भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

तेजस-Mk1A 4.5 जेन फाइटर जेट मात्र ₹390 करोड़ में! चीनी J-20 का...

Tejas MK1A Update: भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां वह सिर्फ इंडियन एयरफोर्स की जरूरत पूरी करने वाला प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है. एचएएल द्वारा निर्मित तेजस-Mk1A को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी कीमत. इतनी कम कीमत में 4.5 जेनरेशन की आधुनिक क्षमताओं वाला फाइटर जेट अभी कोई दूसरा मुल्क नहीं बना पाया है. करीब 42 मिलियन डॉलर यानी लगभग 390 करोड़ रुपये प्रति विमान की कीमत पर उपलब्ध यह फाइटर जेट अब उन देशों के लिए आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है जो पुराने F-5, मिग-21 और एफ-7 जैसे तीसरी पीढ़ी के विमानों को बदलना चाहते हैं. वैश्विक रक्षा बाजार में फिलहाल 300 से 500 हल्के लड़ाकू विमानों की संभावित मांग है. पश्चिमी देशों के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर बेहद महंगे हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिकी F-35 या चीनी J-20 जैसे प्लेटफॉर्म छोटे और मध्यम रक्षा बजट वाले देशों की पहुंच से बाहर हैं. ऐसे में तेजस-Mk1A खुद को किफायती 4.5 जेनरेशन फाइटर के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. आधुनिक तकनीक इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत तेजस की सबसे बड़ी ताकत उसकी आधुनिक तकनीक है. इसमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, आधुनिक एवियोनिक्स और बीवीआर यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल क्षमता मौजूद हैं. भारत की स्वदेशी अस्त्र Mk-1 मिसाइल के साथ इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. कम ऑपरेटिंग लागत और सिंगल इंजन डिजाइन इसे उन देशों के लिए आदर्श बनाता है जिन्हें सीमित बजट में आधुनिक एयर पावर चाहिए. अब तक तेजस के निर्यात में सबसे बड़ी बाधा अमेरिकी कंपनी GE F404 इंजन की सप्लाई थी. अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस समय पर इंजन नहीं दे पा रही थी, जिससे इस जेट का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ. लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है. जीई ने 2026-27 से हर साल 20 इंजन सप्लाई करने की प्रतिबद्धता जताई है. इससे विदेशी ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि रक्षा सौदों में समय पर डिलीवरी बेहद अहम होती है. भारत सरकार ने भी तेजस कार्यक्रम को बड़ी मजबूती दी है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 97 अतिरिक्त तेजस-Mk1A खरीद को मंजूरी दी है. करीब ₹62,000 करोड़ के इस सौदे के बाद कुल ऑर्डर 180 जेट से ज्यादा हो चुके हैं. यह किसी भी विदेशी खरीदार के लिए संकेत है कि भारत इस विमान को लंबे समय तक अपने फ्रंटलाइन फाइटर के रूप में इस्तेमाल करेगा. इससे रखरखाव, अपग्रेड और स्पेयर पार्ट्स की स्थिर व्यवस्था का भरोसा मिलेगा. भारतीय वायु सेना 180 तेजस मार्क-1ए जेट खरीद रही है. इन देशों पर फोकस कर रहा एचएएल एचएएल अब लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों पर खास फोकस कर रहा है. मिस्र, नाइजेरिया, बोत्सवाना और ब्राजील जैसे देशों को तेजस की पेशकश की गई है. मिस्र को तो इसे लीड-इन फाइटर ट्रेनर के रूप में भी ऑफर किया गया है. इन देशों को ऐसे मल्टीरोल फाइटर चाहिए जो एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक और समुद्री मिशन कर सकें, लेकिन उनकी लागत नियंत्रण में रहे. यही वह जगह है जहां चीन का J-20 और पश्चिमी देशों के महंगे जेट मात खा जा रहे हैं. J-20 तकनीकी रूप से उन्नत जरूर है, लेकिन उसकी लागत और रखरखाव खर्च काफी अधिक है. रूस के मिग और सुखोई प्लेटफॉर्म तथा फ्रांस के राफेल जैसे विमान भी महंगे विकल्प माने जाते हैं. तेजस इस गैप को भरने की कोशिश कर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और किफायती कीमत दोनों साथ हैं. रणनीतिक स्वायत्तता भारत की एक और बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता है. कई देश पश्चिमी हथियार सौदों में लगाई जाने वाली सख्त शर्तों और एंड-यूजर मॉनिटरिंग से परेशान रहते हैं. भारत अपेक्षाकृत लचीली शर्तें, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पश्चिमी व स्वदेशी हथियारों के मिश्रण की सुविधा देने को तैयार है. यही वजह है कि कई विकासशील देशों के लिए भारत एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है. हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है. एचएएल को सिर्फ विमान की क्षमता साबित नहीं करनी, बल्कि समय पर उत्पादन, डिलीवरी और मजबूत सपोर्ट सिस्टम भी तैयार करना होगा. यदि भारत यह चुनौती सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो 2026 तेजस कार्यक्रम के लिए निर्णायक साल साबित हो सकता है और भारत वैश्विक फाइटर जेट बाजार में बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है. Source link

ताज़ा खबर

जापान-जर्मनी में नौकरी के लिए यूपी के युवाओं से मांगे गए आवेदन,...

