भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

फाइनेंस पर खरीदा है मोबाइल और लैपटॉप तो न भूलें ईएमआई चुकाना,...

Last Updated:May 21, 2026, 12:24 IST RBI New Rule : रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली के लिए नए प्रस्‍ताव पेश किए हैं, जिन्‍हें 1 अक्‍टूबर, 2026 से लागू किया जा सकता है. आरबीआई ने कहा है कि अगर किसी ग्राहक ने फाइनेंस कराकर मोबाइल या लैपटॉप खरीदा है और 90 दिन से ज्‍यादा का डिफॉल्‍ट किया है तो बैंक उसकी सर्विस बंद कर सकते हैं. आरबीआई ने बैंकों को लोन डिफॉल्‍टर्स के मोबाइल बंद करने की अनुमति का प्रस्‍ताव दिया है. नई दिल्‍ली. टेलीग्राम रेगुलेटर ट्राई के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि भारत अब दुनिया के सबसे बडे़ मोबाइल फोन बाजार में से एक बन चुका है, जहां 1.16 अरब मोबाइल कनेक्‍शन हैं. देश के कुल इलेक्‍ट्रॉनिक उपभोक्‍ताओं में से एक तिहाई यानी करीब 40 करोड़ ने छोटे लोन लेकर अपने गैजेट्स खरीदे हैं. इसका मतलब है कि अगर 3 में से करीब 1 आदमी अपना लैपटॉप और मोबाइल फाइनेंस कराकर खरीदता है. रिजर्व बैंक ने ऐसे उपभोक्‍ताओं के लिए अब नियमों को कड़ा करने का मन बना लिया है. आरबीआई ने प्रस्‍ताव दिया है कि अगर फाइनेंस पर खरीदे मोबाइल या लैपटॉप की ईएमआई नहीं चुकाई गई तो बैंक इन गैजेट्स के फंक्‍शंस को बंद कर सकते हैं. रिजर्व बैंक के हालिया प्रस्‍ताव में कहा गया है कि अगर इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों की ईएमआई 90 दिन से ज्‍यादा समय से बकाया रही तो बैंकों को पहले नोटिस देना होगा और फिर इन गैजेट्स को बंद करा सकते हैं. आरबीआई ने कहा है कि लोन लेने वालों को पहले 60 दिन का ओवरड्यू होने पर नोटिस देना होगा और पुनर्भुगतान के लिए 21 दिन का समय देना होगा. इसके बावजूद अगर पैसे नहीं चुकाए जाते तो बैंक दूसरी नोटिस देकर एक सप्‍ताह का समय और देंगे फिर उसके बाद गैजेट्स को बंद कराया जा सकता है. ग्राहक से पहले ही लेनी होगी अनुमतिआरबीआई ने अपने प्रस्‍ताव में कहा है कि कर्ज देने वाले बैंकों को लोन देते समय ही ग्राहक के साथ इस तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट बनवाना होगा और उसकी अनुमति भी लेनी होगी. न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले साल ही बताया था कि आरबीआई ऐसे कानून पर विचार कर रहा है जो बैंकों को अपने कर्ज वसूलने के लिए स्‍मार्टफोन या लैपटॉप को लॉक करने की अनुमति देगा, ताकि ग्राहकों पर बैंकों के पैसे लौटाने का दबाव डाला जा सके. जरूरी सेवाएं बंद नहीं कर सकेंगे बैंकआरबीआई ने अपने प्रस्‍ताव में यह भी कहा है कि बकाया कर्ज की वसूली के दौरान सख्त और अनुचित तरीकों पर रोक जारी रहेगी. बैंक डिफॉल्‍ट करने वाले उधारकर्ताओं के मोबाइल फोन की सेवाओं को बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे. बैंक किसी तकनीक की मदद से इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, आपातकालीन एसओएस और सरकारी सुरक्षा संदेश जैसी जरूरी सेवाओं को बाधित नहीं कर सकेंगे. यदि उधारकर्ता बकाया चुका देता है, तो एक घंटे के भीतर सभी सेवाएं बहाल करनी होंगी. ऐसा न करने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा. बैंक रखेंगे हर कॉल का रिकॉर्डरिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज वसूली के लिए नियुक्त एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता की जानकारी साझा करना या बार-बार कॉल करना और संदेश भेजना कठोर वसूली तरीकों में शामिल होगा. इन सभी तरीकों पर रोक रहेगी. बैंकों को वसूली कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कॉल की संख्या, समय और बातचीत का विवरण शामिल होगा. इन प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर, 2026 से लागू करने की योजना है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

कौन हैं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके? CJP से जुड़ने...

