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S-400 Missile | S-400 Missile Use | एयरबेस, नेवल बेस, रिफाइनरी… जहां...

S-400 Missile Uses: पूरी दुनिया में जंग का दौर जारी है. ईरान-अमेरिका, रूस-यूक्रेन, इजरायल-गाजा… पश्चिम जारी जंग को देखते हुए पूरी दुनिया अपनी डिफेंस सिस्टम मजबूत करने में जुटी हुई है. इन सभी जंग के दौर में रूसी मेड एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ट्रायम्फ ने अपना जलवा और ताकत का एहसास करा दिया है. ये डिफेंस सिस्टम बॉर्डर पर दुश्मनों के हमलों को नेस्तनाबूद करने के अलावे नेवल बेस पर रक्षा करती है. लेकिन, क्या आपको पता है कि इस डिफेंस सिस्टम का दूसरे सेक्टर में इस्तेमाल हो सकता है? कई ऐसे सेक्टर हैं, जहां कि ये आसमानी ब्रह्मास्त्र रक्षा कर सकता है. आधुनिक युद्धनीति में हवाई सुरक्षा किसी भी देश की रीढ़ होती है. दुनिया में जब भी सबसे खतरनाक और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम की बात आती है, तो रूस में निर्मित ‘S-400 ट्रायम्फ’ सबसे ऊपर दिखता है. ये कोई साधारण मिसाइल नहीं है, बल्कि रडार, कमांड सेंटर और कई तरह की मिसाइलों का एक चलता-फिरता अभेद्य किला है. कई मौके पर ये साबित कर चुका है कि ये किस प्रकार अभेद्य किला है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तो इसने कई बार साबित कर दिया था. कई सेक्टर्स में एस-400 डिफेंस सिस्टम अचूक रक्षक साबित हो सकता है. लॉन्ग-रेंज स्ट्रेटेजिक डिफेंस है एस-400 स्वदेशी ‘आकाश’ मिसाइल सिस्टम जहां शॉर्ट से मीडियम रेंज की हवाई सुरक्षा के लिए एक बेहतरीन ढाल है, वहीं S-400 बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र (लॉन्ग-रेंज स्ट्रेटेजिक डिफेंस) को सुरक्षित करने का काम करता है. आइए समझते हैं कि रक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से S-400 का इस्तेमाल किन-किन सेक्टर्स (क्षेत्रों) में किया जा सकता है. सीमा सुरक्षा और ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ सेक्टर S-400 का सबसे मुख्य इस्तेमाल बॉर्डर या विवादित सीमाओं पर ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ (A2/AD) ज़ोन बनाने के लिए किया जाता है. इसका मतलब है कि दुश्मन के विमानों के लिए एक ऐसा “नो-फ्लाई ज़ोन” तैयार करना, जहां उनका घुसना नामुमकिन हो. फाइटर जेट्स का खात्मा: मिग-29 (MiG-29) या सुखोई जैसे फाइटर जेट्स को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करके भले ही उनकी ताकत कितनी भी बढ़ा ली जाए, या दुश्मन के पास F-35 जैसे स्टील्थ (रडार से बचने वाले) लड़ाकू विमान हों, S-400 का ताकतवर रडार उन्हें 400 किलोमीटर दूर से ही ट्रैक कर सकता है. AWACS और सपोर्ट एयरक्राफ्ट को रोकने में: दुश्मन की हवाई ताकत केवल फाइटर जेट्स पर निर्भर नहीं होती, बल्कि उन्हें कमांड देने वाले AWACS (हवाई रडार सिस्टम) और रिफ्यूलिंग विमानों पर टिकी होती है. S-400 अपनी सबसे लंबी रेंज की मिसाइल से दुश्मन के इन बड़े और अहम विमानों को सीमा पार करने से पहले ही मार गिराता है. बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल डिफेंस सेक्टर आज के दौर में हवाई हमले केवल विमानों से नहीं, बल्कि घातक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से होते हैं. आधुनिक मिसाइलों को रोकना: ईरान की ‘खैबर शेकन’ (Kheibar Shekan) जैसी आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी तेज गति और रडार को चकमा देने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं. S-400 सिस्टम खास तौर पर ऐसे हाई-स्पीड, ऊंचाई से गिरने वाले लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. बहु-स्तरीय