मुरादाबाद में सेवायोजन विभाग की तरफ से विदेश में नौकरी की वैकेंसी निकाली गई है, जिसमें अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा रही है. इन नौकरियों में 2 लाख रुपये से अधिक तक की सैलरी दी जाएगी. युवाओं को अलग-अलग देशों में नौकरी करने का मौका मिलेगा. इसके साथ ही विदेश की भाषा मुफ्त में सीखने का अवसर भी मिलेगा. जो भी आवेदन करना चाहता है, वह सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकता है और वहीं से पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है. विदेशों में मिलेगा रोजगार सहायक निदेशक सेवायोजन रत्नेश चंद्र ने बताया कि उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के अंतर्गत सेवायोजन विभाग जिले के युवाओं को देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित पोर्टल rojgaarsangam.up.gov.in पर जापान, जर्मनी, इजराइल और सऊदी अरब जैसे देशों में प्रशिक्षित एवं कुशल श्रमिकों को भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. विदेश मंत्रालय और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सहयोग से चयन प्रक्रिया को गति दी गई है. ऐसे करें आवेदन उन्होंने बताया कि रोजगार संगम पोर्टल rojgaarsangam.up.gov.in पर सऊदी अरब के लिए विभिन्न पदों जैसे फैब्रिकेशन सुपरवाइजर, मैकेनिकल हेल्पर, वेल्डर TIG एवं ARC CS, पाइप फैब्रिकेटर, स्ट्रक्चरल फैब्रिकेटर, मैकेनिकल टेक्नीशियन, फैब्रिकेटर फोरमैन और मैकेनिकल फिटर के 81 पदों पर भारतीयों के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं. इच्छुक अभ्यर्थी जिनकी आयु 24 से 48 वर्ष के बीच है और जिन्होंने हाईस्कूल, आईटीआई (मैकेनिक मशीन टूल्स, वेल्डर, फिटर) या डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की योग्यता प्राप्त की है, वे इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थियों के पास 5 से 15 वर्ष का कार्य अनुभव होना भी जरूरी है. पोर्टल पर करें पंजीकरण इसके साथ ही जापान, जर्मनी और इजराइल के लिए नर्सिंग (केयरगिवर, पेशेंट केयर, केयरटेकर) जैसी रिक्तियां भी अपलोड कर दी गई हैं. 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के इच्छुक अभ्यर्थी, जिनके पास 0 से 3 वर्ष तक का कार्य अनुभव है और जिन्होंने GNM, ANM या नर्सिंग की योग्यता प्राप्त की है, वे इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. सभी इच्छुक अभ्यर्थी रोजगार संगम पोर्टल पर अपना पंजीकरण करने के बाद इन भर्तियों में आवेदन कर रोजगार का अवसर प्राप्त कर सकते हैं. सऊदी अरब के लिए निर्धारित वेतन लगभग 29,773 रुपये से 99,188 रुपये प्रतिमाह, इजराइल के लिए लगभग 1,31,818 रुपये प्रतिमाह, जापान के लिए लगभग 1,16,976 रुपये प्रतिमाह और जर्मनी के लिए लगभग 2,29,925 रुपये प्रतिमाह तक है. रोजगार संगम पोर्टल पर जर्मन भाषा के निःशुल्क प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण भी शुरू हो गया है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, मुरादाबाद के मोबाइल नंबर 8005383887 पर या किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय पहुंचकर संपर्क कर सकते हैं. Source link

ताज़ा खबर

Nashik TCS case | Nida Khan News | टीसीएस केस : निदा...

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस से जुड़े मामले में छत्रपति संभाजीनगर से ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पार्षद मतीन पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. औरंगाबाद नगर निगम (AMC) ने उनके खिलाफ अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया है. जिन संपत्तियों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें वह बंगला भी शामिल है, जहां नासिक टीसीएस केस की आरोपी निदा खान कथित तौर पर छिपकर रह रही थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम के मेयर समीर राजूरकर ने साफ कहा है कि अगर पार्षद की ओर से नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनकी इमारतों को गिराने की कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं, अगर अवैध निर्माण साबित होता है तो पार्षद की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है. मतीन के ही घर में रह रही थी निदा नगर निगम प्रशासन ने 9 मई को मतीन पटेल को नोटिस भेजा. इनमें कौसर बाग स्थित वह मकान, जहां निदा खान के रहने की बात सामने आई, और उसी इलाके में स्थित उनका एक दफ्तर शामिल है. निगम का दावा है कि शुरुआती जांच में दोनों निर्माण पूरी तरह या आंशिक रूप से अवैध पाए गए हैं. तीन दिन में जवाब, वरना बुलडोजर एक्शन मेयर समीर राजूरकर ने कहा कि नियमों के तहत पार्षद को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है. यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के तहत यदि कोई पार्षद, उसका परिवार या आश्रित अवैध निर्माण में शामिल पाए जाते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या निगम मतीन पटेल की सदस्यता खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला सदन और नगर आयुक्त स्तर पर लिया जाएगा. फिलहाल अवैध निर्माण के मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. 35 वर्षीय मतीन माजिद शेख, जिन्हें मतीन पटेल के नाम से जाना जाता है, पहली बार AIMIM के टिकट पर पार्षद बने हैं. चुनावी हलफनामे के मुताबिक उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की है. उनके पास कृषि और गैर-कृषि जमीनों समेत कई संपत्तियां हैं. इस बीच मतीन पटेल ने स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा है और नगर निगम को किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई से रोकने की मांग की है. मामले पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है. Source link

ताज़ा खबर

CM Himanta Oath Ceremony Live: हिमंत बिस्व सरमा आज फिर संभालेंगे असम...

होमताजा खबरदेश LIVE: CM हिमंत दूसरी बार संभालेंगे असम की कमान, ये चार मंत्री भी साथ लेंगे सपथ Last Updated:May 12, 2026, 07:30 IST Himanta Biswa Sarma Shapath Grahan Live Updates: असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने जा रही है. गुवाहाटी में आजभव्य शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहां हिमंत बिस्व सरमा…और पढ़ें हिमंत बिस्व सरमा आज लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने जा रही है. आज गुवाहाटी में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है, जहां हिमंत बिस्व सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह समारोह गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित वेटरनरी कॉलेज खेल मैदान में सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा, जहां राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे. प्रधानमंत्री के सुबह करीब 10:30 बजे गुवाहाटी पहुंचने की संभावना है. पीएम मोदी के अलावा इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के 22 मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं. शपथ ग्रहण से पहले हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई सरकार में शामिल होने वाले मंत्रियों के नामों की घोषणा की. उन्होंने बताया कि उनके साथ रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चंदन ब्रह्मा (चरण बोरो) और अजंता नियोग मंत्री पद की शपथ लेंगे. CM Himanta Oath Ceremony Live Updates: असम चुनाव में बीजेपी नीत एनडीए को मिली प्रचंड जीत हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार जीत दर्ज की थी. 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 102 सीटें हासिल कीं, जबकि अकेले बीजेपी ने 82 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत से कहीं ज्यादा समर्थन हासिल किया. इसी जीत के बाद हिमंत बिस्व सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

एक ने बसाया जन्नत, दूसरे ने लूटी दौलत तो किसी और ने...