Cockroach Janata Party Founder Abhijeet Dipke: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नया नाम तेजी से वायरल हो रहा है- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी. इंस्टाग्राम पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित डिजिटल अभियान देखते ही देखते करोड़ों युवाओं तक पहुंच गया है. बेरोजगारी, सिस्टम पर तंज, राजनीति पर व्यंग्य और युवाओं की भाषा में तैयार किए गए कंटेंट ने सीजेपी को इंटरनेट पर चर्चा का बड़ा विषय बना दिया है. अब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ चुकी है कि क्या यह सिर्फ एक वायरल मीम ट्रेंड है या फिर युवाओं की नाराजगी का नया चेहरा? सोशल मीडिया कैंपेनिंग में अभिजीत पहले से सक्रिय राजनीतिक रणनीति और सोशल मीडिया कैंपेनिंग में अभिजीत पहले से सक्रिय रहे हैं. साल 2020 से 2022 के बीच वह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में प्रमुख वॉलंटियर के रूप में काम कर चुके हैं. इसके अलावा 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने आप के साथ मिलकर चुनावी रणनीति और डिजिटल कैंपेन पर काम किया था. अब वही अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के जरिए सोशल मीडिया पर नया डिजिटल प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. सीजेपी की शुरुआत कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई. पहले यह एक्स पर एक व्यंग्यात्मक ट्रेंड के रूप में सामने आया, लेकिन जल्द ही इंस्टाग्राम पर इसका अकाउंट लॉन्च हुआ और कुछ ही दिनों में इसके फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंच गए. इंस्टाग्राम पर सीजेपी की लोकप्रियता इंस्टाग्राम पर सीजेपी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके फॉलोअर्स 10.8 मिलियन यानी 1 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर करीब 8.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 13.3 मिलियन और आम आदमी पार्टी के करीब 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं. खास बात यह है कि सीजेपी ने बेहद कम समय में यह आंकड़ा हासिल किया है. सीजेपी की पोस्ट्स में बेरोजगारी, पेपर लीक, सिस्टम से नाराजगी, राजनीतिक बयानबाजी और युवाओं की रोजमर्रा की परेशानियों को मीम्स और व्यंग्य के जरिए पेश किया जाता है. यही वजह है कि यह कंटेंट युवाओं के बीच तेजी से वायरल हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि सीजेपी ने खुद को पूरी तरह गंभीर राजनीतिक संगठन के बजाय एक डिजिटल सटायर मूवमेंट की तरह पेश किया है. पार्टी से जुड़ने के लिए जो एलिजेबिलिटी बताए गए हैं, वे भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इनमें लिखा गया है: बेरोजगार होना चाहिए आलसी होना चाहिए हमेशा ऑनलाइन रहने वाला होना चाहिए प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालने की क्षमता होनी चाहिए इन शर्तों को लोग मजाकिया अंदाज में शेयर कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे युवाओं की निराशा और सिस्टम से असंतोष की झलक भी दिखाई दे रही है. सीजेपी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में कहा कि जब सिस्टम को गटर बनाया हुआ है तो कहीं ना कहीं कॉकरोच पैदा होंगे. NEET पेपर लीक हुआ किसी क्रोकोडाइल को जेल हुई? महंगाई बढ़ रही है, पेट्रोल डीजल महंगा है क्रोकोडाइल ऐश कर रहे हैं. सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पर ‘BJP बनाम CJP’ लिखते हुए पोस्ट शेयर किया, जिसके बाद यह ट्रेंड और तेजी से वायरल हो गया. वहीं महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी इस अभियान को लेकर प्रतिक्रिया दी है. Source link

ताज़ा खबर

Falta Repolling Live: फाल्टा में वोटिंग जारी, सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम,...