सुरक्षा: इस सिस्टम में 4 अलग-अलग रेंज (40 किमी, 120 किमी, 250 किमी और 400 किमी) की मिसाइलें तैनात की जाती हैं. अगर दुश्मन की क्रूज मिसाइल पहली लेयर को पार भी कर ले, तो दूसरी या तीसरी लेयर की मिसाइलें उसे हवा में ही राख कर देती हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तो इसने कई बार साबित कर दिया था. नौसैन्य नेवल और तटीय ढांचे की सुरक्षा समुद्री सीमाओं और नौसैनिक बेड़ों की सुरक्षा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और सामरिक ताकत के लिए बेहद जरूरी है. आधुनिक नेवल इक्विपमेंट और युद्धपोतों को आसमान से होने वाले हमलों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. नेवल बेस और बंदरगाहों की रक्षा: S-400 सिस्टम को तटीय इलाकों में तैनात करके देश के प्रमुख नेवल बेस, डॉकयार्ड और समुद्री तटों को दुश्मन के हवाई हमलों और एंटी-शिप मिसाइलों से बचाया जा सकता है. कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को कवर देना: किसी बड़े नौसैन्य ऑपरेशन के दौरान, S-400 जमीन से ही समुद्र में मौजूद अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों के ऊपर एक सुरक्षा छतरी (Umbrella) प्रदान कर सकता है. रणनीतिक और महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा युद्ध के समय दुश्मन का सबसे पहला लक्ष्य देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों को नष्ट करके सरकार और सेना को पंगु बनाना होता है. S-400 का इस्तेमाल इन क्रिटिकल सेक्टर्स को ‘आयरन डोम’ जैसी सुरक्षा देने के लिए होता है. परमाणु ऊर्जा संयंत्र: न्यूक्लियर प्लांट्स पर होने वाला कोई भी हवाई हमला पूरे देश के लिए विनाशकारी हो सकता है. S-400 को इन प्लांट्स की सुरक्षा के लिए पहली पंक्ति के तौर पर तैनात किया जाता है. राजधानी और कमांड सेंटर: देश की संसद, राष्ट्रपति भवन, सैन्य मुख्यालयों और अहम औद्योगिक शहरों को सुरक्षित रखने के लिए S-400 अचूक है. इसका रडार एक साथ 300 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 80 लक्ष्यों पर एक साथ मिसाइलें दाग सकता है. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन डिफेंस सेक्टर एंटी-जैमिंग क्षमता: जब दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) का इस्तेमाल करके रडार को जैम (Jam) करने की कोशिश करता है, तब भी S-400 काम करता रहता है. इसका रडार सिस्टम बहुत ही एडवांस है जो भारी इलेक्ट्रॉनिक हमले के बीच भी अपने लक्ष्य को ढूंढ निकालता है. ड्रोन स्वार्म से निपटना: यद्यपि छोटे ड्रोन्स को मार गिराने के लिए S-400 की महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से सही नहीं है, लेकिन दुश्मन के बड़े कॉम्बैट ड्रोन (UCAV) को नष्ट करने में यह सिस्टम बेजोड़ है. S-400 सिस्टम का सीमा सुरक्षा में सबसे मुख्य इस्तेमाल क्या है? सीमाओं पर S-400 का मुख्य इस्तेमाल ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ (A2/AD) ज़ोन बनाने के लिए होता है. यह दुश्मन के विमानों के लिए एक ऐसा ‘नो-फ्लाई जोन’ तैयार करता है, जिससे उनकी सीमा में घुसपैठ करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. S-400 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से कैसे रक्षा करता है? यह सिस्टम हाई-स्पीड और ऊंचाई से गिरने वाले लक्ष्यों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें 4 अलग-अलग रेंज (40, 120, 250 और 400 किमी) की मिसाइलें तैनात होती हैं, जो दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही कई लेयर पर नष्ट कर देती हैं. नौसैन्य सुरक्षा में S-400 की क्या