होमफोटोदेश 387 साल पुरानी 12 मई से जुड़ी है दिल्‍ली के दिलचस्‍प किले की कहानी! Last Updated:May 12, 2026, 06:01 IST Lal Qila ki Dilchasp kahani लाल किले की प्राचीर पर खड़ा देवांग अपनी बहन गौरी को लालकिले से जुड़ी वह कहानी बता रहा है, जिसे जानकार आप भी हैरान रह जाएंगे. इस कहानी में 12 मई 1639 की नींव से लेकर नहर-ए-बिहिश्त की ठंडक, तख्त-ए-ताऊस के हीरे, चांदी की छत, अंग्रेजों का बर्बर कहर, बहादुर शाह जफर के बेटों का कत्ल सहित कई घटनाओं का जिक्र किया गया है. देवांग और गौरी लाल किले की प्राचीर के पास खड़े थे. देवांग ने गौरी की तरफ देखा और बोला- गौरी, आज 12 मई है. गौरी हंस दी- तो, मेरा बर्थडे नहीं है. देवांग मुस्कुराया और बोला – नहीं, आज से ठीक 387 साल पहले इसी दिन एक शाह ने धरती पर अपना जन्नत बसाने की नींव रखी थी. वो जन्नत है… ये लाल किला. चल, आज तुझे इसकी हर ईंट की कहानी सुनाता हूं. गौरी ने पूछा- अच्छा, ये लाल-लाल क्यों है? देवांग ने शरारत से कहा- खून से थोड़े ही! गौरी बोली- अरे यार! फिर देवांग सीरियस हो गया- असल में, शाहजहां ने फतेहपुर सीकरी से लाल बलुआ पत्थर यमुना के रास्ते मंगवाए थे और अंदर के महलों के लिए राजस्थान से सफेद संगमरमर. इन पत्थरों पर फूल इस कदर तराशे कि लगे मानो किसी ने दीवारों पर चित्रकारी कर दी हो. ये काम 9 साल चला. 9 साल! तूने कभी 9 साल किसी चीज पर लगाए? देवांग ने सवाल किया- पता है, इस किले को बनने में कितना खर्चा हुआ? गौरी ने अंदाजा लगाया- दस-बीस करोड़? गौरी हंस दी- नहीं, उस जमाने में एक करोड़ रुपये. सुन, हैरान मत हो- उस वक्त ये कई राज्यों का सालाना बजट होता था. यानी शाहजहां ने पूरे राज्यों की कमाई एक किले पर लुटा दी. गौरी बोला- वो तो प्यार में दीवाने थे. गौरी ने कहा- हां, अपनी मुमताज के लिए तो ताजमहल बनवाया, अपने शौक के लिए ये लाल किला. Add News18 as Preferred Source on Google देवांग अब सबसे दिलचस्प बात लेकर आया- ये प्राचीर देख रही है? गौरी ने ऊपर देखा – हां, ऊंची-ऊंची. देवांग ने समझाया- मुगल काल में इस प्राचीर पर चढ़ने का मतलब था बादशाह के दरबार तक सीधी पहुंच. यानी तू दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी से मिलने वाली थी. ऐसे इंसान को कहते थे ‘खास’. गौरी ने पूछा- और आज? देवांग गर्व से बोला- आज इसी प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. 15 अगस्त 1947 से ये परंपरा है. गौरी को गर्मी की फिक्र हुई- गर्मी में यहां लगता तो बहुत तपती होगी. देवांग ने चालाकी से कहा- यही तो चमत्कार है. शाहजहां ने यमुना से एक नहर बनवाई ‘नहर-ए-बिहिश्त’ यानी स्वर्ग की नहर. ये पूरे किले में बहती थी. गौरी चौंकी- पानी से ठंडक? देवांग बोला – हां! रंग महल के पास ये नहर छोटे झरने में बदल जाती थी. बैलों से चलने वाली रहटें रात-दिन पानी बहाती थीं. सचमुच का एसी सिस्टम वो भी 400 साल पहले. अब देवांग की आवाज धीमी हो गई. अब बात करते हैं दुनिया के सबसे कीमती तख्त की. तख्त-ए-ताऊस यानी मयूर सिंहासन. गौरी उत्सुक थी. उसने पूछा- कैसा था? देवांग ने कहा – सात सोने के मोर – उनकी पूंछ में माणिक, पन्ना, नीलम, हीरे… सोने-चांदी के बर्तन, खुरासान के कालीन, रंगीन काँच के झूमर. गौरी ने पूछा – आज कहां है? देवांग उदास हो गया. वह बोला- जब 1739 में नादिरशाह ने दिल्ली लूटी, वो सब ले गया. कोहिनूर हीरा भी, जो आज ब्रिटेन के ताज में जड़ा है. समझ, हमारे दादा-परदादाओं का गहना आज किसी और के सर पर सो रहा है. गौरी ने पूछा- मुगलों के बाद क्या हुआ? देवांग ने बताया- आए मराठे. 1760 के दशक में सदाशिवराव भाऊ ने लाल किला जीत लिया. पर सेना के खर्चे के लिए उन्हें पैसे चाहिए थे. गौरी ने पूछा- क्या किया? देवांग बोला- दीवान-ए-खास की चांदी की छत तोड़कर उसे पिघलाया और सिक्के बनाए. सोच जहां बादशाह बैठता था, वहां अब छत ही नहीं बची. गौरी का सवाल था- अंग्रेजों ने क्या किया? देवांग बहुत गंभीर हो गया. वह बोला- 1857 का विद्रोह. अंग्रेज हारे नहीं, टूट पड़े. उन्होंने किले के 80% से ज्‍यादा हिस्से तोड़ डाले. सफेद मार्बल के महल गिरा दिए, उनकी जगह बैरकें बनाईं. गौरी फफक पड़ी और बोली-ये तो कत्ल है. देवांग ने सबसे बुरी बात बताई- और सबसे बुरा बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को बिना मुकदमे के गोली मार दी. अंग्रेज हडसन ने बूढ़े बादशाह को अपने बेटों के शव दिखाए. फिर जफर को बर्मा भेज दिया, जहां वह अकेले मर गए. देवांग अब उत्तेजित हो गया- अब आता है 1945 का वो मुकदमा. अंग्रेजों ने आजाद हिंद फौज के तीन अफसरों शाह नवाज, गुरबख्श सिंह, प्रेम सहगल का यहीं किले में कोर्ट-मार्शल किया. गौरी ने पूछा- फिर क्या हुआ? देवांग बोला- फिर क्या, पूरा देश सड़कों पर उतर आया. हिंदू-मुस्लिम एक साथ. यहां तक कि ब्रिटेन को दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ा. ये आजादी की शुरुआत की आग थी. देवांग की आंखों में चमक आ गई. अब सबसे सुनहरा पल. 15 अगस्त 1947, सुबह. नेहरू जी इसी प्राचीर पर चढ़े. गौरी ने पूछा- तिरंगा लहराया? देवांग ने कहा- हां. वो तिरंगा राजस्थान के आलूदा गांव में बना था. और जब झंडा फहरा, तो बिस्मिल्लाह खान ने शहनाई बजाई. सोच, वो दृश्य – 200 साल की गुलामी के बाद, लाल किले की दीवारें, शहनाई की आवाज, और उड़ता तिरंगा. गौरी भावुक हो गई. Source link

