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मेहरानगढ़ का वो शाही कक्ष, जहां दीवारों पर चमकता है सोना… पहली...

Last Updated:May 20, 2026, 23:40 IST Jodhpur Famous Palace: जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किला में स्थित फूल महल आज भी राजपूताना वैभव और शाही संस्कृति की अनोखी झलक दिखाता है. सोने की कारीगरी, शीशों की सजावट, भव्य चित्रकारी और बारीक नक्काशी से सजा यह महल पर्यटकों को खास आकर्षित करता है. कभी राजाओं के निजी दरबार और विशेष मेहमानों के स्वागत का केंद्र रहा. जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में स्थित फूल महल अपनी भव्यता और शाही सजावट के कारण पर्यटकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है. यह महल राजसी ठाठ, सुनहरी कलाकारी और पारंपरिक राजपूत स्थापत्य का शानदार उदाहरण माना जाता है. महल के भीतर प्रवेश करते ही दीवारों और छतों पर बनी बारीक नक्काशी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है. सोने की परत और शीशों की सजावट इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. यहां का माहौल आज भी राजघराने के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाता है. यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस शाही हॉल को देखने जरूर पहुंचते हैं. फूल महल का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा अभय सिंह ने करवाया था. उस समय इस महल का उपयोग राजपरिवार के निजी विश्राम और खास मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता था. महल के हर हिस्से में उस दौर की शाही जीवनशैली साफ दिखाई देती है. भव्य दरबार शैली में बने इस कक्ष में कभी संगीत सभाएं और विशेष आयोजन भी आयोजित होते थे. इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान मारवाड़ की विरासत को करीब से महसूस करने का अवसर देता है. आज भी यह हॉल राजपूताना गौरव की अनमोल धरोहर माना जाता है. फूल महल की सबसे बड़ी खासियत इसकी आकर्षक कलाकृतियां और रंगीन भित्तिचित्र हैं. दीवारों और छतों पर बने चित्र राजपूत काल की परंपराओं, युद्धों और सांस्कृतिक आयोजनों को दर्शाते हैं. महल में मौजूद बारीक शीशा कार्य और सजावटी डिजाइन पर्यटकों को लंबे समय तक अपनी ओर खींचे रखते हैं. यहां की हर दीवार मानो इतिहास की कोई कहानी सुनाती नजर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण पर्यटकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचता है.हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र हुआ करता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. पर्यटक यहां पहुंचकर इसकी नक्काशी और डिजाइन को बेहद करीब से निहारते हैं.कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा मानते हैं. पारंपरिक राजस्थानी कला का यह अद्भुत नमूना फोटोग्राफी प्रेमियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है. शाम की रोशनी में चमकती सुनहरी सजावट इसकी खूबसूरती को और खास बना देती है. कई पर्यटक यहां पहुंचकर लंबे समय तक इसकी कलाकृतियों और नक्काशी को निहारते रहते हैं. महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र माना जाता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा बताते हैं. फूल महल आज जोधपुर आने वाले पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल हो चुका है. यहां पहुंचने वाले लोग राजसी स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत को करीब से महसूस करते हैं. शाम ढलते ही महल की खूबसूरती और भी ज्यादा निखरकर सामने आती है. सुनहरी रोशनी में चमकती दीवारें, शीशों की सजावट और कलात्मक छतें लोगों को अलग ही अनुभव कराती हैं. फूल महल केवल एक शाही कक्ष नहीं, बल्कि मारवाड़ की समृद्ध संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक माना जाता है. इसकी भव्य वास्तुकला और पारंपरिक सजावट आज भी लोगों को राजपूत काल की याद दिलाती है. जोधपुर शहर से मेहरानगढ़ किले तक आसानी से स्थानीय परिवहन उपलब्ध हो जाता है. वहीं शाम के समय किले से दिखाई देने वाला नीले शहर का दृश्य भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है. यही वजह है कि फूल महल आज जोधपुर पर्यटन की खास पहचान बन चुका है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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दुबई वाला एहसास अब जोधपुर में… बुर्ज खलीफा डोसा के स्वाद का...