होमताजा खबरदेश Falta Repolling Live: फलता में वोटिंग जारी, जहांगीर खान छोड़ चुके हैं मैदान Last Updated:May 21, 2026, 10:27 IST Repolling In Falta Live Update: फाल्टा विधानसभा में 29 अप्रैल का मतदान रद्द होने के बाद आज रीपोलिंग हो रहा है. आज के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा दोगुनी कर दी है. CAPF और वेबकास्टिंग से कड़ी निगरानी रखी ज…और पढ़ें फलता विधानसभा सीट पर आज रीपोलिंग हो रही है. Repolling In Falta Live Update:  पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान कराया जा रहा है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मानते हुए रद्द कर दिया था और रीपोलिंग का आदेश दिया था. अब दोबारा हो रहे मतदान को लेकर चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. सुरक्षा व्यवस्था को पहले के मुकाबले लगभग दोगुना कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा की आशंका को रोका जा सके. चुनाव आयोग के मुताबिक फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर इस बार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मजबूत तैनाती की गई है. हर बूथ पर आठ CAPF जवान तैनात रहेंगे, जबकि 29 अप्रैल के मतदान के दौरान केवल चार जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी. आयोग का कहना है कि इस बार किसी भी तरह की अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी. करीब 35 कंपनियों के केंद्रीय बल पूरे इलाके में तैनात किए गए हैं. इसके अलावा 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था भी बेहद कड़ी कर दी है. हर बूथ के अंदर दो वेब कैमरे और बाहर एक कैमरा लगाया गया है. पूरे मतदान की लाइव वेबकास्टिंग जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर से मॉनिटर की जाएगी. आयोग ड्रोन सर्विलांस पर भी विचार कर रहा है. इसके साथ ही तीन विशेष चुनाव पर्यवेक्षकों को पूरे मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. जहांगीर खान ने चुनावी मुकाबले से हटे Falta Repolling Live: फाल्टा में 9 बजे तक 20 फीसदी वोटिंग Falta Repolling Live: फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को दोबारा वोटिंग हो रही है. मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलेगा. चुनाव आयोग ने 285 बूथों पर सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां तैनात की हैं. सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की जा रही है. इससे पहले, उस केंद्र में मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे. इसलिए, आयोग ने सभी बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया. सुबह 9 बजे तक 20.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. Falta Repolling Live: एक लाख वोटों से जीतूंगा Falta Repolling Live: BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने री-पोलिंग में बड़ी जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि BJP फाल्टा सीट पर एक से डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी. पांडा ने आरोप लगाया कि पहले मतदान के दौरान कई बूथों पर भारी गड़बड़ी हुई थी. उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर BJP के चुनाव चिह्न पर सेलोटेप लगाया गया और कैमरों को घुमाकर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई. BJP ने इन शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग से दोबारा मतदान की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने री-पोलिंग का फैसला लिया. अब पूरे राज्य की नजर फल्टा पर टिकी हुई है, जहां कड़ी सुरक्षा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. Phalta Repolling Live: फाल्टा को विशेष पैकेज देने का ऐलान Falta Repolling Live: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में भव्य रोड शो किया और घोषणा की थी कि अगले राज्य बजट में फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज शामिल किया जाएगा. उन्होंने यह भी वादा किया कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा में मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी. रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने TMC नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘पुष्पा’ कहने वाला अब कहां है? उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था, क्योंकि उसे पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहे थे, इसलिए वह मैदान छोड़कर भाग गया. सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि फाल्टा के लोग अब खुलकर और निष्पक्ष तरीके से मतदान कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है. यह दूसरे स्वतंत्रता दिवस जैसा महसूस हो रहा है. 10 साल बाद मतदाताओं को अपने मतदान अधिकार वापस मिले हैं. Source link

ताज़ा खबर

Explainer: क्या नदी में दूध डालने से वह प्रदूषित हो सकती है-...

