किल चौराहे पर स्थित जोधा स्वीट्स गर्मियों में अपने खास आम के कलाकंद के लिए प्रसिद्ध है. यहां ताजे आम और मावे से तैयार किया जाने वाला यह स्वादिष्ट कलाकंद लोगों को बेहद पसंद आता है. मिठाई प्रेमियों के लिए यह खास आकर्षण बना रहता है. ठंडा और मीठा स्वाद गर्मी में राहत देने के साथ पारंपरिक मिठास का अनोखा अनुभव भी कराता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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