Last Updated:May 20, 2026, 23:16 IST Jodhpur news: जोधपुर के सरस्वती नगर स्थित मल्हार डोसा सेंटर का बुर्ज खलीफा डोसा चर्चा में, बड़ा साइज, प्रेजेंटेशन और स्वाद से भीड़, करीब 50 तरह के डोसे, गर्मी में फव्वारे की व्यवस्था. मल्हार डोसा सेंटर पर केवल बुर्ज खलीफा डोसा ही नहीं, बल्कि करीब 50 तरह के अलग-अलग डोसे तैयार किए जा रहे हैं. इनमें युवाओं से लेकर परिवारों तक की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई नए फ्लेवर शामिल किए गए हैं. जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर का नाम आते ही लोगों के ज़हन में यहां की मिर्ची बड़ा, प्याज कचौरी और पारंपरिक स्वाद की तस्वीर उभर आती है. लेकिन बदलते दौर के साथ अब शहर के लोगों की खानपान की पसंद भी तेजी से बदल रही है. यही वजह है कि इन दिनों जोधपुर में साउथ इंडियन फूड का क्रेज लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. खास तौर पर एक ऐसा डोसा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसका नाम सुनते ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं. यह खास डोसा है ‘बुर्ज खलीफा डोसा’. दुबई की मशहूर इमारत बुर्ज खलीफा की तर्ज पर तैयार किया जाने वाला यह डोसा अब जोधपुरवासियों के स्वाद का नया आकर्षण बन चुका है. जोधपुर के सरस्वती नगर स्थित मल्हार डोसा सेंटर पर तैयार होने वाला यह बुर्ज खलीफा डोसा अपने बड़े आकार, शानदार प्रेजेंटेशन और खास स्वाद की वजह से लोगों को खूब पसंद आ रहा है. दूर-दूर से लोग यहां सिर्फ इस अनोखे डोसे का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं. लंबे और आकर्षक अंदाज में तैयार होने वाला यह डोसा कई तरह के मसालों और खास चटनियों के साथ परोसा जाता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा देखने को मिल रही है. 50 तरह के डोसे बन रहे लोगों की पसंद मल्हार डोसा सेंटर पर केवल बुर्ज खलीफा डोसा ही नहीं, बल्कि करीब 50 तरह के अलग-अलग डोसे तैयार किए जा रहे हैं. इनमें युवाओं से लेकर परिवारों तक की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई नए फ्लेवर शामिल किए गए हैं. शाम होते ही यहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है और लोग अपने दोस्तों व परिवार के साथ अलग-अलग डोसे का स्वाद लेते नजर आते हैं. यहां आने वाले लोगों का कहना है कि जोधपुर में इस तरह का स्वाद और प्रेजेंटेशन पहले कम देखने को मिलता था, लेकिन अब शहर में फूड एक्सपेरिमेंट का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. खासकर युवा नई-नई डिशेज ट्राय करना पसंद कर रहे हैं. गर्मी में ग्राहकों के लिए खास इंतजाम भीषण गर्मी को देखते हुए मल्हार डोसा सेंटर पर ग्राहकों की सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया है. यहां लोगों को ठंडक महसूस हो, इसके लिए फव्वारों की व्यवस्था की गई है, जिससे पूरा माहौल काफी सुकूनभरा और आकर्षक नजर आता है. सेंटर संचालक पंकज का कहना है कि ग्राहकों को सिर्फ अच्छा स्वाद ही नहीं, बल्कि बेहतर माहौल देने की भी कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि लोगों को कुछ नया और अलग स्वाद देने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं. यही वजह है कि अब लोग मजाकिया अंदाज में यह भी कहने लगे हैं कि जब जोधपुर में ही बुर्ज खलीफा डोसा मिल रहा है, तो दुबई जाने की क्या जरूरत. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jodhpur,Rajasthan Source link

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S400 Missile Price Per Unit | S-400 एयर डिफेंस की एक मिसाइल...

होमताजा खबरदेश S-400 की एक मिसाइल की कीमत में आ जाएंगे कई बंगले! चलाने का खर्च उड़ा देगा होश Last Updated:May 20, 2026, 21:52 IST भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान की अभेद्य ढाल है. इसकी एक मिसाइल दागने का खर्च 2.5 करोड़ से 16.6 करोड़ रुपये तक आता है. हाल ही में भारत ने 10,000 करोड़ रुपये में 288 नई मिसाइलों का आर्डर दिया है. महंगे आपरेशनल कॉस्ट के कारण इस सिस्टम का उपयोग केवल बड़े खतरों जैसे फाइटर जेट और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए किया जाता है. S-400 का एक बटन दबाते ही स्वाहा हो जाते हैं करोड़ों रुपये. (File Photo : PTI) नई दिल्ली: भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान का असली सुदर्शन चक्र है. दुश्मन देश भारत की तरफ आंख उठाने से भी डरते हैं. यह सिस्टम पलक झपकते ही दुश्मन के फाइटर जेट और मिसाइलों को नष्ट कर देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस एडवांस सिस्टम को एक बार चलाने में कितना भारी भरकम बजट खर्च होता है. हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस खतरनाक सिस्टम की सिर्फ एक मिसाइल दागने की कीमत करोड़ों रुपये में है. इसकी सबसे एडवांस मिसाइल को एक बार फायर करने का खर्च किसी भी आम इंसान को हैरान कर सकता है. रूस से खरीदे गए इस खतरनाक हथियार का आपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा है. भारत ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस पर बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है. आइए जानते हैं कि इस घातक सिस्टम से एक बार फायर करने पर कितना बड़ा खर्च आता है. S-400 सिस्टम की एक मिसाइल फायर करने की असली कीमत क्या है? S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में कुल चार अलग-अलग तरह की मिसाइलें लोड होती हैं. इन मिसाइलों की मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होती है. डिफेंस एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके एक मिसाइल की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये से शुरू होती है. इसकी सबसे खतरनाक और लंबी दूरी वाली मिसाइल का नाम 40N6E है. इस मिसाइल की कीमत करीब 8.3 करोड़ रुपये से लेकर 16.6 करोड़ रुपये तक होती है. इसका मतलब है कि अगर भारत इस सिस्टम से केवल एक लंबी दूरी की मिसाइल दागता है तो एक बार में कम से कम 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आता है. भारत को S-400 के नए मिसाइल आर्डर पर कितना खर्च करना पड़ा है? भारतीय एयरफोर्स अपनी सुरक्षा को लगातार अपडेट कर रही है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट काउंसिल ने हाल ही में 288 नई एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है. इस नए डिफेंस सौदे की कुल वैल्यू लगभग 10,000 करोड़ रुपये है. इस आर्डर में 120 कम दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. इसके