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि एनजीटी की भोपाल बेंच ने हाल ही में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में एक अनुष्ठान के दौरान 11,000 लीटर दूध बहाने और 210 साड़ियां विसर्जित करने के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है. एनजीटी ने इस मामले में केंद्री प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी है. तो आइए जानते हैं कि साइंस नदी में दूध डालने पर क्या कहती है, क्या इससे नदी प्रदूषित हो सकती है. भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नदियों को ‘मां’ और साक्षात चेतना मानकर पूजा जाता है. इसी श्रद्धा भाव से नदियों में दूध, दही, घी, तेल, फूल और वस्त्र व अन्य सामग्रियां अर्पित करते आए हैं. लेकिन मौजूदा हालात में जब हमारी नदियां प्रदूषण का शिकार हो रही हों तो ये देखना जरूरी है कि सजीव माने जाने वाली नदियों की सेहत के लिए क्या जरूरी और क्या नहीं. विज्ञान और रिसर्च क्या कहती है? विज्ञान के दृष्टिकोण से दूध एक “शुद्ध खाद्य पदार्थ” जरूर है लेकिन जब ये पानी में जाता है, तो अत्यधिक कंसंट्रेटेड जैविक प्रदूषक का काम करने लगता है. डेयरी विज्ञान और पर्यावरण इंजीनियरिंग के शोध बताते हैं कि दूध क बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानि बीओडी स्तर घरेलू सीवेज यानि नाली के गंदे पानी की तुलना में बहुत अधिक होता है यानि वो गंदे पानी की तुलना में पानी को ज्यादा प्रदूषित करता है. 1 लीटर दूध को पूरी तरह से डीकंपोज करने के लिए पानी को जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, वह हजारों लीटर सामान्य पानी की ऑक्सीजन को खत्म कर सकती है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जब 11,000 लीटर जैसी भारी मात्रा में दूध नदी में जाता है, तो ये उस हिस्से के पानी में ऑक्सीजन के स्तर को करीब शून्य कर सकता है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों की तत्काल मौत हो सकती है. महीनों तक पानी पीने लायक नहीं रहता पर्यावरणविदों का कहना है कि इसका असर केवल तुरंत नहीं दिखता. दूध बहने के बाद नदी के पारिस्थितिकी तंत्र यानि इकोसिस्टम को जो नुकसान होता है, उसका ‘सेकंड फेज’ ज्यादा खतरनाक होता है. पानी में दूध के सड़ने से जो बैक्टीरिया पनपते हैं, वे महीनों तक पानी को पीने और नहाने के लिए अनुपयुक्त बना देते हैं. तेल और घी से नुकसान धार्मिक तौर पर जब नदी तेल और घी अर्पित करते हैं तो ये पानी से हल्के होते हैं, इसलिए पानी की सतह पर एक अदृश्य या गाढ़ी परत बना लेते हैं. यह परत हवा की ऑक्सीजन को पानी में घुलने से रोक देती है. साथ ही, यह सूरज की रोशनी को पानी के नीचे तक जाने से रोकती है, जिससे पानी के अंदर मौजूद पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है. बैक्टीरिया और फंगस का बढ़ना दूध और दही में मौजूद लैक्टोज और प्रोटीन पानी में जाकर हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस के लिए भोजन का काम करते हैं. इससे पानी में सड़न पैदा होती है, बदबू आती है और पानी पीने या नहाने योग्य नहीं रह जाता. कपड़ों या साड़ियों का विसर्जन दूध के साथ-साथ साड़ियों या अन्य कपड़ों का विसर्जन पानी में होने पर वो कई हानिकारक चीजें पानी में घोलते हैं, जिसमें टेक्सटाइल डाइस और माइक्रोप्लास्टिक्स होते हैं, टेक्सटाइल डाइस रासायनिक रंग होते हैं. ये तत्व नदी के तलवे में जमा होकर जलीय वनस्पतियों का दम घोंट देते हैं. तो इसका सीधा मतलब ये है कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से दूध नदी में बहाना पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता, खासकर जब मात्रा बहुत ज्यादा हो. वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इन सामग्रियों को नदी में डालने से पानी प्रदूषित होता है. विज्ञान की भाषा में इसे ऑर्गेनिक पोल्यूशन (जैविक प्रदूषण) कहा जाता है. क्या हैं भारत के जल कानून भारतीय जल अधिनियम, 1974 की धारा 24 पानी में प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण की बात करती है. ये कहती है कि किसी भी ऐसी प्रदूषणकारी या जैविक सामग्री को नदियों, धाराओं या कुओं में डालने पर सख्त रोक लगानी चाहिए, क्योंकि ये पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं. एनजीटी ने यह भी पाया कि सीपीसीबी के पास वर्तमान में ऐसी कोई स्पष्ट और समर्पित गाइडलाइन नहीं है जो धार्मिक अनुष्ठानों में नदी में दूध चढ़ाने को नियमबद्ध या रेगुलेट करती हो. अदालत ने इसी कमी को पूरा करने के लिए दोनों बोर्डों से कहा है कि वे वैज्ञानिक डेटा जुटाएं और यदि जरूरी हो, तो भविष्य के लिए नए नियम या दिशा-निर्देश सुझाएं. प्राचीन काल से अब तक कितना अंतर प्राचीन काल में नदियों में जो सामग्री दूध समेत अर्पित की जाती थी, वो प्रतीकात्मक तौर पर होती थी और आबादी बहुत कम होने की वजह से ऐसा करने वाले भी बहुत कम होते हैं. ऐसा चढ़ाया जाने वाला दूध नदियों के लिए कभी समस्या नहीं बनता था लेकिन आज टैंकरों के माध्यम से हजारों लीटर दूध नदी में बहाना सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है. फिर पुराने समय में नदियां अपने पूरे वेग के साथ बहती थीं. तब यदि कोई प्रतीकात्मक रूप से दूध या तेल अर्पित करता था, तो नदी की अपनी ‘खुद को साफ करने की क्षमता’ उसे संभाल लेती थी. आज नदियों में पानी का बहाव कम हो गया है. अब हमारी आबादी करोड़ों में है. जब हजारों लीटर दूध या टन के हिसाब से सामग्री एक साथ नदियों में बहती है, तो नदियां उस बोझ को संभाल नहीं पातीं. Source link

ताज़ा खबर

दिल्ली की गर्मी में मिल गया छुपा हुआ गांव, यहां पहुंचते ही...