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PM मोदी की 4.5 घंटे मैराथन मीटिंग: मंत्रियों को मैसेज- पेंड‍िंग काम...

होमताजा खबरदेश PM मोदी की 4.5 घंटे मैराथन मीटिंग: मंत्रियों को मैसेज- पेंड‍िंग काम खत्म कीजिए Agency:एजेंसियां Last Updated:May 21, 2026, 22:42 IST प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक मैराथन बैठक की अध्यक्षता की, जो करीब साढ़े चार घंटे तक चली. बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया. पीएम मोदी ने मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और जनता तक लाभ समय पर पहुंचाया जाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैब‍िनेट सहयोग‍ियों के साथ चर्चा की. नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक लंबी और अहम बैठक की अध्यक्षता की. यह बैठक नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई और करीब साढ़े चार घंटे तक चली. बैठक में पीएम मोदी ने मंत्रियों को साफ संदेश दिया कि सरकार के सभी पेंड‍िंग काम जल्द से जल्द पूरे किए जाएं और कामकाज में तेजी लाई जाए. बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई और देर रात तक चली. इसमें सभी प्रमुख मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई. पीएम मोदी ने अलग-अलग विभागों की प्रगति रिपोर्ट ली और जिन क्षेत्रों में देरी हो रही है, वहां तुरंत सुधार के निर्देश दिए. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समय पर जनता तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी और हर मंत्री को अपने विभाग के कामों की नियमित निगरानी करनी होगी. मीटिंग का वक्‍त खास यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. इसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि देश अपनी करीब 85% तेल जरूरत आयात से पूरी करता है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बताया जा रहा है. इससे पेट्रोल-डीजल के दाम, ट्रांसपोर्ट खर्च और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है. पहले की अपील प्रधानमंत्री मोदी पहले भी लोगों से अपील कर चुके हैं कि वे ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करें, सोने की खरीद सीमित करें और विदेश यात्रा पर खर्च को लेकर सतर्क रहें. सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक अनुशासन बेहद जरूरी है. इस मैराथन बैठक को सरकार के कामकाज में तेजी और नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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bihar first solar village model sitamarhi lachhua zero electricity bill 75 percent...

Last Updated:May 21, 2026, 21:40 IST Solar Village In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले का एक छोटा सा गांव लछुआ आज पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन चुका है. इस गांव की करीब 75 फीसदी आबादी ने पारंपरिक बिजली को अलविदा कहकर सौर ऊर्जा (Solar Energy) को अपना लिया है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि गांव के कई घरों का मासिक बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य हो गया है. सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के बेहतर तालमेल से गांव में यह हरित क्रांति आई है. अब पंचायत का लक्ष्य गांव के हर एक घर को सोलर कनेक्शन से जोड़कर इसे शत-प्रतिशत आत्मनिर्भर बनाने का है. सीतामढ़ी: जिले का महुआबा पंचायत के अंतर्गत आने वाला लछुआ गांव आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता और नवीकरणीय ऊर्जा की एक नई मिसाल पेश कर रहा है. विकास की इस दौड़ में लछुआ गांव ने पारंपरिक बिजली ग्रिड पर अपनी निर्भरता को बेहद कम कर दिया है. आज इस गांव की लगभग 75 प्रतिशत आबादी अपनी रोजमर्रा की बिजली जरूरतों के लिए पूरी तरह से सोलर सिस्टम (सौर ऊर्जा) का इस्तेमाल कर रही है. गांव के अधिकांश घरों की छतों पर चमकते सोलर पैनल इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण अब पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ ऊर्जा को अपना रहे हैं. यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी बड़ा सुधार ला रहा है. बिजली बिल से मिली बड़ी राहत, जेब का बोझ हुआ कमइस बेहतरीन और आधुनिक बदलाव का सबसे सीधा और सकारात्मक असर ग्रामीणों की जेब पर देखने को मिल रहा है. सोलर पैनल अपनाने के बाद यहां के अधिकांश घरों का मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 100 से 150 रुपये तक सिमट गया है. स्थानीय ग्रामीण कृष्णनंदन कुमार और राम इकबाल महतो बताते हैं कि पहले बिजली कटने की बड़ी समस्या थी, लेकिन अब सोलर की वजह से 24 घंटे लाइट रहती है. ग्रामीण बताते हैं कि बिजली बिल अब नाममात्र का आता है. कई गरीब व बीपीएल (BPL) परिवारों का बिल तो अब बिल्कुल शून्य (0) आने लगा है. सौर ऊर्जा से मिल रही इस बड़ी वित्तीय राहत के कारण पूरा गांव बेहद खुश और उत्साहित है. स्थानीय प्रशासन की पहल और सरकारी योजनाओं का मिला साथलछुआ गांव को ‘सोलर विलेज’ बनाने में स्थानीय मुखिया संजीव भूषण और पंचायत प्रशासन की भूमिका बेहद सराहनीय रही है. मुखिया के सहयोग से पंचायत के करीब 70 प्रतिशत घरों में सोलर प्लेट्स लगाई जा चुकी हैं. इसके अलावा गांव की सुरक्षा और रोशनी के लिए 17 प्रमुख सार्वजनिक जगहों पर 150 से अधिक सोलर लाइटें और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. महुअवा पंचायत के मुखिया संजीव भूषण ने बताया कि वर्तमान में ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत लगभग 95 नए आवेदन स्वीकृत हैं. स्कूल की इमारतों पर भी सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों को दी जा रही सब्सिडी इस मुहिम को और तेज कर रही है. भविष्य का लक्ष्य और आत्मनिर्भरता की नई ‘सौर क्रांति’लछुआ गांव में शुरू हुई यह सौर क्रांति अब थमने वाली नहीं है, बल्कि इसका दायरा और तेजी से बढ़ने वाला है. गांव के लोग अब सोलर पावर का इस्तेमाल न केवल रोशनी के लिए, बल्कि इंडक्शन चूल्हों पर खाना पकाने के लिए भी कर रहे हैं. पंचायत प्रशासन का आगामी लक्ष्य गांव के शत-प्रतिशत घरों को इस योजना से जोड़ना है, जिसके तहत आने वाले समय में 85% के लक्ष्य को पूरा करते हुए लगभग 700 घरों में सीधे सोलर बिजली का उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar Source link

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समंदर से सुकून तक… जंग के बीच 3,300 से ज्यादा अपनों को...