साथ ही 168 लंबी दूरी की मिसाइलें भी खरीदी जा रही हैं. इस पूरे आर्डर की कास्ट को देखें तो इसमें मेंटेनेंस और लाइफसाइकिल का खर्च भी शामिल होता है. इस बड़े आर्डर से साफ है कि भारत अपनी आसमानी ढाल को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहता है. S-400 का आपरेशनल कॉस्ट इतना महंगा क्यों हो जाता है? यह कोई साधारण मिसाइल सिस्टम नहीं है. इसमें एडवांस रडार और सुपरफास्ट गाइडेड कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. यह सिस्टम एक साथ 36 टारगेट पर नजर रख सकता है. यह एक बार में 72 मिसाइलें दागने में सक्षम है. इसके रडार की रेंज 600 किलोमीटर तक होती है. इस हाई-टेक रडार को हर समय एक्टिव रखने में बहुत ज्यादा बिजली और फ्यूल का इस्तेमाल होता है. इसके पार्ट्स और मेंटेनेंस के लिए रूस पर निर्भरता भी इसकी आपरेशनल कास्ट को बढ़ा देती है. ट्रेनिंग और लगातार होने वाले आपरेशनल खर्च मिलकर इसे दुनिया का सबसे महंगा डिफेंस सिस्टम बनाते हैं. क्या सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए S-400 का उपयोग करना समझदारी है? आजकल युद्ध के मैदान में सस्ते कामिकेजी ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. एक सामान्य ड्रोन की कीमत महज 15 से 20 लाख रुपये होती है. अगर इस सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए भारत S-400 की 8 करोड़ रुपये की मिसाइल फायर करता है तो यह आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान है. डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतने महंगे सिस्टम का इस्तेमाल सिर्फ बड़े खतरों के लिए होना चाहिए. दुश्मन के फाइटर जेट या क्रूज मिसाइल को नष्ट करने के लिए ही इसका उपयोग सबसे बेस्ट माना जाता है. छोटे और सस्ते ड्रोन से निपटने के लिए भारत अब कम दूरी वाले सस्ते एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सतीशन के दांव में अपने ही हुए चित्‍त, सामने खड़े कर दिए...

होमताजा खबरदेश वीडी सतीशन का बड़ा सियासी दांव, नई कैबिनेट में 14 नए चेहरों की एंट्री Last Updated:May 20, 2026, 21:12 IST केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने नई कैबिनेट में 14 नए चेहरों को शामिल कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. पुराने दिग्गजों की जगह युवाओं और पहली बार विधायकों को मौका देकर सतीशन ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. दो महिला मंत्रियों की एंट्री और विभागों के बंटवारे को लेकर चले विवाद ने भी इस नई सरकार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आखिरकार केरल में नए मंत्रिमंडल का गठन हो गया है. UDF Government Cabinet: केरल के नए नवेले मुख्‍यमंत्री वीडी सतीशन ने ऐसा दांव चला है, जिसने उनके अपने सियासी साथियों को चारों खाने चित्‍त कर दिया है. इतना ही नहीं, सतीशन के इस कदम से यूडीएफ के भीतर नई खलबली मच गई है. दरअसल, बीते कई दिनों से केरल की राजनीति में सियासी खींचतान का दौर जारी थी. पार्टी में रसूक रखने वाले तमाम नेता नई सरकार में मंत्री पद पाने की होड़ में थे. ऐसे में, सीएम सतीशन के एक फैसले ने सभी की उम्‍मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है. दरअसल, सीएम सतीशन ने पुराने साथियों पर भरोसा जताने की जगह नए चेहरों को अपना सिपहसालार (मंत्री) बनाया है. इसी के साथ मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की नई कैबिनेट का गठन भी पूरा हो गया है. उन्‍होंने बिना देरी किए इन सिपहसालारों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया है, जिससे सरकार का औपचारिक कामकाज शुरू हो सके. आपको बता दें कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली यूडीएफ सरकार की वापसी को खास माना जा रहा है. इससे पहले साल 2011 में ओम्मन चांडी के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार सत्ता में आई थी. इस बार की कैबिनेट में युवा नेताओं और नए चेहरों को ज्यादा मौका दिया गया है. नई कैबिनेट के 14 सदस्य पहली बार मंत्री बने हैं. इनमें मुख्यमंत्री वीडी सतीशन भी शामिल हैं. खास बात यह है कि छह मंत्री ऐसे हैं जो पहली बार विधायक चुने गए हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. इस बार कांग्रेस ने इतिहास रचते हुए कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी जगह दी है. बिंदु कृष्णा को श्रम विभाग की जिम्मेदारी मिली है. वहीं केए तुलसी को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. यह पहली बार है जब कांग्रेस ने केरल में अपनी सरकार में दो महिला मंत्रियों को शामिल किया है. नए चेहरों में एम लिजू को अहम जिम्मेदारी मिली है. उन्हें आबकारी और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं. हालांकि विभागों के बंटवारे को लेकर यूडीएफ के अंदर कई दिनों तक विवाद चलता रहा. सबसे ज्यादा चर्चा मत्स्य पालन विभाग को लेकर हुई. यह विभाग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को दिया गया है. लैटिन कैथोलिक चर्च ने इसका विरोध किया था. चर्च का कहना था कि तटीय समुदाय को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, इसलिए यह विभाग कांग्रेस के पास रहना चाहिए. लेकिन मुस्लिम लीग अपने फैसले पर अड़ी रही. आखिरकार यूडीएफ ने यह विभाग आईयूएमएल के पास ही रहने दिया और वीई अब्दुल गफूर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई. कांग्रेस के अंदर भी कुछ विभागों को लेकर खींचतान देखने को मिली है. स्वास्थ्य विभाग को लेकर के मुरलीधरन और एपी अनिल कुमार के बीच विवाद था. बाद में मुरलीधरन को स्वास्थ्य और देवस्वम विभाग दिया गया, जबकि अनिल कुमार को राजस्व विभाग मिला. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन और बंदरगाह विभाग अपने पास रखे हैं. वहीं गृह और सतर्कता विभाग वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को सौंपा गया है. इसके अलावा पीके कुन्हालीकुट्टी को उद्योग और आईटी, पीसी विष्णुनाथ को पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा तथा केएम शाजी को स्थानीय स्वशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा, माकपा के बागी नेता जी सुधाकरण ने बुधवार को केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली है. गुरुवार को नए विधायक उनके सामने शपथ लेंगे. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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नेनुआ से लौकी तक सब पर हमला! एक्सपर्ट ने बताया कीड़ों को...