Last Updated:May 21, 2026, 08:17 IST दिल्ली की भागदौड़, ट्रैफिक और भीषण गर्मी के बीच अगर आप कुछ देर सुकून और गांव जैसा शांत माहौल महसूस करना चाहते हैं, तो प्रगति मैदान के पास स्थित क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए बेहतरीन जगह साबित हो सकती है. यहां मिट्टी के घर, देसी गलियां, पारंपरिक कला और शांत वातावरण लोगों को शहर के शोर से दूर एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं. खास बात यह है कि यह जगह न सिर्फ संस्कृति प्रेमियों बल्कि सोशल मीडिया और aesthetic तस्वीरों के शौकीनों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.टूर दिल्ली की गर्मी इन दिनों लोगों का हाल बेहाल कर रही है. ऐसे में अगर आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहां कुछ देर सुकून मिले, ठहराव महसूस हो और शहर की भागदौड़ से अलग माहौल दिखे, तो दिल्ली का क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. यहां पहुंचते ही ऐसा एहसास होता है जैसे अचानक किसी गांव की गलियों में आ गए हों. मिट्टी के घर, देसी कला, शांत माहौल और हर तरफ भारतीय संस्कृति की झलक इस जगह को खास बना देती है. दिल्ली की ट्रैफिक, शोर और धूप से निकलकर जैसे ही आप क्राफ्ट म्यूजियम के अंदर कदम रखते हैं, माहौल पूरी तरह बदल जाता है. यहां मिट्टी से बने घर, लकड़ी के दरवाजे और देसी अंदाज में बनी छोटी-छोटी गलियां गांव जैसा एहसास कराती हैं. ऐसा लगता है जैसे शहर से दूर किसी शांत जगह पर पहुंच गए हों. अगर आप इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया पर अलग और aesthetic तस्वीरें डालना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है. मिट्टी की दीवारें, रंगीन सजावट और देसी बैकग्राउंड आपकी तस्वीरों को बिल्कुल अलग लुक दे सकते हैं.वैसे यहां पहुचना भी असान है क्राफ्ट म्यूजियम प्रगति मैदान के पास स्थित है. मेट्रो से जाना सबसे आसान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आपको हैंडमेड चीजें पसंद हैं, तो यह जगह और भी खास लग सकती है. यहां कई बार कलाकार अपने हाथों से मिट्टी के बर्तन बनाते, पेंटिंग करते या पारंपरिक चीजें तैयार करते दिख जाते हैं. इसे देखकर समझ आता है कि हमारी पुरानी कला कितनी खूबसूरत और मेहनत भरी है. यहां अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियां और संस्कृति को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है. कहीं राजस्थान का देसी टच दिखेगा, तो कहीं उत्तर-पूर्व और गुजरात की झलक नजर आएगी. हर कोना आपको भारत की अलग-अलग परंपराओं से जोड़ता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

ताज़ा खबर

भारत ने UN में पाकिस्तान को घेरा, सीमा पार आतंकवाद पर सख्त...

होमताजा खबरदेश अरे तुम तो अपने ही लोगों पर बम बरसाते हो…UN में भारत ने पाकिस्तान को रगड़ा Last Updated:May 21, 2026, 07:25 IST India Slams Pakistan: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर पाकिस्तान को खूब सुनाया है. भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक के जरिए नागरिकों की मौत का आरोप लगाया. भारत ने 1971 के नरसंहार का भी जिक्र किया और कहा कि तुम तो खुद अपने लोगों पर ही बम बरसाते हो. ख़बरें फटाफट संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है. India Slams Pakistan: भारत ने आतंकवाद पर एक बार फिर पाकिस्तान को लताड़ा है. यूएन यानी संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी. यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला. पाकिस्तान पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार और हिंसा से जुड़ा रहा है, वह भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं रखता. इतना ही नहीं, सीमा पार आतंकवाद पर भारत ने UN में कड़ा संदेश दिया. पी हरीश ने आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की मांग की. संयुक्त राष्ट्र में गुरुवार को भारत ने UNAMA यानी अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि साल 2026 के पहले तीन महीनों में पाकिस्तान की सेना की सीमा पार कार्रवाई और एयरस्ट्राइक के कारण अफगानिस्तान में 750 नागरिकों की मौत और घायल होने के मामले सामने आए. UNAMA के मुताबिक, 95 में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे. UNAMA का पूरा नाम है- यूनाइटेड मिशन असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान. अफगानिस्तान के नाम पर पाकिस्तान को भारत ने धोया पाकस्तान ने जिस तरह से अफगानिस्तान पर अटैक किया था, उसे लेकर भारत ने उसे अच्छे से धोया. भारत ने आगे कहा कि इसी साल रमजान के दौरान मार्च महीने में पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर एयरस्ट्राइक की थी. इस हमले में 269 नागरिक मारे गए और 122 लोग घायल हुए. भारत ने कहा कि यह हमला तरावीह की नमाज के बाद हुआ, जब लोग मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. 1971 जंग का जिक्र भारत ने यह भी कहा कि यूनाइटेड मिशन असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान के अनुसार पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए. भारत ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ नरसंहार और 4 लाख महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था. भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार अपनी अंदरूनी विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा और प्रचार का सहारा लेता रहा है. सीमा पार आतंकवाद पर भारत का UN में कड़ा संदेश संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि सीमा पार से होने वाला आतंकवाद आज भी क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत कई दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है. भारत ने साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन, पनाह या मदद देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी कारण के नाम पर आम नागरिकों पर हमला कभी सही नहीं ठहराया जा सकता. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

क्या PM मोदी लेंगे कोई बड़ा फैसला? विदेश से आते ही बुलाई...