होमताजा खबरदेश समंदर से सुकून तक… जंग के बीच 3,300 से ज्यादा अपनों को सुरक्षित बचा लाया भारत Agency:एजेंसियां Last Updated:May 21, 2026, 20:38 IST वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालात, समुद्री रास्तों पर खतरा और पूरी दुनिया में ईंधन सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारत ने बड़ा भरोसा दिखाया है. सरकार ने न सिर्फ 3,300 से ज्यादा भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी कराई, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है. संकट के बीच भारत का यह मैरिटाइम और सप्लाई मैनेजमेंट अब उसकी बड़ी ताकत बनकर सामने आया है. जंग के बीच से अपनों को बचा लाया भारत. भारत ने बड़ी कामयाबी हास‍िल की है. सेंट्रल पोर्ट म‍िन‍िस्‍ट्री ने गुरुवार को बताया कि क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और अब तक 3,300 से ज्यादा भारतीयों को सफलतापूर्वक स्वदेश वापस लाया जा चुका है. इनमें सिर्फ पिछले 72 घंटों में 99 नाविकों की सुरक्षित वापसी शामिल है. मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगला ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि पिछले तीन दिनों में किसी भी भारतीय-ध्वज वाले जहाज या भारतीय क्रू वाले विदेशी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है. यह स्थिति ऐसे समय में राहत देने वाली है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण समुद्री गतिविधियों पर लगातार दबाव बना हुआ है. सरकार के मुताबिक, हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संकट के दौरान प्राप्त संचार की मात्रा भी बेहद अधिक रही है. पिछले 72 घंटों में मंत्रालय को 404 कॉल और 903 ईमेल प्राप्त हुए, जिनका त्वरित समाधान किया गया. यह दिखाता है कि संकट की स्थिति में भी भारत का मैरिटाइम मैनेजमेंट सिस्टम सक्रिय और जवाबदेह तरीके से काम कर रहा है. क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मुकेश मंगला ने यह भी बताया कि वर्तमान में 13 भारतीय-ध्वज वाले जहाज और एक भारतीय स्वामित्व वाला जहाज इस पूरे क्षेत्र में ऑपरेशन में हैं. इन जहाजों के लिए भोजन, ईंधन और जरूरी आपूर्ति की व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार नजदीकी बंदरगाहों के जरिए की जा रही है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. सबसे अहम बात यह रही कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से जहाजों को भेजने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. सरकार विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है और हालात अनुकूल होने पर ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी. शिपिंग रूट बाधित यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है. इस टकराव के कारण कई जगहों पर शिपिंग रूट बाधित हुए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगभग ब्लॉकेड जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से हालात में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. ईंधन आपूर्ति पूरी तरह स्थिरभारत के लिए राहत की बात यह भी है कि समुद्री संकट के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है. सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक देशभर में उपलब्ध है और किसी भी तरह की कमी की आशंका नहीं है. इसके साथ ही LPG वितरण प्रणाली में भी बड़ा सुधार देखा गया है. अब लगभग 96 प्रतिशत घरेलू LPG सिलेंडर डिलीवरी Authentication Code आधारित सिस्टम से हो रही है, जिससे गैस के दुरुपयोग और अवैध वितरण पर काफी हद तक रोक लगी है. वहीं, MYPNGD.in पोर्टल के जरिए 58,500 से अधिक PNG उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से अपने LPG कनेक्शन सरेंडर किए हैं, जो ऊर्जा वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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सिंधु नदी का गेम ओवर, अब चेनाब का पानी मोड़ेगा भारत! बना...