Last Updated:May 20, 2026, 20:10 IST Agriculture Tips : गर्मी के मौसम में सब्जी की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा होती है, लेकिन फ्रूट किट और व्हाइट फ्लाई जैसे कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक सुजीत पाल के अनुसार, कीट फल में छेद कर उसे सड़ा देते हैं. इससे बचाव के लिए किसान फ्रूट ट्रैप, चिपचिपे टिन, नीम तेल या कीटनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं. खेत में खरपतवार हटाना भी जरूरी है, क्योंकि वहीं से कीट तेजी से फैलते हैं और उत्पादन घटने लगता है. भागलपुर : लोग अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए तरह तरह की कृषि करते हैं. खासकर सब्जी की खेती में सबसे अधिक मुनाफा है, लेकिन इसमें थोड़ा रिस्क भी है. गर्मी के दिनों में सब्जी की कृषि थोड़ी रिस्की होती है, क्योकि इसमें पानी की समस्या, किट की समस्या, जीरी झरने की समस्या समेत कई तरह की समस्या आती है. लेकिन इसको अगर आप ठीक से समझ जाएं तो आप इसकी खेती में सफल किसान बन जाएंगे. फ्रूट किट लग जाए तो क्या करेंदरअसल फल व सब्जी में अभी फ्रूट किट बहुत लगते हैं. फ्रूट किट फलन क्षमता को कम कर और उपज फलन को खराब कर देती है. ऐसे में इससे बचाव अत्यंत आवश्यक है. जब इसको लेकर कृषि वैज्ञानिक सुजीत पाल से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि देखिए फ्रूट किट फल के बीच मे छेद कर देता है जिससे फलन सड़ने लगता है. ऐसे में इसका दो उपाय है. एक आप फ्रूट केप लगा सकते हैं जिसमे किट अपने आप अंदर चला जाएगा. अगर पैसा बचाना है तो आप किसी सफेद रंग या अन्य रंग का भी टिन काटकर उसमें चिपचिपा पदार्थ लगा दें. इसमें सब किट चिपक जाएगा. फ्रूट किट व अन्य किट दोनों का मैनेजमेंट जरूरी है तभी फलन सही होगा. ऐसे में ये चीजें आपके सभी किट के प्रबंधन के लिए सही होगा. अभी नेनुआ खेतो में लगा हुआ है लेकिन इसके बीच मे ही आप छिद्र देखेंगे. ऐसे में इसमें व्हाइट फ्लाई और अन्य किट का अटैक हो गया है तभी बीच मे छिद्र करने लगता है. इसके बचाव के सरल तरीके हैं आप इसको घरेलू विधि व अन्य विधि से भी बचा सकते हैं. आप घरेलू उपाय में टिन वाला चीज तो कर ही सकते हैं. इसके साथ साथ आप इसमें निम तेल का छिड़काव या किसी कीटनाशक चीजो का छिड़काव कर सकते हैं. आप अगर फ्रूट केप लगा सकते हैं तो और अच्छी बात है. गर्मी के दिनों महंगा होता है सब्जीउन्होंने बताया कि देखिए गर्मी के दिनों में सब्जी की डिमांड अधिक होती है. खासकर हरि सब्जी की बात करें तो डिमांड और बढ़ जाती है. इसलिए किसान को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है. लेकिन इसमें लॉस होने का खतरा तब रहता है जब आपका मैनजमेंट सही नहीं होगा. आपको बता दें कि अगर सब्जी के खेत मे खर पतवार अधिक है तो उससे सबसे ज्यादा किट की संभावना होती है. इसलिए पहले खर पतवार को हटा दें जिसके बाद किट का प्रबंधन करें. About the Author Amit Singh 7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhagalpur,Bhagalpur,Bihar Source link

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Healthy Food : तेल बिना बने ये 4 हेल्दी नाश्ते! स्वाद भी...