ताज़ा खबर

दिल्ली की इस इमारत को बनवाने में शाह ने लुटाई जहां की...

History of Redfort & Connection with 12 May: आज से करीब 387 साल पहले दिल्‍ली की इस इमारत को बनवाने के लिए एक शाह ने सारे जहां की दौलत खर्च कर दी थी. यह सिर्फ एक इमारत नहीं थी, बल्कि एक ऐसी सोच थी, जिसे तब के भारत में मौजूद तमाम इमारतों का निचोड़ निकालकर तैयार किया गया है. 1639 में बनी यह इमारत आज भी कितनी खास है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसकी प्राचीर पर पहुंचने वाला शख्‍स पूरी दुनिया के लिए बेहद खास हो जाता है. जी हां, यहां पर हम बात दिल्‍ली के लाल किले की कर रहे हैं. दिल्‍ली का लाल किला आज भी उन चंद इमारतों में शामिल है, जिसके बनाने में सिर्फ पत्‍थर ही नहीं, बल्कि पूरी सल्‍तनत की ताकत लगा दी गई थी. इस किले को बनाने के लिए शाहजहां ने 12 मई 1639 को इसकी नींव रखी थी. लाल किले को चारदीवारी बनाने के लिए फतेहपुर सीकरी से लाल बलुआ पत्थर यमुना के रास्ते दिल्ली मंगाए गए थे. वहीं, किले के अंदर बनने वाले महलों को आलीशान बनाने के लिए राजस्थान के आए संगमरमर का इस्‍तेमाल हुआ था. दीवारों को जीवंत बनाने के लिए इन पत्‍थरों पर फूलों की ऐसी नक्काशी कराई गई. यह काम नौ साल तक चला. तब के जमाने में इस किले को बनाने में करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आया. उससमय एक करोड़ रुपए कई राज्‍यों का सालाना बजट होता था. जहां तक बात इस किले की प्राचीर पर पहुंचने वाले शख्‍स के खास बनने की है तो मुगल काल में लाल किले की प्राचीर पर चढ़ने का मतलब था, बादशाह के दरबार तक सीधी पहुंच रखना. यानी दुनिया की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक से सीधे रूबरू होना. वहां पहुंचने वाला व्यक्ति सचमुच ‘खास’ हो जाता था. लेकिन आज यह परंपरा एक नए रूप में जिंदा है. 15 अगस्त 1947 से हर साल इसी प्राचीर पर भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराते है. तब से लेकर आज तक लाल किले की प्राचीर वह मंच बन गई है जहां से प्रधानमंत्री देश-दुनिया को संबोधित करते है. कैसा था शाहजहां के सपनों का स्‍वर्ग लाल किला यहां फूलों पर लदा होता था सोना: दीवान-ए-खास के सफेद संगमरमर वाले खंभों में फिरोजा, लाजवर्द, पन्ना, नीलम कीमती पत्थर जड़े थे. दीवारों पर कलमकारी का ऐसा काम था कि देखने वाला सिर्फ देखता ही रह जाता था. खुरासान से मंगाए कालीन, रंगीन कांच के झूमर, सोने की परत लगे बर्तन, सब कुछ एक ऐसी दुनिया बनाते थे, जिसकी कल्‍पना करना आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन था. लाल किले की वो नहरें जहां होती थी शाही मौज: लाल किले में सबसे खास ‘नहर-ए-बिहिश्त’ यानी स्वर्ग की नहर थी. यमुना से लालकिले के बीच बनाई गई यह नहर तमाम महलों के बीच से होकर गुजरती थी. यह नहर एक तरह का कूलिंग सिस्टम थी, जो गर्मी के दिनों में महलों को ठंडा रखती थी. रंग महल पहुंचते-पहुंचते यह नहर एक छोटे से झरने में तब्‍दील हो जाती थी. नहर के पाने को पूरे लालकिले में प्रवाहित करने के‍ लिए बैलों से चलने वाले रहटें रात-दिन काम करती थीं. हीरों से सजा था शाहजहां का तख्‍त: लाल किले की सबसे कीमती चीज ‘मयूर सिंहासन’ थी, जिसे तख्त-ए-ताऊस कहा जाता था. यह सिर्फ सोने-चांदी का तख्त नहीं था, बल्कि दुनिया का सबसे कीमती सिंहासन था. इस पर सात सोने के मोर थे, और उनकी पूंछें माणिक्य, पन्ने और हीरों से जड़ी हुई थीं. इसी तख्त पर शाहजहां दरबार लगाता था. फारस के नादिरशाह ने 1739 में जब इस तख्त को लूटा, तो हीरे-जवाहरात के साथ वह कोहिनूर हीरा भी ले गया, जो आज ब्रिटेन के ताज में जड़ा है. जब लालकिले को लगने लगे बड़े झटके बाहरी हमलावरों ने लूटा सारा खजाना: शाहजहां के बाद आने वाले बादशाह उतने सक्षम नहीं थे. सबसे पहला और बड़ा झटका 1739 में लगा, जब नादिरशाह ने दिल्ली पर धावा बोल दिया. उसने लाल किले के अंदर दाखिल होने के साथ उसने सोना, हीरे, मयूर सिंहासन, हाथीदांत की कुर्सियां, कीमती पांडुलिपियां सब लूट लीं. उसने करीब 70 करोड़ रुपये की लूट अपने साथ फारस ले जाने का दावा किया था. यह रकम उस समय इतनी बड़ी थी कि नादिरशाह ने फारस में तीन साल तक कोई कर नहीं लगाया. मराठों के कब्‍जे में आया लालकिला: 1760 के दशक में मराठे लाल किले को जीतने में कामयाब रहे. सदाशिवराव भाऊ ने पानीपत के युद्ध से पहले लाल किले पर यह विजय हासिल की थी. इस जीत को मराठों की मुगलों के खिलाफ सबसे बड़ी जीतों में गिना जाता है. लालकिले पर जीत हासिल करने के बाद मराठों ने सेना के खर्च के लिए दीवान-ए-खास की चांदी की छत को पिघलाकर सिक्कों की शक्‍ल दे दी. इस युद्ध में लाल किले के हिस्‍से खंडहर में तब्‍दील हो गए. अंग्रेजों ने बैरक में बदल दिया स्‍वर्ग: 1857 का विद्रोह भारत के इतिहास का एक बड़ा मोड़ था. लाल किला इस विद्रोह का केंद्र बना, जब बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों ने अपना नेता बना लिया. लेकिन विद्रोह के दब जाने के बाद, अंग्रेजों ने लाल किले को बर्बाद करने की ठान ली. उन्होंने 80% से अधिक अंदरूनी संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया. संगमरमर के महलों को तोड़कर उनकी जगह बैरकें बना दीं. बागीचों को तबाह कर नहरों को भर दिया. लालकिले से जुड़ी दर्द, मुकदमें और प्रतीक की कहानी बहादुर शाह जफर के बेटों की हत्या: 1857 के बाद के दृश्य सबसे दर्दनाक थे. अंग्रेजों ने अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को पकड़ लिया था. अंग्रेज अफसर विलियम हडसन ने जफर के तीन बेटों को बिना किसी मुकदमे के गोली मारने का आदेश दे दिए थे. बहादुर शाज जफर के तीनों बेटों मिर्जा मुगल, मिर्जा खिज्र सुल्तान और मिर्जा अबू बक्र की हत्या लाल किले के एक दरवाजे के पास हुई. बूढ़े बादशाह को अपने बेटों के शव देखने पर मजबूर किया गया. इस घटना के बाद जफर को बर्मा निर्वासित कर दिया गया, जहां 1862 में उनकी मौत हो गई. लाल किला मुकदमा और आजाद हिंद फौज: 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के अंत के बाद लाल किला एक बार

ताज़ा खबर

मीन राशि वालों के लिए आज का दिन रहेगा चुनौतीभरा, व्यापार में...