होमताजा खबरदेश क्या PM मोदी लेंगे कोई बड़ा फैसला? विदेश से आते ही बुलाई साल की पहली अहम बैठक Last Updated:May 21, 2026, 06:22 IST पीएम मोदी आज यानी गुरुवार को मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे. लगभग एक साल बाद हो रही यह बैठक, कैबिनेट और संगठन में होने वाले बहुचर्चित फेरबदल से ठीक पहले हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे. पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक आज यानी बृहस्पतिवार को होगी. इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों और भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी. आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे. मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस साल मंत्रिपरिषद की पहली बैठक होगी. सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल ही में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के विभिन्न पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र कर सकते हैं, और मंत्रालयों एवं विभागों को नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए आवश्यक दिशानिर्देश दे सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, जहाजरानी और रसद जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है. पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद, मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि नागरिकों और युद्ध के कारण प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आम जनता के लाभ के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

समस्तीपुर में गन्ना खेती का नया तरीका…. एकल गांठ विधि से घटेगी...

Last Updated:May 20, 2026, 23:32 IST समस्तीपुर में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए अब वैज्ञानिक तकनीक एक नई उम्मीद लेकर आई है. हर सीजन में बाजार से महंगे बीज खरीदने की मजबूरी जहां खेती की लागत बढ़ा देती है, वहीं कई बार उत्पादन भी संतोषजनक नहीं मिलता. ऐसे में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई “एकल गांठ विधि” किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इस तकनीक के जरिए किसान अपने ही खेत में कम लागत में स्वस्थ और अधिक पौधे तैयार कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर. गन्ने की खेती करने वाले अधिकांश किसान हर सीजन में बाजार से बीज खरीदते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है. कई बार महंगे बीज लेने के बावजूद पौधों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलती. ऐसे में यदि किसान अपने ही खेत में तैयार गन्ने से पौधा बना लें, तो खर्च कम होने के साथ-साथ बेहतर उत्पादन भी हासिल किया जा सकता है. इसी उद्देश्य से लोकल लैटिन की टीम ने पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्र पहुंचकर वैज्ञानिक डॉ. बलवंत कुमार से खास बातचीत की. वैज्ञानिक ने बताया कि गन्ना ऐसी फसल है जिसे आधुनिक तकनीक के जरिए किसान स्वयं तैयार कर सकते हैं. इसके लिए “एकल गांठ विधि” सबसे उपयोगी और किफायती तरीका माना जा रहा है. इस विधि में किसान सबसे पहले स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाले गन्ने का चयन करते हैं. इसके बाद गन्ने को विशेष कटर मशीन से इस प्रकार काटा जाता है कि प्रत्येक टुकड़े में केवल एक गांठ मौजूद रहे.यही गांठ आगे चलकर नए पौधे के रूप में विकसित होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह तरीका कम जगह में अधिक पौधा तैयार करने के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रहा है. नमी का सही प्रबंधन पौधा तैयार करने में निभाता है अहम भूमिकाडॉ. बलवंत कुमार ने बताया कि कटिंग करने के बाद किसान इन एकल गांठों को ट्रे, प्लास्टिक ग्लास या छोटे कंटेनर में लगा सकते हैं. इसके लिए वर्मी कंपोस्ट, कोकोपीट या अच्छी भुरभुरी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण और नमी मिल सके.गन्ने की गांठ को लगाने के बाद नियमित रूप से नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. यदि मिट्टी सूख जाती है तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 25 से 35 दिनों के भीतर इन गांठों से मजबूत पौधे तैयार हो जाते हैं. जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब किसान उन्हें खेत में रोप सकते हैं. यदि खेत तैयार न हो या पौधों को कुछ दिन और सुरक्षित रखना हो, तो ट्रे में ही नमी बनाए रखते हुए पौधों को रखा जा सकता है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम बीज में अधिक पौधे तैयार हो जाते हैं और रोगमुक्त पौध मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है. इससे किसान अतिरिक्त पौध तैयार कर दूसरे किसानों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं. सही किस्म का चयन बढ़ा सकता है उत्पादन वैज्ञानिक ने बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि केवल पौधा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किस्म का चयन करना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने बताया कि बिहार और आसपास के जिलों के किसानों के लिए राजेंद्र गन्ना-1 काफी उपयुक्त किस्म मानी जाती है. यह किस्म बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों को अच्छा लाभ भी देती है. इसके अलावा किसान CoP 112 किस्म का भी उपयोग कर सकते हैं, जो कई क्षेत्रों में बेहतर परिणाम दे रही है. वहीं जल जमाव वाले क्षेत्रों के लिए “राजेंद्र गन्ना-2” अधिक लाभकारी मानी जाती है क्योंकि यह जलभराव को सहन करने की क्षमता रखती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और सही किस्म का उपयोग करें तो गन्ने की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है. आज के समय में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, About the Author Madhuri Chaudhary पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

ताज़ा खबर

मीन राशि वालों की आज चमक उठेगी किस्मत! ग्रहो की बरसेंगी कृपा,...