होमफोटोलाइफ़फूड तेल बिना बने ये 4 हेल्दी नाश्ते! स्वाद भी जबरदस्त, वजन घटाने में भी करेंगे मदद Last Updated:May 20, 2026, 19:01 IST अगर आप सुबह हेल्दी और हल्का नाश्ता ढूंढ रहे हैं, तो ये ऑयल-फ्री देसी ब्रेकफास्ट आपके लिए परफेक्ट हैं. उपमा, फ्रूट योगर्ट बाउल, मूंग दाल खिचड़ी और ओट्स चीला जैसे स्वादिष्ट ऑप्शन न सिर्फ वजन कंट्रोल में मदद करते हैं, बल्कि दिनभर शरीर को एनर्जी भी देते हैं. खास बात ये है कि ये जल्दी बनते हैं और स्वाद में भी जबरदस्त हैं. ऑयल-फ्री वेज उपमा एक हल्का, पौष्टिक और जल्दी बनने वाला नाश्ता है, जो खासकर सुबह के लिए परफेक्ट माना जाता है. इसमें सूजी को बिना तेल के ड्राई रोस्ट किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. इसके बाद इसमें गाजर, मटर, बीन्स जैसी हरी सब्जियां मिलाई जाती हैं, जो इसे फाइबर और विटामिन से भरपूर बनाती हैं. कडी पत्ता, हरी मिर्च और नींबू का इस्तेमाल इसका स्वाद और बढ़ा देता है. यह नाश्ता पेट के लिए हल्का होता है और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखता है. वजन कम करने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन ऑप्शन है. फ्रूट योगर्ट बाउल एक झटपट बनने वाला, स्वादिष्ट और पूरी तरह ऑयल-फ्री नाश्ता है. इसमें ताजा दही के साथ मौसमी फल, चिया सीड्स और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं, जिससे यह पोषण से भरपूर बन जाता है. यह डिश शरीर को ठंडक देती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन शरीर को दिनभर एक्टिव रखने में मदद करते हैं. खासकर गर्मियों में यह एक बेहतरीन और ताजगी भरा नाश्ता साबित होता है. मूंग दाल खिचड़ी एक ऐसी डिश है जो सेहत और सादगी का बेहतरीन मेल है. इसे बिना तेल के भी बहुत स्वादिष्ट तरीके से बनाया जा सकता है. इसमें मूंग दाल, चावल और हल्के मसालों के साथ सब्जियां मिलाकर कुकर में पकाया जाता है. यह न केवल पचने में आसान होती है, बल्कि पेट को आराम भी देती है. बीमार लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सबसे अच्छा भोजन माना जाता है. इसमें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संतुलन होता है, जो शरीर को जरूरी ऊर्जा देता है. Add News18 as Preferred Source on Google ओट्स वेज चीला आज के फिटनेस ट्रेंड में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें ओट्स, बेसन और ताजी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह फाइबर और प्रोटीन से भरपूर बनता है. इसे नॉन-स्टिक तवे पर बिना तेल या बहुत कम तेल में आसानी से बनाया जा सकता है. यह नाश्ता वजन घटाने वालों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है, क्योंकि यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है. इसका हल्का और स्वादिष्ट फ्लेवर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. सुबह की हेल्दी शुरुआत के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Tejas Mark 1A Fighter Jet Update: देसी राफेल पर आ गई बड़ी...

होमताजा खबरदेश देसी राफेल पर आ गई बड़ी खुशखबरी, IAF का वर्षों पुराना सपना होने जा रहा पूरा Last Updated:May 20, 2026, 17:49 IST HAL Tejas Mark 1A Fighter Jet इसी साल एयरफोर्स को म‍िलने जा रहा है. यह बात ड‍िफेंस सेक्रेटरी ने कही है. अगर इस साल तेजस Mk1A वाकई एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हो जाता है, तो यह सिर्फ HAL की सफलता नहीं होगी. यह उस भारत की तस्वीर होगी, जो अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि हथियार बनाने वाली ताकत बनने की कोशिश कर रहा है. सरकार ने क्‍ल‍ियर कर द‍िया तेजस मार्क वन इसी साल एयरफोर्स को म‍िलेगा. ‘देसी राफेल’ कहे जाने वाला HAL Tejas Mark 1A Fighter Jet अब आखिरकार भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने की तरफ बढ़ रहा है. लंबे इंतजार, तकनीकी चुनौतियों और विदेशी सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के बाद सरकार ने भरोसा जताया है कि तेजस Mk1A की डिलीवरी इसी वित्त वर्ष यानी अप्रैल से पहले शुरू हो जाएगी. ड‍िफेंस सेक्रेटरी संजीव कुमार ने बुधवार को कहा कि उन्हें 100 प्रतिशत भरोसा है कि विमान इस साल एयरफोर्स को मिल जाएगा. यह सिर्फ एक लड़ाकू विमान की डिलीवरी नहीं है. इसके पीछे भारत की पूरी रक्षा रणनीति, आत्मनिर्भरता का सपना और चीन-पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर तैयार रहने की जरूरत जुड़ी हुई है. यही वजह है कि तेजस Mk1A को लेकर सरकार, एयरफोर्स और रक्षा उद्योग तीनों की नजरें टिकी हुई हैं. भारत ने अब तक फ्रांस से Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान खरीदे हैं, लेकिन तेजस Mk1A को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया लड़ाकू विमान है. इसमें आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियार, बेहतर मेंटेनेंस सिस्टम और तेज ऑपरेशनल क्षमता दी गई है. रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत का अपना राफेल भी कहते हैं क्योंकि यह भारतीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया हाई-टेक मल्टीरोल फाइटर जेट है. 180 व‍िमानों का ऑर्डर भारतीय वायुसेना ने तेजस Mk1A के 180 विमान दो चरणों में ऑर्डर किए हैं. लेकिन इनकी डिलीवरी तय समय से पीछे चली गई. पहले उम्मीद थी कि विमान पिछले साल ही मिलना शुरू हो जाएंगे, मगर एयरफोर्स चाहती थी कि उसे पूरी तरह ऑपरेशनल कॉन्फिगरेशन वाला जेट मिले. यानी ऐसा विमान जिसमें हथियार, रडार और मिशन सिस्टम पूरी तरह इंटीग्रेटेड हों. रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने माना कि देरी हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट करीब 90 प्रतिशत तैयार है. उनके मुताबिक बाकी बचा काम कुछ हथियारों के इंटीग्रेशन और अंतिम तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ा है, जो लगभग पूरा हो चुका है. देरी की वजह क्‍या रही देरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी GE Aerospace से आने वाले GE-404 इंजन बताए जा रहे हैं. कोविड महामारी और वैश्विक सप्लाई चेन संकट की वजह से इंजन की सप्लाई प्रभावित हुई. दुनिया भर में सिविल एविएशन सेक्टर में भी जेट इंजनों की भारी मांग बढ़ी, जिसका असर सैन्य प्रोजेक्ट्स पर पड़ा. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि GE की सप्लाई चेन टूटने के बाद स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा. तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के लिए इतना अहम क्यों है? असल में भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है. वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वॉड्रन चाहिए, लेकिन मौजूदा संख्या इससे काफी कम है. पुरानी पड़ चुकी MiG-21 जैसी फाइटर सीरीज को धीरे-धीरे रिटायर किया जा रहा है. ऐसे में तेजस Mk1A इस कमी को भरने में बड़ी भूमिका निभाएगा. यह विमान हल्का है, लेकिन इसकी मारक क्षमता काफी आधुनिक है. इसमें AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें लगाने की क्षमता होगी. इसका मतलब यह है कि भारतीय पायलट दुश्मन के रडार से बचते हुए तेजी से हमला कर सकेंगे. सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह विमान भारत में बन रहा है. युद्ध की स्थिति में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता हमेशा जोखिम पैदा करती है. रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि संकट के समय हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऐसे में अगर भारत अपने लड़ाकू विमान खुद बनाता है, तो युद्ध के समय उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ती है. तेजस Mk1A सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट भी है. इसमें सैकड़ों भारतीय कंपनियां जुड़ी हुई हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स, कंपोजिट मटेरियल, एवियोनिक्स और हथियार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भारतीय उद्योग को इससे बड़ा अनुभव मिला है. यही अनुभव भविष्य में भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में काम आएगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक तेजस को लेकर विदेशी देशों की भी दिलचस्पी बढ़ रही है. कई देशों ने इस विमान को खरीदने में रुचि दिखाई है. हालांकि भारत ने साफ किया है कि पहली प्राथमिकता भारतीय वायुसेना की जरूरतें पूरी करना है. उसके बाद ही निर्यात पर जोर दिया जाएगा. अगर तेजस का सफल निर्यात होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो खुद लड़ाकू विमान डिजाइन, विकसित और बेच सकते हैं. अभी अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन जैसे देशों का इस क्षेत्र में दबदबा है. भारत इस क्लब में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है. तेजस Mk1A का एक और बड़ा रणनीतिक महत्व चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भी है. चीन तेजी से अपनी एयरफोर्स को आधुनिक बना रहा है और पाकिस्तान को भी चीन से आधुनिक हथियार मिल रहे हैं. ऐसे में भारत को बड़ी संख्या में आधुनिक फाइटर जेट चाहिए, जो जल्दी तैयार हो सकें और कम लागत में लंबे समय तक ऑपरेशन कर सकें. तेजस इस जरूरत को पूरा करता है. सरकार अब तेजस Mk2 और एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है. लेकिन Mk1A को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के लिए एक ट्रांजिशन पॉइंट है. यानी भारत पहली बार बड़े पैमाने पर अपने आधुनिक लड़ाकू विमान को ऑपरेशनल स्तर पर ला रहा है. 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बार-बार क्यों जीत जाती है बीजेपी? Axis My India वाले प्रदीप गुप्ता...

क्या बीजेपी सिर्फ हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की वजह से चुनाव जीतती है? यह सवाल स‍ियासत में लंबे समय से पूछा जाता रहा है. लेकिन देश के सबसे चर्चित चुनाव विश्लेषकों में गिने जाने वाले प्रदीप गुप्‍ता ने इस थ्योरी को सीधे खारिज कर दिया है. Axis My India के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने साफ कहा कि बीजेपी की लगातार चुनावी जीतों को सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ना गुड गवर्नेंस और डिलीवरी का अपमान है. उन्होंने कहा, जीत-हार हिंदू-मुस्लिम राजनीति से तय नहीं होती. अगर आप ऐसा कहते हैं तो फिर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में बीजेपी की लगातार वापसी को कैसे समझेंगे? वहां की सरकारों के काम, गवर्नेंस और डिलीवरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सिर्फ ध्रुवीकरण से चुनाव नहीं जीते जाते प्रदीप गुप्ता ने खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बीजेपी सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण के भरोसे चुनाव जीतती, तो अलग-अलग राज्यों में बार-बार सत्ता में वापसी संभव नहीं होती. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार दो बार सत्ता में लौटी. मध्य प्रदेश में लंबे समय तक पार्टी का दबदबा बना रहा. बिहार में NDA गठबंधन लगातार मजबूत बना हुआ है. प्रदीप गुप्ता के मुताबिक, इन नतीजों के पीछे गुड गवर्नेंस, योजनाओं की डिलीवरी और संगठन की ताकत बड़ी वजह है. यानी उनके हिसाब से बीजेपी की चुनावी मशीनरी सिर्फ भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि “लाभार्थी राजनीति और जमीनी नेटवर्क पर भी टिकी हुई है. बीजेपी की असली ताकत क्या है? पिछले एक दशक में बीजेपी ने खुद को सिर्फ एक वैचारिक पार्टी नहीं, बल्कि चुनाव जीतने वाली हाई-परफॉर्मेंस मशीन में बदला है. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों तक सीधा असर पहुंचाया. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने वेलफेयर , नेशनलिज्म और मजबूत लीडरशिप का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया, जो विपक्ष के लिए चुनौती बन गया. प्रशांत किशोर पर भी बोले प्रदीप गुप्ता बातचीत में गुप्ता ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत क‍िशोर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर किसी भी पार्टी के साथ तभी जुड़ते हैं, जब उन्हें वहां स्पार्क यानी उभरती हुई संभावनाएं दिखाई देती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु में DMK के साथ काम करने के दौरान I-PAC को यह समझ आ गया था कि एक नया नेतृत्व उभर रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने अभिनेता और नेता व‍िजय की बढ़ती लोकप्रियता का भी जिक्र किया. विपक्ष आखिर कहां चूक जाता है? बीजेपी की जीत को लेकर दो तरह की सोच दिखाई देती है. एक पक्ष मानता है कि धार्मिक ध्रुवीकरण बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. दूसरा पक्ष कहता है कि विपक्ष बीजेपी की संगठन क्षमता, बूथ मैनेजमेंट और योजनाओं की पहुंच को कम आंकता है. प्रदीप गुप्ता का बयान इसी दूसरे नजरिए को मजबूत करता है. उनका कहना है कि अगर हर चुनावी जीत को सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति कहकर समझाया जाएगा, तो फिर मतदाताओं के फैसले और सरकारों के काम दोनों को हल्के में लेना होगा. और शायद यही वजह है कि भारतीय राजनीति में बीजेपी को समझना सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि वोटर बिहेवियर, वेलफेयर मॉडल और संगठन की गहराई से जुड़ा मामला बन चुका है. Source link

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बिजली के प्रीपेड मीटर कितने फायदेमंद हैं? पुराने और नए मीटर में...