Last Updated:May 12, 2026, 03:31 IST Aaj Ka Meen Rashifal 12 May 2026: मीन राशि वालों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. व्यापार और कारोबार में सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है, क्योंकि धन हानि के संकेत बन रहे हैं. स्वास्थ्य के मामले में पुराने रोग फिर से परेशानी बढ़ा सकते हैं. वहीं दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी. मीन राशि वालों के लिए आज का दिन थोड़ी चुनौतियां लेकर आ सकता है. ग्रहों की प्रतिकूल चाल के कारण कामों में रुकावट और योजनाओं में देरी होने की संभावना है. मन में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है, जिससे आत्मविश्वास कमजोर पड़ सकता है. छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ने के संकेत हैं. ऐसे समय में धैर्य और समझदारी से काम लेना बेहद जरूरी रहेगा. जल्दबाजी या भावनाओं में आकर लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सोच-समझकर कदम बढ़ाएं. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, आज मानसिक तनाव और उलझन बढ़ सकती है. पहले से चल रही चिंताएं कम होने के बजाय और गहरी हो सकती हैं. इसलिए धैर्य रखें, विवादों से दूर रहें. सोच-समझकर ही कोई कदम उठाएंगे तो अच्छा रहेगा. मीन राशि का करियर और व्यापार राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज करियर के क्षेत्र में दिन सामान्य रहने वाला है. लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने से राहत महसूस होगी, लेकिन लापरवाही और काम टालने की आदत नुकसान पहुंचा सकती है. सफलता के लिए मेहनत और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी रहेगा. व्यापार में उम्मीद के अनुसार लाभ मिलने के संकेत कम हैं. काम के सिलसिले में की गई यात्रा भी निराश कर सकती है. नए अवसर हाथ से निकल सकते हैं, इसलिए समय रहते सही निर्णय लेना बेहद जरूरी होगा. मीन राशि का स्वास्थ्य और आर्थिक स्थितिस्वास्थ्य की दृष्टि से आज का दिन मध्यम रहेगा. मानसिक तनाव और थकान महसूस हो सकती है. इनसे बचने के लिए ध्यान और योग करना लाभकारी रहेगा. छोटी-मोटी बीमारियों से बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना आवश्यक होगा. आर्थिक स्थिति की बात करें तो आज का दिन मिला-जुला रह सकता है. खर्च की अधिकता रहेगी, लेकिन शाम होते-होते पुरानी निवेश की गई पूंजी से धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं. साथ ही पूंजी निवेश के लिए आज का दिन काफी अच्छा रहेगा. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफललव लाइफ के मामले में आज का दिन थोड़ा तनाव और उलझन लेकर आ सकता है. पार्टनर के साथ बातचीत में गलतफहमियां बढ़ने की आशंका है, जिससे रिश्तों में दूरी महसूस हो सकती है. किसी छोटी बात को लेकर मनमुटाव गहरा सकता है. साथी की भावनाओं को नजरअंदाज करना संबंधों में कड़वाहट ला सकता है. शादीशुदा जीवन में भी वाणी पर संयम रखना जरूरी होगा, वरना घरेलू माहौल तनावपूर्ण बन सकता है और आपसी तालमेल प्रभावित हो सकता है. मीन राशि वाले जरूर करें ये उपायआज आपके लिए लकी नंबर 9 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. वहीं आज के दिन इस राशि के जातक जो धर्म-कर्म के साथ दान-पुण्य में रुचि रखते हैं, उन्हें चाहिए कि आज के दिन हनुमान जी महाराज के मंदिर जाकर भगवान को गुड़, चने का भोग लगाए. उसके बाद गरीबों में लाल वस्तु का दान-वितरण करें, जिससे आज का दिन बेहतरीन हो सके. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

ताज़ा खबर

West Bengal Bharti Ghotala: सुजीत बोस कर बैठे लालू यादव वाला कांड?...