नई दिल्ली: सिंधु जल समझौते को होल्ड (In Abeyance) पर रखने के बाद भारत ने चेनाब नदी प्रणाली पर दो बेहद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है. नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के इन दोनों प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग 2,600 करोड़ रुपये है. इसके तहत पहला काम हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में एक बड़ी इंटर-बेसिन वाटर डायवर्जन टनल बनाने का है. दूसरा प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध की परिचालन क्षमता को वापस पाने के लिए गाद प्रबंधन (Sediment Management) से जुड़ा है. ये दोनों प्रोजेक्ट्स भारत के जल अधिकारों के बेहतर इस्तेमाल के लिहाज से गेमचेंजर माने जा रहे हैं. लाहौल-स्पीति में बनने वाली 2,352 करोड़ रुपये की चेनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना क्या है? इस पूरे प्लान में सबसे बड़ा हिस्सा लाहौल-स्पीति में बनने वाली चेनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट का है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 2,352 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. योजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी एक टनल बनाई जाएगी. इस टनल का मुख्य उद्देश्य चेनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को मोड़कर ब्यास नदी प्रणाली में पहुंचाना है. यह प्रोजेक्ट एक बड़े इंटर-बेसिन रिवर-लिंकिंग अभियान का हिस्सा है. पहले फेज में लाहौल घाटी में नदी पर एक 19 मीटर ऊंचा बराज (Barrage) बनाने का भी प्रस्ताव है. इसके जरिए चेनाब की सहायक चंद्रा नदी के पानी को हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर और टनल की मदद से ब्यास बेसिन की तरफ डायवर्ट किया जाएगा. यह पूरा इलाका चीन और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर 268 करोड़ रुपये की लागत से क्या बदलाव होने जा रहा है? हिमाचल प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर में भी चेनाब नदी से जुड़ा एक और अहम प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. रियासी जिले में स्थित सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर एनएचपीसी 268 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है. यहां एक नया डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास टनल (गाद निकालने वाली टनल) बनाया जाएगा. दरअसल, पहाड़ों से बहकर आने वाली मिट्टी और मलबे के कारण सलाल बांध के जलाशय में भारी गाद जमा हो चुकी है. एक सर्वे के अनुसार, इस गाद की वजह से सलाल जलाशय की वाटर स्टोरेज क्षमता घटकर सिर्फ 5% रह गई है. गाद जमा होने से बिजली बनाने वाले टर्बाइनों की लाइफ और क्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ता है. यह नई टनल जरूरत पड़ने पर पानी को मोड़ने और जलाशय में जमा गाद को बाहर निकालने का काम करेगी. सलाल बांध की पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए नई टनल क्यों जरूरी हो गई थी? सलाल बांध के इतिहास में गाद प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद रहा है. दशकों पहले जब इस बांध का निर्माण हो रहा था, तब सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान की आपत्तियों के बाद बांध के निचले हिस्से में मौजूद स्लुइस (गाद निकालने वाले गेट) को कंक्रीट से बंद कर दिया गया था. भारतीय विशेषज्ञों का हमेशा से मानना था कि इस बदलाव के कारण बांध की गाद साफ करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई. अब बनने वाली नई बाईपास टनल इसी पुरानी कमी को दूर करेगी. यह टनल बांध को बिना कोई नुकसान पहुंचाए गाद को बाहर फ्लश करने का रास्ता देगी. इससे सलाल पावर स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता में भारी सुधार होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर की उम्र भी बढ़ जाएगी. चेनाब नदी पर दो अहम प्रोजेक्ट्स का काम शुरू. (Photo made with AI) फैसले की टाइमिंग का रणनीतिक महत्व भी है इन दोनों प्रोजेक्ट्स की टाइमिंग रणनीतिक नजरिए से बहुत मायने रखती है. साल 1960 में हुए सिंधु जल समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) पर पूरा अधिकार मिला था, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का पानी पाकिस्तान को दिया गया था. हालांकि, भारत के पास इन पश्चिमी नदियों पर बिना पानी रोके रन-ऑफ-द-रिवर बिजली प्रोजेक्ट बनाने का अधिकार हमेशा से रहा है. पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को होल्ड पर डालने का कड़ा रुख अपनाया था. अब इन प्रोजेक्ट्स के जरिए भारत यह साफ संदेश दे रहा है कि वह अपने हिस्से के पानी की एक-एक बूंद का पूरा इस्तेमाल करेगा. पानी को मोड़ने और गाद प्रबंधन की इस तैयारी पर पाकिस्तान की भी पैनी नजर बनी हुई है. Source link

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मिथ‍िला एक्‍सप्रेस में आग लगी नहीं लगाने की कोश‍िश हुई, गोधरा दोहराने...