Last Updated:May 21, 2026, 03:25 IST Aaj Ka Meen Rashifal 21 May 2026: मीन राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छे परिणाम लेकर आएगा. पारिवारिक जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बना रहेगा. सेहत अच्छी रहेगी और आप पूरे दिन सक्रिय बने रहेंगे. समय पर संतुलित और पोषक आहार लेने से सेहत और बेहतर होगी. मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है. कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम देखने को मिल सकता है और सफलता के नए रास्ते खुलेंगे. नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, वहीं पदोन्नति या सम्मान मिलने के भी योग बन रहे हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और निवेश से जुड़े फैसलों के लिए समय अनुकूल रहेगा. दिनभर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, आज गुरुवार का दिन मीन राशि के जातकों के लिए बेहद अनुकूल रहने वाला है. प्रेम जीवन में अपनापन और विश्वास बढ़ेगा, जिससे रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत और खुशहाल बनेंगे. पार्टनर के साथ बेहतर संवाद आपकी बॉन्डिंग को और गहरा करेगा. मीन राशि वालों का करियर राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज करियर के क्षेत्र में तालमेल और सूझबूझ सफलता की कुंजी बनेगी. कार्यस्थल पर सहकर्मियों का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिससे आपके अधूरे काम तेजी से पूरे हो सकते हैं. आपका धैर्य, सकारात्मक सोच और विनम्र व्यवहार लोगों को प्रभावित करेगा. टीम के साथ बेहतर समन्वय आपकी छवि को मजबूत बनाएगा और कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं. मीन राशि वालों का व्यापार राशिफलमीन राशि के व्यापारियों के लिए आज का दिन सफलता और लाभ के नए संकेत लेकर आया है. कारोबार में सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे और काम की रफ्तार बढ़ेगी. किसी विश्वसनीय मित्र या बिज़नेस पार्टनर के सहयोग से नए अवसर आपके सामने आ सकते हैं. साथ ही किसी बड़े प्रोजेक्ट या महत्वपूर्ण ऑर्डर मिलने के भी प्रबल योग बन रहे हैं, जो आपके व्यापार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. मीन राशि वालों का स्वास्थ राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद अनुकूल दिन रहेगा. शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहेगी, वहीं पुराने रोगों से राहत मिलने के भी सकारात्मक संकेत हैं. समय पर संतुलित और पोषक आहार लेने से सेहत और बेहतर होगी. बच्चों का स्वास्थ्य भी सामान्य और सुदृढ़ रहेगा. कुल मिलाकर आज का दिन स्वास्थ्य के मामले में संतोष और प्रसन्नता देने वाला रहेगा. मीन राशि वालों का आर्थिक राशिफलआज आर्थिक मामलों में आपके लिए सकारात्मक और लाभकारी परिस्थितियां बनती नजर आ रही हैं. Bधन संबंधी जरूरत पड़ने पर मित्रों और करीबी लोगों का पूरा सहयोग मिलेगा. पुराने निवेश से अच्छे लाभ के संकेत हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. साथ ही नए निवेश के अवसर भी सामने आ सकते हैं.यदि आप धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेते हैं, तो आने वाले समय में आपको इसके शानदार परिणाम और लाभ मिलने की संभावना है. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज प्रेम और वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहने वाला है. शादीशुदा लोगों के रिश्तों में अपनापन और तालमेल बढ़ेगा, जिससे संबंध और मजबूत होंगे. प्रेमी जोड़ों के लिए दिन रोमांस से भरपूर रहेगा और साथी के साथ बिताए पल खास बनेंगे. वहीं जो लोग अभी सिंगल हैं, उनके जीवन में नई शुरुआत के संकेत हैं, मनपसंद साथी से मुलाकात या प्रेम प्रस्ताव मिलने के योग बन रहे हैं. मीन राशिफल वाले जरूर करेंयह उपाय आज आपके लिए लकी नंबर 4 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. जो जातक धर्म-कर्म में रुचि रखते हैं, वे आज देव गुरु ब्रह्मस्पति के मंदिर जाकर भगवान का पूजन करे. साथ ही गरीबों को पिली वस्तु का दान करें. यह उपाय मानसिक शांति देगा और आत्मविश्वास बढ़ाएगा. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

ताज़ा खबर

India Italy Agreements: कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते,...