बंगाल में सत्‍ता बदलते ही हालात बदल गए हैं. नगरपालिका भर्ती घोटाले में अब तक बचते रहे ममता सरकार के मंत्री सुजीत बोस को ईडी ने सोमवार को ग‍िरफ्तार कर ल‍िया. जब उनके आरोपों की फेहर‍िस्‍त ईडी ने पढ़नी शुरू की तो लगा क‍ि ये तो कुछ वैसा ही कांड कर बैठे हैं, जो आरोप लालू यादव के पर‍िवार पर लगे हैं. फर्क सिर्फ इतना है क‍ि लालू यादव ने नौकरी देने के बदले लोगों की जमीनें हथ‍ियाई, और इन्‍होंने नौकरी के बदले पैसे लिए, फ्लैट लिए और भर्ती सिस्टम को पूरी तरह मैनेज किया. हम आपको बंगाल भर्ती घोटाले की एक एक परत बताने जा रहे हैं. आखिर सुजीत बोस हैं कौन? सुजीत बोस तृणमूल कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पकड़ सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं मानी जाती थी. उत्तर 24 परगना और खासकर बिधाननगर इलाके में उन्हें बेहद प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है. ममता बनर्जी सरकार में वह अग्निशमन मंत्री रहे. उन्हें तृणमूल के ऑर्गेनाइजेशनल मैनेजर नेताओं में गिना जाता था. यानी सिर्फ चुनावी चेहरा नहीं, बल्कि संगठन और स्थानीय नेटवर्क पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता. इसी वजह से उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक तौर पर भी बड़ी मानी जा रही है. आरोप क्‍या है? आरोप है कि पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों और शहरी निकायों में नियमों को दरकिनार करके, पैसे लेकर, राजनीतिक सिफारिश पर और फर्जी प्रक्रिया के जरिए भर्तियां की गईं. यानी जिन लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए थी, उनकी जगह कथित तौर पर ऐसे लोगों को भर्ती कर लिया गया जिन्होंने पैसे दिए, राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल किया या सिस्टम से सेटिंग की. ED और CBI दोनों एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि नगर निगम भर्ती घोटाला संगठित नेटवर्क की तरह काम करता था. आरोपों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी. कई पदों के लिए वैध विज्ञापन नहीं निकाले गए. मेरिट लिस्ट संदिग्ध थीं. इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया में हेरफेर हुआकई लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए. पूरा मामला शुरू कहां से हुआ? नगर निगम भर्ती घोटाले की कहानी सीधे सुजीत बोस से शुरू नहीं होती. असल शुरुआत हुई शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से. 2023 में ED प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही थी. इसी दौरान एजेंसी ने कारोबारी अयान सिल और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की. यहीं से जांच को बड़ा सुराग मिला. यहां से ED को कई डिजिटल फाइलें, भर्ती से जुड़े दस्तावेज, कथित भुगतान रिकॉर्ड और OMR डेटा मिले. जांच में एजेंसी को शक हुआ कि घोटाला सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं था. बल्कि पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों में भी नौकरियां बेची जा रही थीं. किन-किन जगहों पर हुआ कथित खेल? ED के मुताबिक जांच में कई नगर निगमों और नगरपालिका क्षेत्रों के नाम सामने आए, जहां भर्तियों में घोटाले क‍िए गए. आरोप है कि इन निकायों में भर्ती प्रक्रिया को सिस्टमेटिक तरीके से प्रभावित किया गया. अगर आपको लगता है कि मामला सिर्फ बड़े अधिकारियों की नियुक्ति का था, तो ऐसा नहीं है. ED का दावा है कि कथित घोटाला नगर निगमों की लगभग पूरी लोअर और मिड-लेवल भर्ती में फैला हुआ था. क‍िन पदों पर होनी थी भर्ती मजदूरस्वीपरक्लर्कपियूनड्राइवरएम्बुलेंस अटेंडेंटपंप ऑपरेटरहेल्परसैनिटरी असिस्टेंटअसिस्टेंट मिस्त्री यानी वे नौकरियां, जिनके लिए गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सालों तैयारी करते हैं. अयान स‍िल कौन है और उसका रोल क्या? पूरे केस का टेक्निकल और ऑपरेशनल केंद्र माना जा रहा है अयान स‍िल. उसकी कंपनी ABS Infozon Pvt Ltd को कई नगर निगमों की भर्ती प्रक्रिया का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. कंपनी पेपर छापती थी. OMR शीट डिजाइन करती थी. OMR जांचती थी और मेरिट लिस्ट तैयार करती थी. यानी भर्ती सिस्टम की चाबी उसी के हाथ में थी. ED का आरोप है कि अयान स‍िल ने OMR शीट में हेरफेर किया. नंबर बदले और पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलवाई. Former West Bengal Minister under TMC Government Sujit Bose has been taken into ED custody in connection with the municipal recruitment scam. He was at one point in time engaged in small business as an egg roll vendor, who later became associated with the CPI(M) before joining… pic.twitter.com/5YD77HWgxM Source link