होमताजा खबरदेश मिथ‍िला एक्‍सप्रेस में आग लगी नहीं, गोधरा जैसे आग लगाने की कोश‍िश हुई Last Updated:May 21, 2026, 18:36 IST हावड़ा स्टेशन पर मिथिला एक्सप्रेस में आग लगने की घटना अब एक बड़े सुरक्षा अलर्ट में बदल गई है. रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति को आग जैसी स्थिति पैदा करते हुए देखा गया है, जिससे यह आशंका गहराई है कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश हो सकती है. पेट्रोल में भीगा कपड़ा मिलने और पीक आवर्स में हुई घटना ने जांच को और गंभीर बना दिया है. मिथ‍िला एक्‍सप्रेस में लगी आग पर रेल मंत्रालय का बड़ा बयान आया है. मिथ‍िला एक्‍सप्रेस में क्‍या आग लगाने की साज‍िश हुई? क्‍या क‍िसी ने गुजरात के गोधरा जैसा कांड करने का प्‍लान रचा था? क्‍योंक‍ि हावड़ा स्टेशन पर खड़ी मिथिला एक्सप्रेस में आग लगने पर रेलवे ने जो खुलासा क‍िया है, वह खौफनाक है. रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सिर्फ आग लगने की घटना नहीं बल्कि एक संभावित साजिश भी हो सकती है, क्योंकि जांच के दौरान पेट्रोल में भीगा हुआ आधा जला कपड़ा बरामद हुआ है. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि ट्रेन को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी. एक सीसीटीवी फुटेज भी एजेंस‍ियों को म‍िला है, जिसमें एक शख्‍स नजर आ रहा है और वह काफी संद‍िग्‍ध है. रेलवे मंत्रालय ने कहा कि हावड़ा स्टेशन पर खड़ी मिथिला एक्सप्रेस के एक कोच में धुआं और आग की सूचना मिलते ही तत्काल जांच शुरू की गई. प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं. मंत्रालय के मुताबिक, ट्रेन के बाथरूम क्षेत्र से पेट्रोल में भीगा हुआ कपड़ा मिला है, जो आधा जला हुआ था. इससे यह संकेत मिलता है कि आग किसी तकनीकी खराबी से नहीं बल्कि बाहरी हस्तक्षेप से लगी या लगाने की कोशिश की गई. CCTV फुटेज में द‍िखा ‘संद‍िग्‍ध’ सुरक्षा एजेंसियों और आरपीएफ ने हावड़ा स्टेशन के कैब रोड क्षेत्र के पास एक बेहद संदिग्ध गतिविधि सीसीटीवी में कैद होने के बाद बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है. फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति को जानबूझकर एक कवर या वस्तु फेंकते हुए देखा गया है, जिसके तुरंत बाद आग और धुएं जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. यह घटना पीक यात्री समय के दौरान की गई थी, जिससे अधिकतम अफरा-तफरी और दहशत फैल सके. Security agencies and the Railway Protection Force (RPF) have launched a massive investigation after CCTV footage captured a highly suspicious act at Howrah Station near the cab road area. The footage shows a suspect deliberately throwing a cover/object that immediately led to a… pic.twitter.com/bLaskxkRuN — 🦏 Payal M/પાયલ મેહતા/ पायल मेहता/ পাযেল মেহতা (@payalmehta100) May 21, 2026 Source link

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क्या पीएम मोदी नई पीढ़ी के नेताओं का मंत्रिमंडल में ज्यादा स्थान...

होमवीडियोदेश Rubika Liyaquat Show: क्या पीएम मोदी नई पीढ़ी के नेताओं का मंत्रिमंडल में ज्यादा स्थान देंगे? X Rubika Liyaquat Show: क्या पीएम मोदी नई पीढ़ी के नेताओं का मंत्रिमंडल में ज्यादा स्थान देंगे?   Rubika Liyaquat Show: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विदेश दौरे से लौटकर सीधे दिल्ली पहुंचे हैं और इसके साथ ही सियासी हलचल भी अचानक तेज हो गई है. वजह है केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अहम बैठक, जो करीब एक साल बाद फिर से बुलाई गई है. जानकारी के मुताबिक, शाम 5 बजे पीएम मोदी अपने 71 मंत्रियों के साथ यह बड़ी बैठक करेंगे और करीब 5:30 बजे उनका संबोधन होगा और यही संबोधन इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपने मंत्रियों को न सिर्फ दिशा देंगे बल्कि उनके कामकाज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी सामने रख सकते हैं. दरअसल, पहले भी ऐसी बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी के सख्त और सीधे संदेश चर्चा में रहे हैं कभी उन्होंने मंत्रियों को ‘ग्राउंडेड रहने’ की सलाह दी थी, तो कभी काम करने के तरीके पर साफ संदेश दिया था. ऐसे में इस बार भी सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पीएम इस बार क्या ‘वन लाइनर मैसेज’ देते हैं. लेकिन असली सस्पेंस सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी तेज है कि यह मीटिंग सिर्फ रूटीन नहीं बल्कि बड़े बदलावों की भूमिका हो सकती है. अगले साल कई राज्यों में चुनाव हैं और उससे पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें लगातार मजबूत हो रही हैं. इसके साथ ही बीजेपी संगठन में भी बदलाव की सुगबुगाहट है, जहां नए अध्यक्ष की टीम के गठन को लेकर भी रणनीति तैयार हो रही है. माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यूपी, उत्तराखंड, पंजाब और अन्य राज्यों के समीकरणों को साधने पर खास फोकस रहेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Terrorists Killed By Unknown Gunmen In Pakistan | हमजा बुरहान भी जहन्नुम...