होमताजा खबरदेश कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते Last Updated:May 20, 2026, 23:33 IST भारत और इटली के बीच रिश्ते अब सिर्फ डिप्लोमैटिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहे. दोनों देशों ने कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल सहयोग समेत 15 बड़े समझौतों पर सहमति बनाई है. इन डील्स को भारत-इटली आर्थिक साझेदारी के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे कारोबार, निवेश और रोजगार के नए मौके खुल सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को अपग्रेड करते हुए स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की. इसके साथ ही 15 डील पर साइन हुई, ज‍िसमें ट्रेड को 20 ब‍िल‍ियन यूरो (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाना और ‘मेक इन इंडिया-मेक इन इटली’ में भागीदारी बढ़ाना है. इन फैसलों से कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र को बड़ा फायदा होने वाला है. हम आपको हर समझौते में भारत के ल‍िए क्‍या है, वो बता रहे हैं. स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप क्या है समझौता: दोनों देशों ने अपने पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों को अपग्रेड करते हुए विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है. इससे क्या मिलेगा: इससे भारत और इटली के बीच व्यापार, तकनीक, क्लीन एनर्जी, सुरक्षा और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी. साथ ही, दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंध, शिक्षा, संस्कृति और गतिशीलता के नए रास्ते खुलेंगे. ड‍िफेंस एंड स‍िक्‍योर‍िटी क्या है समझौता: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल रोडमैप और जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत ज्‍वाइंट म‍िलि‍ट्री एक्‍सरसाइज, इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा. इससे क्या मिलेगा: इस समझौते से इटली की दिग्गज रक्षा कंपनियों के लिए भारत में सैन्य उपकरणों के कोड‍िजाइन, कोप्रोडक्‍शन का रास्ता खुलेगा. भारतीय सेनाओं को अत्याधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी मिलेगी और भारत को रक्षा विनिर्माण का ग्लोबल हब बनने में मदद मिलेगी. ट्रेड एंड इन्‍वेस्‍टमेंट क्या है समझौता: दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2029 तक बढ़ाकर लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. साथ ही भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर सहमति बनी है. इससे क्या मिलेगा: भारत में पहले से सक्रिय 800 से अधिक इतालवी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा. भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि-खाद्य उत्पादों के लिए यूरोप का एक बड़ा बाजार खुलेगा, जिससे भारत में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्या है समझौता: भारत के मानव-केंद्रित तकनीक दृष्टिकोण और इटली की अल्गोर-एथिक्स परंपरा को मिलाकर दोनों देश सुरक्षित एआई, डिजिटल क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा में सहयोग करेंगे. इससे क्या मिलेगा: दोनों देशों के आईटी विशेषज्ञ और सुपरकंप्यूटर्स मिलकर अगली पीढ़ी की एआई तकनीक विकसित करेंगे. भारतीय फिनटेक और टेक-स्टार्टअप्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलेगा. इसके अलावा, साइबर हमलों से निपटने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल स्पेस का निर्माण होगा. अंतरिक्ष और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी क्या है समझौता: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इटली की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण, सैटेलाइट विकास और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए समझौता हुआ है. इससे क्या मिलेगा: भारत की किफायती एवं उन्नत अंतरिक्ष क्षमता और इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के मिलन से कम लागत वाले कमर्शियल सैटेलाइट्स का निर्माण होगा. अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों को नई ग्लोबल लैब और अत्याधुनिक तकनीकों का एक्सेस मिलेगा. ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है समझौता: स्वच्छ ऊर्जा, रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ग्रिड और हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के विकास के लिए दोनों देशों ने ऊर्जा साझीदारी को नई दिशा देने की घोषणा की है. इससे क्या मिलेगा: भारत का ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने का सपना सच होगा. इटली की उन्नत रिन्यूएबल ऊर्जा तकनीकों की मदद से भारत को अपने नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी और देश में स्वच्छ ऊर्जा सस्ती होगी. क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्या है समझौता: दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर हाथ मिलाया है. इससे क्या मिलेगा: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी. भारतीय ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को कच्चे माल की बिना रुके आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे घरेलू स्तर पर उत्पादन लागत काफी घट जाएगी. भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार क्या है समझौता: भारत से इटली में नर्सिंग प्रोफेशनल्स की गतिशीलता और आसान आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. इससे क्या मिलेगा: यह समझौता भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार के बड़े और नए अवसर पैदा करेगा. इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को पहचान मिलेगी और दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण में सुधार होगा. प्रवासन और गतिशीलता क्या है समझौता: दोनों नेताओं ने ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे कानूनी रूप से प्रतिभाओं का आदान-प्रदान आसान हो सके. इससे क्या मिलेगा: भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और स्किल्ड प्रोफेशनल्स (जैसे इंजीनियर्स, डॉक्टर्स और नर्सों) के लिए इटली में पढ़ाई और नौकरी के रास्ते बेहद आसान हो जाएंगे. इससे अवैध प्रवासन पर रोक लगेगी और भारतीय युवाओं को यूरोपीय वर्क परमिट आसानी से मिल सकेगा. कनेक्टिविटी और आईएमईसी कॉरिडोर क्या है समझौता: दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEEC) के त्वरित क्रियान्वयन और बंदरगाहों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह सहमत हुए हैं. इससे क्या मिलेगा: भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने का समय और लागत 40% तक कम हो जाएगी. इटली यूरोप के लिए भारत का ‘एनर्जी और लॉजिस्टिक्स गेटवे’ बनेगा. भारतीय समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा और वैश्विक व्यापार में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी. वैश्विक गठबंधन और समुद्री सुरक्षा क्या है समझौता: इटली ने भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया है. इससे क्या मिलेगा: वैश्विक मंचों पर भारत की साख बढ़ेगी.

Scroll to Top