ब‍िजली चोरी रोकते हैं स्‍मार्ट प्रीपेड मीटर (सांकेतिक तस्वीर) लेकिन प्रीपेड मीटर एक क्रांति की तरह हैं. अभी चूंकि लोगों को इन मीटरों की आदत नहीं हुई है, इस वजह से लोगों को प्रीपेड मीटर खराब लग रहे हैं. हालांकि एक एक्सपर्ट के तौर पर देखा जाए तो नुकसान सिर्फ मानसिक है. वास्तविकता में प्रीपेड मीटरों का कोई नुकसान नहीं है. इससे कंपनियों को तो फायदा है ही उपभोक्ताओं को भी दोहरा लाभ है. डॉ. भूषण कहते हैं कि ग्राहकों को इससे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में फायदा मिलेगा. क्या हैं प्रीपेड मीटरों के शॉर्ट टर्म फायदे क्या हैं लॉन्ग टर्म में फायदे भूषण कहते हैं कि बहुत सारी भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है. बिजली के प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर मोबाइल सिम की तरह ही हैं और दोनों ही सिम आज बखूबी चल रही हैं. बहुत सारे लोगों को प्रीपेड सिम ज्यादा फायदेमंद लगती हैं. प्रीपेड या पोस्‍टपेड कौन से मीटर ज्‍यादा फायदेमंद. आने वाले समय में जब लोगों को इन मीटरों की आदत पड़ेगी तो उन्हें इनके फायदे नजर आएंगे. कहीं भी तब तकनीक आती है और पूरा शिफ्ट होता है तो ये चुनौतियां सामने आती हैं. हालांकि प्रीपेड मीटर भविष्य के लिए बेहतर हैं और तकनीकी रूप से बेहद मजबूत हैं. आइए जानते हैं उनसे सवालों के जवाब क्या प्रीपेड मीटर से बिजली चोरी रुकती है?हां प्रीपेड मीटर पूरी तरह स्मार्ट मीटर हैं और इनसे बिजली की चोरी रुकेगी, ऐसी उम्मीद है. ये मीटर कैसे काम करते हैं?प्रीपेड मीटर मोबाइल फोन की प्रीपेड सिम की तरह काम करते हैं. पहले भुगतान करिए फिर उसके हिसाब से बनी यूनिटों का उपभोग करिए.अगर आप भुगतान से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो आपकी बिजली कट जाएगी. इन मीटरों का फायदा क्या है?इन मीटरों से उपभोक्ता को पता चलता है कि उसकी बिजली की खपत कितनी है. उसे खपत का रियल टाइम डेटा मिलता है.इन मीटरों से डिस्कॉम कंपनियों को भी फायदा है और उन्हें बिजली सप्लाई का पूरा भुगतान मिल पाता है. रेवेन्यू के लिहाज से ये मीटर फायदेमंद हैं. इन मीटरों से बिजली चोरी भी रुकती है. स्मार्ट बिजली मीटर चोरी कैसे रोकता है? पुराने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मीटर आसानी से टैम्पर हो जाते थे. लोग मैग्नेट लगाकर, बाईपास करके या न्यूट्रल वायर काटकर मीटर को धीमा या बंद कर देते थे. स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और टैम्पर-प्रूफ हैं. इनमें एडवांस्ड सेंसर लगे होते हैं जो मैग्नेटिक टैम्पर, कवर ओपन, न्यूट्रल डिस्कनेक्ट, रिवर्स करंट या असामान्य खपत का तुरंत पता लगाते हैं. यह मीटर घटना रिकॉर्ड करता है और रियल-टाइम में डिस्कॉम के सेंटर को अलर्ट भेजता है. जरूरत पड़ने पर रिमोट से कनेक्शन डिस्कनेक्ट भी किया जा सकता है. इससे चोरी लगभग असंभव हो जाती है. प्रीपेड डिजिटल स्मार्ट मीटर का पूरा मैकेनिज्म क्या है?स्मार्ट मीटर में माइक्रोकंट्रोलर, करंट और वोल्टेज सेंसर, रियल-टाइम क्लॉक और कम्युनिकेशन मॉड्यूल (RF/GSM/PLC) होते हैं. यह हर 15-30 मिनट में खपत का डेटा रिकॉर्ड करता है और AMI (Advanced Metering Infrastructure) के जरिए हेड-एंड सिस्टम को भेजता है. यह न सिर्फ यूनिट गिनता है बल्कि पावर फैक्टर, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, पीक लोड आदि भी मॉनिटर करता है. एन्क्रिप्टेड डेटा होने से हैकिंग मुश्किल है. क्या इन प्रीपेड मीटरों का बिल ज्यादा आता है, जैसा सूचनाएं आ रही हैं?नहीं ऐसा नहीं है. इसमें भी उतना ही बिल आता है. यह साइकोलॉजिकल है कि प्रीपेड में पहले पैसा जमा करके फिर बिजली इस्तेमाल करते हैं तो बिल खत्म होता दिखता है. इसके फायदे क्या हैं?इन मीटरों से सटीक बिलिंग, अनुमानित बिल खत्म, विवाद कम होता है. ये रियल-टाइम मॉनिटरिंग के साथ ऐप या डिस्प्ले पर देख सकेंगे कि कौन-सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है, बिल कंट्रोल में रहेगा. इन मीटरों के लगने से पूरा सिस्टम अपडेट होगा. चोरी रुकने से बिजली की उपलब्धता और गुणवत्ता बढ़ेगी, कम लोडशेडिंग होगी. प्रीपेड ऑप्शन में रिचार्ज जैसे मोबाइल, लो-बैलेंस अलर्ट की भी सुविधा है. लंबे समय में बिल में बचत और पारदर्शिता भी है. डॉ. भारत भूषण कहते हैं कि स्मार्ट मीटर सिर्फ मीटर नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन का स्मार्ट टूल है. UP में इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हो रहा है, जो AT&C घाटे को कम कर बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाएगा. Source link

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TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन ममता दीदी की MP...