नई दिल्ली: पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है. इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं. पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत? भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया. लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला? पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था. मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया? जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था. पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ? साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था. ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था. यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा. हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद. जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान. दाऊद इब्राहिम कास्कर. वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा. लखबीर सिंह उर्फ रोडे. रंजीत सिंह उर्फ नीता. परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़. भूपिंदर सिंह भिंडा. गुरमीत सिंह बग्गा. गुरपतवंत सिंह पन्नून. हरदीप सिंह निज्जर. परमजीत सिंह उर्फ पम्मा. साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम. यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई. अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की. शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह. फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू. अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर. इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ. यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम. शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन. सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग. गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद. जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद जफर खान उर्फ मौलवी उर्फ खुर्शीद इब्राहिम. रियाज इस्माइल शाहबांदरी उर्फ शाह रियाज अहमद उर्फ रियाज भटकल उर्फ मोहम्मद रियाज उर्फ अहमद भाई उर्फ रसूल खान उर्फ रोशन खान उर्फ अजीज. मोहम्मद इकबाल उर्फ शाहबांदरी मोहम्मद इकबाल उर्फ इकबाल भटकल. शेख शकील उर्फ छोटा शकील. मोहम्मद अनीस शेख. इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर

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17 women in palamu transformed 20 acres of farming with solar irrigation...

होमताजा खबरकृषि पलामू की 17 महिलाओं का कमाल! सोलर लिफ्ट सिंचाई से 20 एकड़ में लहलहाई फसलें Last Updated:May 21, 2026, 15:34 IST Solar Irrigation System: झारखंड के पलामू (चैनपुर) में 17 महिला किसानों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. सरकार से मिले 90% अनुदान की मदद से महिलाओं ने सोलर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली को अपनाया. जिससे 20 एकड़ बंजर जैसी भूमि पर पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है. डीजल और बिजली के खर्च से मुक्ति मिलने के कारण खेती की लागत में भारी कमी आई है. जिससे अब इन महिलाओं के लिए हाई-वैल्यू (नकदी) फसलों की खेती करने और अपनी आय बढ़ाने का नया रास्ता खुल गया है. ख़बरें फटाफट पलामू: सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार नई योजनाएं चला रही है. इसी कड़ी में पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में महिलाओं ने सामुदायिक प्रबंधित सौर्य लिफ्ट सिंचाई प्रणाली अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है. यहां 17 महिलाओं ने मिलकर सोलर पंप आधारित सिंचाई व्यवस्था शुरू की है. जिससे अब 20 एकड़ तक की जमीन पर सालभर सिंचाई संभव हो सकेगी. इस पहल से दोहरा लाभ मिलेगा. खेती की लागत घटने के साथ हाई वैल्यू क्रॉप यानी अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती का रास्ता भी खोल रही है. लागत 6 लाख पर खर्च मात्र 60 हजार यह योजना नित्या परिवर्तन जल उपभोक्ता समूह के माध्यम से सीएम एसएलआई योजना के तहत लागू की गई है. इसके अंतर्गत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप की सुविधा दी जा रही है. इस परियोजना की कुल लागत करीब 6 लाख रुपए है. जिसमें किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि यानी लगभग 60 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं. जेएसएलपीएस और स्वयंसेवी संस्था टीआरआई के सहयोग से ग्राम संगठन के माध्यम से यह सुविधा किसानों तक पहुंचाई गई है. न बिजली कटने की समस्या, न डीजल खर्च का बोझमहिला किसान रीता देवी बताती हैं कि वह पिछले 10 वर्षों से खेती कर रही हैं. पहले डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती थी. जिससे खर्च अधिक होता था. वहीं बिजली पंप से सिंचाई के दौरान बिजली कटने की समस्या बनी रहती थी. लेकिन अब खेत में सोलर पंप लगने से सिंचाई बेहद आसान हो गई है. उन्होंने बताया कि गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती में अब पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है. 17 महिलाओं ने मिलकर इस योजना का लाभ लिया है. इससे खेती में अच्छा फायदा मिलने लगा है. 20 एकड़ तक की भूमि सिंचाई हुई आसानमहुगांवा की रहने वाली शकुंतला देवी कहती हैं कि सब्जी खेती में सबसे बड़ी समस्या पटवन की होती थी. लेकिन अब सोलर आधारित सिंचाई प्रणाली से खेती आसान हो गई है. शिवपुर डैम में लगाए गए 5 एचपी मोटर के जरिए पानी को करीब 1500 फीट दूर तक पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. इससे 20 एकड़ तक की भूमि की सिंचाई आसानी से हो सकेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें बिजली बिल का कोई खर्च नहीं आता और मोटर चलाने में भी परेशानी नहीं होती. भविष्य की खेती का मजबूत विकल्पउन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प बन सकती है. इससे खेती की लागत कम होगी, पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई वैल्यू क्रॉप की ओर कदम बढ़ा सकेंगे. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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चीनी या फिर गुड़…किसकी चाय अच्छी और हेल्दी होती है?