ताज़ा खबर

मनरेगा से ‘जी राम जी’ तक, मजदूरी से विकास मॉडल तक का...

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 देशभर में एक जुलाई से लागू होगा. इसके साथ ही यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ले लेगा. सरकार ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण के अनुरूप आधुनिक ग्रामीण विकास की रूपरेखा बताया है. सरकार के अनुसार इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वर्ष की जाएगी. हालांकि, विपक्षी दलों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को समाप्त करने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह अधिकारों पर आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना थी और नए अधिनियम में डिजिटल प्रक्रिया, चेहरे का सत्यापन और प्रशासनिक बदलाव श्रमिकों के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं. नए कानून से क्या बदलेगा?नए कानून के तहत ऐसे हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी. पहले यह सीमा 100 दिन की थी. केंद्र सरकार ने कहा कि यह योजना चार व्यापक कार्य श्रेणियों पर केंद्रित होगी, जिनमें जल संरक्षण परियोजनाएं; बुनियादी ग्रामीण ढांचा परियोजनाएं; आजीविका से संबंधित परियोजनाएं; और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने की परियोजनाएं शामिल हैं. मनरेगा के तहत कार्यों को व्यापक श्रेणियों में बांटा गया था, जैसे जल संरक्षण, सूखा-रोधी उपाय, सिंचाई, पारंपरिक जल निकायों का पुनर्निर्माण, भूमि विकास और बाढ़ नियंत्रण. इस कानून में ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (वीजीपीपी) शामिल की गई है. इसके तहत ग्राम पंचायतें अपने इलाके के विकास के लिए एक संयुक्त योजना तैयार करेंगी, और इस योजना को ग्राम सभा की मंजूरी लेनी होगी. सरकार के अनुसार, इस कानून के तहत सभी काम इन्हीं ग्राम विकास योजनाओं के आधार पर ही किए जाएंगे. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य लोगों की जरूरतों के हिसाब से हों और हर क्षेत्र का संपूर्ण व संतुलित विकास किया जा सके. नए कानून का कार्यान्वयन कैसे होगा?केंद्र ने कहा है कि मनरेगा की जगह नए कानून का कार्यान्वयन ‘सुचारु और निर्बाध’ होगा. मनरेगा को औपचारिक रूप से एक जुलाई 2026 से समाप्त किया जाएगा, उसी तारीख को वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू होगा. मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे और उन्हें नए कानून के तहत उन्हें ढाला जाएगा. सरकार ने कहा है कि अधूरे सार्वजनिक कार्य और परियोजनाएं पूरी करने को प्राथमिकता दी जाएगी. जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं किए जाते तब तक उन श्रमिकों के लिए जॉब कार्ड अस्थायी रूप से मान्य रहेंगे, जिनकी ‘ई-केवाईसी’ पूरी हो चुकी है. क्या चीजें अपरिवर्तित रहेंगी?रोजगार की मांग करने के 15 दिन के अंदर रोजगार देना अनिवार्य रहेगा, ऐसा न करने पर श्रमिक राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे. मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी रहेगा और यह साप्ताहिक या ‘मस्टर रोल’ बंद होने के बाद 15 दिन के अंदर करना होगा. ‘मस्टर रोल’ एक आधिकारिक रजिस्टर या हाजिरी रिकॉर्ड होता है जिसमें किसी काम पर लगे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है. इस कानून में यह प्रावधान भी बनाए रखा गया है कि यदि मजदूरी का भुगतान देर से होता है, तो श्रमिकों को उसका मुआवजा (क्षतिपूर्ति) दिया जाएगा. नए प्रशासनिक प्रावधान क्या हैं?कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अब चेहरे की पहचान पर आधारित प्रणाली उपयोग की जाएगी. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि जहां खराब इंटरनेट सुविधा, तकनीकी समस्या या अन्य वास्तविक कठिनाइयां होंगी, वहां छूट दी जाएगी. एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कृषि सीजन के चरम पर होने (जैसे बुवाई और कटाई के समय) के दौरान दूसरे काम करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. यह अवधि राज्य सरकारें तय करेंगी, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो. वित्तपोषण कैसे होगा?इस योजना के तहत राज्यों को मिलने वाला फंड अलग-अलग होगा. उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 रहेगा. अन्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह 60:40 होगा. जबकि बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार से शत प्रतिशत से फंड मिलेगा. इसके अलावा, जिला स्तर पर सामग्री से जुड़े खर्च को 40 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है. पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, जबकि सामग्री का खर्च केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में साझा होता था. सरकार की नजर में नया कानून क्यों जरूरी है?सरकार का कहना है कि यह नयी व्यवस्था ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, क्योंकि इसमें आजीविका सहायता, बुनियादी ढांचा निर्माण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को एकीकृत किया गया है. अधिकारियों के अनुसार, यह कानून केवल ‘मांग आधारित मजदूरी कार्यक्रम’ से आगे बढ़कर एक ऐसा विकास मॉडल खड़ा करेगा जिसमें ग्राम स्तर पर बेहतर योजना और समन्वय होगा. सरकार यह भी कहती है कि इसमें मौसम संबंधी चुनौतियों (जैसे बाढ़, सूखा आदि) से निपटने की व्यवस्था को शामिल करना ग्रामीण भारत की बढ़ती जलवायु चुनौतियों का समाधान है. क्या चिंताएं जताई जा रही हैं?विपक्षी दलों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को पूरी तरह समाप्त करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं, और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय खत्म करने पर आपत्ति जताई है. मनरेगा एक मांग-आधारित योजना है, जिसका मतलब है कि अगर काम की मांग हुई तो सरकार को अतिरिक्त धन आवंटित करना पड़ता है. वीबी-जी राम जी विधेयक में राज्यों को तय धनराशि देने का प्रावधान है, और उससे अधिक खर्च का बोझ राज्यों को उठाना होगा. कुछ कार्यकर्ताओं को आशंका है कि अनिवार्य चेहरा सत्यापन उपस्थिति प्रणाली से दूरदराज के क्षेत्रों के वे मजदूर योजना से बाहर हो सकते हैं, जहां डिजिटल कनेक्टिविटी कमजोर है. उनका मानना है कि इससे वे बुजुर्ग भी योजना से बाहर हो सकते हैं, जिनकी पहचान के सत्यापन में समस्या आती है. यह भी आशंका जताई गई है कि कृषि सीजन के चरम पर होने के दौरान दूसरे काम पर प्रतिबंध लगाने से भूमिहीन मजदूरों की कमाई के अवसर घट सकते हैं. आलोचकों ने यह भी स्पष्ट करने की की मांग की है कि क्या 125 दिन के गारंटीशुदा रोजगार के