होमताजा खबरदेश TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन दीदी की MP को मिला Y श्रेणी प्रोटेक्शन Last Updated:May 20, 2026, 15:07 IST Kakoli Ghosh Dastidar Gets Y Category Security: केंद्र ने TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार को IB रिपोर्ट के बाद CISF की Y कैटेगरी सुरक्षा दी गई है. पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं की सुरक्षा कटौती के बीच इसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. केंद्र सरकार ने टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को Y श्रेणी सुरक्षा दी है. फोटो- पीटीआई पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है. एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं और विधायकों की सुरक्षा में कटौती की खबरें चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ काकोली घोष दस्तीदार को केंद्र सरकार ने ‘Y’ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान कर दी है. इस फैसले ने बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ टीएमसी नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को CISF की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. अधिकारियों के मुताबिक यह सुरक्षा 19 मई से लागू कर दी गई है. यह फैसला गृह मंत्रालय द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर लिया गया. क्या होती है Y कैटेगरी सुरक्षा? ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा भारत में वीआईपी सुरक्षा की अहम श्रेणियों में गिनी जाती है. इसमें आमतौर पर 24 घंटे सुरक्षा के लिए हथियारबंद जवानों की टीम तैनात रहती है. खतरे के स्तर के अनुसार सुरक्षाकर्मियों की संख्या तय की जाती है. इस बार खास बात यह है कि काकोली घोष दस्तीदार को यह सुरक्षा सीआईएसएफ के जरिए दी गई है. सीआईएसएफ आमतौर पर एयरपोर्ट, मेट्रो, परमाणु संयंत्र और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जानी जाती है, लेकिन खतरे के आकलन के आधार पर यह हाई-प्रोफाइल नेताओं को भी सुरक्षा देती है. कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार? काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं. वह राज्य की बारासात लोकसभा सीट से सांसद हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन तथा संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. टीएमसी की ओर से वह कई राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर आवाज रही हैं. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है. संसद में भी वह कई बार स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखती रही हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ टीएमसी नेताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. ऐसे में केंद्र द्वारा काकोली घोष दस्तीदार को सुरक्षा दिए जाने को सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है. 30 विधायकों की सुरक्षा कटौती की चर्चा क्यों? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं. सूत्रों के मुताबिक चुनाव के बाद कई TMC नेताओं और करीब 30 विधायकों की सुरक्षा में कटौती या समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई थी. ऐसे माहौल में काकोली घोष दस्तीदार को ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा मिलना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. विपक्षी दल इसे केंद्र की सेलेक्टेड सुरक्षा नीति बता रहे हैं, जबकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा केवल खतरे के आकलन के आधार पर दी जाती है. IB रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला सूत्रों के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में काकोली घोष दस्तीदार के लिए संभावित सुरक्षा खतरे का जिक्र किया गया था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा प्रोफाइल की समीक्षा की और CISF सुरक्षा मंजूर कर दी. अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि सुरक्षा व्यवस्था स्थायी नहीं होती. समय-समय पर खतरे के स्तर की समीक्षा की जाती है. अगर भविष्य में खतरा बढ़ता या घटता है तो सुरक्षा श्रेणी में बदलाव भी किया जा सकता है. बंगाल की राजनीति में नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बदलते सत्ता समीकरण के बीच सुरक्षा अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है. एक ओर TMC लगातार अपने नेताओं पर राजनीतिक दबाव और सुरक्षा खतरे की बात करती रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा का फैसला केवल इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर लिया जाता है. हालांकि, काकोली घोष दस्तीदार को मिली ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में सुरक्षा और राजनीतिक टकराव दोनों बड़े मुद्दे बने रह सकते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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