अंबाला. हर साल 21 मई पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है. इस दिन का चाय के उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने के साथ-साथ चाय उद्योग से जुड़े किसानों और श्रमिकों की आजीविका और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है. वहीं भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजाना की आदत और भावनाओं से जुड़ी चीज है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, चाय के बिना बात अधूरी लगती है. लेकिन, जैसे-जैसे लोग सेहत को लेकर जागरूक हुए हैं. ऐसे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं कि चीनी या फिर गुड़, किसकी चाय अच्छी होती है. दरअसल, चाय में चीनी के अलावा, गुड़ एक हेल्दी विकल्प है. बहुत से लोग मानते हैं कि अगर चाय में चीनी की जगह गुड़ डाल दिया जाए, तो वह नुकसानदेह नहीं रहती, लेकिन, क्या यह सच है?  क्या वाकई गुड़ वाली चाय सेहत के लिए बेहतर है, या यह सिर्फ एक भ्रम है?  इसी सवालों को लेकर लोकल 18 की टीम ने अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा से बातचीत की. उन्होंने बताया कि गुड़ और चीनी में सबसे बेहतर आयुर्वेद में गुड़ को ही माना गया हैं. क्योंकि चीनी गुड़ से ही बनती है, लेकिन दोनों के बीच काफी ज्यादा फर्क होता है. उन्होंने कहा कि गुड़ में भी क्वालिटी काफी मायने रखती हैं, क्योंकि आजकल गुड़ में भी मिलावट देखने को मिल रही है इसलिए अच्छे ब्रांड का ही गुड़ लोगों को चाय में डालना चाहिए. वह बताते हैं कि कई जगह पर गुड़ को साफ करने के लिए मीठा सोडा डाला जाता है,जिससे पिला और लाल गुड़ इतना फायदेमंद नहीं होता है. चीनी का काफी नुकसान होता है, क्योंकि चीनी से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी काफी ज्यादा बढ़ रही है. इसलिए गर्मियों के मौसम में चाय का इस्तेमाल भी काफी काम करना चाहिए और अगर चाय पी भी रहे हैं तो उसमें देसी गुड़ ही डालें. चीनी के इस्तेमाल बंद करने के बाद काफी ज्यादा बदलाव शरीर में देखने को मिलता है और मोटापा भी कम होता है. आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि ब्राउन कलर का गुड़ अच्छा और फायदेमंद होता है. इसके साथ ही चाय में गुड़ की मात्रा भी सीमित रखनी है. आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर को 6 प्रकार के रस की जरूरत होती है, जिसमें मधुर, अम्ल, लवण, कटु तिक्त, कषाय शामिल हैं. यह 6 प्रकार के रस हमें खानपान की सभी वस्तुओं से मिल जाते हैं और इनका ध्यान हमें बस रखना होता हैं. आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि ब्राउन कलर का गुड़ अच्छा और फायदेमंद होता है. चाय में गुड़ डालने से कितना पोषण मिलता है? हकीकत यह है कि चाय में हम गुड़ बहुत ही कम मात्रा में डालते हैं. आमतौर पर आधा या एक छोटा चम्मच. इतनी कम मात्रा से मिलने वाले मिनरल्स का शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ता. यानी पोषण के लिहाज से गुड़ वाली चाय, चीनी वाली चाय से बहुत अलग नहीं है. असली समस्या कहां है? समस्या गुड़ या चीनी में नहीं, बल्कि मीठे की आदत में है. जब लोग गुड़ को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, तो वे इसकी मात्रा बढ़ा देते हैं. यही आदत धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचाती है, चाहे मीठा गुड़ से आए या चीनी से. Source link

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