ताज़ा खबर

Aaj ka Vrishchik Rashi: आज धैर्य से लाभ का दिन, वृश्चिक वाले...

Last Updated:May 12, 2026, 00:03 IST Aaj ka Vrishchik Rashifal 12 may 2026: 12 मई 2026 का दिन वृश्चिक राशि वालों के लिए नई उम्मीदें और मानसिक शांति लेकर आया है. आज का दिन विशेष रूप से आत्ममंथन करने और लंबे समय से अटके हुए कार्यों को गति देने के लिए श्रेष्ठ है. सितारों की चाल बताती है कि धैर्य और समझदारी के साथ पुराने विवादों को सुलझाने में आपको बड़ी सफलता मिलेगी. बस, आज के दिन आपको आर्थिक प्रबंधन और पारिवारिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है. हल्का नीला रंग और अंक 6 आज आपके लिए सकारात्मकता लेकर आएंगे. ख़बरें फटाफट सीतामढ़ी: वृश्चिक राशि वालों के लिए 12 मई 2026 का दिन आत्ममंथन और अधूरे कार्यों को पूरा करने का संदेश लेकर आया है. सुबह के समय कोई पुरानी बात, गलती या अधूरा मामला अचानक सामने आ सकता है. मन उसे टालने या नजरअंदाज करने का करेगा. लेकिन आज परिस्थितियां यही संकेत दे रही हैं कि जो बातें लंबे समय से अधूरी हैं उन्हें सुलझाना जरूरी होगा. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार आज का दिन बीते अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ने का अवसर देगा. यदि धैर्य और समझदारी से काम लिया जाए तो मानसिक बोझ काफी हल्का हो सकता है. कार्यक्षेत्र में पुराने काम मांगेंगे ध्याननौकरी और व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए आज पुराने रुके कार्य दोबारा सामने आ सकते हैं. जिन योजनाओं या जिम्मेदारियों को आप टालते आ रहे थे वे आज प्राथमिकता बन सकती हैं. हालांकि शुरुआत में थोड़ी परेशानी महसूस होगी. लेकिन समय रहते काम पूरा कर लेने से आने वाले दिनों का रास्ता साफ हो जाएगा. कार्यस्थल पर वरिष्ठों की अपेक्षाएं बढ़ सकती हैं. इसलिए लापरवाही से बचना जरूरी रहेगा. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे बताते हैं कि आज धैर्य और अनुशासन बनाए रखने वाले लोगों को भविष्य में लाभ मिलने के संकेत हैं. धन और रिश्तों में रखें संतुलनआर्थिक मामलों में आज कोई पुराना लेन-देन या हिसाब सामने आ सकता है. ऐसे में पैसों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना लाभकारी रहेगा. जल्दबाजी या भ्रम की स्थिति नुकसान पहुंचा सकती है. वहीं पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों में भी कोई पुरानी बात दोबारा उठ सकती है. ऐसे समय गुस्से या कटु शब्दों से बचना आवश्यक होगा. शांत व्यवहार और समझदारी रिश्तों को बिगड़ने से बचाएगी. पुराने विवादों को शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास भविष्य के संबंधों को मजबूत करेगा. आज का उपाय और शुभ संकेतआज का विशेष उपाय यह है कि किसी पुराने दोस्त, रिश्तेदार या करीबी व्यक्ति को याद करके उसके लिए मन में अच्छा विचार रखें. इससे मानसिक शांति मिलेगी और भीतर का तनाव कम होगा. दिन का लकी नंबर 6 और लकी कलर हल्का नीला रहेगा. कुल मिलाकर आज का दिन यह सिखाएगा कि यदि अतीत की उलझनों को समय रहते संभाल लिया जाए, तो भविष्य की राह अधिक आसान और सकारात्मक बन सकती है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar Source link

Scroll to Top